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रामलला की तिजोरी, एयर मार्शल की ड्यूटी: जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का अनुभव आया मंदिर के काम! - शिवानंद तिवारी।

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    अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चंदे की हेराफेरी क्या हुई, व्यवस्थापकों के तो मानो होश ही उड़ गए। घोटाले की जांच पूरी हुई, पुरानी कमेटी के चेहरे बदले, लेकिन असली 'मास्टरमाइंड्स' की सेहत पर रत्ती भर असर नहीं पड़ा। वे आज भी उतने ही सुरक्षित हैं जितने कल थे। असली चमत्कार तो इसके बाद देखने को मिला—चंदे की सुरक्षा का जिम्मा एक रिटायर्ड एयर मार्शल को सौंप दिया गया! अब देश की जनता असमंजस में है कि इस फैसले पर ठहाका लगाए या सिर धुनकर रोए। व्यवस्था का आलम तो देखिए—मंदिर के दानपात्र की चौकीदारी के लिए अब वही अनुभव चाहिए जो कभी पाकिस्तान से जंग में काम आया था। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान आसमान से दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले अफसर को शायद अंदाज़ा भी नहीं होगा कि देश की सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार नहीं, बल्कि मंदिर के भीतर चंदे की रसीदों को संभालना बन जाएगी। यह फैसला चीख-चीखकर कह रहा है कि देश में प्रशासनिक अनुभव और ईमानदारी का अकाल पड़ चुका है। अब सिविल अफसरों या ईमानदार ट्रस्टियों के बस की बात नहीं रही कि वे चढ़ावे का हिसाब-किताब रख सकें। रामलला की तिजोरी इतनी संवेदनशील हो चुकी है ...

पूछो उस कुत्ते से !

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    26 अगस्त की बाढ़ में नेपाल का त्रिशूली बाज़ार तबाह होकर 'भूतिया शहर' बन गया, लेकिन एक कुत्ता वहीं शांत खड़ा रहा। इंसानों ने तुरंत मान लिया कि वह अपने मालिक का इंतज़ार कर रहा है, क्योंकि हम हर जानवर के अस्तित्व को केवल इंसानी सेवा और वफ़ादारी के चश्मे से ही देखते हैं।   जापान का हाचिको और रॉयल नेवी का कुत्ता 'जस्ट नूइसेंस' (जो रात में नशे में धुत नाविकों को सुरक्षित जहाजों तक पहुँचाता था) वफ़ादारी के बड़े प्रतीक माने जाते हैं। लेकिन इंसान हमेशा मानता है कि जानवरों का जीवन उसकी ज़रूरतों के लिए ही है।   इंसान खुद को सोचने-समझने की क्षमता के कारण श्रेष्ठ मानता आया है और जानवरों को बिना अधिकारों की 'संपत्ति' समझता है। लेकिन विज्ञान (डार्विन के बाद से) यह स्पष्ट कर चुका है कि इंसानी दिमाग मौलिक रूप से जानवरों से श्रेष्ठ नहीं है।   तबाही के बीच बिल्कुल शांत (Stoic) खड़ा नेपाल का कुत्ता इंसानी सभ्यता के सामने एक आईना रख रहा है। सदियों से इंसानों के साथ रहते हुए इन बेजुबानों ने हमारे बुरे-से-बुरे कृत्यों को देखा है।   जानवर इंसानों के अधीन या...

फिल्म 'तरेंगन' (Tarengan) का मुख्य कथा सार (Synopsis)

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   यह बिहार के मुशहर  परिवार की एक मार्मिक कहानी है।एक पिता के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और बेटे की कृतघ्नता की भावुक कहानी पर आधारित है: 1. संघर्ष और समर्पण (1993 - 2004) कहानी बिहार की पृष्ठभूमि में 1993 से 2004 के दौर को दर्शाती है। मुख्य पात्र जुगल मुसहर समाज से आने वाला एक मूक-बधिर (बोल और सुन न पाने वाला) रिक्शा चालक है। जुगल का जीवन अत्यंत अभावों में बीतता है, जहाँ वह अमीरों के बच्चों को रिक्शा से स्कूल छोड़ने का काम करता है। तमाम मुश्किलों और सामाजिक विषमताओं के बावजूद, जुगल का एक ही सपना है—अपने प्यारे बेटे 'तरेंगन' को पढ़ा-लिखाकर एक बड़ा और आदरणीय इंसान बनाना। वह अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी और खुशियाँ न्योछावर कर देता है। 2. सफलता और दूरी पिता के कड़े परिश्रम और त्याग के बल पर तरेंगन अपनी पढ़ाई पूरी करता है और आगे चलकर एक ऊँचे पद और अच्छे सामाजिक ओहदे पर पहुँच जाता है। 3. घमंड और रिश्तों का पतन सफलता और ओहदा मिलते ही तरेंगन के व्यवहार में बदलाव आ जाता है। वह अपने गरीब और मूक-बधिर पिता के त्याग और संघर्षों को भूलकर घमंडी तथा लापरवाह हो जाता है...

विष का प्याला और चढ़ता पाप: बेढना के उस खूनी जाम की कहानी। -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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     कहते हैं कि पाप का घड़ा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, एक दिन उसके भरने का वक्त आ ही जाता है। जब इंसान के सर पर बदले की आग चढ़कर बोलने लगती है, तो विवेक की आँखें बंद हो जाती हैं। लेकिन वो यह भूल जाता है कि कानून और कुदरत के हाथ हमेशा जुर्म की गर्दन तक पहुँच ही जाते हैं। पटना के शांत ग्रामीण इलाके बाढ़ के बेढना गांव में 30 अगस्त की शाम कुछ अलग नहीं लग रही थी। गांव के चार दोस्त—नीशू और उसके साथी—खुशनुमा माहौल में महफिल जमाने की तैयारी में थे। उन्हें क्या मालूम था कि जिस जाम को वो खुशी का जरिया समझ रहे हैं, उसमें मौत घुल चुकी है। इस साजिश का ताना-बाना बुन रहा था लाली कुमार। लाली के दिल में पिछले दो-ढाई सालों से नफरत का जहर उबल रहा था। वजह थी नीशू का उसकी बहन के साथ प्रेम प्रसंग। ऊपर से नीशू और उसके साथियों के तंज और ताने लाली के जख्मों पर नमक का काम करते थे। प्रतिशोध की आग में अंधा हो चुका लाली अब सिर्फ सही मौके की तलाश में था। लाली ने अपने साथी, सब्जी विक्रेता रुदल कुमार, और एक अन्य मददगार के साथ मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई। बाजार से जहर खरीदा गया। लाली ने बड़े ही दोस्त...

उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय भगवानपुर में MLC प्रो. नवल किशोर यादव का भव्य स्वागत, शिक्षकों की समस्याओं पर हुई चर्चा। -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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  रजौली (नवादा): दिनांक 01 सितंबर 2026 को उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, भगवानपुर (रजौली, नवादा) परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान पार्षद (MLC) डा. प्रो. नवल किशोर यादव का विद्यालय पहुँचने पर भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सरोज यादव तथा समस्त शिक्षकवृंद ने एमएलसी प्रो. नवल किशोर यादव का पुष्पगुच्छ भेंट कर औपचारिक स्वागत किया। जनसंपर्क अभियान और चुनावी तैयारी आगामी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में प्रो. नवल किशोर यादव लगातार पटना, नालंदा और नवादा जिलों के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों का सघन दौरा कर रहे हैं। इस जनसंपर्क अभियान के तहत वे शिक्षकों और प्रबुद्धजनों से मुलाकात कर अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को साझा कर रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। सड़क से सदन तक शिक्षकों की बुलंद आवाज प्रो. नवल किशोर यादव की पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में है जो लगातार शिक्षकों के अधिकारों और उनकी ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। चाहे...

अस्पृश्यता, 'पवित्रता' की अवधारणा और कानून की सीमा !

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  हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद आयोजित एक 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान ने भारतीय कानून में अस्पृश्यता और जातिगत भेदभाव के कानूनी पहलुओं पर पुनः बहस छेड़ दी है। अनुच्छेद 17: संविधान अस्पृश्यता को समाप्त करता है, हालांकि यह इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं देता। संसद ने इसे लागू करने के लिए 'नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955' बनाया। निजी व्यक्तियों पर लागू: सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार, अनुच्छेद 17 के प्रावधान राज्य के साथ-साथ गैर-राज्य (निजी) संस्थाओं/व्यक्तियों के खिलाफ भी प्रवर्तनीय हैं। अपराध की शर्तें: SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केवल अपमान करना अपराध नहीं है; यह साबित होना आवश्यक है कि अपमान व्यक्ति की जाति के आधार पर और 'सार्वजनिक दृष्टि' (Public view) में किया गया था (हितेश वर्मा मामला)। उच्चतम और उच्च न्यायालय की व्याख्या 'शुद्धता और प्रदूषण' का सिद्धांत: सुकन्या शांता (2024) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अस्पृश्यता जाति व्यवस्था और 'पवित्रता-अशुद्धता' की धारणाओं से जुड़ी है। अनुच्छेद 17 ऐसे किसी भी भ...

बिहार में नदियां उफान पर: जलस्तर, खतरे के निशान और अनुमंडल अलर्ट रिपोर्ट । (स्रोत मॉसम विज्ञान व अन्य न्यूज़ एजेंसि)

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   नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और मैदानी भागों में हुई बारिश के कारण बिहार की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। केंद्रीय जल आयोग (CWC) और बिहार जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा, गंडक, कोसी, सोन और पुनपुन नदियां कई स्थानों पर खतरे के मानक स्तर को पार कर चुकी हैं।   नदियों की वर्तमान स्थिति एवं जलस्तर वृद्धि   नदी का नाम खतरे के निशान से ऊपर वाले प्रमुख स्थल जलस्तर की प्रवृत्ति (Trend) गंगा पटना (दीघा, गांधीघाट, हाथीदह), भागलपुर (कहलगांव, सुल्तानगंज) बढ़ने की संभावना गंडक डुमरियाघाट (गोपालगंज), लालगंज (वैशाली) स्थिर/धीमी वृद्धि कोसी बलतारा (खगड़िया), कुरसेला (कटिहार), बीरपुर (सुपौल) बढ़ने की संभावना सोन मनेर (पटना) बढ़ने की संभावना पुनपुन श्रीपालपुर (पटना), किंजर (अरवल) बढ़ने की संभावना दरधा और मोरहर जहानाबाद और पटना के ग्रामीण निचले इलाके चेतावनी स्तर पर / वृद्धि प्रमुख नदियों का विस्तृत विश्लेषण गंगा नदी: पटना के दीघाघाट, गांधीघाट और हाथीदह में खतरे के निशान से ऊपर है। भागलपुर और कहलगांव में भी नदी खतरे के स्तर को पार कर चुकी है। पीछे ...