राजनीति का गिरता स्तर और जनता दल (यूनाइटेड): सिद्धांतों से समझौते का लाचार अंजाम।
बिहार की राजनीति इन दिनों एक ऐसे दिलचस्प और चिंताजनक मोड़ पर है, जहाँ सत्ता के समीकरणों ने राजनीतिक दलों को वैचारिक रूप से पूरी तरह लाचार कर दिया है। हाल ही में एमएलसी चुनाव के दौरान जो दृश्य सामने आए, उन्होंने साफ कर दिया है कि आज के दौर में अनुशासन, पार्टी व्हिप और वैचारिक प्रतिबद्धता महज कागजी बातें बनकर रह गई हैं। जनता दल (यूनाइटेड) यानी जेडीयू के भीतर जिस तरह से पार्टी विधायकों द्वारा खुलेआम बागी तेवर अपनाए गए और जन सुराज के पक्ष में समर्थन जुटाया गया, वह किसी भी राजनीतिक दल के आंतरिक नियंत्रण की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। अनुशासनहीनता की हदें और सहमी हुई सियासत जब किसी दल के विधायक अपनी ही पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ सरेआम ताल ठोकते हैं और पार्टी का शीर्ष नेतृत्व आंखें मूंदकर बैठा रहता है, तो यह राजनीतिक लाचारी की पराकाष्ठा है। स्थिति यहाँ तक बिगड़ गई कि जेडीयू के उम्मीदवार इस राजनीतिक दहशत और अनिश्चितता के चलते सदमे में अस्पताल जा पहुँचे। आखिर यह कैसी राजनीति है? जब दलों के भीतर अनुशासन का डर खत्म हो जाता है, तो कार्यकर्ता और प्रत्याशी खुद को ठगा हु...