Posts

उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय भगवानपुर में MLC प्रो. नवल किशोर यादव का भव्य स्वागत, शिक्षकों की समस्याओं पर हुई चर्चा। -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

Image
  रजौली (नवादा): दिनांक 01 सितंबर 2026 को उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, भगवानपुर (रजौली, नवादा) परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद (MLC) डा. प्रो. नवल किशोर यादव का विद्यालय पहुँचने पर भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सरोज यादव तथा समस्त शिक्षकवृंद ने एमएलसी प्रो. नवल किशोर यादव का पुष्पगुच्छ भेंट कर औपचारिक स्वागत किया। जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारी आगामी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में प्रो. नवल किशोर यादव लगातार पटना, नालंदा और नवादा जिलों के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों का सघन दौरा कर रहे हैं। इस जनसंपर्क अभियान के तहत वे शिक्षकों और प्रबुद्धजनों से मुलाकात कर अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को साझा कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। सड़क से सदन तक शिक्षकों की बुलंद आवाज प्रो. नवल किशोर यादव की पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में है जो लगातार शिक्षकों के अधिकारों और उनकी ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। चाहे...

अस्पृश्यता, 'पवित्रता' की अवधारणा और कानून की सीमा !

Image
  हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद आयोजित एक 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान ने भारतीय कानून में अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के कानूनी पहलुओं पर पुनः बहस छेड़ दी है। अनुच्छेद 17: संविधान अस्पृश्यता को समाप्त करता है, हालांकि यह इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं देता। संसद ने इसे लागू करने के लिए 'नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955' बनाया। निजी व्यक्तियों पर लागू: सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, अनुच्छेद 17 के प्रावधान राज्य के साथ-साथ गैर-राज्य (निजी) संस्थाओं/व्यक्तियों के खिलाफ भी प्रवर्तनीय हैं। अपराध की शर्तें: SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केवल अपमान करना अपराध नहीं है; यह साबित होना आवश्यक है कि अपमान व्यक्ति की जाति के आधार पर और 'सार्वजनिक दृष्टि' (Public view) में किया गया था (हितेश वर्मा मामला)। उच्चतम और उच्च न्यायालय की व्याख्या 'शुद्धता और प्रदूषण' का सिद्धांत: सुकन्या शांता (2024) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अस्पृश्यता जाति व्यवस्था और 'पवित्रता-अशुद्धता' की धारणाओं से जुड़ी है। अनुच्छेद 17 ऐसे किसी भी भ...

बिहार में नदियां उफान पर: जलस्तर, खतरे के निशान और अनुमंडल अलर्ट रिपोर्ट । (स्रोत मॉसम विज्ञान व अन्य न्यूज़ एजेंसि)

Image
   नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और मैदानी भागों में हुई बारिश के कारण बिहार की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। केंद्रीय जल आयोग (CWC) और बिहार जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा, गंडक, कोसी, सोन और पुनपुन नदियां कई स्थानों पर खतरे के मानक स्तर को पार कर चुकी हैं।   नदियों की वर्तमान स्थिति एवं जलस्तर वृद्धि   नदी का नाम खतरे के निशान से ऊपर वाले प्रमुख स्थल जलस्तर की प्रवृत्ति (Trend) गंगा पटना (दीघा, गांधीघाट, हाथीदह), भागलपुर (कहलगांव, सुल्तानगंज) बढ़ने की संभावना गंडक डुमरियाघाट (गोपालगंज), लालगंज (वैशाली) स्थिर/धीमी वृद्धि कोसी बलतारा (खगड़िया), कुरसेला (कटिहार), बीरपुर (सुपौल) बढ़ने की संभावना सोन मनेर (पटना) बढ़ने की संभावना पुनपुन श्रीपालपुर (पटना), किंजर (अरवल) बढ़ने की संभावना दरधा और मोरहर जहानाबाद और पटना के ग्रामीण निचले इलाके चेतावनी स्तर पर / वृद्धि प्रमुख नदियों का विस्तृत विश्लेषण गंगा नदी: पटना के दीघाघाट, गांधीघाट और हाथीदह में खतरे के निशान से ऊपर है। भागलपुर और कहलगांव में भी नदी खतरे के स्तर को पार कर चुकी है। पीछे ...

राजनीतिक जनसांख्यिकी और लोकतंत्र का भविष्य।

Image
  हाल के दिनों में इलोन मस्क से लेकर भारत के विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक नेताओं (जैसे चंद्रबाबू नायडू, एम.के. स्टालिन, मोहन भागवत आदि) द्वारा अधिक बच्चे पैदा करने की अपीलें की गई हैं। यह रुझान दर्शाता है कि जन्म, मृत्यु, प्रवासन और आबादी की उम्रदराजी से जुड़े 'राजनीतिक जनसांख्यिकी' के मुद्दे अब विश्व और भारत की राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं। प्रसवोत्साहवाद का अर्थ: घटती जन्मदर को रोकने और आबादी बढ़ाने के लिए लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना। वैश्विक अनुभव: जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और इटली जैसे देशों ने भारी वित्तीय प्रोत्साहन और नीतियां लागू कीं, लेकिन वे घटती प्रजनन दर को पुराने स्तर पर वापस लाने में सफल नहीं हो सके। कारण: प्रजनन दर केवल पैसे या प्रोत्साहन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसका सीधा संबंध आवास, रोजगार, शिक्षा, लैंगिक बराबरी और जीवन-स्तर की लागत से है। भारत की कुल प्रजनन दर घटकर 2.0 हो गई है, जो प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level - 2.1) से नीचे है। National Family Health Survey (NFHS-5) के अनुसार, सभी प्रमुख धार्मिक समुदायों में प्रजनन दर घटी ...

आंकड़ों की ज़ुबानी: भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता और नीतिगत सुधारों की आवश्यकता ।

Image
    वैश्विक स्तर पर उच्च ऊर्जा कीमतों, कच्चे माल की बढ़ती लागत और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही (Q1: अप्रैल-जून) में 7.8% की जीडीपी (GDP) वृद्धि दर दर्ज कर उत्कृष्ट आर्थिक जुझारूपन का परिचय दिया है। यह प्रदर्शन अधिकांश समष्टि-आर्थिक पूर्वानुमानों से कहीं बेहतर रहा है। पूर्व में प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने 7.1% तथा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 7.0% वृद्धि दर का अनुमान लगाया था। इसके अतिरिक्त, पूर्व तिमाही (Q4: जनवरी-मार्च) के संशोधित आंकड़े भी आर्थिक गति की पुष्टि करते हैं, जहां वृद्धि दर प्रारंभिक 7.8% से बढ़कर 8.6% दर्ज की गई। यद्यपि आरबीआई ने संपूर्ण वित्त वर्ष के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.7% रखा है, किंतु वर्तमान आंकड़े अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ बुनियादी ढांचे  को दर्शाते हैं। इस तिमाही के आंकड़ों का सबसे सकारात्मक पहलू पूंजीगत व्यय और निवेश चक्र में आई तेजी है:  Q1 में GFCF की वृद्धि दर बढ़कर 11.9% हो गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 5.8% थी। यह अर्थव्यवस्था में उत्पादक परिसंपत्तियों के तीव्र न...

राम लखन सिंह यादव कॉलेज में 'हिंदी पखवाड़ा' का भव्य शुभारंभ: भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान पर हुई विशेष परिचर्चा।

Image
    पटना: राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद, पटना के हिंदी विभाग द्वारा आज से 'हिंदी पखवाड़ा' (01 सितम्बर से 14 सितम्बर) का गरिमामय शुभारंभ किया गया। इस पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा का व्यापक प्रचार-प्रसार करना तथा हिंदी साहित्य के महान मूर्धन्य साहित्यकारों के अमूल्य योगदान का स्मरण करना है। कार्यक्रम का समापन 14 सितम्बर को 'हिंदी दिवस' के अवसर पर मुख्य समारोह के साथ किया जाएगा। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में  के प्राचार्य  प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में  कहा कि "हिंदी हमारी मातृभाषा है और इसे दैनिक जीवन व पठन-पाठन में पूर्ण सम्मान देना हमारा कर्तव्य है।" कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष  उप-प्राचार्या प्रो. कुमारी संगीता ने किया और भरतेंद्रु के जीवन पर प्रकाश डाला।विषय प्रवेश कराते हुए हिंदी के प्राध्यापक प्रो. रोहित कुमार ने भारतेंदु हरिश्चंद्र के योगदान को रेखांकित किया और कहा कि "भारतेंदु जी ने अत्यंत कम उम्र में ही हिंदी को एक अनमोल साहित्यिक धरोहर के रूप में स्थापित कर दिया।" शिक्षक प्रतिनिधि प्रो बीडी यादव ने भी अपने वि...

कानून का ढोंग और व्यवस्था की गहरी नींद !

Image
  वर्ष 2012 के निर्भया कांड के बाद कानूनों को सख्त बनाया गया और बलात्कार की परिभाषा को व्यापक किया गया। लेकिन 2013-2019 के आंकड़े और हालिया घटनाएं यह साबित करती हैं कि केवल कानून की धाराएं बदलने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। जब तक कानून का खौफ सड़कों पर नहीं दिखेगा, ये बदलाव महज़ कागज़ी औपचारिकता बनकर रह जाएंगे। नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक एक निजी बस में रात भर नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदगी होती रही, लेकिन रास्ते में न किसी पुलिस गश्त की नज़र पड़ी, न नाकेबंदी पर बस रोकी गई और न ही सीसीटीवी निगरानी का कोई फायदा मिला। यह सुरक्षा एजेंसियों और पुलिसिंग सिस्टम की अक्षमता और घोर लापरवाही को नग्न रूप में उजागर करता है। देश की राजधानी होने के बावजूद दिल्ली महिलाओं के लिए असुरक्षित बनी हुई है। "बहुस्तरीय सुरक्षा" और "कड़े पहरे" के दावे अपराधियों के बेखौफ रवैये के सामने पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। सख्त कानून और गश्त के तमाम सरकारी दावों के बावजूद व्यवस्था की आपराधिक लापरवाही और पुलिसिंग तंत्र की नाकामी के कारण अपराधियों के मन से कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका...