ओबीसी 'क्रीमी लेयर' परीक्षण: सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक स्पष्टीकरण!
पृष्ठभूमि: क्रीमी लेयर और 1993 का कार्यालय ज्ञापन (OM) भारत में ओबीसी आरक्षण का लाभ केवल उन्हें मिलता है जो 'क्रीमी लेयर' के दायरे में नहीं आते। इसका निर्धारण 1993 के एक सरकारी ज्ञापन के आधार पर होता है। इसमें दो मुख्य मानदंड हैं: पद की स्थिति: उच्च संवैधानिक पदों और क्लास-1 व क्लास-2 अधिकारियों के बच्चों को आरक्षण से बाहर रखा गया है। आय/संपत्ति परीक्षण: वर्तमान में, जिन अभिभावकों की वार्षिक आय ₹8 लाख या उससे अधिक है (लगातार तीन वर्षों तक), उनके बच्चे 'क्रीमी लेयर' में माने जाते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस गणना में वेतन और कृषि आय को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। विवाद का मुख्य कारण: 2004 का विवादास्पद पत्र विवाद तब शुरू हुआ जब 2004 में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने एक पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और निजी क्षेत्र में काम करने वाले उन अभिभावकों के बच्चों की आय की गणना में 'वेतन' को भी शामिल किया जाने लगा, जिनके पदों की तुलना सरकारी पदों से (Equivalence) नहीं की गई थी। इसके कारण कई पात्र अभ्यर्थी आरक्षण के ला...