भारत: नवाचार की नई दहलीज और भविष्य की चुनौतियाँ !
वैश्विक अर्थव्यवस्था के केंद्र में भारतीय प्रतिभा का दबदबा निर्विवाद है। 'भारत इनोवेट्स 2026' जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि यदि भारतीय स्टार्टअप्स को धैर्यपूर्वक पोषित किया जाए, तो वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी परिणाम दे सकते हैं। हालांकि, तकनीक के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को केवल एक उपभोक्ता बने रहने के बजाय, स्वयं को एक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना होगा। भारत के लिए अपनी नवाचार यात्रा को 'फ्रंटियर' तक ले जाने के लिए दो प्रमुख स्तंभों पर काम करना आवश्यक है: पूंजी का सही उपयोग: उद्यम पूंजी के लिए एक स्पष्ट और पारदर्शी वातावरण का होना अनिवार्य है। साथ ही, सफल उद्यमियों को हतोत्साहित करने वाली 'रेंट-सीकिंग' प्रवृतियों पर लगाम लगाना जरूरी है, ताकि नवाचार को डर के बजाय प्रोत्साहन मिले। शीर्ष प्रतिभा को देश में रोके रखने के लिए केवल व्यावसायिक अवसर पर्याप्त नहीं हैं। भारत को अपने शहरों में जीवन की गुणवत्ता भारी निवेश करना होगा। प्रतिभाएँ वहीं रुकती हैं जहाँ उन्हें एक सम्मानजनक और स्वस्थ जीवनशैली मिलती है। अंततः, भ...