रचनात्मक अर्थव्यवस्था: भारत की नई आर्थिक नियति !
इसे निम्नलिखित बिंदुओं से समझें. 1 कल्पना से व्यापार तक का सफर टिकाऊ उद्यम केवल वित्तीय आंकड़ों से नहीं, बल्कि कल्पना और एक निश्चित दृष्टिकोण से शुरू होते हैं। 'ऑरेंज इकोनॉमी' विचारों को बौद्धिक संपदा में बदलती है, जो अंततः आजीविका का साधन बनती है। यह एक पुनर्योजी क्षेत्र है जहाँ एक कहानी या डिजिटल निर्माण बिना किसी प्राकृतिक संसाधन के क्षरण के, वैश्विक स्तर पर फैल सकता है। 2. आर्थिक प्रभाव और सांख्यिकी रचनात्मकता अब केवल एक 'सॉफ्ट स्किल' नहीं, बल्कि एक आर्थिक बुनियादी ढांचा है: वैश्विक प्रभाव: यह क्षेत्र विश्व स्तर पर सालाना $2 ट्रिलियन से अधिक का राजस्व उत्पन्न करता है। भारतीय परिदृश्य: भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग $30 बिलियन को पार कर चुका है और 2029 तक $47 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। भविष्य की संभावना: 2030 तक भारत की व्यापक रचनात्मक अर्थव्यवस्था $100 बिलियन तक पहुँच सकती है, जिससे 50 लाख नौकरियों के अवसर पैदा होंगे। 3. दुर्गा पूजा: एक जीवंत उदाहरण कोलकाता की दुर्गा पूजा (यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त) का उदाहरण हैं कि कैसे एक सांस्कृत...