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गोरगवाँ मेला: स्मृतियों के झरोखे से टूटती परंपराओं की गूँज! - प्रो. प्रसिद्ध कुमार

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    उँगली थामे पीढ़ियों का सफर!  समय का चक्र भी कितना अद्भुत है! कभी मैं अपने पिताजी की उँगली पकड़कर ग्रामीण मेलों की रौनक देखने जाता था, और आज मैं अपने ज्येष्ठ पुत्र प्रेम रंजन के साथ बाइक पर सवार होकर उसी मेले की ओर बढ़ रहा था। दानापुर स्टेशन और खगौल से करीब 3 किमी पश्चिम, जमालुद्दीन चक पंचायत के गोरगवां गाँव का यह मेला आज भी अपनी जड़ों को थामे खड़ा है, लेकिन इसकी रंगत अब समय की धूल में कुछ धुंधली पड़ने लगी है। चैता की तान और वह रसभरी संस्कृति मेले की असली पहचान यहाँ के 'चैता' गीतों से थी। वह गूँज आज भी कानों में मिश्री घोल देती है: "अरि राम जी के भइले जनमवा... चला हो, करि आई दरशनवा..." पुराने दौर में यहाँ 'चैता के गोला' सजते थे। 6-7 मंडलियाँ, शामियाने के नीचे हारमोनियम, नाल, ढोलक और दर्जनों झालों की थाप पर समां बांध देती थीं। बीच में 'लौंडा नाच' और कलाकारों (वचनवा, जदुआ, सुदामा) की कलाकारी देखने लोग आम के पेड़ों पर चढ़ जाते थे। अफसोस कि पुराने व्यवस्थापकों के जाने के बाद वह पारंपरिक 'चैता मंडली' अब बीते दिनों की बात हो गई है। बाबूचक, महम्मदप...

खगौल में राम नवमी के अवसर पर निकाली गई भव्य झाकियाँ

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  राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने मुख्य अतिथि और  मंत्री रामकृपाल यादव का शॉल ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया।   खगौल  (पटना): मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, रामनवमी के पावन अवसर पर आज  खगौल  की    सड़कें भक्ति के रंग में सराबोर नजर आईं। सिर पर केसरिया पगड़ी और हाथों में ध्वज लिए हजारों श्रद्धालुओं के 'जय श्री राम' के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। इस वर्ष खगोल में रामनवमी का जुलूस अपनी भव्यता और आपसी सौहार्द के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। दो समूहों में निकली भव्य झांकी इस बार  खगौल  में   दो प्रमुख समूहों के नेतृत्व में झांकियां निकाली गईं। प्रथम समूह का नेतृत्व आशुतोष कुमार ने किया, जबकि दूसरे समूह की कमान भरत पोद्दार ने संभाली। आशुतोष कुमार के नेतृत्व में निकली झांकी मोती चौक, बड़ी खगोल और नवरतन पुर होते हुए बाबूचक रोड स्थित राम-जानकी मंदिर (देव लोक धाम) पहुंची। राम-जानकी मंदिर में हुआ भव्य अभिनंदन बाबूचक रोड पर राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने मुख्य अतिथि और  मंत...

युद्ध की मार और आम आदमी: भारतीय अर्थव्यवस्था पर संकट और समाधान ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र विभाग.

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    यह  पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारतीय उपभोक्ताओं और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का विश्लेषण है।  कैसे एक दूरस्थ युद्ध भारत में एलपीजी (LPG), ईंधन, खाद्य सामग्री और यात्रा की कीमतों को बढ़ा रहा है। सरकार ने अब तक स्थिति को संभालने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं, लेकिन युद्ध लंबा खिंचने पर चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं।  आपूर्ति श्रृंखला में बाधा: पश्चिम एशिया विश्व के 20% पेट्रोलियम तरल पदार्थों की आपूर्ति करता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों के मार्ग बदलने के कारण आपूर्ति में देरी और लागत में वृद्धि हुई है। महंगाई का दोहरा प्रहार: ईंधन और एलपीजी की बढ़ती कीमतों का सीधा असर परिवहन और खाद्य पदार्थों पर पड़ रहा है। घरेलू बजट बिगड़ने से उपभोक्ता मांग में कमी आने की संभावना है। रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने (94 के स्तर तक पहुँचने) से आयात, विशेषकर तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स, और भी महंगे हो गए हैं। क्षेत्रीय प्रभाव: पर्यटन क्षेत्र हवाई किराए बढ़ने से प्रभावित है, वहीं रेस्टोरेंट और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स भी कम ऑ...

आधुनिक भू-राजनीति में आर्थिक अंतर्निर्भरता का संकट!

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  पारंपरिक मान्यता रही है कि राष्ट्रों के बीच बढ़ती आर्थिक अंतर्निर्भरता युद्ध की संभावना को कम करती है। यूरोपीय संघ इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहाँ कोयले और स्टील के व्यापारिक गठबंधन ने कभी शत्रु रहे देशों को शांति के सूत्र में बांध दिया। लेकिन वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, विशेषकर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने इस धारणा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ईरान का भू-राजनीतिक लाभ और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई करते समय उसकी आर्थिक शक्ति का तो सही आकलन किया गया, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति के प्रभाव को कम आंका गया। रणनीतिक मार्ग: वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा, विशेषकर 84% कच्चा तेल और 83% एलएनजी (LNG) इसी मार्ग से एशिया की ओर जाता है। प्रहार क्षमता: ईरान ने अपनी भौगोलिक निकटता और कम लागत वाले 'शाहेद-136' ड्रोन जैसी तकनीकों के माध्यम से खाड़ी देशों (GCC) के व्यापार और बुनियादी ढांचे पर दबाव बनाने की क्षमता प्रदर्शित की है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और एशिया पर प्रभाव इस संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिसक...

भारत की नई एफडीआई नीति (PN3) और निवेश की द्वंद्वपूर्ण स्थिति!

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  यह  भारत सरकार द्वारा हाल ही में 'प्रेस नोट 3' (PN3) के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों का विश्लेषण है।  चीन के प्रति नरम रुख: भारत ने उन देशों (विशेषकर चीन) के लिए नियमों में ढील दी है जिनके साथ वह भूमि सीमा साझा करता है। अब इन देशों के निवेशक 'ऑटोमैटिक रूट' के माध्यम से 10% तक की गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी (Beneficial Ownership) रख सकते हैं। विनिर्माण को प्रोत्साहन: सरकार ने विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनल और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा है, ताकि घरेलू विनिर्माण को गति मिल सके। घटता शुद्ध निवेश (Net FDI): यह एक चिंताजनक रुझान की ओर इशारा करता है कि भले ही भारत में कुल निवेश आ रहा हो, लेकिन 'नेट एफडीआई' (कुल आवक और निकासी का अंतर) ऐतिहासिक रूप से कम हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशी निवेशकों द्वारा विनिवेश $51.5 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया। भारतीय निवेशकों का पलायन: एक विरोधाभासी स्थिति देखी जा रही है जहाँ एक तरफ सरकार विदेशी निवेश के लिए दरवाजे ...

प्राकृतिक खनिज जल: शुद्धता, स्रोत और स्वास्थ्य पर प्रभाव !

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  खनिज जल (Mineral Water) केवल प्यास बुझाने वाला तरल नहीं है, बल्कि यह एक जटिल भूगर्भीय प्रक्रिया का परिणाम है। यह सामान्य नल के पानी से इस मामले में भिन्न है कि इसे कृत्रिम रूप से शुद्ध करने के बजाय इसकी प्राकृतिक अवस्था में ही संरक्षित किया जाता है।  प्राकृतिक स्रोत और निर्माण: खनिज जल भूमिगत जलाशयों (aquifers) से आता है। जब बारिश या पिघली हुई बर्फ चूना पत्थर, ग्रेनाइट या ज्वालामुखी बेसाल्ट जैसी चट्टानों की परतों से होकर गुजरती है, तो वह अपने साथ कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम जैसे खनिजों को घोल लेती है। वर्षों की इस प्रक्रिया के बाद यह पानी प्राकृतिक दबाव से सतह पर आता है। सख्त मानक और नियम: भारत में FSSAI और BIS (IS 13428) इसके कड़े मानक तय करते हैं। नियम के अनुसार, खनिज जल के प्राकृतिक स्वरूप या खनिज संरचना में कोई रासायनिक बदलाव नहीं किया जा सकता। इसे केवल छना (filtration) या कीटाणुरहित (sterilization) किया जा सकता है। बोतल पर स्रोत का नाम और खनिजों की मात्रा का उल्लेख अनिवार्य है। खनिजों का महत्व और स्वाद: कैल्शियम और मैग्नीशियम: पानी को 'भारीपन' (mouthfeel) प्रदान करते...

डब्ल्यूटीओ का MC14: वैश्विक व्यापार बहुपक्षवाद की अग्निपरीक्षा!

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  यह  विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के महत्व और उसके सामने खड़ी चुनौतियों का विश्लेषण है। सम्मेलन का आयोजन 26 से 29 मार्च के बीच कैमरून के याउंडे में हो रहा है। प्रमुख मुद्दे और चुनौतियां वैश्विक व्यापार व्यवस्था इस समय एक गंभीर संकट से गुजर रही है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: बहुपक्षवाद बनाम एकपक्षवाद: अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता और देशों द्वारा सुरक्षा के नाम पर व्यापारिक प्रतिबंधों ने बहुपक्षीय व्यवस्था को कमजोर किया है। अमेरिका की 'एकपक्षीय' नीतियों और टैरिफ जबरदस्ती (Tariff Coercion) ने वैश्विक व्यापार नियमों को चुनौती दी है। विवाद निपटान प्रणाली का संकट: डब्ल्यूटीओ का 'अपीलीय निकाय' (Appellate Body) लंबे समय से ठप पड़ा है क्योंकि अमेरिका ने नए सदस्यों की नियुक्ति रोक दी है। इस संकट को सुलझाना MC14 की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। बहुपक्षीय (Plurilateral) समझौते: निवेश सुविधा और ई-कॉमर्स जैसे मुद्दों पर कुछ चुनिंदा देशों के बीच होने वाले समझौतों को वैश्विक नियमों में शामिल करने पर बहस जारी है। भारत जैसे देश इसका विरोध कर...