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पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार की शानदार जीत पर आरएलएसवाई कॉलेज, अनीसाबाद में जश्न; कॉलेज परिवार ने दी बधाई

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    ​पटना: पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार की शानदार और ऐतिहासिक जीत पर राम लखन सिंह यादव (RLSY) कॉलेज, अनीसाबाद, पटना के प्रांगण में हर्षोल्लास का माहौल रहा। कॉलेज परिवार की ओर से नवनिर्वाचित विधान पार्षद (MLC) डॉ. संजीव कुमार को हार्दिक बधाई एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। ​इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि "डॉ. संजीव कुमार के शिक्षक प्रतिनिधि के रूप में चुने जाने से संपूर्ण शिक्षा जगत को एक नया संबल और मजबूती मिलेगी।" ​प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद, प्रो. प्रसिद्ध कुमार, प्रो. वीरेंद्र यादव, प्रो. राम जीवन यादव और प्रो. मनीष भारती ने नवनिर्वाचित एमएलसी डॉ. संजीव कुमार को पुष्पगुच्छ भेंट कर और माल्यार्पण कर जीत की बधाई दी। इस दौरान पूरे कॉलेज परिवार ने उम्मीद जताई कि डॉ. संजीव कुमार विधान परिषद में पूरी मुखरता के साथ कॉलेज के शिक्षकों, कर्मचारियों और विशेष रूप से वित्तरहित कॉलेज कर्मियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएंगे तथा उनके समाधान की दिशा में सार्थक प्रयास करेंगे। ​उत्सव के इ...

बिहार mlc चुनाव में कौन कहाँ से जीते व हारे!राजनीतिक विश्लेषण: किस दल को कितना लाभ और नुकसान?-प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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    ​1. भारतीय जनता पार्टी (BJP): मजबूती और बढ़त ​लाभ: भाजपा ने इन चुनावों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दरभंगा स्नातक, तिरहुत शिक्षक और कोसी स्नातक सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। कोसी स्नातक सीट से एन.के. यादव ने जीत की हैट्रिक लगाकर पार्टी की पकड़ को मजबूत किया है। ​नुकसान: पार्टी को सबसे बड़ा झटका पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लगा, जहां पिछले 30 सालों से काबिज दिग्गज नेता नवल किशोर यादव को हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा सारण शिक्षक सीट पर भी बागी उम्मीदवार के हाथों नुकसान उठाना पड़ा। ​2. जनता दल यूनाइटेड (JDU): साख बचाने में कामयाब ​लाभ: जेडीयू के खाते में पटना स्नातक सीट आई, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार ने जीत दर्ज की। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर बाहुबली विधायक अनंत सिंह के विरोध और आंतरिक उठापटक के बावजूद जीत हासिल करना जेडीयू के लिए एक बड़ी राहत और नैतिक जीत माना जा रहा है। ​3. राष्ट्रीय जनता दल (RJD): आक्रामक वापसी ​लाभ: राजद ने पटना शिक्षक सीट पर बड़ा उलटफेर करते हुए डॉ. संजीव कुमार को जिताया और भाजपा के लंबे समय के गढ़ को ढहा दिया। इसके अलावा कई सीटों पर प...

पटना में तेजस्वी का जलवा: तीस साल का अहंकार ध्वस्त, राजद की ऐतिहासिक जीत ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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  शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा को चटाई धूल, लालू-तेजस्वी की रणनीति ने लिखी नई इबारत राजनीति में अहंकार का पतन तय माना जाता है, और जब जनता और शिक्षक वर्ग ठान लें, तो बड़े-बड़े दिग्गजों के किले भी ढह जाते हैं। बिहार की राजधानी पटना के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों चारों तरफ एक ही चर्चा है—पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव परिणाम। राजद (RJD) समर्थित उम्मीदवार डॉ. संजीव कुमार ने भाजपा प्रत्याशी नवल यादव को 1057 वोटों के अंतर से करारी शिकस्त देकर न सिर्फ दशकों पुराना समीकरण बदला, बल्कि यह साबित कर दिया कि जमीन से जुड़ी राजनीति और जनहित के आगे बड़े-बड़े दावे धरे के धरे रह जाते हैं। अहंकार और बदजुबानी का अंत नवल यादव का राजनीतिक सफर और उनका कथित अहंकार किसी से छिपा नहीं रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उनके बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते थे। उन्होंने खुले मंचों से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की हैसियत पर सवाल उठाए थे और उनकी पार्टी की 'दुकान बंद होने' जैसी बातें कही थीं। यही नहीं, शिक्षकों को लेकर उनकी अपमानजनक टिप्पणियां—जैसे उन्हें 'मास्टरवा' या ...

फोर्टिफाइड साल्ट (DFS): एनीमिया मुक्ति की प्रभावी और आसान राह ।

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  भारत में आयरन की कमी (एनीमिया) एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जो आधी से अधिक महिलाओं और तीन-चौथाई बच्चों को प्रभावित करती है। इस चुनौती से पार पाने के लिए 'डबल फोर्टिफाइड साल्ट' (DFS) — जिसमें आयोडीन और आयरन दोनों होते हैं — एक अत्यधिक किफायती, व्यावहारिक और प्रभावी समाधान के रूप में उभर कर आया है। चूंकि नमक का सेवन हर घर में बिना किसी सामाजिक या आर्थिक भेद के किया जाता है, इसलिए यह कुपोषण और एनीमिया के खिलाफ जंग में सबसे बड़ा हथियार बन सकता है।    विभिन्न अध्ययनों और पायलट प्रोजेक्ट्स से यह साबित हुआ है कि DFS के उपयोग से एनीमिया में उल्लेखनीय कमी आती है। इसे 'एनीमिया मुक्त भारत' (AMB) अभियान और प्रधानमंत्री पोषण (PM POSHAN) जैसी योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर लागू करने की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि इसकी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जाए, गुणवत्ता नियंत्रण सुधारा जाए और इसके व्यापक प्रसार के लिए नीतिगत प्रतिबद्धता दिखाई जाए, ताकि 'विकसित भारत 2047' के दृष्टिकोण को साकार किया जा सके।   

सुरक्षा का घेरा और डिजिटल खतरे: कुडनकुलम साइबर उल्लंघन से सीख ।

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  यह  भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे (क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) की सुरक्षा में मौजूद साइबर जोखिमों पर प्रकाश डालता है। हाल ही में, तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र से जुड़े लगभग 19,000 फाइलों का डेटा लीक डार्क वेब पर सामने आया, जिसमें इंजीनियरिंग ड्रॉइंग, निरीक्षण रिपोर्ट और बीमा दस्तावेज शामिल थे। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संयंत्र के मुख्य नियंत्रण और सुरक्षा प्रणालियाँ इंटरनेट से अलग (आइसोलेटेड) थीं और सुरक्षित थीं, लेकिन यह घटना सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर करती है।    डेटा एक थर्ड-पार्टी ठेकेदार (कंट्रेक्टर) के सर्वर पर सुरक्षित था, जो यह दर्शाता है कि जैसे-जैसे परमाणु और अन्य संवेदनशील परियोजनाएं निजी कंपनियों, आपूर्तिकर्ताओं और डेटा सेंटरों तक विस्तृत होती हैं, वैसे-वैसे साइबर हमलों का जोखिम भी बढ़ता जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए मजबूत डेटा वर्गीकरण, शून्य-विश्वास (zero-trust) दृष्टिकोण, सख्त तृतीय-पक्ष अनुपालन प्रमाणपत्र और एक एकीकृत राष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता है।    #CyberSecurity #Koodankulam #CriticalInfrastruc...

​सोनिया गांधी की आत्मकथा "Belonging: A Journey of Love": भारतीय राजनीति और संघर्ष का जीवंत दस्तावेज ।

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    ​पुस्तक का सार: "अपनापन: प्यार की एक यात्रा"  ​प्रेम और आत्म-खोज की कहानी: यह पुस्तक केवल एक राजनीतिक सफर नहीं, बल्कि सोनिया गांधी के व्यक्तिगत जीवन, प्रेम, जिम्मेदारी, अपने प्रियजनों को खोने के गहरे गम और अपनी एक नई जगह तलाशने की एक संवेदनशील दास्तान है।   ​ऐतिहासिक राजनीतिक दौर की गवाही: इस किताब में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल तक के दौर को करीब से दिखाया गया है, जिसे भारत की प्रगति का एक महत्वपूर्ण काल माना जाता है।   ​गांधी परिवार का सफर और व्यक्तिगत त्रासदी: राजीव गांधी के साथ उनके प्रेम संबंध से शुरू हुआ यह सफर उन्हें गांधी परिवार की बहू के रूप में देश के राजनीतिक केंद्र में ले आया, जहां उन्होंने परिवार पर आए दुखों के पहाड़ों को भी देखा।   ​त्याग और आर्थिक विकास: प्रधानमंत्री पद को स्वयं से दूर रखकर देश को डॉ. मनमोहन सिंह जैसा प्रधानमंत्री देने का उनका फैसला इतिहास में दर्ज है। साथ ही, 2004 से 2014 के दौरान उनके और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भारत की आर्थिक प्रगति को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में र...

​जंतर-मंतर से 'दिल्ली चलो': सत्ता को चुनौती देते जन-आंदोलन और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई।

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    ​विभिन्न विरोध प्रदर्शनों का एकीकरण: पिछले कुछ महीनों में भारत में तीन मुख्य असंतोष धाराएं उभरी हैं—कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन, वामपंथी छात्र संगठनों के कार्य, और कांग्रेस व 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के नेतृत्व वाले अभियान。 ये सभी धाराएं अब लोकतंत्र, असहमति, नागरिकों के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता जैसे समान मुद्दों पर एकजुट हो रही हैं。   ​छात्र और युवा असंतोष: जंतर-मंतर पर शुरू हुआ पहला चरण शिक्षा सुधारों, नीट (NEET) पेपर लीक और पूर्व शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर केंद्रित था。 सीजेपी (CJP) ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई और युवाओं की ऊर्जा व रचनात्मकता से बड़े पैमाने पर असंतोष को सड़कों पर उतारा。   ​चुनावी सूची और निष्पक्षता पर सवाल: सितंबर 2026 तक मतदाता सूचियों से 1.33 करोड़ से अधिक नामों के बाहर होने ने पात्र नागरिकों के मताधिकार से वंचित होने की गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। विरोध प्रदर्शनों के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मतदाता विलोपन की जांच, मनमाने निष्कासन पर रोक और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की गई है।...