पाटलिपुत्र स्टेशन की घटना: प्रशासनिक विफलता और बेरोजगारी के अंतहीन दंश का परिणाम!
सफलता की दर मात्र 0.82% है। पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर मद्य निषेध विभाग की परीक्षा देने जा रहे परीक्षार्थियों द्वारा किया गया हंगामा और तोड़फोड़ कानूनन गलत है। लेकिन, इस आक्रोश के पीछे परीक्षा आयोजित करने वाले तंत्र की घोर लापरवाही, अदूरदर्शिता और बिहार में बेरोजगारी की चरम स्थिति जिम्मेदार है। परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र गृह जिले से 400-500 किलोमीटर दूर (उत्तर से दक्षिण बिहार) बनाए गए, जो इस भीषण गर्मी में पूरी तरह अव्यावहारिक था। 5लाख छात्रों की आवाजाही की जानकारी होने के बावजूद रेलवे और राज्य प्रशासन ने पहले से 'एग्जाम स्पेशल' ट्रेनों की व्यवस्था नहीं की। हंगामे के बाद जो ट्रेन दी गई, वह भी समय पर नहीं खुली, जिससे छात्रों की परीक्षा छूटने का डर बढ़ गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। यह घटना बिहार में रोजगार की भीषण कमी को दर्शाती है, जहां प्रतियोगिता का स्तर डरावना है: कुल उपलब्ध पद: 4,128 ,कुल वैध आवेदक: ~ 5,00,000 (पाँच लाख),प्रति पद मुकाबला: 1 पद के लिए लगभग 121 दावेदार (सफलता की दर मात्र 0.82%) इस पूरी घटना में अंतिम नुकसान युवाओं का ही हुआ। रे...