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राजनीति का अनोखा रंग: जब दीवानगी नापती है किलोमीटर !

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   भारत में राजनीति सिर्फ नीतियों या बयानों का खेल नहीं है, यह भावनाओं और अटूट दीवानगी का एक ऐसा समंदर है जहाँ अक्सर हैरान कर देने वाली तस्वीरें सामने आती हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह तस्वीर इसी बात का जीता-जागता सबूत है। 2000 किलोमीटर का सफर और एक 'जबर' फैन इस तस्वीर में एक ऑटो चालक को मुस्कुराते हुए देखा जा सकता है, जो मीडिया चैनल के माइक पर अपनी बात रख रहा है। इस तस्वीर के ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा है: "2000 KM ऑटो चलाकर लालू यादव से मिलने पहुंचा जबरा फैन!" वहीं नीचे की पट्टी पर एक दिलचस्प सवाल पूछा गया है: "क्या आपने कभी किसी नेता के लिए ऐसा जुनून देखा है?" यह छवि साफ तौर पर दर्शाती है कि आम जनता के दिल में अपने पसंदीदा राजनेता के प्रति किस कदर का सम्मोहन और श्रद्धा होती है। एक ऑटो, जो रोज़ी-रोटी कमाने का साधन है, उसे लेकर 2000 किलोमीटर का लंबा और थका देने वाला सफर तय करना कोई साधारण बात नहीं है। यह बिना किसी स्वार्थ के, विशुद्ध रूप से अपने पसंदीदा नेता की एक झलक पाने की बेताब चाहत है। लालू प्रसाद यादव: जनमानस में बसी गहरी चाहत बिहार की रा...

विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) के अवसर पर दुनिया, भारत और बिहार के जनसंख्या, घनत्व के आंकड़े ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र, विभाग।

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     विश्व:  वैश्विक जनसंख्या घनत्व \(16\) व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।  भारत: क्षेत्रफल 3.28 लाख वर्ग किमी है और घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। बिहार: क्षेत्रफल 94,163 वर्ग किमी है और घनत्व 1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।  विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर दुनिया, भारत और बिहार के जनसांख्यिकीय (demographic) आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण नीचे दिया गया है। इसमें आपके द्वारा दिए गए आंकड़ों के साथ-साथ साक्षरता, बेरोजगारी और जीवन प्रत्याशा (life expectancy) के महत्वपूर्ण संकेतकों को भी जोड़ा गया है। 1. मुख्य जनसांख्यिकीय आंकड़े: एक नजर में क्षेत्र कुल जनसंख्या वार्षिक/दशकीय वृद्धि दर जनसंख्या घनत्व (प्रति वर्ग किमी) विश्व ~8.3 अरब ~0.83% (वार्षिक) 16 भारत ~1.43 अरब 0.8% - 1% (वार्षिक, घटती हुई) 382 बिहार ~14 करोड़ + 14.4% (दशकीय वृद्धि दर) 1,106 2. सामाजिक-आर्थिक संकेतक (साक्षरता, बेरोजगारी और जीवन प्रत्याशा) विकास और मानव संसाधन की गुणवत्ता को समझने के लिए ये तीन संकेतक सबसे महत्वपूर्ण हैं: साक्षरता दर (Literacy Rate) विश्व: लगभग 86.7% वैश्विक आबादी साक्षर...

​भोजपुरी माटी के ‘शेक्सपियर’ भिखारी ठाकुर: लोक-चेतना और मानवीय संवेदना का महा-मंच !

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    खगोल! सर्वप्रथम  कलाकारों व अतिथियों द्वारा भिखारी ठाकुर के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गयी।  ​भोजपुरी संस्कृति के पर्याय, महान लोक कलाकार और कालजयी रचनाकार भिखारी ठाकुर जी का नाम आते ही हमारी आंखों के सामने एक ऐसी जीवंत तस्वीर उभरती है, जो आम आदमी के दर्द, संघर्ष और उमंग को बयां करती है। आज, 10 जुलाई 2026 को उनकी 55वीं पुण्यतिथि के अवसर पर पटना के खगोल स्थित देवी स्थान में एक विशेष आयोजन "भिखारी ठाकुर: लोक-चेतना और मानवीय संवेदना के स्वर" संपन्न हुआ। ​सांस्कृतिक संस्था 'सूत्रधार' द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम मात्र एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा को आज की युवा पीढ़ी से जोड़ने का एक सफल प्रयास रहा। ​लोक-चेतना का संगम ​भिखारी ठाकुर का साहित्य केवल शब्द नहीं, बल्कि उस धड़कन का नाम है जो सदियों से हमारी माटी में रची-बसी है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी कृतियाँ—जैसे 'बिदेसिया' और 'बेटी-बेचवा'—आज के दौर में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी दशकों पहले थीं। ​दिग्गज वक्ताओं के विचार ​कार्यक्रम में साहित्य, रंगमंच और ...

​भोजपुरी माटी के ‘शेक्सपियर’ भिखारी ठाकुर: लोक-चेतना और मानवीय संवेदना के स्वर !

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     ​"भिखारी ठाकुर का साहित्य केवल शब्द नहीं, बल्कि उस दर्द और उमंग की धड़कन है जो सदियों से हमारी माटी में रची-बसी है।" ​भोजपुरी संस्कृति के पर्याय, महान लोक कलाकार और कालजयी रचनाकार भिखारी ठाकुर जी की 55वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सांस्कृतिक संस्था 'सूत्रधार' एक विशेष आयोजन करने जा रही है। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उनकी विचारधारा और मानवीय संवेदनाओं को आज की पीढ़ी से जोड़ने का एक महा-मंच है। ​🎭 कार्यक्रम का विषय: "भिखारी ठाकुर: लोक-चेतना और मानवीय संवेदना के स्वर" ​भिखारी ठाकुर जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से 'बिदेसिया' और 'बेटी-बेचवा' जैसी कृतियों द्वारा समाज की कुरीतियों और मानवीय संवेदनाओं को जिस गहराई से छुआ, वह आज भी प्रासंगिक है। 'सूत्रधार' द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य उनकी इन कालजयी रचनाओं के भीतर छिपे लोक-चेतना के स्वर को पुनः जागृत करना है। ​🌟 आयोजन की मुख्य विशेषताएँ: ​गहन परिचर्चा: साहित्य, रंगमंच और समाजशास्त्र के दिग्गज भिखारी ठाकुर के दृष्टिकोण पर मंथन करेंगे। ​सांस्कृतिक गायन: 'सूत्रधार'...

जड़ों से उखड़ती ज़िंदगी: जलवायु परिवर्तन का अनकहा दर्द!

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   ​आज जब हम विकास की ऊँचाइयों को छूने की बात करते हैं, तो कहीं न कहीं हम उस ज़मीन को खोते जा रहे हैं जो हमें पालती-पोसती है। वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन अब केवल तापमान के बढ़ने या ग्लेशियरों के पिघलने की वैज्ञानिक चर्चा नहीं रह गई है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आँखों से बहते आँसू और उनकी आँखों में छिपे डर की कहानी बन चुकी है। भारत सहित दुनिया के तमाम हिस्सों में एक बड़ा जनमानस अब इस दुविधा में नहीं है कि मौसम कब बदलेगा। उनका प्रश्न अस्तित्व का है—क्या आने वाले वर्षों में वे अपने पुरखों की ज़मीन, अपने खेत और अपने घर की दहलीज पर टिक पाएंगे? बाढ़ का पानी, समुद्र का बढ़ता दायरा, खेतों में दरारें डालता सूखा और तूफानी चक्रवात—ये केवल आपदाएं नहीं, बल्कि धीरे-धीरे उन लोगों को उनकी जड़ों से उखाड़ने वाले क्रूर प्रहार हैं। समाज में अक्सर विस्थापन को केवल एक 'सरकारी आंकड़े' या 'पुनर्वास' की समस्या के रूप में देखा जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि जब कोई परिवार अपना घर छोड़ता है, तो वह केवल ईंट-पत्थर का एक ढांचा नहीं खोता। उसके साथ वे अनमोल स्मृतियाँ खो जाती हैं जो बचपन की गलियों म...

राम मंदिर के बाद अब 'शिक्षा के मंदिर' में भी डाका? नीति नहीं, नीयत देखिए!

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   महिला कॉलेज,   खगौल की प्रभारी प्राचार्या और भाजपा की पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी पर आरोप।  समाज में जब आस्था के केंद्रों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, तब अक्सर नैतिकता के ऊंचे मापदंडों का दावा किया जाता है। लेकिन जब वही रक्षक भक्षक बन जाएं और 'शिक्षा के मंदिर' को अपनी जागीर समझकर लूट का अड्डा बना लें, तो व्यवस्था और राजनीति दोनों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना द्वारा महिला कॉलेज, खगोल की प्रभारी प्राचार्या और भाजपा की पूर्व विधायक डॉ. उषा विद्यार्थी को जारी किया गया 'कारण बताओ नोटिस' इसी कड़वी सच्चाई को बयां करता है। यह केवल एक प्रशासनिक नोटिस नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की आत्मा पर हुआ वो प्रहार है जो चीख-चीख कर कह रहा है—"लूट और भ्रष्टाचार की बुनियाद पर कोई भी शिक्षण संस्थान कभी फल-फूल नहीं सकता।" भ्रष्टाचार का 'अकादमिक मॉडल': आरोपों का कच्चा चिट्ठा जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में आ जाएं, तो नियम-कानून कागजों की शोभा बनकर रह जाते हैं। इस मामले में जो १० संगीन आरोप सामने आए हैं, वे किसी भी संवेदनशील नागरि...

राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव: CEO पद का सृजन!

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    श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपने गठन (2020) के बाद से अब तक के सबसे बड़े प्रशासनिक फेरबदल से गुजर रहा है। ट्रस्ट ने अपने दो सबसे प्रभावशाली पदाधिकारियों—महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा—का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का निर्णय लिया है।  हाल ही में दान और वित्तीय लेनदेन को लेकर उपजे विवादों (जैसे चोरी और जमीन खरीद के आरोप) के बाद पारदर्शिता लाने और 'पेशेवर वित्तीय प्रबंधन' स्थापित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। आरएसएस  ने भी प्रशासनिक प्रणालियों को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया था। नई प्रशासनिक व्यवस्था: पारंपरिक व्यवस्था में अब तक ट्रस्टी और पदाधिकारी ही सीधे तौर पर दैनिक कार्यों का संचालन करते थे। अब CEO की नियुक्ति से दैनिक प्रशासन पेशेवर तरीके से चलेगा, जिससे ट्रस्टी मुख्य रूप से नीतिगत निर्णयों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। यह मॉडल तिरुपति और माता वैष्णो देवी जैसे अन्य बड़े मंदिरों के समान है। पारदर्शिता का अभाव (अन्य मंदिरों से तुलना): तिरुपति, जगन्नाथ और वैष्णो देवी जैसे प्रमुख मंदिर र...