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व्यवस्था की चक्की में पिसती मानवीय संवेदनाएँ !

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  प्रस्तुत पंक्तियाँ केवल शब्द नहीं, बल्कि आधुनिक समाज की उस विसंगति का दस्तावेज़ हैं जहाँ 'न्याय' की अवधारणा प्रतीक्षालयों में दम तोड़ रही है। आम आदमी की मासूमियत और उसके अधिकारों की बलि चढ़ाकर खड़ा हुआ है।  प्रतीक्षा का त्रासद अंत एक ऐसी स्थिति जहाँ उम्मीदें धुंधली पड़ चुकी हैं। यह व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है कि न्याय पाने की प्रक्रिया ही इतनी लंबी और बोझिल है कि व्यक्ति न्याय मिलने से पहले ही 'पथरा' (संवेदनाहीन या मृतप्राय) जाता है।  भीड़ के पहियों तले कुचले पंख: यह लोकशाही या भीड़तंत्र की उस अराजकता को दर्शाता है जहाँ व्यक्ति की स्वतंत्रता और उसके सपने (पंख) निर्दयता से कुचल दिए जाते हैं। व्यवस्था की चक्की" एक ऐसा रूपक है जो दर्शाता है कि नियम और कानून के पहिए इतने भारी हैं कि उनके बीच "कोमल न्याय की मानवीय संवेदनाएँ" पिसकर अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। आज न्याय केवल प्रक्रिया (Procedure) बनकर रह गया है, जिसमें मानवीय करुणा और संवेदनशीलता के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। 

समकालीन विश्व व्यवस्था और एआई: शक्ति का नया व्याकरण !

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  आज की समकालीन विश्व व्यवस्था एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है, जहाँ 'शक्ति' की पारंपरिक परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं। कल तक जो राष्ट्र अपनी सैन्य क्षमता और क्षेत्रीय विस्तार के बल पर विश्व पटल को नियंत्रित करते थे, आज वे एक नई डिजिटल प्रतिस्पर्धा के केंद्र में हैं। अब शक्ति का पैमाना केवल बंदूकों या सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा, एल्गोरिदम और उच्च स्तरीय कंप्यूटिंग अवसंरचना की ओर स्थानांतरित हो गया है। शक्ति के बदलते आयाम पारंपरिक रूप से, भू-राजनीतिक प्रभाव सैन्य शक्ति पर आधारित रहा है। हालाँकि, वर्तमान युग में 'सॉफ्ट पावर' और 'टेक पावर' का उदय हुआ है। जिस देश या संस्था के पास सूचनाओं का विशाल भंडार (Big Data) और उन्हें संसाधित करने की क्षमता है, वही भविष्य की दिशा तय करने की स्थिति में है। एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) इस नई शक्ति संरचना का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के समक्ष चुनौतियाँ इस तकनीकी क्रांति ने लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने एक जटिल प्रश्न खड़ा कर दिया है। मुख्य चुनौती यह है कि एआई को: केवल बाजार की एक अनियं...

एक बागी किसान पुत्र: मनेर से मुंबई तक का सफर !

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  रामायण तिवारी का जन्म सन 1917 के आसपास बिहार की राजधानी पटना के निकट स्थित मनेर के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। किशोरावस्था तक आते-आते उनके भीतर देशभक्ति की ज्वाला धधकने लगी थी। अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ वे आवाज उठाना चाहते थे, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों ने उन्हें कुछ समय तक खेतों तक सीमित रखा। ट्रेन की वह घटना जिसने बदल दी किस्मत आजाद हिंद फौज से जुड़ने के बाद, एक बार ट्रेन यात्रा के दौरान रामायण जी का विवाद एक अंग्रेज मुसाफ़िर से हो गया। आवेश में आकर उन्होंने उस अंग्रेज को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे अगले स्टेशन पर उतरकर दूसरी ट्रेन में चढ़ गए। उन्हें नहीं पता था कि वह ट्रेन कहाँ जा रही है, लेकिन जब आँख खुली तो वे सपनों की नगरी बंबई (मुंबई) पहुँच चुके थे। जब घरवालों ने समझ लिया था 'मृत' मुंबई में शुरुआती संघर्ष के बाद उन्हें एक फिल्म स्टूडियो में काम मिला। वे दिन में नौकरी करते और रात में स्वतंत्रता आंदोलन की गतिविधियों में शामिल होते। इसी बीच, फिल्म 'मन मंदिर' की शूटिंग के दौरान एक अभिनेता के न आने पर निर्देशक की नजर ...

संकल्प की सिंदूरी आभा: फुलवारीशरीफ की बिटिया का आकाश छूता गौरव! -प्रो प्रसिद्ध कुमार.

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  (तस्वीर में मेरे साथ प्रिया के माता पिता व दादा जी हैं)  कहते हैं कि जब इरादों में फौलाद की मजबूती और लक्ष्य में आईने जैसी स्पष्टता हो, तो समय का अभाव भी मार्ग की बाधा नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को निखारने वाली सान बन जाता है। मेरे पड़ोसी गाँव की लाडली और मेरे अभिन्न मित्र की पौत्री प्रिया कुमारी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) में 232वीं रैंक प्राप्त कर केवल एक परीक्षा ही उत्तीर्ण नहीं की, बल्कि मध्यमवर्गीय सपनों को एक नया आकाश दे दिया है। संघर्ष की धूप में खिला सफलता का कमल प्रिया का यह सफर किसी तपस्या से कम नहीं रहा। 2021 से एक निजी कंपनी में नौकरी करते हुए, फाइलों के बोझ और कॉर्पोरेट जगत की आपाधापी के बीच उसने अपनी एकाग्रता का दीया जलाए रखा। बिना किसी भव्य कोचिंग संस्थान के, केवल स्वाध्याय और अडिग इच्छाशक्ति के बल पर देश की सबसे कठिन परीक्षा को जीत लेना, आधुनिक युग के एकलव्य जैसा उदाहरण है। उसकी मेधा की चमक पुरानी है; 2021 में ही उसने कंपनी सेक्रेटरी (CS) की परीक्षा में पूरे देश में 21वां स्थान पाकर अपनी प्रतिभा की मुनादी कर दी थी। संस्कारों की विरासत और स्मृतियों के गलियारे प्रि...

राम लखन सिंह यादव कॉलेज में संस्थापक की 106वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई!

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अनीसाबाद, पटना | 9 मार्च 2026 आज अनीसाबाद स्थित राम लखन सिंह यादव कॉलेज में कॉलेज के संस्थापक और प्रख्यात समाजसेवी राम लखन बाबू की 106वीं जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर कॉलेज परिसर में एक गरिमामयी पुष्पांजलि सभा और व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद द्वारा राम लखन बाबू के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। अपने संबोधन में प्राचार्य ने उनके जीवन कृत्यों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि: "राम लखन बाबू न केवल एक दूरदर्शी जननायक थे, बल्कि उन्होंने समाज के वंचित तबकों तक शिक्षा की लौ पहुँचाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके आदर्श आज भी संस्थान के लिए प्रेरणा के मुख्य स्रोत हैं।" प्रमुख उपस्थिति इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक वरिष्ठ शिक्षकों और कर्मचारियों ने शिरकत की और संस्थापक को अपनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल रहे: वरिष्ठ प्राध्यापक: प्रो. रामबीनेश्वर सिंह, प्रो. बी.डी. यादव,  प्रो. वीरेन्द्र प्रसाद सिंह और प्रो. राय श्रीपाल सिंह,  प्रो ...

संघर्ष से सफलता तक: फुलवारीशरीफ की बेटी प्रिया कुमारी ने UPSC में लहराया परचम (232वीं रैंक) !

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   मेरे लिए यह गर्व की बात है कि मेरे मित्र की  पौत्री व  मेरे पड़ोसी गाँव की बिटिया ने आज सफलता का  पड़चम  लहराई.कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और लक्ष्य साफ हो, तो नौकरी की व्यस्तता भी आपकी राह का रोड़ा नहीं बन सकती। बिहार की एक और बेटी, प्रिया कुमारी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 232वीं रैंक हासिल कर इस बात को सच कर दिखाया है। नौकरी के साथ जारी रखा संघर्ष प्रिया की यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इसे बिना किसी कोचिंग के, सेल्फ स्टडी और नौकरी के साथ हासिल किया है। वर्ष 2021 से वह एक निजी कंपनी में कार्यरत थीं। काम के दबाव के बीच समय निकालकर देश की सबसे कठिन परीक्षा की तैयारी करना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। मेधावी रहा है शैक्षणिक सफर प्रिया की प्रतिभा के चर्चे नए नहीं हैं। इससे पहले वर्ष 2021 में उन्होंने CS (Company Secretary) फाइनल परीक्षा में ऑल इंडिया 21वीं रैंक हासिल की थी। उनके पास एक सुरक्षित करियर था, लेकिन उनका सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए कुछ बड़ा करने का था, जिसे उन्होंने आज पूरा कर लिया है। एक गौरवान्...

सफलता की कहानी: पटना, बेऊर् के गौरव कुमार ने यूपीएससी 2025 में लहराया परचम (AIR 338) !

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   फुलवारी कुरकुरी में ही इनका ननिहाल है. सपनों को हकीकत में बदलने के लिए केवल आंखों में उम्मीद नहीं, बल्कि इरादों में फौलाद होना चाहिए। पटना, बिहार के रहने वाले गौरव कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 में 338वीं रैंक हासिल कर इस बात को साबित कर दिखाया है। एक मेधावी शैक्षणिक सफर गौरव की यह सफलता अचानक मिली उपलब्धि नहीं है, बल्कि सालों की निरंतर मेहनत का परिणाम है। उनके शैक्षणिक बैकग्राउंड पर नज़र डालें तो उनकी काबिलियत साफ झलकती है: प्रारंभिक शिक्षा: गौरव ने अपनी 10वीं की पढ़ाई (ICSE) डॉन बॉस्को एकेडमी और 12वीं (CBSE) सेंट माइकल्स हाई स्कूल से 90% से अधिक अंकों के साथ पूरी की। उच्च शिक्षा: उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech किया है। उपलब्धियां: वे गूगल हैकाथॉन (IIT खड़गपुर) के विजेता रहे हैं और उनके नाम नेटवर्किंग क्षेत्र में एक पेटेंट भी दर्ज है। संघर्ष और संकल्प गौरव के लिए यह सफर आसान नहीं था। उनके आवेदन पत्र (DAF) के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय अरविंद कुमार घोष अब इस दुनिया में नहीं हैं। पिता को खोन...