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146वीं प्रेमचंद जयंती 2026: जानिए इस विशेष संगोष्ठी और आयोजन का पूरा विवरण!

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  हिंदी साहित्य के महान कथाकार और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती हर साहित्य प्रेमी के लिए एक विशेष पर्व की तरह होती है। इस वर्ष 'सूत्रधार' (स्थापित-1979) संस्था द्वारा मुंशी प्रेमचंद जी की 146वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यदि आप साहित्य में रुचि रखते हैं और प्रेमचंद जी की रचनाओं और विचारों को नए दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं, तो यह कार्यक्रम आपके लिए एक बेहतरीन अवसर है। संगोष्ठी का विषय इस वर्ष आयोजित होने वाली संगोष्ठी का मुख्य विषय है: “वर्तमान समय में प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता” बदलते सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवेश में मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कृतियां आज भी हमारे समाज और सरोकारों को कितनी गहराई से छूती हैं, इसी विषय पर प्रबुद्ध वक्ता अपने विचार साझा करेंगे। कार्यक्रम की संपूर्ण जानकारी दिनांक: 31 जुलाई 2026 समय: संध्या 04:00 बजे स्थान: सूत्रधार कार्यालय, जमालुद्दीन चक, खगौल संपर्क एवं अधिक जानकारी यदि आप इस आयोजन में भाग लेना चाहते हैं या कार्यक्रम से जुड़ी अन्य जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए विवरण ...

नेउरा-दनियावाँ रेल खंड: क्या बाबूचक-मोहम्मदपुर में बनेगा 'शहीद जयगोविंद सिंह यादव रेलवे स्टेशन'?

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  पूर्व मध्य रेलवे (दानापुर मंडल) के अंतर्गत नेउरा-दनियावाँ नई रेल लाइन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन इस नई रेल लाइन के शुरू होने के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों और यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण माँग सामने आई है। हाल ही में स्थानीय निवासी प्रसिद्ध कुमार (ग्राम- बाबूचक, पटना) ने भारत सरकार के माननीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी को पत्र लिखकर 'बाबूचक-मोहम्मदपुर' के पास एक नए स्टेशन के निर्माण और उसके नामकरण अमर शहीद जयगोविंद सिंह यादव के नाम पर करने का आग्रह किया है। 1. स्टेशनों की दूरी और भौगोलिक आवश्यकता वर्तमान रेल योजना के अनुसार: नेउरा और जट-डुमरी के बीच की दूरी लगभग 18.2 किलोमीटर है। इस दूरी के बीच केवल 'गोनपुरा' में स्टेशन प्रस्तावित है। नेउरा और गोनपुरा के ठीक बीचों-बीच (लगभग 7 किमी) 'बाबूचक-मोहम्मदपुर' स्थित है। भौगोलिक और तकनीकी दृष्टि से बाबूचक-मोहम्मदपुर एक ऐसा केंद्र है जहाँ स्टेशन बनने से आस-पास के दर्जनों गाँवों को सीधा लाभ मिलेगा। 2. पटना AIIMS और दानापुर पहुँचना होगा बेहद आसान बाबूचक-मोहम्मदपुर मुख्य पुरैनि...

शिक्षा का राजनीतिकरण और वैज्ञानिक चेतना का क्षरण: प्रतीकवाद बनाम वास्तविक सुधार! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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  शिक्षा केवल भवनों का निर्माण या नामांकरण का खेल नहीं है; यह किसी राष्ट्र के भविष्य की रीढ़ और बालमन की सोच को गढ़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। हाल ही में राज्य के 551 स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के नाम पर 'सरस्वती विद्या निकेतन' की अवधारणा लाने और परिसरों के रंग-रोगन को लेकर जो नीतियां सामने आ रही हैं, वे शिक्षा के मूल उद्देश्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यद्यपि सरकार का यह स्पष्टीकरण राहत देने वाला है कि दानदाताओं और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर बने स्कूलों के नाम नहीं बदले जाएंगे, परंतु शिक्षा व्यवस्था के प्रतीकात्मक ढर्रे और विचारधारात्मक बदलाव की कोशिशों पर एक गंभीर बहस की आवश्यकता है। जिस देश में महात्मा ज्योतिबा फुले, माता सावित्रीबाई फुले और फ़ातिमा शेख जैसे समाज सुधारकों ने असीम यातनाएं और सामाजिक बहिष्कार सहकर बालिकाओं एवं वंचितों के लिए शिक्षा के द्वार खोले, आज उनके व्यावहारिक संघर्ष और वैज्ञानिक चेतना को नेपथ्य में धकेला जा रहा है। शिक्षा का ध्येय तर्क, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और खोजी मानसिकता का विकास करना है। जब शैक्षणिक संस्थानों में वास्तविक...

बांकीपुर में तेजस्वी यादव का रोड शो: छात्रों पर फायरिंग को लेकर सरकार पर बरसे, न्यायिक जांच और रिहाई की मांग!

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  फुलवारी शरीफ , अजीत कुमार की रिपोर्ट : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रत्याशी रेखा गुप्ता के समर्थन में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक विशाल रोड शो किया। यह रोड शो मीठापुर से शुरू होकर चांदपुर बेला, सिपारा, विग्रहपुर, पोस्टल पार्क, चिरैयाटांड़ पुल, गोरिया टोली, लालजी टोला, पीरमुहानी, आयुर्वेदिक कॉलेज, लोहानीपुर, साहित्य सम्मेलन, दरियापुर और खेतान मार्केट होते हुए सब्जीबाग चौराहा तक पहुंचा। इस दौरान सड़कों पर राजद समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। रोड शो के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला और बांकीपुर की जनता का रुख बताते हुए कहा, "जनता ने इस बार भाजपा को हराने का मन बना लिया है। इस बार बांकीपुर में लालटेन ही जलेगा।" छात्र आंदोलन पर सरकार को घेरा छात्र आंदोलन और हालिया कार्रवाई पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी ने कहा कि सरकार पहले किसानों को ठग रही थी और अब छात्रों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि सोमवार शाम तक गिरफ्तार छात्रों को...

राम लखन सिंह यादव कॉलेज में बीए सेमेस्टर-1 के नवागत छात्रों का हुआ आत्मीय स्वागत, नियमित कक्षाओं और नैतिक मूल्यों पर दिया गया जोर!

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  पटना, 27 जुलाई 2026: राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद, पटना-2 में स्नातक प्रथम वर्ष (बीए सेमेस्टर-1, सत्र 2026-2030) के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के शैक्षणिक सफर की शुरुआत के उपलक्ष्य में सोमवार को एक भव्य शिक्षक-छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। सुबह 10:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज के प्राध्यापकों ने नवागत छात्रों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह महत्वपूर्ण सम्मेलन कॉलेज की उप-प्राचार्या प्रो. संगीता कुमारी की अध्यक्षता में और प्रो. प्रसिद्ध कुमार के कुशल संचालन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन के दौरान प्राध्यापकों ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने की सलाह दी। वक्ताओं ने पठन-पाठन के साथ-साथ स्वाध्याय (स्व-अध्ययन), मौलिक रचनाओं और नैतिक मूल्यों (Moral Values) के महत्व पर विशेष जोर दिया। शिक्षकों ने कहा कि अनुशासन और निरंतरता ही एक सफल छात्र जीवन की नींव है। कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने भी अपने विचार खुलकर रखे और कॉलेज में मिले इस आत्मीय स्वागत के प्रति आभार जताया। छात्रों ने प्राध्यापकों की प्रेरणादायी बातों...

लोक-संवेदना का अमर उल्लास: 'गबरघिचोर' के बहाने! -समीक्षक: प्रो. प्रसिद्ध कुमार।

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    खगौल के नवनिर्मित सृजन प्रेक्षागृह में भिखारी ठाकुर की नाट्य-चेतना और स्त्री-पीड़ा का सजीव प्रकटीकरण !  स्थान: सृजन प्रेक्षागृह, खगौल (पटना) प्रस्तुति: सूत्रधार | मूल नाटककार: भिखारी ठाकुर | निर्देशक: नवाब आलम रविवार की संध्या खगौल का नवनिर्मित सृजन प्रेक्षागृह भोजपुरी माटी के अमर शिल्पी और लोक-नाट्य के महानायक भिखारी ठाकुर की कालजयी नाट्य-चेतना से स्पंदित हो उठा। नाट्य-संस्था 'सूत्रधार' के तत्त्वावधान में आयोजित बहुचर्चित नाटक 'गबरघिचोर' के मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। अत्याधुनिक ध्वनि-प्रकाश व्यवस्था, कलात्मक चित्रों से सुसज्जित दीवारों और मखमली आभामंडल से युक्त यह प्रेक्षागृह स्वयं में रंगकर्म के एक नवीन युग के सूत्रपात का साक्षी बन रहा था। प्रेक्षकों के अपार जनसैलाब ने यह सिद्ध कर दिया कि डिजिटल युग की चकाचौंध में भी लोक-संस्कृति की जड़ें अत्यंत गहरी और अटूट हैं। गरिमामय परिवेश एवं अतिथियों की उपस्थिति समारोह का मंगलाचरण पारंपरिक दीप-प्रज्वलन तथा विशेष नाट्य-पुस्तिका के विमोचन के साथ हुआ। तत्पश्चात आगत अतिथियों को अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया।...

रंग-तरंग: जब खगौल के मंच पर 'गबरघिचोर' के साथ जीवंत हो उठी भिखारी ठाकुर की लोक-संस्कृती - प्रो. प्रसिद्ध कुमार की आँखों देखी !

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    पटना/खगौल। रविवार की शाम खगौल का नवनिर्मित सृजन प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। मौका था भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के कालजयी लोकनाट्य 'गबरघिचोर' के प्रभावशाली मंचन का। चर्चित नाट्य संस्था 'सूत्रधार' द्वारा प्रस्तुत इस नाटक को देखने के लिए दर्शकों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि हॉल खचाखच भर गया। आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस यह प्रेक्षागृह किसी बड़े थिएटर या मॉल से कम नहीं लग रहा था—मखमली फर्श, आरामदायक सीटें, शानदार लाइट-साउंड व्यवस्था और दीवारों पर उकेरी गई खूबसूरत चित्रकारी ने रंगकर्म के माहौल को और भी भव्य बना दिया था। गरिमामय शुरुआत और सम्मान कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और एक विशेष पुस्तिका के विमोचन के साथ हुई। उपस्थित सभी अतिथियों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। फ्रंट सीट पर बैठकर नाटक का आनंद ले रहे अतिथियों में जेएनएल कॉलेज की प्राचार्य सह प्रख्यात साहित्यकार प्रो. (डॉ.) मधु प्रभा सिंह पूरी तन्मयता के साथ कलाकारों का हौसला बढ़ा रही थीं। एक महिला और साहित्यकार के नाते मंच पर उकेरी जा रही स्त्री-वेदना उ...