वैश्विक अस्थिरता और घरेलू आर्थिक संकट: एक तुलनात्मक विश्लेषण,! -प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र, विभाग.
यह वर्तमान युद्ध की स्थिति और उसके भारतीय अर्थव्यवस्था व आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण है। तुलनात्मक आर्थिक तालिका क्षेत्र (Sector) वर्तमान स्थिति एवं प्रभाव ईरान-अमेरिका तनाव भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risk) खाड़ी देशों में अस्थिरता से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित होती है, जिससे अनिश्चितता का माहौल बनता है। पेट्रोल-डीजल के दाम लागत-प्रेरित मुद्रास्फीति (Cost-Push Inflation) कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से माल ढुलाई महंगी होती है, जिससे हर वस्तु के दाम बढ़ जाते हैं। मजदूरों का पलायन श्रम विस्थापन (Labor Displacement) युद्ध या आर्थिक तंगी के डर से जब मजदूर घर लौटते हैं, तो औद्योगिक उत्पादन गिरता है और 'बेरोजगारी दर' बढ़ती है। गैस व राशन की किल्लत आपूर्ति आघात (Supply Shock) मांग स्थिर रहने और आपूर्ति घटने से 'स्टैगफ्लेशन' (Stagnation + Inflation) जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है। 1930 बनाम आज चक्रीय मंदी (Cyclical Recession) 1930 में मांग की कमी थी, आज 'मुद्रास्फीति' (Inflation) और 'आपूर्ति की बाधाएं' मुख्य संकट...