भारतीय शेयर बाजार में IPO नियमों में सुधार और कम 'पब्लिक फ्लोट' (Public Float) के खतरों पर चिंता।
"बाजार नियामक SEBI को IPO नियमों में तुरंत सुधार करना चाहिए ताकि कृत्रिम मूल्यांकन और पूंजी के पलायन को रोका जा सके" आर्थिक विशेषज्ञों की चिंताओं के मद्देनजर, भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मौजूदा IPO (प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम) नियमों की समीक्षा करने की तत्काल आवश्यकता है। वर्तमान नियम न केवल घरेलू निवेशकों के हितों को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिरता के लिए भी चुनौती बन रहे हैं। मुख्य चिंताएं और विश्लेषण: कृत्रिम रूप से बढ़ा हुआ मूल्यांकन वर्तमान नियमों के तहत कई बड़ी कंपनियों को बहुत कम पब्लिक फ्लोट (केवल 1% से 5% तक सार्वजनिक हिस्सेदारी) के साथ बाजार में सूचीबद्ध होने की अनुमति दी गई है। अर्थशास्त्र के बुनियादी 'मांग और आपूर्ति' के नियम के अनुसार, जब बाजार में शेयरों की आपूर्ति बेहद सीमित होती है, तो उनकी कीमतें कृत्रिम रूप से आसमान छूने लगती हैं। यह एक तरह से "मूल्यांकन में हेरफेर करने का कानूनी लाइसेंस" बन जाता है। विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) का भारत रुख और उच्च P/E अनुपात: एक समय था जब कोका-कोल...