राम मंदिर के बाद अब 'शिक्षा के मंदिर' में भी डाका? नीति नहीं, नीयत देखिए!
महिला कॉलेज, खगौल की प्रभारी प्राचार्या और भाजपा की पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी पर आरोप। समाज में जब आस्था के केंद्रों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, तब अक्सर नैतिकता के ऊंचे मापदंडों का दावा किया जाता है। लेकिन जब वही रक्षक भक्षक बन जाएं और 'शिक्षा के मंदिर' को अपनी जागीर समझकर लूट का अड्डा बना लें, तो व्यवस्था और राजनीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना द्वारा महिला कॉलेज, खगोल की प्रभारी प्राचार्या और भाजपा की पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी को जारी किया गया 'कारण बताओ नोटिस' इसी कड़वी सच्चाई को बयां करता है। यह केवल एक प्रशासनिक नोटिस नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की आत्मा पर हुआ वो प्रहार है जो चीख-चीख कर कह रहा है—"लूट और भ्रष्टाचार की बुनियाद पर कोई भी शिक्षण संस्थान कभी फल-फूल नहीं सकता।" भ्रष्टाचार का 'अकादमिक मॉडल': आरोपों का कच्चा चिट्ठा जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाएं, तो नियम-कानून कागजों की शोभा बनकर रह जाते हैं। इस मामले में जो १० संगीन आरोप सामने आए हैं, वे किसी भी संवेदनशील नागरि...