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जे.एन.एल कॉलेज खगौल में एनईपी 2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा पर विशेष व्याख्यान आयोजित।

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जे.एन.एल कॉलेज खगौल में दर्शनशास्त्र विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय विशिष्ट व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर गहन विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज की प्राचार्या एवं कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रो. मधु प्रभा सिंह और आमंत्रित मुख्य वक्ता द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। इसके बाद प्राचार्या महोदया ने मुख्य वक्ता को अंगवस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। वक्ताओं के मुख्य बिंदु प्राचार्या प्रो. मधु प्रभा सिंह (अध्यक्षीय संबोधन): "एनईपी 2020 केवल आधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों को उनकी जड़ों से जोड़कर राष्ट्रीय गौरव की भावना जागृत करती है।" डॉ. अनुप पति तिवारी (मुख्य वक्ता - गया कॉलेज गयाजी, मगध विश्वविद्यालय): राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत के बौद्धिक पुनर्जा...

नशा-मुक्त युवा से ही संभव है विकसित भारत का निर्माण: राम लखन सिंह यादव कॉलेज में आयोजित हुआ विशाल जागरूकता जुलूस!

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    पटना, 05 अगस्त 2026:  पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार आज राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनिसाबाद, पटना-2 के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई द्वारा "नशा-मुक्त युवा फॉर विकसित भारत" विषय पर एक विशेष जागरूकता अभियान एवं भव्य जुलूस का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज प्रांगण में राष्ट्रगान के साथ हुई। इसके पश्चात प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों की भारी उपस्थिति के साथ कॉलेज प्रांगण से एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई। यह रैली कॉलेज परिसर से प्रारंभ होकर अनिसाबाद गोलंबर तथा चितकोहरा गोलंबर होते हुए पुनः कॉलेज प्रांगण लौटकर संपन्न हुई। रैली के दौरान विद्यार्थियों ने नशा-मुक्त समाज और स्वस्थ भारत के निर्माण से जुड़े नारों के माध्यम से जन-सामान्य को जागरूक किया। कार्यक्रम के समापन सत्र में NSS के कॉर्डिनेटर प्रो. प्रसिद्ध कुमार के नेतृत्व में उपस्थित सभी शिक्षकों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं ने समाज को नशा-मुक्त बनाने और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का संकल्प लेते हुए शपथ-पत्र पढ़ा। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ...

प्रो० श्यामल किशोर के निधन पर वित्त रहित शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने व्यक्त किया गहरा शोक!

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  पटना ।  सामाजिक न्याय के पुरोधा, मधेपुरा स्थित कॉमर्स कॉलेज के संस्थापक प्रधानाचार्य तथा 'मंडल प्रकाशन' पत्रिका के संपादक प्रो० श्यामल किशोर (टेंगराहा, मधेपुरा) के निधन से शैक्षणिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन पर वित्त रहित शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, बिहार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मधेपुरा और संपूर्ण बिहार में सामाजिक रूप से पिछड़े समाज के अधिकारों की आवाज़ उठाने और उन्हें सही मार्गदर्शन देने में प्रो० श्यामल किशोर का योगदान अविस्मरणीय रहा है। वे जीवनपर्यंत मंडल विचारधारा के अग्रणी प्रणेता के रूप में सक्रिय रहे। अध्यक्ष मंडल के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति और शोक व्यक्त मोर्चा की आयोजित बैठक में अध्यक्ष मंडल के प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने दिवंगत प्रो० श्यामल किशोर के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी। शोक व्यक्त करने वाले प्रमुख सदस्यों में शामिल थे: प्रो० रामबिनेश्वर सिंह जयनारायण सिंह 'मधु' विन्देश्वरी प्रसाद सिंह यादव शंभु कुमार सिंह रामनरेश पांडेय "समाजवादी मूल्यों और शिक...

धरातल से दूरी और बंद दरवाजे: क्या अस्तित्व के संकट की ओर बढ़ रही है राजद?- प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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    बिहार की राजनीति में 'राष्ट्रीय जनता दल' (राजद) सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक जन-आंदोलन का प्रतीक रहा है। लेकिन आज की बदलती परिस्थितियों में यह सवाल मौजूं हो गया है कि क्या पार्टी अपनी उस जमीनी विरासत को भूलती जा रही है, जिसने उसे कभी सत्ता के शीर्ष तक पहुँचाया था? विरासत हमेशा सत्ता की गारंटी नहीं होती। यदि समय रहते संगठन और नेतृत्व की कार्यशैली में धरातल स्तर पर सुधार नहीं किया गया, तो अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने में देर नहीं लगेगी। 1. जनप्रतिनिधियों की दुर्लभता और अक्षम संगठन आज राजद के आम कार्यकर्ताओं और जनता की सबसे बड़ी शिकायत उनके प्रतिनिधियों (सांसदों और विधायकों) की अनुपलब्धता है। चुनाव जीतने के बाद जनता के काम तो दूर, नेताओं के दर्शन तक दुर्लभ हो जाते हैं। प्रवक्ताओं का सतही रुख: पार्टी का पक्ष रखने वाले प्रवक्ता अक्सर ठोस तथ्यों की जगह रटे-रटाए बयानों और पुरानी घिसी-पिटी बातों को दोहराते दिखते हैं, जिससे जनता से उनका जुड़ाव फीका पड़ रहा है। अनुभवी नेताओं का मोहभंग: संगठन को धारदार बनाने वाले और जमीन से जुड़े एक-एक अनुभवी नेता किनारे ह...

बांकीपुर का अभेद्य किला ढहा ! सवर्णों, प्रबुद्ध वर्ग और 'Gen Z' की नई पसंद P K. - प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सीएम सम्राट चौधरी की साख दांव पर।  बिहार की राजनीति में पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट का परिणाम एक बड़ा मोड़ साबित हुआ है। इसे भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य गढ़ माना जाता था, जहाँ पार्टी की कद्दावर उपस्थिति और सत्ता की पूरी ताकत दांव पर लगी थी। लेकिन इस बार के नतीजों ने परंपरागत राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। सत्ता बल, स्टार प्रचारक और जनता का फैसला चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। सत्ता पक्ष की ओर से मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और स्टार प्रचारकों की पूरी फौज मैदान में उतारी गई थी। इसके बावजूद, बांकीपुर की जागरूक जनता ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि केवल स्टार प्रचारकों, भीड़ जुटाने वाले भड़कीले आयोजनों या कागजी दावों के भरोसे चुनाव नहीं जीता जा सकता। जनता अब जमीनी मुद्दों, जवाबदेही और कार्यशैली का मूल्यांकन कर रही है। बांकीपुर के नतीजे और वोट का गणित   इस सीट पर वोट प्रतिशत और मतों का अंतर क्षेत्र के बदलते मिजाज को स्पष्ट रूप से बयां करता है: कुल मतदान प्रतिशत: बांकीपुर सीट पर कुल 34.30% मतदान...

'गटर जनरेशन' से 'सीधे गोली चलवाने' तक: लोकतंत्र और छात्र आंदोलनों पर हेट स्पीच का हमला !

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  कंगना रनौत छात्रों को 'गटर जनरेशन', 'गटर छाप', 'गंदगी' और 'बदसूरत' कहकर संबोधित किया था।  लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति, विरोध और आंदोलन जनता के मौलिक अधिकार हैं। जंतर-मंतर पर नीट (NEET) पेपर लीक मामले के खिलाफ छात्रों द्वारा किया गया प्रदर्शन देश की शिक्षा व्यवस्था की कमियों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक न्यायसंगत सवाल था। हालांकि, इस जायज नाराजगी का समाधान निकालने या संवाद स्थापित करने के बजाय, सत्ता पक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों और विचारकों द्वारा जिस तरह की अमर्यादित, आपत्तिजनक और हिंसक भाषा का प्रयोग किया गया, वह लोकतांत्रिक गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 1. कंगना रनौत द्वारा छात्रों का अमानवीकरण भाजपा सांसद व अभिनेत्री कंगना रनौत द्वारा संसद परिसर और सोशल मीडिया पर आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा केवल अभद्र नहीं, बल्कि युवाओं की गरिमा पर सीधा हमला है। आलेख के अनुसार उनके द्वारा दिए गए प्रमुख आपत्तिजनक व नफरती बयान निम्नलिखित हैं: आंदोलनकारी छात्रों को 'गटर जनरेशन', 'गटर छाप', 'गंदगी' और 'बदसूरत...

ईमानदार होने की कीमत: व्यवस्था की बलि चढ़े EO विमल कुमार!

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  "सच्चाई की राह पर चलना अब मुफ़्त  नहीं रहा, यहाँ ईमानदारी की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है।" यह महज़ एक पंक्ति नहीं, बल्कि उस कड़वे सच का बयान है जो आज हमारी व्यवस्था की नसों में ज़हर बनकर दौड़ रहा है। ईओ (कार्यपालक पदाधिकारी) विमल कुमार की हत्या ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सत्ता के संरक्षण में पलते 'सफ़ेदपोश रावणों' के आगे जनता का जनसेवक कितना असुरक्षित है। मृतक विमल कुमार की पत्नी बबीता विमल के बेबस, बिलखते आँसू अब सिर्फ एक परिवार का मातम नहीं हैं, बल्कि वे सुशासन के दावों के चेहरे पर ज़ोरदार तमाचा हैं। बबीता जी का सीधा और गंभीर आरोप है कि डेहरी के विधायक सोनू सिंह द्वारा उनके पति से 50 लाख रुपये की रंगदारी माँगी जा रही थी। और जब एक ईमानदार अधिकारी ने इस अवैध उगाहने के खेल में झुकने से इंकार कर दिया, तो उसकी कीमत अपनी ज़िंदगी देकर चुकानी पड़ी। कहाँ गया वो 'बड़बोलापन' और 'पिंडदान' के खोखले वादे? जनता को याद है सरकार के शीर्ष पर बैठे नुमाइंदों का वो बुलंद भाषण— "अपराधी या तो नेपाल भागेंगे या गया में उनका पिंडदान होगा... गंगा मैया गोद में ल...