₹100 का मनोवैज्ञानिक स्तर: प्रतीक बनाम वास्तविकता!
भारतीय रुपये में गिरावट के मायने, वैश्विक दबाव और देश की आर्थिक बुनियाद का एक विश्लेषणात्मक मूल्यांकन 1. गिरावट और उसके कारण हाल के दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये का मूल्य ₹85 से गिरकर लगभग ₹96 के स्तर पर आ गया है, और यह लगातार ₹100 के मनोवैज्ञानिक आंकड़े की ओर बढ़ रहा है। इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित बाह्य और आंतरिक कारक ज़िम्मेदार हैं: कच्चे तेल का संकट: भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए लगभग 90% कच्चे तेल का आयात करता है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ़ हारमुज़' की नाकेबंदी के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल पार कर चुकी हैं, जिससे देश का आयात बिल काफी बढ़ गया है। पूंजी की निकासी : विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारतीय शेयर बाजार (NSE) में हिस्सेदारी 17 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। वर्ष 2024 और 2025 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने हर साल करीब ₹3 लाख करोड़ की निकासी की है, और 2026 में यह स्थिति और भी गंभीर दिख रही है। डॉलर रिटर्न में कमी: यद्यपि भारतीय शेयर सूचकांक 'निफ्टी 50...