'कोटा के भीतर कोटा' की मांग: क्या यही बना महिला आरक्षण बिल के गिरने का मुख्य कारण?
भारतीय राजनीति के इतिहास में महिला आरक्षण बिल एक बार फिर से सुर्खियों में है। हालिया विधायी कार्यवाही के दौरान सदन में हुई वोटिंग के परिणाम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। हालाँकि बिल के पक्ष में 278 वोट पड़े, लेकिन दो-तिहाई बहुमत की कमी और विशेषकर "कोटा के भीतर कोटा" की मांग पर असहमति ने इस महत्वपूर्ण विधेयक की राह रोक दी। क्या है 'कोटा के भीतर कोटा' का विवाद? महिला आरक्षण बिल का मूल प्रस्ताव लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करने का है। लेकिन, विपक्षी दलों और सामाजिक न्याय के पैरोकारों की यह प्रमुख मांग रही है कि इस 33% आरक्षण के भीतर ही: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाए। अल्पसंख्यक (Minority) समुदायों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिले। तर्क यह दिया जा रहा है कि बिना इस उप-वर्गीकरण (Sub-categorization) के, आरक्षण का लाभ केवल उच्च वर्ग या साधन संपन्न महिलाओं तक ही सीमित रह जाएगा, और पिछड़े वर्गों की महिलाएं मुख्यधारा से कटी रहेंगी। संसद में गतिरोध के प्रमुख बिंदु सामाजिक न्याय बनाम लैंगिक समान...