एडम स्मिथ की दृष्टि में आधुनिक भारत: उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ!

 






‘द वेल्थ ऑफ नेशंस’ के 250 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर यह विश्लेषण अत्यंत प्रासंगिक है कि अर्थशास्त्र के जनक एडम स्मिथ आज के भारत को किस तरह देखते। स्मिथ का मानना था कि किसी राष्ट्र की वास्तविक संपत्ति उसके बैलेंस शीट में नहीं, बल्कि उसके लोगों की उत्पादक क्षमता और खुशहाली में निहित होती है।

1. बाजार की शक्ति और 'अदृश्य हाथ' (The Invisible Hand)

स्मिथ ने सहकारी प्रयास और विशेषज्ञता (Specialization) को समृद्धि का मूल मंत्र माना था। भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (जैसे UPI और डिजिटल पहचान) ने इसी विशेषज्ञता और भागीदारी को जमीनी स्तर तक पहुँचाया है। हालांकि, स्मिथ भारतीय बाजारों में व्याप्त विषमताओं और 'क्रोनी कैपिटलिज्म' (बड़े कॉरपोरेट्स और नीति निर्माताओं की निकटता) को लेकर निश्चित रूप से चिंतित होते, क्योंकि वे मुक्त और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के प्रबल पक्षधर थे।

2. वैश्वीकरण बनाम संरक्षणवाद

स्मिथ का तर्क था कि राष्ट्र व्यापार और विशेषज्ञता के माध्यम से समृद्ध होते हैं। भारत ने सेवाओं (Services) के क्षेत्र में तो इसे अपनाया है, लेकिन विनिर्माण (Manufacturing) के मामले में भारत अभी भी टैरिफ और संरक्षणवाद की ओर झुक रहा है। स्मिथ संभवतः इस "सुरक्षात्मक दृष्टिकोण" को चुनौती देते और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक एकीकरण का सुझाव देते।

3. राज्य की भूमिका: सुविधा प्रदाता या बाधा?

स्मिथ एक न्यूनतम राज्य (Minimalist State) के पक्ष में नहीं थे, बल्कि एक 'सक्षम राज्य' के पक्षधर थे। उनके अनुसार सरकार का मुख्य कार्य बुनियादी ढांचा प्रदान करना, न्याय सुनिश्चित करना और कानून का शासन बनाए रखना है। भारत में न्यायिक देरी और विनियामक जटिलताएँ (Regulatory Complexity) आज भी आर्थिक आत्मविश्वास के मार्ग में बड़ी बाधाएँ हैं।

4. समावेशी विकास और खुशहाली

स्मिथ ने चेतावनी दी थी कि कोई भी समाज तब तक समृद्ध और सुखी नहीं हो सकता, जब तक उसका बड़ा हिस्सा गरीब और दुखी है। भारत की विकास दर प्रभावशाली रही है, लेकिन आय, शिक्षा और अवसर की असमानता अभी भी एक गहरी खाई के रूप में मौजूद है। स्मिथ के लिए, समृद्धि का अर्थ केवल विकास दर नहीं, बल्कि उसका व्यापक और समावेशी होना है।

5. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का नया दौर

आज के दौर में AI उत्पादकता बढ़ाने का एक बड़ा साधन है, जिसे स्मिथ संभवतः एक आधुनिक 'स्पेशलाइजेशन' के रूप में देखते। लेकिन वे इसके वितरण को लेकर सतर्क रहते। यदि AI का लाभ केवल पूंजीपतियों तक सीमित रहा और श्रमिकों के लिए अवसर कम हुए, तो यह सामाजिक और आर्थिक असंतुलन को और गहरा कर देगा। 

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