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मैं दिल्ली का जंतर-मंतर हूँ! - प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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  समय के शिलालेख पर लिखी जनक्रांति और सत्ता के परिवर्तन की अमर गाथा!  1. स्थापत्य से क्रांति तक का सफर मैं केवल पत्थर, चूने और ईंटों से खड़ा कोई लाल-गुलाबी ढाँचा मात्र नहीं हूँ; मैं काल के गाल पर उकेरा गया इतिहास का एक जीवंत हस्ताक्षर हूँ। १८वीं सदी की शुरुआत में (सन १७२४), महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने मुझे नक्षत्रों की गति नापने, समय की चाल को समझने और खगोलशास्त्र के रहस्यों को सुलझाने के लिए गढ़ा था। मेरे सम्राट यंत्र, जय प्रकाश यंत्र और राम यंत्र सदियों से तारों और ग्रहों से बातें करते आ रहे हैं। पर समय का चक्र बदला, और खगोलशास्त्र की गणना करने वाली मेरी दीवारें देश की राजनीति और जन-आंदोलनों की दिशा तय करने लगीं। तारों की चाल से शुरू हुआ मेरा सफर, सत्ता की चाल बदलने का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। "मैं वो वेधशाला हूँ जो सिर्फ़ आसमान के तारे नहीं गिनती, बल्कि धरातल पर तख्तो-ताज की किस्मत भी नापती है।" 2. सत्ता के गुरूर को तोड़ती मेरी ज़मीन मेरे आगोश में आज़ादी के बाद के भारत का संपूर्ण इतिहास और धड़कता हुआ वर्तमान समाहित है। जब-जब सत्ता के गलियारों में निरंकुशता ने जन्म लिया, ...

लोकतंत्र में जनशक्ति की विजय: जब छात्र आंदोलन के आगे झुकी सत्ता ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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   जन-आकांक्षाएँ, प्रशासनिक जवाबदेही और लोकतंत्र में आम आदमी की शक्ति।  लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि इसमें सत्ता का अंतिम स्रोत कोई पद, महल या व्यवस्था नहीं, बल्कि इस देश का आम नागरिक होता है। जब-जब सत्ता अपने कर्तव्यों से विमुख होती है या प्रशासनिक खामियों के कारण आम जनमानस—विशेषकर युवाओं का भविष्य—अंधकार में जाने लगता है, तब-तब यही लोकतंत्र अपनी वास्तविक ताकत दिखाता है। हाल ही में NEET-UG परीक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी लोकतांत्रिक शक्ति का एक सजीव प्रमाण है। पृष्ठभूमि: जब सड़कों पर उतरा देश का भविष्य NEET जैसी देश की सबसे बड़ी और संवेदनशील परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों ने लाखों परीक्षार्थियों और उनके परिवारों को झकझोर कर रख दिया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि वह देश के उस युवा का आक्रोश था जिसकी मेहनत पर व्यवस्था की कमियों का पानी फिर रहा था। महीनों तक धूप, बारिश और अनिश्चितता के बीच जंतर-मंतर पर डटे छात्रों और उनके समर्थकों ने ...

1/29 बिहार बटालियन NCC, पटना द्वारा राम लखन सिंह यादव कॉलेज में 'टीबी मुक्त भारत अभियान' का भव्य आयोजन!

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पटना । 25 जुलाई 26 राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद (पटना) के तत्वावधान में 1/29 बिहार बटालियन NCC, पटना द्वारा "टीबी मुक्त भारत अभियान" के अंतर्गत एक भव्य जन-जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में टीबी (क्षय रोग) के प्रति जागरूकता फैलाना, इसके समय पर इलाज और रोकथाम के उपायों से आमजन को अवगत कराना था। यह पूरा अभियान Associate NCC Officer Lt. Mukesh Kumar Yadav के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय के माननीय प्राचार्य प्रो. सुरेन्द्र प्रसाद के साथ डॉ. शंकर प्रसाद साहा, प्रो. मनीष भारती, प्रो. हरेन्द्र कुमार, प्रो. सत्येन्द्र कुमार, प्रो. रोहित भारती, प्रो. रोहित कुमार, अन्य शिक्षकगण, एनसीसी कैडेट्स एवं विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर एवं उत्साहपूर्वक भाग लिया। 🚶‍♂️ विशाल जागरूकता रैली का आयोजन कार्यक्रम के दौरान एक जन-जागरूकता रैली निकाली गई, जो राम लखन सिंह यादव कॉलेज परिसर से प्रारंभ होकर अनीसाबाद – चितकोहरा मार्ग से होते हुए पुनः महाविद्यालय परिसर में समाप्त हुई। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए एनसीसी कैडेट्स ने ...

उत्तर क्रांति: जब यूनिवर्सिटी ने खत्म किया पेपर लीक का 'डिप्रेशन'!

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  प्रश्न पत्र के साथ answer भी।  शिक्षा जगत में रोज़ नए-नए प्रयोग होते रहते हैं, लेकिन राजस्थान यूनिवर्सिटी ने जो ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है, उसकी कल्पना तो स्वयं नोबेल पुरस्कार समिति ने भी नहीं की होगी। जहाँ देश भर के युवा 'पेपर लीक' के डर से अवसाद में चले जाते हैं, वहीं जयपुर की इस महान यूनिवर्सिटी ने समस्या की जड़ पर ही प्रहार कर दिया। ना रहेगा बाँस, ना बजेगी बंसुरी—और ना होगी लीक की टेंशन, जब प्रश्न पत्र के साथ उत्तर पत्र ही 'फ्री' होम डिलीवरी में मिल जाए! मामला एमए समाजशास्त्र के द्वितीय सेमेस्टर का है। परीक्षार्थी हाथों में पेन और दिमाग में डिप्रेशन लिए 'इंडियन सोसायटी' का पेपर देने पहुँचे थे। दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं कि न जाने कौन सा कठिन सवाल सामने आ जाए। पर जैसे ही प्रश्न पत्र हाथ में आया, परीक्षार्थियों की आँखों से गंगा-जमुना बहने लगी—खुशी के आँसू! सवालों के नीचे बाकायदा थ्योरी और उत्तर छपे हुए थे, वो भी शायद किसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की असीम अनुकंपा से। सोचिए, कितना क्रांतिकारी विचार है! छात्र को उत्तर याद करने की झंझट से मुक्ति। नकल कर...

आई लव यू खगौल! जलमग्न पथ, रेलवे का चकमा और एक भीगे शहर की प्रेमकथा — प्रो. प्रसिद्ध कुमार का एक रिपोर्ताज।

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  दानापुर रेलवे की चक्करघिनी!  जून की २५वीं तारीख़ थी और घड़ी में शाम के ठीक पाँच बज रहे थे। अंबर की नीलिमा को चीरते हुए कजरारे मेघों का एक घटाटोप घिर आया था। हवाएँ पूरे शबाब पर थीं, मानो प्रकृति किसी महातांडव की भूमिका रच रही हो। मैं अपनी जीवनसंगिनी के साथ दानापुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या ४ पर खड़ा था। नियति का खेल तो देखिए, इससे पहले वाली ट्रेन केवल इसलिए छूट गई क्योंकि उसका प्रस्थान प्लेटफॉर्म संख्या १A से होना मुक़र्रर हुआ था। अभी हम उस दंश से उबर ही रहे थे कि उद्घोषक (अनाउंसर) की देववाणी गूंजी—"दानापुर-झाझा पैसेंजर प्लेटफॉर्म संख्या १A से रवाना होगी।" रेलवे की लीला अपरंपार है! प्लेटफॉर्म संख्या ४ से १A की यात्रा करना किसी ओलंपिक भारोत्तोलक या मल्ल-योद्धा के पुरुषार्थ से कम नहीं। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा का रेलवे प्रशासन के लिए वही मोल है, जो पतझड़ में सूखे पत्तों का। आधा किलोमीटर की इस मैराथन दौड़ में रेलवे का धर्म केवल घोषणा करना है, यात्री पहुँचे या पस्त हो जाए—इससे साहिबान को क्या सरोकार? इंद्रदेव की असीम अनुकंपा बरस रही थी। तन-मन जलधाराओं में सराबोर हो...

जंतर-मंतर प्रदर्शन: पुलिस बर्बरता, कानूनी सीमाएं और जवाबदेही का सवाल !

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  भगवाधारियों का असली चेहरा सामने आया! बिहार के एक मंत्री को छात्रों को आतंकी कहने में भी शर्म नहीं  आई ।  हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न परीक्षाओं में बार-बार हो रहे 'पेपर लीक' के खिलाफ छात्र, युवा और आम नागरिक (महिलाएं, किशोर व परिवार) शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान दिल्ली पुलिस और कुछ अज्ञात लोगों द्वारा किए गए अत्यधिक बल प्रयोग ने भीड़ नियंत्रण के सभी स्थापित प्रोटोकॉल और नियमों का उल्लंघन किया है। सोशल मीडिया पर आए कई वीडियो क्लिप पुलिस की बर्बरता और मनमानी को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। हिंसा और दुर्व्यवहार के मुख्य साक्ष्य सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो फुटेज के अनुसार: हिंसा और उत्पीड़न: वर्दीधारी तथा सादे कपड़ों में मौजूद कर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के बजाय उन्हें भयभीत करने और नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से हिंसा की गई। महिलाओं से अभद्रता: वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारी छात्रा को थप्पड़ मारते, पीछे से अनधिकृत व्यक्ति द्वारा छेड़खानी करते तथा कुछ कर्मियों द्वारा घेराबंदी कर अभद्र व्यवहार व छेड़छाड़ करत...

छात्र आक्रोश और दमन की नीति: देश भर में उबलता युवा असंतोष!

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   Khagoul में प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता सौरव कुमार, जनमेजय कुमार, विकाश कुमार , शुभम कुमार,  इमाम,  राइश यादव समेत दर्जनों छात्रों को पुलिस ने किया गिरफ्तार ।  1. राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि वर्तमान में पूरा देश छात्र असंतोष और उग्र प्रदर्शनों की चपेट में है। परीक्षाओं में धांधली, नीट (NEET) विवाद, परिणामों में अनियमितताएं और रोजगार के घटते अवसरों को लेकर युवाओं का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। सोशल मीडिया के डिजिटल मंचों से लेकर सड़कों तक छात्र एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। 2. बिहार में विशाल पैदल मार्च और सौरव कुमार का नेतृत्व इसी राष्ट्रव्यापी आक्रोश के तहत बिहार में छात्रों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला। राजधानी पटना और खगौल में छात्र नेता सौरव कुमार के नेतृत्व में एक विशाल पैदल मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन में हजारों की संख्या में छात्र शामिल हुए और शैक्षणिक सुधारों व पारदर्शी प्रक्रिया की मांग की। 3. शाहपुर थाना में कार्रवाई और 7 घंटे की हिरासत आंदोलन को नियंत्रित करने के नाम पर पुलिस व प्रशासन द्वारा दमनकारी रुख अपनाया गया। प्रम...