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​राम लखन सिंह यादव कॉलेज, पटना में 'प्लास्टिक मुक्त परिसर' अभियान का सफल आयोजन !

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    ​पटना, 13 जुलाई 2026: पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार, आज राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनिसाबाद, पटना के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) विभाग द्वारा "प्लास्टिक मुक्त परिसर जागरूकता कार्यक्रम" का आयोजन किया गया। ​कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिंगल-यूज प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के प्रति छात्रों और समुदाय में जागरूकता पैदा करना था। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई। कॉलेज परिसर से शुरू होकर अनिसाबाद गोलंबर तक निकाली गई इस रैली में छात्रों ने प्लास्टिक विरोधी नारे और बैनर के माध्यम से जन-जागरूकता का संदेश दिया। ​रैली के उपरांत, NSS स्वयंसेवकों ने कॉलेज परिसर में व्यापक सफाई अभियान चलाकर प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया। कार्यक्रम के समापन पर प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद और NSS समन्वयक प्रो. प्रसिद्ध कुमार की उपस्थिति में सभी विद्यार्थियों और कर्मचारियों ने प्लास्टिक का उपयोग न करने की शपथ ली। प्रो. प्रसिद्ध कुमार ने बताया कि यह अभियान छात्रों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए निरंतर जारी रहेगा। ​द्...

वेतन, पेंशन और बकाये अनुदान की मांगों को लेकर 'वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा' का जनसंपर्क अभियान शुरू !

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    Mlc के साथ वित्त रहित के नेतागण।   विधान परिषद सदस्य प्रो० नवल किशोर यादव ने दिया शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन!  पटना। शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन, पेंशन तथा बकाये अनुदान के महत्वपूर्ण सवालों को लेकर आज से 'वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा' का व्यापक  जनसंपर्क अभियान प्रारंभ हो गया है। अभियान  के पहले दिन मोर्चा के प्रतिनिधियों ने बिहार विधान परिषद के माननीय सदस्य प्रो० नवल किशोर यादव से मुलाकात की और अपनी गंभीर समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। इस मुलाकात के दौरान लंबित मांगों पर विस्तृत चर्चा हुई। माननीय सदस्य प्रो० नवल किशोर यादव ने मोर्चा को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि मुख्यमंत्री के स्तर से बकाया अनुदान का भुगतान जल्द ही कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने वेतन और पेंशन से जुड़े मामलों पर भी शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई कराने का दृढ़ आश्वासन दिया है। मोर्चा के नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि अपनी जायज मांगों को लेकर उनका यह संघर्ष और घेराव अभियान कल भी पूरी एकजुटता के साथ जारी रहेगा। आज के इस घेराव व धरना अभियान में वित्त रहित मोर्चा के अध्यक...

अहिंसा की शक्ति: जब संवेदना ने बदल दी परंपरा की दिशा !

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     अधिकारी पूरन महतो की कहानी।  भगवान बुद्ध की करुणा, भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत और महात्मा गांधी का सत्याग्रह—ये केवल अतीत की बातें नहीं हैं।  ​इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े युद्धों और संघर्षों का अंत हथियारों से नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदना और अहिंसा के मार्ग से हुआ है। भगवान बुद्ध की करुणा, भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत और महात्मा गांधी का सत्याग्रह—ये केवल अतीत की बातें नहीं हैं, बल्कि ये आज भी हमारे समाज की आधारशिला हैं। पश्चिम बंगाल के लालगढ़ से आई एक घटना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि आज के दौर में भी 'संवेदना' सबसे बड़ा हथियार है। ​एक अनूठी पहल: जब अधिकारी ने झुका दिए सिर ​यह घटना वर्ष 2018 की है। मिदनापुर की अतिरिक्त प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) पुरबी महतो के सामने एक बड़ी चुनौती थी। लगभग 5,000 आदिवासियों का एक समूह पारंपरिक शिकार उत्सव के लिए जंगल में प्रवेश करने वाला था। अधिकारी को भय था कि इस भीड़ के जंगल में जाने से वहां मौजूद बाघ के सुरक्षित जीवन पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ​कानूनी सख्ती के बजाय, उन्होंने जो किया वह मानवता का एक दुर्लभ उदाहर...

भारतीय उच्च शिक्षा में बदलाव की आवश्यकता!

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     ​ चीन ने हाल ही में अपने भविष्य के कार्यबल की जरूरतों को देखते हुए अपने एक-तिहाई स्नातक पाठ्यक्रमों को बंद कर दिया है और एआई (AI), रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। इसके विपरीत, भारत के शिक्षा संस्थान अभी भी पुरानी परंपराओं पर चल रहे हैं।  नवीनतम 'इंडिया स्किल्स रिपोर्ट' के अनुसार, भारत के केवल 56% स्नातक ही रोजगार के योग्य हैं। पारंपरिक पाठ्यक्रमों (जैसे BBA, BA, BCom) की मांग गिर रही है, जबकि एआई और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में कौशल की मांग बढ़ रही है। ​भारत को चीन के मॉडल की नकल करने के बजाय अपनी अनूठी लोकतांत्रिक संरचना और जरूरतों के अनुसार शिक्षा प्रणाली को सुधारना चाहिए। इंजीनियरिंग और मानविकी के पाठ्यक्रमों को 'सिस्टम थिंकिंग' और 'डिजिटल ह्यूमैनिटीज' जैसे आधुनिक विषयों के साथ जोड़ना आवश्यक है। केवल डिग्री लेना पर्याप्त नहीं है; पाठ्यक्रम के साथ 'कौशल संवर्धन' को अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए। भारत को एक ऐसे ढांचे की आवश्यकता है जहाँ प्रत्येक छात्र में एआई और डेटा साक्षरता के साथ-साथ अपने विषय का गहरा ज्ञान ...

विकसित भारत का मार्ग: आर्थिक प्रगति और मानव पूंजी का संगम !

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  आज जब हम भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की ओर अग्रसर हैं, तो अक्सर हमारा ध्यान सकल घरेलू उत्पाद (GDP), औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे जैसे आर्थिक आंकड़ों पर जाकर टिक जाता है। निःसंदेह ये आर्थिक स्तंभ बेहद जरूरी हैं, लेकिन क्या केवल ऊंचे आर्थिक आंकड़े ही किसी देश को वास्तव में 'विकसित' बना सकते हैं? वास्तविकता यह है कि केवल भौतिक या वित्तीय समृद्धि से एक स्थायी और समावेशी (Inclusive) विकसित भारत का निर्माण असंभव है। असली विकास की नींव देश के नागरिकों की क्षमता और उनकी गुणवत्ता में छिपी होती है। 1. आर्थिक प्रगति बनाम मानव पूंजी  अर्थशास्त्र के दृष्टिकोण से, किसी भी देश के विकास के लिए 'मानव पूंजी' सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है। यदि नागरिकों के पास कौशल और शिक्षा नहीं होगी, तो तीव्र आर्थिक विकास दर को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल होगा। एक विकसित भारत के निर्माण के लिए निम्नलिखित चार स्तंभ अनिवार्य हैं: शिक्षित नागरिक: शिक्षा नवाचार और तकनीकी प्रगति का आधार है। कुशल नागरिक: आधुनिक वैश्विक अर्थव्यवस्था में रोजगार और उच्च उत्पादकता के लिए कौशल अनिवार्य है। संवेदनशील और जागर...

हर भारतीय के लिए वित्तीय स्वास्थ्य का भविष्य !

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  सिर्फ बैंक खाता न खुले, बल्कि सभी का  वित्तीय स्वास्थ्य सुनिश्चित हो।  वर्ल्ड बैंक के 'ग्लोबल फिंडेक्स' के आंकड़ों के अनुसार, भारत में वयस्कों के पास बैंक खातों का स्वामित्व महज 10 वर्षों में 56% से बढ़कर 89% हो गया है। अब भारत का अगला बड़ा कदम सिर्फ बैंक खाते खोलने तक सीमित न रहकर हर नागरिक का वित्तीय स्वास्थ्य  सुनिश्चित करना होना चाहिए। वित्तीय स्वास्थ्य का तात्पर्य केवल बैंक खाता होने से कहीं अधिक है। इसका अर्थ यह है कि नागरिकों के पास ऐसे वित्तीय उत्पाद, नीतियां और सेवाएं उपलब्ध हों जिससे वे: अपने दैनिक खर्चों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन कर सकें। किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय झटके (जैसे बीमारी, नौकरी जाना या प्राकृतिक आपदा) का सामना करने में सक्षम हों। अपने भविष्य के दीर्घकालिक लक्ष्यों (जैसे सेवानिवृत्ति या शिक्षा) के लिए बचत और निवेश कर सकें। आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जी सकें। भारत के 'विकसित भारत 2047' के विजन (कल्याण से धन सृजन) को साकार करने के लिए  चार प्रमुख कदम सुझाए गए हैं: जन धन 2.0 का विकास: प्रधानमंत्री जन-धन योजना (PMJDY) के दूसरे दशक में, ...

भारत की 'सिल्वर इकोनॉमी': एक उभरता हुआ अवसर!

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  2050 तक, भारत की एक बड़ी आबादी (लगभग 34 करोड़) 60 वर्ष से अधिक आयु की होगी। भारत की अगली बड़ी आर्थिक क्रांति तकनीकी नवाचार के बजाय जनसांख्यिकीय परिवर्तनों, विशेष रूप से जनसंख्या के वृद्ध होने से आएगी। ​जनसांख्यिकीय बदलाव: भारत की प्रजनन दर अब प्रतिस्थापन स्तर  से नीचे गिर गई है।  ​अनदेखा बाजार: जबकि दुनिया का ध्यान एआई (AI) और तकनीकी नौकरियों पर है, एक विशाल 'सिल्वर इकोनॉमी' (वृद्धों के लिए बाजार) पूरी तरह से अविकसित है। इसमें स्वास्थ्य देखभाल, वित्तीय उत्पाद, पोषण, आवास और अवकाश सेवाएं शामिल हैं जो विशेष रूप से वृद्धों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। ​रोजगार का स्रोत: वृद्धों की देखभाल  में मानवीय स्पर्श और निर्णय की आवश्यकता होती है, जिसे एल्गोरिदम प्रतिस्थापित नहीं कर सकते। यह क्षेत्र भविष्य में रोजगार का एक स्थायी और तेजी से बढ़ने वाला स्रोत बन सकता है। ​नीतिगत और निवेश की आवश्यकता: एक वृद्ध होती आबादी का मतलब है कि स्वास्थ्य देखभाल का खर्च और वित्तीय बोझ बढ़ेगा। इसलिए, निजी क्षेत्र और नीति-निर्माताओं को अभी से ऐसी स्वास्थ्य अवसंरचना, बीमा प्रणालियों और लंबी अवधि ...