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( कहानी) ठगी की दुनिया में मैं भी ठगाया: जब खागौल के चौराहे पर गच्चा खा गए गुरुजी!-प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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   ​"साधारण सी दिखने वाली मासूमियत कभी-कभी बड़े-बड़े विद्वानों और प्रोफेसरों को भी गच्चा दे जाती है।" ​ज्ञान की नगरी खागौल और शाम का मोती चौक ​बिहार की ऐतिहासिक और ज्ञान की भूमि—आर्यभट्ट की नगरी 'खागौल' (जिसे स्थानीय लोग बड़े प्रेम और मज़ाक में 'खा-पीकर गोल' भी कहते हैं)—अपनी अनूठी संस्कृति के लिए जानी जाती है। शाम के करीब पाँच बज रहे थे। कॉलेज का एक लंबा दिन बिताकर मैं रोजाना की तरह मोती चौक पर उतरा। यहाँ से अपने गाँव जाने के लिए ऑटो का इंतज़ार करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा था। ​मोती चौक से महज पचास कदम की दूरी पर राजकुमार साव की खल्ली-चोकर की दुकान है। साव जी से मेरी पुरानी और गहरी दोस्ती है, इसलिए ऑटो के आने तक उनकी दुकान पर बैठना मेरा रोज का नियम था। उस दिन भी मैं वहीं बेंच पर बैठा था। कभी साव जी दुकान के काम से इधर-उधर आ-जा रहे थे, और कभी मेरी नजरें सड़क पर गुजरते ऑटो तलाश रही थीं। ​मासूम चेहरा और वह रहस्यमयी चाबी ​अचानक राजकुमार साव बिना कुछ कहे दुकान से कहीं चले गए। तभी वहाँ एक आठ-दस साल की छोटी सी बच्ची आई। उसके कपड़े साधारण थे, और चेहरे पर एक अजीब सी श...

​दिल्ली में सुरक्षा कड़ी: बंगाल और छत्तीसगढ़ से CRPF के 7,000 जवान तैनात।

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  ​सुरक्षा बलों की तैनाती: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के लगभग 7,000 कर्मियों (लगभग 70 कंपनियों) को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली बुलाया गया है।   ​हाई-अलर्ट और निर्देश: केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत, पश्चिम बंगाल से 40 कंपनियों को 'शून्य समय' (zero time) में और छत्तीसगढ़ सेक्टर से 30 कंपनियों को तुरंत दिल्ली में तैनात व तैयार रहने को कहा गया है।   ​विशेष उपकरण और हथियार: तैनात किए जाने वाले जवानों को नवीनतम दंगा-विरोधी उपकरण (anti-riot equipment), ऑपरेशनल-स्केल हथियार और निर्धारित गोला-बारूद के साथ पूरी तरह से लैस रहने के निर्देश दिए गए हैं।   ​गृह मंत्री का दौरा रद्द: स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तेलंगाना, मेघालय, मिजोरम और मणिपुर के अपने निर्धारित दौरे रद्द कर दिए हैं और वे दिल्ली में ही रुके हुए हैं।   ​धारा 163 लागू: दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में किसी भी तरह के जुलूस, रैल...

कमजोर रुपया और वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल: कारण और प्रभाव.

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    ​वैश्विक स्तर पर चल रही आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच भारतीय रुपया अपने न्यूनतम स्तर पर है। हालांकि इसे एक कमजोरी के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति को रुपये का "अंडरवैल्यूड" (कम आंका जाना) मानना भविष्य में अर्थव्यवस्था के लिए रिकवरी का रास्ता तैयार कर सकता है।   ​ऐतिहासिक संदर्भ और वास्तविकता: वर्तमान में मुद्रास्फीति (Inflation) को समायोजित करने के बाद रुपये का वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (REER) 90 के आसपास है, जो 2013-14 के 'यूएस टेंडर टैंट्रम' (US taper tantrum) के दौर की याद दिलाता है। यह गिरावट भारत के मजबूत बुनियादी आर्थिक फंडामेंटल्स (fundamentals) में किसी खराबी के कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह (capital flow) की गतिशीलता के कारण है।   ​वैश्विक कारण: भू-राजनीतिक जोखिमों, आक्रामक मौद्रिक सख्ती (monetary tightening) और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक बॉन्ड बाजारों में भारी बिकवाली देखी जा रही है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा लगातार बिकवाली से डॉलर की मांग असामान्...

भारतीय सिनेमा के बेजोड़ नायक: नाना पाटेकर

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    ​भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा अनूठा और विद्रोही व्यक्तित्व खो दिया है, जिसने अभिनय को कभी महज़ एक कला नहीं बल्कि जीवन के साथ एक सीधा टकराव माना। 75 वर्ष की आयु में गोवा स्थित अपने आवास पर हृदयाघात के कारण उनका निधन हो गया। उनका पूरा जीवन और अभिनय सफर लीक से हटकर सोचने और धारा के विपरीत चलने वाले व्यक्ति का प्रमाण रहा है।   ​अभिनय का अनूठा सफर और शैली   ​समानांतर और व्यावसायिक सिनेमा का सेतु: नाना पाटेकर ने अपने चार दशक से अधिक लंबे करियर में समानांतर कला-आन्दोलनों और मुख्यधारा के व्यावसायिक सिनेमा के बीच की खाई को पाटने का काम किया।   ​विशिष्ट पहचान: तीन बार राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award) और चार बार फिल्मफेयर पुरस्कार (Filmfare Award) जीतने वाले नाना पाटेकर ने ऐसे किरदारों को चुना जो आसानी से किसी श्रेणी में नहीं बंधे।   ​प्रमुख फिल्में और यादगार भूमिकाएं: 'गमन' (1978) से अपने अभिनय की शुरुआत करने वाले नाना ने 'अंकुश' (1986) में एक बेरोजगार युवा, 'परिंदा' (1989) में खतरनाक अंडरवर्ल्ड डॉन 'अन्ना सेठ', 'प्रहार' (1991) में गहराई से राष्...

पटना स्नातक :बिहार की सियासत में 'शुचिता' का सवाल: बाहुबल और आदर्शों का द्वंद्व । _प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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      राजद के दिलीप पटेल इस सियासी लड़ाई में अपनी गाड़ी को 'ग्रीन सिग्नल' मिलते हुए देख रहे हैं।  ​बिहार की राजनीति एक बार फिर उस चौराहे पर खड़ी है जहाँ आदर्शों और बाहुबल का द्वंद्व चरम पर है। प्रदेश के सबसे बड़े राजनैतिक दल, जदयू (JDU) की चुप्पी और उसकी विवशता, राजनीति के गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। सवाल यह है कि क्या पार्टी के भीतर भय इतना व्याप्त है कि वह अपने ही बागी नेताओं को 'बागी' तक कहने की हिम्मत खो चुकी है? ​वर्तमान घटनाक्रम के केंद्र में हैं जदयू के उम्मीदवार नीरज सिंह, जो भले ही अपनी बड़बोली शैली के लिए कुख्यात रहे हों, लेकिन उनके राजनीतिक चरित्र का एक उज्ज्वल पहलू भी है। उन्होंने कभी भी न तो अपराधियों को प्रत्यक्ष समर्थन दिया और न ही उनके सामने नतमस्तक हुए। स्वस्थ लोकतंत्र की यही वह शुचिता है जिसकी अपेक्षा एक राजनेता से की जाती है। ​इसके ठीक विपरीत, अनंत सिंह जैसे बाहुबली खुलेआम पार्टी से बगावत कर रहे हैं। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी नेतृत्व, कार्रवाई तो दूर, उनसे स्पष्टीकरण (Show Cause) तक मांगने की हिम्मत नह...

सटाकर मारने के बाद चुनाव लड़ना, और उसपे राजनीति करना_ बड़ा अहँकार नहीं तो क्या ?-प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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    ​पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में निवर्तमान MLC डॉ नवल प्रसाद यादव के हालिया बयान ने राजनीतिक हलचल मचा दी है, जहाँ वे अपने विरोधियों को 'सटाकर मारने' की धमकी देते नज़र आ रहे हैं। यह वक्तव्य विरोधियों के प्रति अहँकार और कटुता का स्पष्ट प्रदर्शन है, जो किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए अनुचित है। ​विरोधी को कम आंकना, अपनी राजनीति को ख़त्म करना_ ​राजनीतिक जीवन में विरोधियों का होना स्वाभाविक है। वे साधारण नहीं होते, बल्कि जनता द्वारा चुने गए या जनता से जुड़ने वाले होते हैं। डॉ यादव के पांच बार चुनाव लड़ने के कारण, लगभग ५० प्रबल विरोधी सीधे उनकी इस बात से आहत होंगे। यदि प्रत्येक विरोधी के १०-१० समर्थक भी मानें, तो लगभग ५०० विरोधी उनके अहँकार के परिणामस्वरूप सीधे तौर पर उनसे जुड़ जाएंगे, जो उनके चुनावी भविष्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। ​लालू यादव का अपमान, अपनी कब्र खोदने जैसा_ ​अपने बयानों में लालू यादव की हैसियत को कमतर बताना भी उनके राजनीतिक आत्महत्या करने जैसा कदम है। लालू यादव एक लोकप्रिय नेता हैं, जिनके समर्थक न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में फैले हैं। उनके चाहने वालों की भावना को ...

लोककवि घाघ की कृषि, मौसम, खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी अनमोल कहावतें ।

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    ​"जो जागे सवेरे, रोग कबहू न घेरे।" घाघ की कहावतें केवल मौसम और खेती तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि उनका दायरा मानव जीवन के हर पहलू—जैसे खान-पान, स्वास्थ्य, बीमारियाँ और दैनिक जीवन—तक विस्तृत था।   ​नीचे उनकी मौसम, खान-पान, स्वास्थ्य और अन्य लोकप्रिय कहावतों को प्रस्तुत किया गया है: ​१. मौसम और वर्षा से जुड़ी अन्य प्रसिद्ध कहावतें ​सावन मास की वर्षा: ​"सावन बरसे अति झुरा, भादों बरसे पूरा-पूरा।" (अर्थात यदि सावन में कम वर्षा हो और भादों में अच्छी हो, तो फसल अच्छी होती है।) ​पछुआ हवा और बारिश: ​"पूर्व की चली पुरवइया, छाई घटा तो बरसैबइया।" (अर्थात पूरब की हवा चलने और आकाश में बादल छाने से अच्छी बारिश की संभावना होती है।) ​माघ महीने का मौसम: ​"माघ परे जो पाला, समझो अन्न का अकाल टाला।" (अर्थात माघ महीने में पाला पड़ना या ठंड होना रबी की फसल (गेहूं आदि) के लिए बहुत फायदेमंद होता है।) ​२. खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी कहावतें ​खान-पान और सेहत को लेकर घाघ और घाघिन की कही गई बातें आज भी आयुर्वेद और विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती हैं: ​भोजन और पाचन: ​"भूख...