दृष्टिकोण का विकास: एक सतत प्रक्रिया !
दृष्टिकोण यानी सोचने-समझने का नजरिया, किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यह एक कड़वा सच है कि दृष्टिकोण जन्मजात नहीं होता। हम अपने साथ इसे लेकर पैदा नहीं होते, बल्कि यह समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होता है। दृष्टिकोण को निखारने के साधन व्यक्ति अपने नजरिए को केवल भाग्य पर नहीं छोड़ सकता। इसे परिपक्व बनाने के लिए कुछ विशेष माध्यमों की आवश्यकता होती है: आत्मचिंतन: स्वयं के विचारों का विश्लेषण करना। अध्ययन: निरंतर पढ़ना और ज्ञान अर्जित करना। संवाद: दूसरों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करना। अनुभव: जीवन की परिस्थितियों से सीखना। व्यापकता का आधार जब हम केवल अपनी दुनिया तक सीमित न रहकर दूसरों के अनुभवों से सीखने का प्रयास करते हैं, तब हमारा दृष्टिकोण व्यापक और गहरा होता है। अंततः, एक सही और परिपक्व दृष्टिकोण ही हमें समाज में एक बेहतर इंसान के रूप में स्थापित करता है।