इमारतों के मलबे में दबती जवाबदेही: 5 वर्षों में 8,000 मौतों का कड़वा सच ।
राजधानी दिल्ली के सत्या निकेतन में पांच मंजिला इमारत के ढहने से हुई मौतों ने एक बार फिर देश में भवन सुरक्षा मानकों और उनके ढीले प्रवर्तन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सत्या निकेतन जैसी घटनाएं मीडिया का ध्यान खींचने में सफल रहती हैं, लेकिन सच यह है कि देश भर में हर साल सैकड़ों लोग प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण के कारण मलबे में दबकर अपनी जान गंवा रहे हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ADSI रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 से 2024 के बीच देशभर में इमारतों और संरचनाओं के ढहने से कुल 7,874 लोगों की मौत हुई। वर्ष 2024 की स्थिति: 2024 में उत्तर प्रदेश में इमारतों के ढहने से सबसे अधिक 223 लोगों की मौत दर्ज की गई, इसके बाद महाराष्ट्र 220 मौतों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। अन्य प्रभावित राज्य: मध्य प्रदेश (174), राजस्थान (131), गुजरात (115) और झारखंड (92) भी उन शीर्ष राज्यों में शामिल हैं जहां ऐसी दुर्घटनाएं सबसे अधिक हुईं। यदि प्रति मिलियन जनसंख्या पर मौतों के आंकड़े देखे जाएं, तो दिल्ली की स्थिति बेहद चिंताजनक है। दिल्ली भौगोलिक रूप से छोटी होने के ब...