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राम मंदिर के बाद अब 'शिक्षा के मंदिर' में भी डाका? नीति नहीं, नीयत देखिए!

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   महिला कॉलेज,   खगौल की प्रभारी प्राचार्या और भाजपा की पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी पर आरोप।  समाज में जब आस्था के केंद्रों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, तब अक्सर नैतिकता के ऊंचे मापदंडों का दावा किया जाता है। लेकिन जब वही रक्षक भक्षक बन जाएं और 'शिक्षा के मंदिर' को अपनी जागीर समझकर लूट का अड्डा बना लें, तो व्यवस्था और राजनीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना द्वारा महिला कॉलेज, खगोल की प्रभारी प्राचार्या और भाजपा की पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी को जारी किया गया 'कारण बताओ नोटिस' इसी कड़वी सच्चाई को बयां करता है। यह केवल एक प्रशासनिक नोटिस नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की आत्मा पर हुआ वो प्रहार है जो चीख-चीख कर कह रहा है—"लूट और भ्रष्टाचार की बुनियाद पर कोई भी शिक्षण संस्थान कभी फल-फूल नहीं सकता।" भ्रष्टाचार का 'अकादमिक मॉडल': आरोपों का कच्चा चिट्ठा जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाएं, तो नियम-कानून कागजों की शोभा बनकर रह जाते हैं। इस मामले में जो १० संगीन आरोप सामने आए हैं, वे किसी भी संवेदनशील नागरि...

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: CEO पद का सृजन!

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    श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने गठन (2020) के बाद से अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक फेरबदल से गुजर रहा है। ट्रस्ट ने अपने दो सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों—महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा—का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया है।  हाल ही में दान और वित्तीय लेनदेन को लेकर उपजे विवादों (जैसे चोरी और जमीन खरीद के आरोप) के बाद पारदर्शिता लाने और 'पेशेवर वित्तीय प्रबंधन' स्थापित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आरएसएस  ने भी प्रशासनिक प्रणालियों को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया था। नई प्रशासनिक व्यवस्था: पारंपरिक व्यवस्था में अब तक ट्रस्टी और पदाधिकारी ही सीधे तौर पर दैनिक कार्यों का संचालन करते थे। अब CEO की नियुक्ति से दैनिक प्रशासन पेशेवर तरीके से चलेगा, जिससे ट्रस्टी मुख्य रूप से नीतिगत निर्णयों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। यह मॉडल तिरुपति और माता वैष्णो देवी जैसे अन्य बड़े मंदिरों के समान है। पारदर्शिता का अभाव (अन्य मंदिरों से तुलना): तिरुपति, जगन्नाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख मंदिर र...

पक्षी की बातें: जेब्रा फिंच पर शोध के लिए वैज्ञानिक को मिला ₹95 लाख का पुरस्कार !

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  यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले की वैज्ञानिक डॉ. जूली एली (Dr. Julie Elie) को जेब्रा फिंच पक्षियों के आपसी संवाद पर शोध के लिए प्रतिष्ठित 'कॉलर डोलिटल चैलेंज' द्वारा $100,000 (लगभग ₹95 लाख) का पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने जेब्रा फिंच द्वारा की जाने वाली 11 विशिष्ट कॉल्स (आवाजों) और उनके अर्थों की पहचान की है। पहले वैज्ञानिक केवल आवाजों के ध्वनिक ढांचे  का अध्ययन करते थे। डॉ. एली के शोध में यह नई बात सामने आई कि ये पक्षी आवाजों को केवल उनकी ध्वनि के आधार पर नहीं, बल्कि उनके 'अर्थ' और व्यावहारिक उपयोग के आधार पर वर्गीकृत करते हैं। पशु संज्ञान शोधकर्ता डॉ. एंटोनियो जोस ओसुना-मस्कारो के अनुसार, जब पक्षी आवाज पहचानने में गलती करते हैं, तो वे उन आवाजों के बीच अधिक भ्रमित होते हैं जिनका अर्थ एक जैसा होता है, न कि उन आवाजों में जिनकी केवल ध्वनि आपस में मिलती-जुलती हो। इससे यह साबित होता है कि उनका दिमाग आवाजों के पीछे के व्यावहारिक अर्थ को समझता है। आज के समय में एआई (AI) लाखों आवाजों के डेटा का विश्लेषण करके बारीक पैटर्न ढूंढ सकता है। लेकिन इसके साथ एक बड़ा जोखिम '...

पटना में 'सोनारू' ऑटो गैंग का भयंकर आतंक! अब कॉलेज की प्रध्यापिका को बनाया निशाना!

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  सुशासन के दावों की खुली पोल: पुलिस अधिकारी की बेटी ने सूझबूझ से बचाई जान, 6 महीने पहले भी इसी कॉलेज के कर्मी से हुई थी लूट की असफल प्रयास।   पटना। बिहार की राजधानी पटना में कानून-व्यवस्था का जनाजा निकल चुका है। सड़कों पर खुलेआम घूम रहे अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब शहर की पढ़ी-लिखी और संभ्रांत महिलाएं भी सुरक्षित नहीं हैं। पटना में 'ऑटो लिफ्टर और सोने की बिस्किट' दिखाने वाला एक शातिर गैंग बेखौफ होकर घूम रहा है, जिसे न तो खाकी का खौफ है और न ही कानून का डर। ताजा मामला एक कॉलेज की इतिहास विभाग की प्रध्यापिका (प्रोफेसर) से जुड़ा है, जो अपराधियों के एक सुनियोजित षड्यंत्र का शिकार होते-होते बाल-बाल बचीं। साजिश का जाल: 70 फीट से अनीसाबाद के बीच बुना गया जाल घटना के अनुसार, प्रध्यापिका सुबह करीब 10 बजे पटना बाईपास 70 फीट स्थित अपने घर से राम लखन सिंह यादव कॉलेज (अनीसाबाद) जाने के लिए निकली थीं। तभी एक ऑटो उनके पास आकर रुका और चालक ने उन्हें गंतव्य तक छोड़ने की बात कही। मैडम जैसे ही ऑटो में बैठीं, पहले से घात लगाए बैठे अपराधियों का खेल शुरू हो गया। तभी एक अन्य व्यक्...

सिर्फ असेंबल न करें, नवाचार (Innovation) करें!

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    भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है, जिसका श्रेय मुख्य रूप से PLI (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) जैसी सरकारी नीतियों को जाता है। वर्तमान में, भारतीय कंपनियाँ मुख्य रूप से केवल 'असेंबली' (जुड़ाव) तक सीमित हैं। उच्च-मूल्य वाली गतिविधियाँ जैसे डिजाइन, तकनीक और बौद्धिक संपदा (IP) अभी भी अमेरिका, यूरोप और चीन की कंपनियों के पास हैं। अतीत में भारतीय ब्रांड (जैसे लावा, माइक्रोमैक्स) ने बाजार में अच्छी हिस्सेदारी बनाई थी, लेकिन वे R&D (अनुसंधान और विकास) में निवेश न करने के कारण लंबे समय तक टिक नहीं पाए।  वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए, भारतीय कंपनियों को केवल दूसरों की तकनीक का उपयोग करने के बजाय अपनी खुद की तकनीक विकसित करनी होगी और पेटेंट पोर्टफोलियो का विस्तार करना होगा।  भारत को एक 'असेंबली हब' से बदलकर एक 'नवाचार-संचालित तकनीकी पावरहाउस' बनने की आवश्यकता है। इसके लिए स्थानीय नवाचारों को बनाने और उनका मुद्रीकरण करना अनिवार्य है, जो 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्यों के अनुरूप है।

राष्ट्रीय किसान मोर्चा का एक दिवसीय चिंतन शिविर सम्पन्न, बिहार के किसानों की समस्याओं पर हुआ गंभीर मंथन !

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  पटना (खुसरूपुर): राष्ट्रीय किसान मोर्चा बिहार इकाई संगठन के तत्वावधान में खुसरूपुर प्रखंड के चौड़ा ग्राम में एक दिवसीय परिचय, सम्मान सह चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में संगठन के तमाम शीर्ष नेताओं सहित सैकड़ों की संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए। सभा की अध्यक्षता चौड़ा ग्राम के विश्वनाथ यादव ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम नंदन कुमार यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में आए हुए सभी अतिथियों का अंग वस्त्र (शॉल) और पुष्पहार देकर भव्य स्वागत किया गया। कार्यक्रम के समापन पर प्रदेश महासचिव रवींद्र कुमार सिंह ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। दिग्गजों का जुटाव इस अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्याम नंदन कुमार यादव, राष्ट्रीय महासचिव विपिन चौधरी, प्रदेश महासचिव (मधुबनी) श्री विनोद कुमार सिंह यादव, प्रदेश महासचिव व फतुहा प्रखंड के उप प्रमुख रवींद्र कुमार सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष उत्तम सिंह बाल्यान, रुपेश सिंह कुंतल, खुसरूपुर के प्रखंड अध्यक्ष सुरेश यादव, शंभूशरण सिंह यादव, सूरज कुमार यादव, पुनीत सिंह, जगवीर सिंह शा...

मृत्युभोज: आस्था के नाम पर सामाजिक अभिशाप और हमारी संवेदनहीनता !

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  शोक के आंगन में स्वाद की तलाश क्यों? किसी प्रियजन के चले जाने का दुख क्या होता है, यह केवल वही परिवार समझ सकता है जिसने अपना कोई खोया है। मृत्यु के बाद घर में पसरा सन्नाटा, अपनों के आंसू और वो कभी न भरने वाला खालीपन... ऐसे गमगीन माहौल में जब पूरा समाज उस पीड़ित परिवार के घर 'मृत्युभोज' (तेरहवीं) के नाम पर पकवान खाने जुटता है, तो मानवता सचमुच शर्मसार हो जाती है। जिस चौखट पर बैठकर कभी ढांढस बंधाना चाहिए था, वहां बैठकर भोजन की फरमाइश करना हमारी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। शास्त्रों का सच्चा संदेश: पुण्य नहीं, यह पाप है हम अक्सर परंपराओं की दुहाई देकर अपनी गलतियों को छुपाने की कोशिश करते हैं, लेकिन हमारे ग्रंथ और इतिहास कुछ और ही सीख देते हैं। महाभारत का अनुशासन पर्व: महाभारत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विपदा और संकट के समय पीड़ित परिवार की तन, मन और धन से सहायता करनी चाहिए, न कि उनके घर जाकर भोजन ग्रहण करना चाहिए। श्रीकृष्ण का उपदेश: भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार, भोजन हमेशा प्रसन्न मन की स्थिति में ही ग्रहण करना चाहिए। शोक संतप्त मन से बनाया और खिलाया गया भोजन कभी तृप्ति नहीं ...