अहिंसा की शक्ति: जब संवेदना ने बदल दी परंपरा की दिशा !
अधिकारी पूरन महतो की कहानी। भगवान बुद्ध की करुणा, भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत और महात्मा गांधी का सत्याग्रह—ये केवल अतीत की बातें नहीं हैं। इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े युद्धों और संघर्षों का अंत हथियारों से नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदना और अहिंसा के मार्ग से हुआ है। भगवान बुद्ध की करुणा, भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत और महात्मा गांधी का सत्याग्रह—ये केवल अतीत की बातें नहीं हैं, बल्कि ये आज भी हमारे समाज की आधारशिला हैं। पश्चिम बंगाल के लालगढ़ से आई एक घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि आज के दौर में भी 'संवेदना' सबसे बड़ा हथियार है। एक अनूठी पहल: जब अधिकारी ने झुका दिए सिर यह घटना वर्ष 2018 की है। मिदनापुर की अतिरिक्त प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) पुरबी महतो के सामने एक बड़ी चुनौती थी। लगभग 5,000 आदिवासियों का एक समूह पारंपरिक शिकार उत्सव के लिए जंगल में प्रवेश करने वाला था। अधिकारी को भय था कि इस भीड़ के जंगल में जाने से वहां मौजूद बाघ के सुरक्षित जीवन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। कानूनी सख्ती के बजाय, उन्होंने जो किया वह मानवता का एक दुर्लभ उदाहर...