बिहार: न्याय की गुहार बनाम प्रतिशोध की गिरफ़्तारी !😢😢
बिहार की राजनीति में 'न्याय के साथ विकास' का नारा अब एक विडंबना की तरह लगने लगा है। 7 फरवरी 2026 की आधी रात को सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और उसकी प्राथमिकताओं पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटनाक्रम केवल एक नेता की गिरफ़्तारी नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि सत्ता जब असुरक्षित महसूस करती है, तो वह कानून को न्याय का औज़ार बनाने के बजाय प्रतिशोध का हथियार बना लेती है। 31 साल पुराने मामले की 'सजगता' और वर्तमान का सन्नाटा सरकार की कार्यकुशलता पर सबसे बड़ा सवाल इसकी टाइमिंग को लेकर है। जिस मामले में पप्पू यादव को आधी रात को गिरफ्तार किया गया, वह 31 साल पुराना है—किराए के मकान से जुड़ा एक विवाद। सवाल उठता है कि: क्या तीन दशकों से सो रहा प्रशासन अचानक इतना मुस्तैद हो गया कि बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के रात के 12 बजे कार्रवाई करना ज़रूरी हो गया? सच्चाई: यह 'मुस्तैदी' कानून के पालन से अधिक, सत्ता की खीझ को दर्शाती है। नीट छात्रा कांड: न्याय कहाँ है? एक तरफ प्रशासन 31 साल पुराने छोटे से मामले में 'सुपर एक्टिव' ...