न्यूनतम बैलेंस के नाम पर गरीब की बचत पर पेनल्टी का प्रहार: बैंकों की 28,000 करोड़ से अधिक की कमाई का सच" !
1. पिछले 5 वर्षों का लेखा-जोखा (वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25) संसदीय आंकड़ों और हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय बैंकों (सार्वजनिक और निजी दोनों) ने पिछले पांच वर्षों में न्यूनतम बैलेंस न बनाए रखने के नाम पर ग्राहकों से भारी-भरकम राशि वसूली है। कालखंड (समय सीमा) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) निजी क्षेत्र के बैंक (Private Banks) कुल अनुमानित वसूली पिछले 5 वर्ष (कुल) ₹8,500 करोड़ - ₹9,000 करोड़ ₹19,000 करोड़ - ₹20,000 करोड़ ₹28,495 करोड़+ मुख्य बिंदु: निजी बैंकों का वर्चस्व: निजी क्षेत्र के बैंकों (जैसे HDFC, ICICI, Axis) ने इस मामले में सरकारी बैंकों को काफी पीछे छोड़ दिया है। अकेले वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकों ने लगभग ₹4,818 करोड़ वसूले, जिसमें से आधे से अधिक हिस्सा निजी बैंकों का था। SBI की राहत: देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मार्च 2020 से बचत खातों पर न्यूनतम बैलेंस की पेनल्टी को पूरी तरह माफ कर दिया है। वर्तमान में सरकारी बैंकों द्वारा वसूली गई राशि मुख्य रूप से चालू खातों (Current Accounts) और अन्य बैंकों से आती है। 2. इस पैसे का क्या हुआ? अक...