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शर्मसार होती मानवता और खोखले दावे: जमुई से लेकर बिहटा तक सुलगता बिहार।

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    ​बिहार की धरती पर हाल ही में घटी घटनाएं सिर्फ कानून-व्यवस्था की नाकामी नहीं हैं, बल्कि यह हमारे पूरे समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली मानवीय विफलता हैं। जमुई में सरेराह एक छात्रा के साथ छेड़खानी और दुष्कर्म का प्रयास, और उससे भी ज्यादा खौफनाक पहलू—तमाशबीन बनी भीड़—यह साबित करता है कि संवेदनशीलता किस रसातल में जा चुकी है। दूसरी ओर, बिहटा  से अपहृत छात्रा का शव उत्तर प्रदेश से मिलना इस बात का चीख-चीख कर अहसास कराता है कि 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा सिर्फ कागजी घोषणा बनकर रह गया है। ​संवेदनहीन होती भीड़ और गिरता सामाजिक ताना-बाना ​जमुई की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? जब सरेराह एक अबोध छात्रा के साथ दरिंदगी की कोशिश हो रही हो और आसपास खड़े लोग सिर्फ मूकदर्शक बनकर वीडियो बनाते रहें, तो यह कानून के इकबाल के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों के पतन की पराकाष्ठा है। यह डर सिर्फ अपराधियों का नहीं, बल्कि समाज के उस खोखलेपन का है जो जुर्म होते देख अपनी आंखें मूंद लेता है। ​खोखले साबित हो रहे सुरक्षा के दावे ​बढ़ता आपरा...

बिहार विधान परिषद चुनाव 2026: 8 सीटों पर चुनाव का ऐलान, जानिए पूरा शेड्यूल और नामांकन की तारीखें।

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      ​भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार सहित चार राज्यों (बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक) में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनावों की घोषणा कर दी है। बिहार की जिन 8 विधान परिषद सीटों पर चुनाव होना है, उनके वर्तमान सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। चुनाव की घोषणा के साथ ही संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।   ​मुख्य चुनाव कार्यक्रम (Schedule) ​निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार चुनाव से जुड़ी महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं: ​अधिसूचना जारी होने की तिथि: 29 सितंबर 2026 (मंगलवार)   ​नामांकन भरने की अंतिम तिथि: 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)   ​नामांकन पत्रों की संवीक्षा (Scrutiny): 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार)   ​नाम वापसी की अंतिम तिथि: 9 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)   ​मतदान की तिथि: 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) (समय: सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक)   ​मतगणना की तिथि: 27 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)   ...
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   ​हाल ही में जर्मनी के क्षेत्रीय चुनावों में दक्षिणपंथी दल 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (AfD) को ऐतिहासिक सफलता मिली है।   ​सैक्सोनी-एन्हाल्ट में AfD को 43.8% और मेक्लेनबर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में 38% वोट मिले हैं।   ​पूर्वी जर्मनी में इस दल की लोकप्रियता का मुख्य कारण ऐतिहासिक अनुभव, लोकतांत्रिक परंपराओं की कमी, और सामाजिक-आर्थिक निराशा है।   ​पश्चिमी और पूर्वी जर्मनी के बीच इतिहास, फासीवाद, और रूस के प्रति दृष्टिकोण को लेकर आज भी सांस्कृतिक और राजनीतिक अंतर बना हुआ है।    जर्मन राष्ट्रवादी स्वीडन और इटली के दक्षिणपंथी दलों की तरह उदार और मध्यम मार्ग नहीं अपनाते हैं, तो गठबंधन के अभाव में AfD का प्रभाव सीमित ही रहेगा।  

भारतीय उपभोक्ता वर्ग का बदलता स्वरूप ।।

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    पारंपरिक रूप से भारत के मध्यम वर्ग को देश की उपभोक्ता क्षमता का पैमाना माना जाता था, लेकिन अब यह वर्ग इतना विशाल और विविध हो चुका है कि इसे केवल एक सामान्य श्रेणी में नहीं देखा जा सकता।  ​मध्यम वर्ग का विस्तार: शीर्ष 100 शहरों के अध्ययन से पता चलता है कि मध्यम आय वाले परिवार (₹6-36 लाख वार्षिक आय) कुल परिवारों का 53% हो गए हैं और 2030-31 तक 60% तक पहुँच सकते हैं।  ​बदलती प्राथमिकताएँ: समान आय वाले परिवारों के बीच भी जीवनशैली, बचत और उपभोग के तौर-तरीकों में बड़ा अंतर है  व्यवसायों और नीति निर्माताओं के लिए अब मुख्य चुनौती यह समझना है कि इस विविध वर्ग के भीतर लोग क्या और क्यों चुन रहे हैं। 

दीर्घायु और जीवनशैली: जापान से सीख और भारत की राह ।

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    ​दीर्घायु और स्वस्थ जीवन आज के समय में पूरी दुनिया में चर्चा का एक मुख्य विषय बन चुका है। जापान में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों (शतायु नागरिकों) की संख्या बढ़कर पहली बार 1,07,677 हो गई है, जिनमें 94,298 महिलाएं शामिल हैं। यह संख्या 1963 में केवल 153 थी। जापान की यह उपलब्धि हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर उन्होंने ऐसी कौन सी जीवन-पद्धति अपनाई है, जिससे एक पूरा देश स्वस्थ और सक्रिय रूप से लंबी उम्र जी रहा है।   ​दूसरी ओर, यदि हम भारत की बात करें, तो हमारी पारंपरिक जीवनशैली, खान-पान (थाली) और शारीरिक श्रम (श्रम) में स्वास्थ्य की असली कुंजी छिपी रही है। भारत में भी प्राचीन काल से स्वास्थ्य को किसी औषधि की शीशी में बंद वस्तु नहीं माना गया है, बल्कि इसे हमारी दिनचर्या, थाली, श्रम और संयम का हिस्सा माना गया है।   ​भारत और जापान की जीवनशैली में अंतर एवं समानताएं ​जीवन-पद्धति और खान-पान: जापान के नागरिकों की दीर्घायु के पीछे बेहतर पोषण और स्वास्थ्य-व्यवहार की बड़ी भूमिका है। ठीक इसी तरह, भारत में भी यह माना जाता है कि धन से सुख-सुविधाएं खरीदी जा सक...

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें: बिना OTP के बैंक खाता खाली करने वाले नए फ्रॉड से कैसे बचें?

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     ​आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन ठगी करने वाले नए-नए और शातिर तरीके अपना रहे हैं। अब साइबर ठगों ने लोगों को चूना लगाने के लिए ऐसा तरीका निकाल लिया है जिसमें बिना OTP के ही बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं।  कैसे थोड़ी सी लापरवाही या एक छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है और आपका पूरा अकाउंट खाली हो सकता है।   ​यह फ्रॉड कैसे काम करता है? ​साइबर अपराधी अक्सर लोगों को झांसा देने, फर्जी लिंक भेजने या लुभावने ऑफर्स के जरिए मानसिक रूप से उलझाते हैं। लोग सोचते हैं कि जब तक वे किसी के साथ OTP साझा नहीं करेंगे, तब तक उनका पैसा सुरक्षित है। लेकिन यह नया तरीका इस भ्रम को तोड़ता है। इसमें मैलवेयर, स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स या अन्य तकनीकी कमियों का फायदा उठाकर ठग बिना किसी ओटीपी के खातों में सेंध लगा रहे हैं। ​इससे कैसे बचाव करें? ​अज्ञात लिंक्स से बचें: किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी अनधिकृत ऐप को अपने फोन में डाउनलोड करें। ​स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स से सावधान रहें: किसी भी अनजान कॉलर के कहने पर अपने फोन में AnyDesk, TeamViewer या ऐसे ही अन्य स्क्...

दास कैपिटल फॉर्मेशन: बंगाल में औद्योगिकीकरण और भूमि सुधार की नई दिशा।

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    बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन और बयानबाजी से आगे बढ़कर उद्योग स्थापित करने के लिए स्पष्ट इच्छाशक्ति की आवश्यकता है.   उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि प्राप्त करने के तीन मुख्य तरीके हैं—अधिग्रहण (Acquisition), बातचीत द्वारा खरीद (Negotiated purchase), और भूमि पूलिंग (Land pooling). इनमें से किसी एक का चयन परियोजना की प्रकृति पर निर्भर करता है.    पूंजी की कोई विचारधारा नहीं होती, बल्कि उसे संस्थागत स्थिरता, नियमों की स्पष्टता और विश्वसनीयता की आवश्यकता होती है. बंगाल के सामने मूल समस्या केवल भूमि की कमी नहीं, बल्कि बड़े और कानूनी रूप से उपयोग योग्य भूखंडों का अभाव है.    हाल ही में सरकार ने दुर्गा पूजा से पहले 33 उद्योगों को भूमि सौंपने के लिए रास्ता साफ किया है. हालांकि, असली परीक्षा इस बात की होगी कि क्या ये आवंटन समय पर परियोजना के क्रियान्वयन, रोजगार और निजी निवेश में बदलते हैं.   भूमि पूलिंग और नियमों को सरल बनाना मददगार हो सकता है, लेकिन यह कोई जादुई छड़ी नहीं है. बंगाल को पूंजी और औद्योगिकीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर एक...