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फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान कॉकपिट में हाथापाई और सऊदी अरब में आपातकालीन लैंडिंग।

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  ​30 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात से इज़राइल जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान (FZ1073) के कॉकपिट में अचानक हिंसक हाथापाई और झड़प होने के कारण विमान को सऊदी अरब के   Tabuk की ओर डायवर्ट करना पड़ा.   भारतीय नागरिक और सीनियर पायलट कैप्टन स्मित माछछार तथा अन्य चालक दल के सदस्यों ने भारी संघर्ष के बाद विमान पर नियंत्रण बनाए रखा और सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित की.   ​शुरुआती रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों की जांच में कॉकपिट में जेबकट्टा (pocket knife) या इसी तरह की वस्तु के इस्तेमाल, और पायलट पर हमले के एंगल की बात सामने आई, हालांकि एयरलाइन ने आधिकारिक तौर पर फ्लाइट डेक में हाथापाई होने की पुष्टि की है.   ​इस गंभीर सुरक्षा घटना के बाद अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है और विमान के सुरक्षा उपायों को और अधिक कड़ा कर दिया गया है.   ​#Flydubai #AviationSafety #Tabuk #FlightIncident #MiddleEast #EmergencyLanding

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का राज्य बहाली प्रस्ताव और उत्पन्न राजनीतिक गतिरोध.

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   ​  ​25 सितंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा राज्य के तत्काल और पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली का प्रस्ताव पेश किया गया, जिसे 28 सितंबर को 62 मतों के बहुमत से पास कर दिया गया.   ​इस प्रस्ताव में 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और 2024 के विशेष दर्जे का संदर्भ भी शामिल किया गया, जिसके कारण भाजपा ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) किया.   ​भाजपा का तर्क था कि राज्य के दर्जे से संबंधित प्रस्ताव के साथ 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव को जोड़ना पूरी तरह से अनावश्यक और आंतरिक तनाव को बढ़ावा देने वाला था.   ​इसके अतिरिक्त, इस बात को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ कि कानून सचिव और मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने संबंधी टिप्पणियों में इसे "सबज्यूडिद" (विचाराधीन मामला) बताया था, जिस पर मुख्यमंत्री ने नौकरशाही पर राज्य का दर्जा रोकने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया.   ​#JammuAndKashmir #Statehood #OmarAbdullah #JKAssembly #BJP #IndianPolitics  

इम्पा वित्तीय अनियमितता विवाद: एनसीएलएटी ने खारिज की याचिकाएं, सदस्यों के निलंबन पर उठे सवाल।

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  ​भारतीय मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) के पदाधिकारियों द्वारा कान फिल्म फेस्टिवल की यात्रा और वित्तीय खर्चों में कथित अनियमितता का मामला राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) पहुँच गया है। एनसीएलएटी ने इम्पा की अपीलें खारिज करते हुए सदस्यों की याचिका पर सुनवाई की छूट को बरकरार रखा है। ​मुख्य बिंदु: ​एनसीएलएटी का फैसला: नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने 30 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए एनसीएलटी मुंबई पीठ के 8 जुलाई 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। ​प्रमुख आरोप: याचिकाकर्ताओं (संजीव कुमार सिंह, प्रदीप सिंह, रोशन सिंह और रत्नाकर कुमार) का आरोप है कि कान फिल्म समारोह में तय सीमा (2 प्रतिनिधि) के विपरीत 32 प्रतिनिधियों का खर्च संस्था के फंड से उठाया गया। ​अन्य वित्तीय मामले: बिना पूर्व स्वीकृति के अंतरराष्ट्रीय संघ की सदस्यता के लिए 12.50 लाख रुपये खर्च करना, 'चंद्रगुप्त बिल्डिंग' परियोजना के लिए अनधिकृत उधारी और यात्रा-विज्ञापन खर्चों में अस्पष्ट बढ़ोतरी शामिल है। ​सदस्यों का निलंबन: एनसीएलटी ने वित्तीय कुप्रबंधन और असहमति जताने वाले सदस...

अटेंशन इकॉनमी में बदलाव: सामग्री, जुड़ाव और लोकतंत्र का भविष्य ।

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  ​आज का मीडिया और मनोरंजन उद्योग एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है, जहाँ 'ध्यान' (Attention) सबसे मूल्यवान मुद्रा बन चुका है। पारंपरिक रूप से सूचना या मनोरंजन देने वाला यह क्षेत्र अब 'सामग्री और ध्यान' (C&A) अर्थव्यवस्था में तब्दील हो रहा है।   ​डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विस्तार और सामग्री की भरमार के कारण उपभोक्ता अब केवल निष्क्रिय दर्शक नहीं रहे, बल्कि वे विभिन्न माध्यमों के बीच सक्रिय रूप से नेविगेट करते हैं।   ​आज हर उपभोक्ता एक संभावित निर्माता बन चुका है और हर क्रिएटर एक संभावित उद्यम बन गया है, जिससे पारंपरिक व्यावसायिक सीमाएं धुंधली हो रही हैं।   ​खंडित ध्यान और लगातार बढ़ती सामग्री के इस दौर में, जो प्लेटफॉर्म्स और फ्रेमवर्क खंडित ध्यान को एक साझा सांस्कृतिक और आर्थिक फोकस में एकजुट कर सकते हैं, वे ही दीर्घकालिक सफलता प्राप्त करेंगे।   ​इसके बावजूद, लोकतंत्र पर मनोरंजन के प्रभाव को कम करके नहीं आंका जा सकता, क्योंकि रचनात्मक अभिव्यक्ति और आलोचनात्मक दृष्टिकोण लोकतांत्रिक ताकत को मजबूत करते हैं।   ​वैश्वीकरण के इस दौर में भा...

अनौपचारिक क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर: उत्पादकता बढ़ाने के लिए जिला-स्तरीय नीति की आवश्यकता।

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  ​भारत का अनौपचारिक या असंगठित क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और आजीविका की रीढ़ है, जो विनिर्माण, व्यापार और सेवाओं के क्षेत्र में करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। हालिया एएसयूएसई (ASUSE) 2025 के आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है कि देश के असंगठित उद्यमों का भौगोलिक वितरण अत्यधिक संकेंद्रित है।   ​देश के शीर्ष 5 जिले अपने संबंधित राज्यों के 30% से अधिक प्रतिष्ठानों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि 26 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में 10 से कम जिले आधे से अधिक प्रतिष्ठानों को संभालते हैं।   ​रोजगार देने वाले बड़े जिलों में हमेशा उच्च उत्पादकता नहीं होती है, और कई जिले जो भारी कार्यबल रखते हैं वे मूल्यवर्धन के प्रमुख स्रोत नहीं हैं।   ​उदाहरण के लिए, मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) में राज्य का 40% कार्यबल है, लेकिन यह कम उत्पादकता और जीवीए (GVA) सृजन के कारण एक अलग आर्थिक संरचना को दर्शाता है।   ​इसके विपरीत, दक्षिण 24 परगना जैसे जिले अधिक विविध आर्थिक गतिविधियों वाले हैं, जहाँ शीर्ष 3 गतिविधियाँ कार्यबल का 20% से भी कम हिस्सा रखती हैं। ...

भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संरचनात्मक दुविधा और विभाजित पीठ का मुद्दा।

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   ​सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर हाल ही में आया एक विभाजित फैसला (Split Verdict) न्यायपालिका की आंतरिक वास्तुकला और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।   ​विभाजित फैसला: 23 सितंबर को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की दो-जजों की बेंच ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विभाजित फैसला सुनाया।   ​पीठ के गठन पर मतभेद: जहां जस्टिस दत्ता ने मामले को पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजने की मांग को खारिज कर दिया, वहीं जस्टिस शर्मा ने इस पर सहमति जताई। अंततः इस असहमति के कारण मामले को मुख्य न्यायाधीश (CJI) के पास भेजना पड़ा, जिससे याचिकाओं पर फैसले में और देरी हुई है।   ​नियुक्ति ढांचे में बदलाव: दिसंबर 2023 के नए कानून ने अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ मामले में 5 जजों की संविधान पीठ द्वारा तय उस अंतरिम व्यवस्था को बदल दिया, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा ...

भारत के मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) का एक दशक: बदलाव और भविष्य की दिशा।

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    ​भारत के मॉडल द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) को संशोधित करने का प्रयास 2015 के संशोधित मॉडल के अनुमोदन के लगभग एक दशक बाद शुरू हुआ है। केंद्रीय बजट 2025-26 ने घोषणा की थी कि इस मॉडल को अधिक निवेशक-अनुकूल बनाने के लिए सुधारा जाएगा। यह समीक्षा इस बात पर आधारित है कि पिछले दशक में भारत ने क्या सीखा है और उन सीखों से नए मॉडल को कैसे आकार मिलना चाहिए।   ​सतर्क और संतुलित ढांचा: 2015 का मॉडल 'व्हाइट इंडस्ट्रीज ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत गणराज्य' और निवेशक-राज्य विवाद समाधान (ISDS) से जुड़े व्यापक चिंताओं के ऐतिहासिक संदर्भ में उभरा था। इसमें निवेश की एक संकुचित परिभाषा, विनियामक अपवाद और पंचाट (arbitration) शुरू करने से पहले कम से कम पांच साल तक स्थानीय उपायों को आजमाने की शर्त शामिल थी।   ​बदलता हुआ वैश्विक और राष्ट्रीय दृष्टिकोण: संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNCTAD) और UNCITRAL कार्य समूह III के माध्यम से वैश्विक स्तर पर निवेश सुविधा, सहयोग, और स्थायी विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। भारत ने भी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), उज्बेकिस्तान और इजराइल (जुलाई 202...