भारतीय आईटी का 'पिरामिड संकट' और एआई की चुनौती!
बदलाव के मुहाने पर भारतीय आईटी ! भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र ने पिछले चार दशकों में Y2K संकट से लेकर क्लाउड कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) जैसे कई तकनीकी बदलावों को सफलतापूर्वक अपनाया है। लेकिन वर्तमान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विशेषकर जेनरेटिव एआई (GenAI), इसके पारंपरिक व्यावसायिक ढांचे के लिए एक अभूतपूर्व खतरा बनकर उभरा है। मुख्य संकट: 'पिरामिड मॉडल' का ढहना भारतीय आईटी कंपनियों की सफलता का मुख्य आधार उनका 'पिरामिड मॉडल' रहा है। पारंपरिक ढांचा: इस मॉडल के निचले हिस्से में बड़ी संख्या में कम अनुभवी इंजीनियर होते हैं, जो मुख्य रूप से कोडिंग, टेस्टिंग और मेंटेनेंस जैसे दोहराव वाले कार्य करते हैं। एआई का प्रभाव: चूंकि एआई इन बुनियादी कार्यों को बहुत तेजी से और बेहद कम लागत पर करने में सक्षम है, इसलिए मैनपावर (वर्कफोर्स) पर टिकी इस व्यवस्था की प्रासंगिकता खत्म हो रही है। अब कंपनियों के लिए सिर्फ कार्यबल का आकार बड़ा होना सफलता की गारंटी नहीं रह गया है। सांस्कृतिक और रणनीतिक बदलाव की आवश्यकता उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी कंपनियों क...