गुदरी का लाल, सामाजिक न्याय की मशाल: लालू प्रसाद यादव ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।
"घोर अंधेरी रात, असमानता का आघात, तेज आंधियों में जला एक चिराग..." भारतीय राजनीति के क्षितिज पर कुछ नाम ऐसे होते हैं जो महज़ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने आप में एक संपूर्ण आंदोलन बन जाते हैं। लालू प्रसाद यादव एक ऐसा ही नाम हैं। वे सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि देश के करोड़ों वंचितों, शोषितों और 'बैक-बेंचर्ज़' की उस चेतना का नाम हैं, जिसने कभी सत्ता के सामने झुकना नहीं सीखा और न ही अपने सिद्धांतों से समझौता किया। 11 जून 1948 को गोपालगंज के फुलवरिया गाँव में माता मरछिया देवी और पिता कुंदन राय के आँगन में जनमे लालू जी की कोई बड़ी पारिवारिक या आर्थिक पृष्ठभूमि नहीं थी। वे सचमुच 'गुदरी के लाल' हैं, जिन्होंने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर पटना यूनिवर्सिटी के छात्र संघ (1973-74) से लेकर देश की संसद और केंद्रीय रेल मंत्रालय तक का सफर तय किया। मात्र 29 वर्ष की उम्र में छपरा से देश के सबसे युवा सांसद बनने वाले लालू जी ने भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को हमेशा के लिए बदल दिया। 1. संसद से सड़क तक: वंचितों की बेबाक आवाज़ लालू यादव के व्यक्तित्व की थाह पाने के लिए ...