नीतीश कुमार का राजनीतिक ढलान: 'चाणक्य' से 'विवशता' तक का सफर! 'सुरक्षित निकास' (Safe Exit) . -प्रो प्रसिद्ध कुमार.
1. संघर्ष और उत्थान: शुरुआती राजनीतिक पृष्ठभूमि नीतीश कुमार का शुरुआती राजनीतिक जीवन वास्तव में संघर्षपूर्ण रहा। 1977 और 1980 की लगातार हार ने उन्हें जमीन से जोड़कर रखा। लालू-नीतीश की जुगलबंदी: 1989 में बाढ़ लोकसभा क्षेत्र से उनकी जीत और लालू प्रसाद यादव को मुख्यमंत्री बनाने में उनकी भूमिका, बिहार की राजनीति के उस दौर को दर्शाती है जब 'मंडल राजनीति' के दो स्तंभ साथ थे। समता पार्टी का उदय: 1994 में लालू यादव से अलग होकर समता पार्टी बनाना उनके राजनीतिक करियर का सबसे साहसिक मोड़ था, जिसने बिहार में लालू यादव के विरुद्ध एक नया विकल्प पेश किया। 2. 'सुशासन बाबू' और गठबंधन की राजनीति 2005 से 2013 तक का दौर नीतीश कुमार के स्वर्ण युग के रूप में जाना जाता है। भाजपा के साथ मिलकर उन्होंने जो 'लव-कुश' समीकरण और 'अति पिछड़ा' (EBC) वोट बैंक तैयार किया, उसने लालू के 'MY' (मुस्लिम-यादव) समीकरण को कड़ी टक्कर दी। अस्थिरता का दौर: 2013 के बाद से बार-बार पाला बदलने (U-turns) के कारण उनकी साख ('Credibility') पर सवाल उठे। जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाना और...