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लोकतंत्र की 'हाइजैकिंग': विरासत, अपराध और पूंजी का त्रिकोण!

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  भारतीय राजनीति आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ 'लोकतंत्र' (Democracy) धीरे-धीरे 'वंशतंत्र' (Dynasty) और 'धनतंत्र' (Plutocracy) में तब्दील होता जा रहा है। वह कार्यकर्ता, जिसने झंडे उठाए, लाठियां खाईं और गलियों की खाक छानी, आज हाशिये पर खड़ा होकर अपनी ही पार्टी के भीतर 'वंशवाद की बेल' को वटवृक्ष बनते देख रहा है। 1. वंशवाद: योग्यता की बलि और संघर्ष का अंत जब संघर्ष से तपकर कोई कार्यकर्ता नेता बनता है, तो उसके विजन में जनता की समस्याओं की तपिश होती है। इसके विपरीत, राजनीतिक घरानों में पैदा हुए 'पैराशूट लीडर्स' बिना किसी सदन का अनुभव लिए सीधे मंत्री पद की शपथ लेते हैं। डेटा का आईना: विभिन्न शोधों (जैसे 'India at the Polls') के अनुसार, भारतीय संसद में लगभग 30% से अधिक सांसद किसी न किसी राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। युवा सांसदों (40 वर्ष से कम) के मामले में यह आंकड़ा 70% से भी ऊपर चला जाता है। यह दर्शाता है कि एक सामान्य मेधावी युवा के लिए राजनीति के द्वार लगभग बंद हैं। 2. अपराधीकरण: बाहुबल के आगे नतमस्तक नीतिशास्त्र विरासत की राजनीति को ...

​आईआईटी पटना: शिक्षा का मंदिर या लापरवाही का 'डेथ ट्रैप'? एक मेधावी छात्र की मौत का जिम्मेदार कौन?

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    ​भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, आईआईटी (IIT) पटना के कैंपस से 9 मई 2026 की सुबह जो खबर आई, उसने न केवल संस्थान को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। तेलंगाना के रहने वाले 22 वर्षीय बीटेक फाइनल ईयर के छात्र हर्षित राज की मौत कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक हत्या है। ​जिस छात्र को कुछ ही दिनों में देश के विकास में योगदान देना था, वह आज बिजली विभाग और संस्थान की घोर लापरवाही के कारण हमारे बीच नहीं है। ​घटना: खेल के मैदान में बिछा था 'मौत का जाल' ​सुबह के 6 बजे, जब कैंपस में उत्साह और खेल का माहौल होना चाहिए था, वहां मातम पसर गया। हॉस्टल के ग्राउंड में क्रिकेट खेलते समय, फील्डिंग के दौरान हर्षित का संपर्क एक लाइव इलेक्ट्रिक पोल (बिजली के खंभे) से हो गया। करंट इतना जोरदार था कि हर्षित को संभलने का मौका तक नहीं मिला और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी जान चली गई। ​व्यवस्था पर कड़वे सवाल: आखिर चूक कहां हुई? ​यह घटना आईआईटी प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है: ​इंजीनियरिंग संस्थान में तकनीकी विफलता? जिस संस्थान में देश के बेहतरीन ...

बिहार में नौकरी के बदले लाठी: TRE-4 अभ्यर्थियों पर बरसीं पुलिस की लाठियाँ, राजद का सरकार पर तीखा हमला!

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  पटना | 9 मई 2026 बिहार की राजनीति में एक बार फिर 'नौकरी और रोजगार' का मुद्दा गरमा गया है। शिक्षक बहाली (TRE 4) की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है। नौकरी मांगने पर लाठी और FIR: दमनकारी नीति का आरोप बिहार प्रदेश राजद के प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि अपनी जायज मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों को पुलिस ने 'दौड़ा-दौड़ा कर' पीटा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार 'नौकरी देने वाली' नहीं, बल्कि 'नौकरी छीनने वाली' सरकार बन गई है। अहमद ने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि: गांधी मैदान थाना में 4 नामजद और लगभग 5000 अज्ञात छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर छात्रों को ऐसे तलाश रही है जैसे उन्होंने नौकरी मांगकर कोई 'बड़ा अपराध' कर दिया हो। "नफरत की राजनीति बनाम रोजगार की नीति" राजद प्रवक्त...

भारतीय राजनीति: आदर्शों का पतन और जातिगत ध्रुवीकरण!

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    ​यह समकालीन भारतीय राजनीति के बदलते स्वरूप पर एक गंभीर कटाक्ष  है। इसमें मुख्य रूप से तीन बिंदुओं को रेखांकित किया गया है: ​संवाद का गिरता स्तर: आज की राजनीति में वैचारिक विमर्श और नीतिगत चर्चाओं के बजाय आरोप-प्रत्यारोप की प्रधानता हो गई है। जनहित के वास्तविक मुद्दे गौण होते जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। ​सिद्धांत बनाम जाति: राजनीति से सैद्धांतिक आधार (Ideology) गायब हो रहे हैं। सिद्धांतों के स्थान पर 'जातीय आधार' अधिक प्रबल हो गए हैं। यही कारण है कि जाति जनगणना को एक ऐतिहासिक या 'युगप्रवर्तक' कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब पूरी राजनीति इसी के इर्द-गिर्द सिमट गई है। ​तुष्टिकरण और जनसेवा का भ्रम: आजादी के बाद से पिछड़ों के उत्थान और आरक्षण की बातें तो हुईं, लेकिन धरातल पर उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया। अब राजनीति 'अति पिछड़ों' के तुष्टिकरण की ओर मुड़ गई है। विडंबना यह है कि आज इसी तुष्टिकरण की राजनीति को 'जनसेवा' का नाम देकर जायज ठहराया जा रहा है। आधुनिक राजनीति जन-कल्याण के वास्तविक लक्ष्यों से भटककर जातिगत समीकरणों और एक...

सेहत से खिलवाड़: क्या हमारी थाली में परोसा जा रहा है ज़हर?

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  स्वस्थ रहने के लिए हम अक्सर ताजे फलों और हरी सब्जियों का रुख करते हैं, लेकिन हालिया घटनाएं यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम सेहत चुन रहे हैं या धीमा ज़हर? एक खौफनाक हकीकत: मुंबई की घटना मुंबई के पायधोनी इलाके से आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत सिर्फ इसलिए हो गई क्योंकि उन्होंने तरबूज खाया था। फॉरेंसिक जांच में जो खुलासा हुआ वह डराने वाला है: मृतकों के आंतरिक अंगों और तरबूज के नमूनों में चूहे मारने की दवा के अंश मिले हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह घातक रसायन तरबूज के भीतर कैसे पहुँचा। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि शायद फल को पकाने के लिए ही इस ज़हर का इस्तेमाल किया गया हो। मुनाफे की अंधी दौड़ और अनियंत्रित रसायन आज के दौर में फलों को समय से पहले पकाने, उन्हें चमकदार दिखाने और सब्जियों का आकार रातों-रात बढ़ाने के लिए रसायनों और इंजेक्शनों का अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है। अवैज्ञानिक उपयोग: कीटनाशक फसलों की सुरक्षा के लिए बने थे, लेकिन इनका अवैज्ञानिक उपयोग अब मानव जीवन पर भारी पड़ रहा है। नियमों की अनदेखी: सरकार ने कीटनाश...

वादों की अर्थी और तंत्र की लाठियाँ: बिहार में 'रोजगार' की खूनी हकीकत!

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  बिहार की राजनीति में 'बहाली' अब एक उम्मीद नहीं, बल्कि एक डरावनी चक्रव्यूह बनी है। TRE 4.0 के वोट बैंक पर हाल ही में हुआ बार्ब लाठीचार्ज इस बात का प्रमाण है कि सरकार के लिए युवाओं के लिए केवल 'वोट बैंक' हैं, 'भविष्य' नहीं। जब सत्य का हनक संवाद भारी प्रचार प्रसार पर आया, तो समझ लेना चाहिए कि तंत्र गुंग और बहरा हो चुका है। बिहार की धरती, जो कभी ज्ञान और क्रांति का केंद्र बनती है, आज युवा छात्रों के उत्पीड़न का कुचक्र बन गया है। TRE 4.0 (शिक्षक  अभ्यर्थियों) की प्रक्रिया में समर्थन और अपने अधिकार की मांग कर रहे शिक्षकों पर जिस तरह की बर्बरता की लाठी लाठियां बनी हैं, वह सरकार के 'रोजगार' के आधार की कलई खोल दी है। यह केवल लाठीचार्ज नहीं है, बल्कि बिहार के भविष्य और युवाओं के आत्मसम्मान पर एक प्रहार है।  शिक्षा वर्ग का तिरस्कार: जो युवा कल समाज को शिक्षा देने का दायित्व संभालने वाले थे, आज वे शिक्षा वर्ग पर शासन की संवेदनहीनता का शिकार हो रहे हैं। एक सभ्य समाज के लिए इससे अधिक लज्जाजनक स्थिति और क्या हो सकती है? सरकार को यह दावा करना होगा कि कलम की शक्ति को ल...

तेजस्वी यादव का NDA सरकार पर तीखा हमला: "बिहार में परिवारवाद और भ्रष्टाचार का नया विजन हुआ स्थापित" !

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     ​बिना सदन के सदस्य बने 'नेता पुत्रों' को मंत्री बनाने पर उठाए सवाल; TRE-4 के छात्रों पर लाठीचार्ज को बताया लोकतंत्र की हत्या!  ​पटना | 08 मई, 2026 राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्य कार्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने बिहार की नवनिर्वाचित एनडीए सरकार और मंत्रिमंडल विस्तार पर जमकर प्रहार किया। तेजस्वी यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली, परिवारवाद और युवाओं पर हो रहे लाठीचार्ज को लेकर कड़े सवाल खड़े किए। ​"परिवारवाद पर भाजपा और जदयू का दोहरा चरित्र" ​तेजस्वी यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कल हुए विस्तार में विकास का कोई विजन नहीं दिखा। उन्होंने सीधा हमला बोलते हुए कहा: ​"नीतीश जी ने परिवारवाद के नाम पर गठबंधन तोड़ा था, लेकिन कल उनके बेटे निशांत और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना किसी सदन का सदस्य रहे मंत्री बना दिया गया। क्या अब भाजपा के लिए यह 'शहजादे' नहीं हैं? कैबिनेट में 17 मंत्री परिवारवादी हैं, जिनमें तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे श...