Posts

इच्छापत्र से रोडमैप तक: क्या ‘सप्तधारा’ दे पाएगी आर्थिक विकास को नई धार?

Image
  सप्तधारा का विज़न और वास्तविकता।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक भारत को 'विकसित भारत' बनाने के लिए 'सप्तधारा' (विनिर्माण, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, रक्षा, हरित/नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर) का संकल्प प्रस्तुत किया है। हालाँकि, केवल नई शब्दावली गढ़ने या पुरानी योजनाओं (मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, गति शक्ति) को एक नए ढांचे में समेटने भर से त्वरित विकास दर हासिल नहीं की जा सकती। जब तक इस संकल्प के साथ एक कठोर कार्यान्वयन रणनीति नहीं जोड़ी जाती, यह नीति से अधिक एक 'इच्छापत्र' (Wishlist) ही प्रतीत होगी। 10.8% जीडीपी वृद्धि का कठिन लक्ष्य पिछले 25 वर्षों में भारत की औसतन जीडीपी वृद्धि दर 6.5% रही है। विकसित देश का दर्जा पाने के लिए भारत को 2047 तक प्रति व्यक्ति आय में लगभग 9.8% की चक्रवृद्धि वृद्धि हासिल करनी होगी, जिसके लिए वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर को लगातार ~10.8% बनाए रखना होगा। इतिहास में इतने लंबे समय तक लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत ऐसी तीव्र वृद्धि दर का कोई पूर्व उदाहरण नहीं मिलता। भारत में आर्थिक सुधारों को लागू करना...

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS): सुधार की सख्त जरूरत।

Image
    भारतीय शेयर बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की नई व्यवस्था अत्यधिक उतार-चढ़ाव (volatility) की वजह बन रही है, जिसने आम निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। हाल ही में सेंसेक्स का कुछ ही मिनटों में 2,000 अंक गिरना और बैंकएक्स ऑप्शन में 14,700% का उछाल आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि यह व्यवस्था फिलहाल बड़े ट्रेडर्स और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स (HFT) के पक्ष में ज्यादा झुकी हुई दिखती है। CAS की मुख्य समस्याएं और चुनौतियां असंतुलित मुकाबला: सह-स्थान (co-location) सुविधाओं से लैस वैश्विक संस्थागत संस्थाएं और एक सामान्य खुदरा निवेशक एक ही बाजार में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जिससे आम निवेशकों का नुकसान बढ़ रहा है। आवश्यक तंत्र की कमी: भारत में एक सक्रिय प्रतिभूति उधार और उधार (Securities Lending and Borrowing - SLB) प्रणाली का अभाव है, जो CAS की सफलता के लिए अनिवार्य शर्त मानी जाती है। नियामक कमियां: जेपीमॉर्गन से जुड़ी संस्था सहित दो संस्थाओं पर सेबी (Sebi) द्वारा CAS में हेरफेर के लिए जुर्माना लगाना यह साबित करता है कि इस प्रणाली की खामियों का फायदा उठाया जा रहा है। आगामी जोख...

लक्जरी मुकदमेबाजी का बोझ: जब अमीरों की रंजिश की कीमत चुकाते हैं गरीब!

Image
  सर्वोच्च न्यायालय की 'लक्जरी लिटिगेशन' (विलासितापूर्ण मुकदमेबाजी) के खिलाफ हालिया चेतावनी एक स्वागत योग्य कदम है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने दो प्रभावशाली पक्षों के बीच 11 साल पुराने एक विवाद की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालतें व्यक्तिगत रंजिशें भुनाने या बिना किसी वास्तविक कारण के मुकदमे चलाने का जरिया नहीं बन सकतीं। शीर्ष अदालत ने इस विवाद को खारिज करते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। भारत की अदालतों पर मुकदमों का भारी बोझ है—वर्तमान में 5.6 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें से 11 लाख से अधिक मामले 20 साल से भी अधिक समय से लटके हुए हैं। मुकदमों की इस लंबी कतार के मुख्य कारणों में न्यायाधीशों के रिक्त पद, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, बार-बार तारीखें (स्थगन), जांच में देरी, और कमजोर केस प्रबंधन शामिल हैं। अदालती देरी का सबसे भयानक प्रभाव असमानता पर पड़ता है: अमीर और प्रभावशाली याचिकाकर्ता: इनके लिए लंबा खींचता मुकदमा केवल वकीलों की एक और फीस या सुनवाई भर होता है। गरीब और कम पढ़े-लिखे लोग: इनके लिए अदालत...

स्वास्थ्य रिपोर्ट एवं मार्गदर्शिका का मुख्य सारांश:

Image
   1. मुख्य स्वास्थ्य मानक (Health Parameters & Normal Ranges) Medical Standards क्र.सं. मानक (Parameter) सामान्य सीमा (Normal Range) 1 ब्लड प्रेशर (BP) 120/80 mmHg 2 पल्स रेट (हृदय गति) 60 – 100 बीट/मिनट 3 शरीर का तापमान 36.5°C – 37.2°C (98.6°F) 4 श्वसन दर (Respiratory Rate) 12 – 20 प्रति मिनट 5 कोलेस्ट्रॉल (Total Cholesterol) 130 – 200 mg/dL 6 पोटैशियम 3.5 – 5.0 mEq/L 7 ब्लड शुगर (खाली पेट / Fasting) 70 – 100 mg/dL 8 ब्लड शुगर (खाने के 2 घंटे बाद / PP) < 140 mg/dL 9 क्रिएटिनिन (Creatinine) पुरुष: 0.7 – 1.3 mg/dL | महिला: 0.6 – 1.1 mg/dL 10 हीमोग्लोबिन (Hb) पुरुष: 13.5 – 17.5 g/dL | महिला: 12.0 – 15.5 g/dL 11 यूरिया (BUN) 7 – 20 mg/dL 12 आयरन (Serum Iron) 50 – 170 µg/dL (दैनिक आवश्यकता: 8–18 mg/दिन) 13 प्लेटलेट्स 1.5 – 4.5 लाख / µL 14 श्वेत रक्त कोशिकाएं (WBCs) 4,000 – 11,000 / µL 15 सोडियम 135 – 145 mEq/L 16 यूरिक एसिड पुरुष: 3.4 – 7.0 mg/dL | महिला: 2.4 – 6.0 mg/dL 2. ऊंचाई के हिसाब से आदर्श वजन (Height to Weight Chart - BMI Based) एशियाई मानकों (BMI 18.5 – 24.9) के ...

फेल होने की 'महान कला' और 'कौशल' की नई परिभाषा।

Image
   बिहार के शिक्षा मंत्री के इस अद्भुत और ऐतिहासिक 'क्रांति' को देखकर तो यही लगता है कि देश में अब कोई अनपढ़ या असफल रहेगा ही नहीं! शिक्षा मंत्री जी के इस क्रांतिकारी निर्णय ने एक ही झटके में पूरी शिक्षा प्रणाली और बेरोजगारी की समस्या का हल निकाल दिया है। अब रिपोर्ट कार्ड पर लाल स्याही से 'फेल' लिखकर बच्चे का दिल दुखाने का जमाना गया, अब तो गर्व से कहा जाएगा—"हमारा बच्चा फेल नहीं हुआ है, वो तो कौशल सीखने के लिए पात्र घोषित हुआ है!" फेल होना: एक अत्यंत दुर्लभ और कठिन 'कौशल' अगर 'फेल' होने को कौशल के नजरिए से देखें, तो यह हर किसी के बस की बात नहीं है: किताबों से दूरी बनाने का हुनर: साल भर बिना किसी तनाव के रहना और किताबों को बिना छुए परीक्षा भवन तक पहुंच जाना अपने आप में एक 'स्ट्रेस मैनेजमेंट' का अद्भुत कौशल है। उत्तर पुस्तिका में नए विचार पेश करना: प्रश्नों का उत्तर न जानते हुए भी कॉपी के पन्ने भरकर आना, कोई मामूली बात नहीं है। इसे साहित्य की भाषा में 'काल्पनिक रचनात्मकता' कहा जाता है। बिना पढ़े पास होने की उम्मीद रखना: यह अति-आत्...

लूटशाही व्यवस्था पर निगरानी का करारा प्रहार: जब ‘जनता के सेवकों’ ने वाशिंग मशीन और नोटों में बेची ईमानदारी!

Image
  अधिकारियों के साथ-साथ उनके घरेलू नौकर और दलाल तक करोड़पति बन रहे हैं। बिहार में भ्रष्टाचार का दीमक अब इस कदर जड़ें जमा चुका है कि सरकारी पद जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि निजी तिजोरियाँ भरने और ऐशो-आराम जुटाने का जरिया बन गए हैं। आम आदमी अपने ही हक, जमीन और इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, जबकि अफसरशाही पूरी निर्लज्जता के साथ जनता की गाढ़ी कमाई को 'बाप की बपौती' समझकर लूटने में जुटी है। हाल ही में समस्तीपुर के रोसड़ा से सामने आया मामला इस सड़न का ज्वलंत उदाहरण है। भूमि सुधार उप-समाहर्ता (DCLR) कंचन कुमारी झा और उनके घरेलू नौकर (दलाल) सुमित कुमार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने ₹2 लाख नकद और ₹37,000 की नई वॉशिंग मशीन की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सरकारी आवास से मिला ₹13.82 लाख का अतिरिक्त कैश यह बताने के लिए काफी है कि कैसे आम जनता का खून-पसीना पानी की तरह बहाया जा रहा है।   व्यवस्था पर कुछ चुभते सवाल: नीचे से ऊपर तक बना सिंडिकेट: राजस्व और भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार किस सीमा तक फैला है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अधिकार...

प्रकृति का तांडव: जब बिखर गया इंसानी घमंड!

Image
   जान बचाने के लिए सांस लेने तक की मोहलत नहीं थी। सूर्य की पहली किरण के साथ वह शहर रोज़ की तरह जाग रहा था। गगनचुम्बी इमारतें अपनी शान-शौकत का ढिंढोरा पीट रही थीं, और सड़कों पर दौड़ती गाड़ियां इंसान की तरक्की की गवाही दे रही थीं। रमेश भी अपने नवनिर्मित तीन मंजिला संगमरमर के महल की छत पर खड़ा होकर अपनी संपत्ति को निहार रहा था। जीवन भर उसने इस धन-दौलत, नाम और रुतबे को कमाने में क्या-कुछ नहीं किया—छल, कपट, दिन-रात का चैन और रिश्तों की बलि। उसके लिए पैसा ही सब कुछ था। लेकिन कुदरत खामोशी से अपना हिसाब लिख रही थी। इंसानों ने जिस बेदर्दी से जंगलों को काटा था, नदियों का गला घोंटा था और हवाओं में ज़हर घोला था, उसकी आहुति मांगने का वक्त आ चुका था। अचानक, धरती के सीने से एक गहरा, भयानक कंपन उठा। गड़गड़ाहट इतनी तेज़ थी कि लगा जैसे आसमान फट पड़ा हो। कुछ ही सेकंडों में वह आलीशान महल, जिसे बनाने में रमेश ने अपनी पूरी जिंदगी खपा दी थी, ताश के पत्तों की तरह ढहने लगा। कंक्रीट के बड़े-बड़े टुकड़े गिरने लगे और चीख-पुकार से पूरा आसमान थर्रा उठा। सड़कों का नज़ारा हृदयविदारक था। लोग बदहवास होकर इधर-उधर भाग रहे थे...