महात्मा गांधी के विचार: एक समकालीन और तथ्यात्मक दृष्टि!
महात्मा गांधी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा थे, जिनके विचार आज भी मानवता, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता आंदोलन के समय थे। उनके विचार सत्य, अहिंसा और सर्वोदय की मजबूत नींव पर टिके थे। यहाँ उनके प्रमुख वैचारिक आयामों का तथ्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत है: 1. आर्थिक विचार: स्वावलंबन और ट्रस्टीशिप गांधीजी की आर्थिक दृष्टि विकेंद्रीकरण और कुटीर उद्योगों पर आधारित थी। ग्राम स्वराज्य और खादी: उनका मानना था कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। मशीनीकरण के अंधानुकरण के बजाय उन्होंने खादी और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया ताकि हर हाथ को काम मिल सके। ट्रस्टीशिप (न्यासधारिता का सिद्धांत): गांधीजी पूंजीवाद के विरोधी थे, लेकिन वे पूंजीपतियों के नाश के पक्ष में भी नहीं थे। उनके अनुसार, मिल मालिकों और उद्योगपतियों को अपनी संपत्ति का व्यक्तिगत स्वामी न मानकर, समाज की भलाई के लिए उसका 'ट्रस्टी' (संरक्षक) समझना चाहिए। 2. सामाजिक विचार: समता और छुआछूत का विरोध सामाजिक सुधार गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों का केंद्र बिंदु थे। अस्पृश्यता क...