कितने मजबूर हैं आज भी नदी तट के लोग: वैशाली नाव हादसे की पीड़ा और बिहार का दर्द।
बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में हुआ नाव हादसा एक बार फिर राज्य की एक कड़वी और खौफनाक सच्चाई को हमारे सामने लाकर खड़ा कर देता है। गंगा और उसकी सहायक नदियों की गोद में बसे इस राज्य में, पानी केवल जीवन का आधार नहीं, बल्कि कई बार अनगिनत जिंदगियों के लिए मौत का पैगाम बन जाता है। इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत तमाम दिग्गजों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की गई हैं और हरसंभव मदद का भरोसा दिया गया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या संवेदनाओं के ये शब्द हर बार होने वाली इन मौतों की भरपाई कर सकते हैं? क्या हादसों के बाद मुआवजे का मरहम उन माता-पिता के आंसू पोंछ सकता है जिन्होंने अपनी औलाद खो दी? बिहार में आखिर क्यों बार-बार होते हैं नाव हादसे? बिहार में जल परिवहन जीवन का एक अहम हिस्सा है, लेकिन कुप्रबंधन और लापरवाही के कारण यह हादसों का पर्याय बन चुका है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं: क्षमता से अधिक ओवरलोडिंग: नाविक थोड़े से मुनाफे के चक्कर में तय क्षमता से कई गुना अधिक लोगों और...