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# पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (PPU) अवकाश विश्लेषण 2026: एक संपूर्ण गाइड !

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पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने वर्ष 2026 के लिए अपना आधिकारिक शैक्षणिक कैलेंडर और अवकाश सूची जारी कर दी है। विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुविधा के लिए हमने इस कैलेंडर का विस्तृत विश्लेषण किया है ताकि आप अपने शैक्षणिक वर्ष की योजना बेहतर ढंग से बना सकें। --- ### 1. छुट्टियों का संक्षिप्त सारांश (Statistics) कैलेंडर के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2026 का विवरण निम्न प्रकार है: * **कुल अवकाश के दिन (रविवार सहित):** 59 दिन * **कुल अवकाश के दिन (रविवार को छोड़कर):** 52 दिन * **ग्रीष्मावकाश (केवल शिक्षकों के लिए):** 30 दिन (23 मई से 21 जून) * **शीतकालीन अवकाश:** 06 दिन (26 दिसंबर से 31 दिसंबर) --- ### 2. रविवार के दिन पड़ने वाले अवकाश (Holidays on Sundays) वर्ष 2026 में कुल **7 छुट्टियां** ऐसी हैं जो रविवार के दिन पड़ रही हैं, जिससे अलग से कोई अतिरिक्त छुट्टी नहीं मिलेगी: | तिथि | त्योहार/अवकाश | | :--- | :--- | | 01 फरवरी | संत रविदास जयंती | | 15 फरवरी | महाशिवरात्रि | | 22 मार्च | बिहार दिवस | | 02 अक्टूबर | महात्मा गांधी जयंती | | 11 अक्टूबर | दुर्गा पूजा कलश स्थापना | | 08 नवंबर | दीपाव...

फार्मा और MSME क्षेत्र में नई क्रांति: 'मेक इन इंडिया' को मिली गति!

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  ​हाल के नीतिगत निर्णयों ने भारत के विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र, विशेषकर दवा उद्योग में एक नई ऊर्जा भर दी है। सरकार द्वारा जेनेरिक दवाओं के उत्पादन और छोटे उद्योगों को दी जा रही प्राथमिकता से आर्थिक विकास के नए द्वार खुलते नजर आ रहे हैं। ​1. जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में वृद्धि ​बजट और सरकारी योजनाओं में विनिर्माण क्षेत्र के अंतर्गत जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। यह दवा क्षेत्र (Pharma Sector) के लिए अत्यंत उत्साहजनक है, क्योंकि इससे न केवल दवाओं की लागत कम होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की "दुनिया की फार्मेसी" वाली छवि और मजबूत होगी। ​2. MSME के लिए वित्तीय प्रोत्साहन ​MSME क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसे सशक्त बनाने के लिए दो प्रमुख वित्तीय घोषणाएं की गई हैं: ​पूंजी सहायता: MSME को वित्तीय मजबूती देने के लिए ₹10,000 करोड़ की पूंजी सहायता की घोषणा की गई है। ​जोखिम कोष: व्यवसायिक अनिश्चितताओं और जोखिम से निपटने के लिए ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त कोष (Risk Fund) बनाया गया है। ​3. छोटे शहरों का विकास और 'मेक इन इ...

पहचान का मोह और मानसिक शांति !

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  ​आज की भागदौड़ भरी दुनिया में हर कोई एक अंधी दौड़ का हिस्सा बना हुआ है। हर व्यक्ति दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगा है, लेकिन इस आपाधापी में हम यह भूल जाते हैं कि असली प्रगति बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर है। ​ पद से परे अपनी पहचान ​अक्सर हम अपनी पहचान को अपने पद (Position) या अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा (Identity) से पूरी तरह जोड़ लेते हैं। जब हम ऐसा करते हैं, तो हम बाहरी प्रशंसा और आलोचना के गुलाम बन जाते हैं। ​आलोचना का प्रभाव: यदि आप केवल अपने पद से जुड़े हैं, तो कोई भी छोटी सी आलोचना आपको भीतर तक झकझोर देगी। ​आंतरिक स्थिरता: इसके विपरीत, जब आप खुद को अपने काम और सिद्धांतों से जोड़ते हैं, तो बाहरी टिप्पणियाँ आपके मानसिक संतुलन को बिगाड़ नहीं पातीं। ​ भयमुक्त कार्य प्रणाली ​जब इंसान लगातार दूसरों से तुलना करना छोड़ देता है, तो वह 'डर' के साये से बाहर निकल आता है। बिना किसी डर या दबाव के अपनी क्षमता के अनुसार काम करने के दो मुख्य लाभ होते हैं: ​मानसिक स्वास्थ्य: अनावश्यक प्रतिस्पर्धा न होने से मानसिक तनाव (Stress) में भारी कमी आती है। ​कार्य की गुणवत्ता: जब मन शांत और स्थिर ह...

दानापुर रेल मंडल: 65 रेलकर्मियों को दी गई भावभीनी विदाई, 'समापक भुगतान' के साथ शुरू हुई नई पारी !

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  ​ दानापुर | 02 फरवरी, 2026 रिपोर्ट: प्रो. प्रसिद्ध कुमार ​दानापुर रेल मंडल के अधिकारी क्लब में आज एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जनवरी 2026 में अपनी सेवा पूर्ण करने वाले 65 रेलकर्मियों को "समापक भुगतान" (Settlement Payment) के साथ ससम्मान विदाई दी गई। ​ सम्मान और विदाई ​कार्यक्रम की शुरुआत वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी श्री अतुल कुमार ने की, जिन्होंने सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों के सेवा विवरण और भुगतान संबंधी विस्तृत जानकारी साझा की। इसके पश्चात, मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री विनोद कुमार ने सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अंगवस्त्र और समापक भुगतान के दस्तावेज सौंपकर उन्हें सम्मानित किया। ​ DRM का महत्वपूर्ण संदेश ​उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए डीआरएम श्री विनोद कुमार ने रेलकर्मियों के सुखद और समृद्ध भविष्य की कामना की। उन्होंने सेवानिवृत्त कर्मियों को सचेत करते हुए कहा: ​"अपनी मेहनत की कमाई और समापक भुगतान की राशि को किसी भी असुरक्षित जगह पर निवेश न करें। अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और जीवन के इस नए पड़ाव का आनंद लें।" ​ स्वास्थ्य पर विशेष सत्...

बिहार लेनिन जगदेव प्रसाद: शोषितों की आवाज़ और सामंतवाद के विरुद्ध महासंग्राम!

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  आज जन्मदिन पर मैं पुष्पांजलि किया। ​इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी मसीहा ने करोड़ों मूक बधिरों को ज़बान दी है, तब-तब सत्ता और सामंतवाद ने मिलकर उसकी आवाज़ को खामोश करने की साजिश रची है। 5 सितंबर 1974 का वह काला दिन बिहार के इतिहास में एक गहरे ज़ख्म की तरह दर्ज है, जब 'बिहार लेनिन' जगदेव प्रसाद की हत्या महज एक पुलिसिया कार्रवाई नहीं, बल्कि वैचारिक क्रांति को कुचलने का एक सुनियोजित षड्यंत्र था। ​षड्यंत्र का ताना-बाना और शहादत ​जगदेव बाबू का बढ़ता कद और "शोषितों के राज" की ललकार ने तत्कालीन सामंती ताकतों की नींद उड़ा दी थी। कुर्था सत्याग्रह के दौरान जिस तरह से एक विशेष मानसिकता के अधिकारियों की तैनाती की गई और गुंडों के माध्यम से पत्थरबाजी कराकर पुलिस को गोली चलाने का बहाना दिया गया, वह इस साजिश की गहराई को दर्शाता है। ​20,000 लोगों की भीड़ के बीच जैसे ही जगदेव बाबू शांति की अपील करने बाहर आए, पुलिस की गोली उनके गर्दन को बेध गई। मानवता शर्मसार तब हुई जब मरणासन्न स्थिति में पानी मांग रहे इस योद्धा को एक दलित माँ ने पानी पिलाना चाहा, लेकिन पुलिसिया बूटों ने उसे ठुकरा द...

केंद्रीय बजट 2026-27: मुख्य बिंदु !

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  ​ 1. रुपया कहाँ से आता है? (Government Income) ​सरकार की कुल कमाई के मुख्य स्रोत (प्रति 1 रुपया): ​उधार और अन्य देनदारियां: 24 पैसे ​आयकर (Income Tax): 21 पैसे ​निगम कर (Corporate Tax): 18 पैसे ​GST और अन्य कर: 15 पैसे ​केंद्रीय उत्पाद शुल्क: 8 पैसे ​सीमा शुल्क (Customs): 5 पैसे ​गैर-कर राजस्व: 7 पैसे ​गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां: 2 पैसे ​ 2. रुपया कहाँ जाता है? (Government Expenditure) ​सरकार द्वारा खर्च की जाने वाली राशि (प्रति 1 रुपया): ​ब्याज भुगतान: 20 पैसे ​करों में राज्यों का हिस्सा: 20 पैसे ​केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं: 16 पैसे ​रक्षा (Defense): 8 पैसे ​सब्सिडी (खाद्य/उर्वरक): 6 पैसे ​वित्त आयोग व अन्य अंतरण: 9 पैसे ​पेंशन: 4 पैसे ​अन्य खर्च: 17 पैसे ​ 3. क्या सस्ता हुआ? (Rates Decreased) ​कैंसर की दवाइयां: सीमा शुल्क (Customs Duty) में भारी कटौती। ​मोबाइल फ़ोन: मोबाइल पार्ट्स और चार्जर पर इंपोर्ट ड्यूटी कम हुई। ​सोलर पैनल: सोलर ग्लास बनाने वाले कच्चे माल पर शुल्क हटा। ​विदेशी पैसा भेजना (LRS): विदेश पैसे भेजने पर TCS 5% से घटकर 2% हुआ। ​मखाना और बीज: कृषि निर्यात बढ़ाने के लि...

मंगल ग्रह की वधू और गोविंद बाबू का 'पुत्र-पुराण' ! ( कहानी )- प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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  जब ईगो के आगे 'वर-वधू स्वयंवर' भी हो जाए भंग ! ​गोविंद बाबू हमारे कॉलेज के वे नियमित अतिथि हैं, जो अतिथि कम और 'पुत्र-प्रशस्ति' के गायक अधिक जान पड़ते हैं। उनके पास फुर्सत का अपार भंडार है और उस भंडार का एकमात्र उपयोग है—अपने सुपुत्र के लिए ऐसी वधू की खोज, जो शायद विधाता ने अभी तक बनाई ही नहीं। ​ कुलीनता का बोझ और ईगो का आकाश ​गोविंद बाबू के परिचय का दायरा उनके पद और प्रतिष्ठा से शुरू होकर उनके अहंकार पर जाकर समाप्त होता है। वे खुद बीडीओ के दामाद हैं, रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं, और नवादा-कौआकोल के जमींदार भी। पटना में मकानों की कतार है और संतान के नाम पर केवल एक 'पुत्र-रत्न'। ​उनकी बातों में बेटा एम्स (AIIMS) का 'पे-लेवल 11' वाला अधिकारी है, लेकिन वास्तविकता की परतों में झांकें तो मामला आउटसोर्सिंग और निजी क्षेत्र की धुंधली गलियों में खो जाता है। सरकारी नौकरी का दावा तो बस उनके ईगो को जिंदा रखने वाली एक ऑक्सीजन है। ​ भूगोल की बंदिशें और 'चांद-सितारों' की चाहत ​गोविंद बाबू का अहंकार भौगोलिक सीमाओं को भी नहीं बख्शता। उनके पास बिहार के उन जिलों की ...