FCRA बिल 2026 चिंताएं!
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में बजट सत्र के दौरान विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाले विदेशी फंड के प्रबंधन और नियंत्रण को और अधिक कड़ा बनाना है। हालाँकि, विपक्षी दलों और नागरिक समाज के भारी विरोध के कारण फिलहाल इसे टाल दिया गया है। विधेयक के प्रमुख प्रस्तावित बदलाव इस नए संशोधन में कुछ ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं जिन्होंने नई बहस को जन्म दिया है: संपत्तियों पर नियंत्रण: विधेयक में एक 'नामित प्राधिकरण' (Designated Authority) की नियुक्ति का प्रस्ताव है। यदि किसी NGO का पंजीकरण रद्द या निलंबित होता है, तो यह प्राधिकरण उनकी संपत्तियों का प्रबंधन या निपटान करने का अधिकार रखेगा। 'मुख्य पदाधिकारी' की व्यापक परिभाषा: अब ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता और संगठन को नियंत्रित करने वाले अन्य लोगों को भी 'मुख्य पदाधिकारी' माना जाएगा, जिससे उनकी कानूनी जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। जांच के लिए पूर्व अनुमति: किसी भी कानून प्रवर्तन एजेंसी को FCRA संबंधी शिकायतों की जांच शुरू करने स...