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अंतर्मन की शांति: संघर्ष से आत्मबोध तक का सफर!

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  अक्सर हम शांति की तलाश में पहाड़ों, जंगलों या एकांत की ओर भागते हैं। हमें लगता है कि शोर से दूर कहीं हरियाली में बैठने से मन शांत हो जाएगा। लेकिन सत्य यह है कि जीवन की वास्तविक शांति बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर से अंकुरित होती है। शांति के तीन स्तंभ: संतुलन, आशा और करुणा बाहरी परिस्थितियाँ कभी हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन हमारा आंतरिक स्वभाव हमारे हाथ में है। यदि हम अपने भीतर इन तीन गुणों को सींचना शुरू कर दें, तो दुनिया का कोई भी शोर हमें विचलित नहीं कर सकता: संतुलन (Balance): सुख-दुख और लाभ-हानि में खुद को स्थिर रखना। आशा (Hope): घने अंधेरे में भी यह विश्वास रखना कि सवेरा निश्चित है। करुणा (Compassion): स्वयं और दूसरों के प्रति दया का भाव रखना, जो हमारे अहंकार को पिघला देता है। दृष्टिकोण का बदलाव जब हम भीतर से मजबूत होते हैं, तो जीवन के प्रति हमारा नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। तब मुश्किलें हमें डराने के बजाय निखारने का काम करती हैं। "जब भीतर का समुद्र शांत हो, तो बाहर के तूफान नाव नहीं डुबो सकते।" संघर्ष नहीं, एक यात्रा इस आंतरिक परिवर्तन के बाद, जीवन केवल चुनौतिय...

भारतीय रुपया: वैश्विक उथल-पुथल के बीच संकेत या अस्थायी विचलन? -प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र विभाग.

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  वर्तमान में पश्चिम एशिया के युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 7% से अधिक की विकास दर पर टिकी हुई है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में रुपये के मूल्य में आई 10.6% की गिरावट ने विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। यह स्थिति 'टेपर टेंट्रम' (2013-14) की याद दिलाती है, लेकिन क्या वर्तमान गिरावट भारत की आर्थिक कमजोरी का संकेत है या केवल एक बाजार विकृति? 1. गिरावट के प्रमुख कारण और चिंताएं पोर्टफोलियो बहिर्वाह: वित्त वर्ष 2026 में 16.4 बिलियन डॉलर की निकासी हुई है, जो पिछले 28 वर्षों में सर्वाधिक है। भुगतान संतुलन (BoP) घाटा: भारत को लगातार तीन वर्षों (वित्त वर्ष 2025 से) BoP घाटे का सामना करना पड़ सकता है, जो 1991 के बाद पहली बार पूंजी और चालू खाता दोनों में घाटे की संभावना को दर्शाता है। व्यापार घाटा: सेवाओं के निर्यात में वृद्धि के बावजूद, आयात बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ा है। 2. अर्थव्यवस्था के मजबूत पक्ष भारत का चालू खाता घाटा (CAD) वित्त वर्ष 2027 में भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1.5% से नीचे रहने का अनुमान है, जो इसे सुरक्षित दायरे में रखता है। भारतीय रिजर्व बैंक (...

गोरगवाँ मेला: स्मृतियों के झरोखे से टूटती परंपराओं की गूँज! - प्रो. प्रसिद्ध कुमार

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    उँगली थामे पीढ़ियों का सफर!  समय का चक्र भी कितना अद्भुत है! कभी मैं अपने पिताजी की उँगली पकड़कर ग्रामीण मेलों की रौनक देखने जाता था, और आज मैं अपने ज्येष्ठ पुत्र प्रेम रंजन के साथ बाइक पर सवार होकर उसी मेले की ओर बढ़ रहा था। दानापुर स्टेशन और खगौल से करीब 3 किमी पश्चिम, जमालुद्दीन चक पंचायत के गोरगवां गाँव का यह मेला आज भी अपनी जड़ों को थामे खड़ा है, लेकिन इसकी रंगत अब समय की धूल में कुछ धुंधली पड़ने लगी है। चैता की तान और वह रसभरी संस्कृति मेले की असली पहचान यहाँ के 'चैता' गीतों से थी। वह गूँज आज भी कानों में मिश्री घोल देती है: "अरि राम जी के भइले जनमवा... चला हो, करि आई दरशनवा..." पुराने दौर में यहाँ 'चैता के गोला' सजते थे। 6-7 मंडलियाँ, शामियाने के नीचे हारमोनियम, नाल, ढोलक और दर्जनों झालों की थाप पर समां बांध देती थीं। बीच में 'लौंडा नाच' और कलाकारों (वचनवा, जदुआ, सुदामा) की कलाकारी देखने लोग आम के पेड़ों पर चढ़ जाते थे। अफसोस कि पुराने व्यवस्थापकों के जाने के बाद वह पारंपरिक 'चैता मंडली' अब बीते दिनों की बात हो गई है। बाबूचक, महम्मदप...

खगौल में राम नवमी के अवसर पर निकाली गई भव्य झाकियाँ

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  राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने मुख्य अतिथि और  मंत्री रामकृपाल यादव का शॉल ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया।   खगौल  (पटना): मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, रामनवमी के पावन अवसर पर आज  खगौल  की    सड़कें भक्ति के रंग में सराबोर नजर आईं। सिर पर केसरिया पगड़ी और हाथों में ध्वज लिए हजारों श्रद्धालुओं के 'जय श्री राम' के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। इस वर्ष खगोल में रामनवमी का जुलूस अपनी भव्यता और आपसी सौहार्द के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। दो समूहों में निकली भव्य झांकी इस बार  खगौल  में   दो प्रमुख समूहों के नेतृत्व में झांकियां निकाली गईं। प्रथम समूह का नेतृत्व आशुतोष कुमार ने किया, जबकि दूसरे समूह की कमान भरत पोद्दार ने संभाली। आशुतोष कुमार के नेतृत्व में निकली झांकी मोती चौक, बड़ी खगोल और नवरतन पुर होते हुए बाबूचक रोड स्थित राम-जानकी मंदिर (देव लोक धाम) पहुंची। राम-जानकी मंदिर में हुआ भव्य अभिनंदन बाबूचक रोड पर राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने मुख्य अतिथि और  मंत...

युद्ध की मार और आम आदमी: भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट और समाधान ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र विभाग.

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    यह  पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारतीय उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का विश्लेषण है।  कैसे एक दूरस्थ युद्ध भारत में एलपीजी (LPG), ईंधन, खाद्य सामग्री और यात्रा की कीमतों को बढ़ा रहा है। सरकार ने अब तक स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं, लेकिन युद्ध लंबा खिंचने पर चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।  आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: पश्चिम एशिया विश्व के 20% पेट्रोलियम तरल पदार्थों की आपूर्ति करता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों के मार्ग बदलने के कारण आपूर्ति में देरी और लागत में वृद्धि हुई है। महंगाई का दोहरा प्रहार: ईंधन और एलपीजी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर परिवहन और खाद्य पदार्थों पर पड़ रहा है। घरेलू बजट बिगड़ने से उपभोक्ता मांग में कमी आने की संभावना है। रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने (94 के स्तर तक पहुँचने) से आयात, विशेषकर तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स, और भी महंगे हो गए हैं। क्षेत्रीय प्रभाव: पर्यटन क्षेत्र हवाई किराए बढ़ने से प्रभावित है, वहीं रेस्टोरेंट और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी कम ऑ...

आधुनिक भू-राजनीति में आर्थिक अंतर्निर्भरता का संकट!

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  पारंपरिक मान्यता रही है कि राष्ट्रों के बीच बढ़ती आर्थिक अंतर्निर्भरता युद्ध की संभावना को कम करती है। यूरोपीय संघ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ कोयले और स्टील के व्यापारिक गठबंधन ने कभी शत्रु रहे देशों को शांति के सूत्र में बांध दिया। लेकिन वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, विशेषकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने इस धारणा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ईरान का भू-राजनीतिक लाभ और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई करते समय उसकी आर्थिक शक्ति का तो सही आकलन किया गया, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति के प्रभाव को कम आंका गया। रणनीतिक मार्ग: वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा, विशेषकर 84% कच्चा तेल और 83% एलएनजी (LNG) इसी मार्ग से एशिया की ओर जाता है। प्रहार क्षमता: ईरान ने अपनी भौगोलिक निकटता और कम लागत वाले 'शाहेद-136' ड्रोन जैसी तकनीकों के माध्यम से खाड़ी देशों (GCC) के व्यापार और बुनियादी ढांचे पर दबाव बनाने की क्षमता प्रदर्शित की है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और एशिया पर प्रभाव इस संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसक...

भारत की नई एफडीआई नीति (PN3) और निवेश की द्वंद्वपूर्ण स्थिति!

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  यह  भारत सरकार द्वारा हाल ही में 'प्रेस नोट 3' (PN3) के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों का विश्लेषण है।  चीन के प्रति नरम रुख: भारत ने उन देशों (विशेषकर चीन) के लिए नियमों में ढील दी है जिनके साथ वह भूमि सीमा साझा करता है। अब इन देशों के निवेशक 'ऑटोमैटिक रूट' के माध्यम से 10% तक की गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी (Beneficial Ownership) रख सकते हैं। विनिर्माण को प्रोत्साहन: सरकार ने विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनल और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा है, ताकि घरेलू विनिर्माण को गति मिल सके। घटता शुद्ध निवेश (Net FDI): यह एक चिंताजनक रुझान की ओर इशारा करता है कि भले ही भारत में कुल निवेश आ रहा हो, लेकिन 'नेट एफडीआई' (कुल आवक और निकासी का अंतर) ऐतिहासिक रूप से कम हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशी निवेशकों द्वारा विनिवेश $51.5 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। भारतीय निवेशकों का पलायन: एक विरोधाभासी स्थिति देखी जा रही है जहाँ एक तरफ सरकार विदेशी निवेश के लिए दरवाजे ...