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बांकीपुर में तेजस्वी यादव का रोड शो: छात्रों पर फायरिंग को लेकर सरकार पर बरसे, न्यायिक जांच और रिहाई की मांग!

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  फुलवारी शरीफ , अजीत कुमार की रिपोर्ट : बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रत्याशी रेखा गुप्ता के समर्थन में सोमवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने एक विशाल रोड शो किया। यह रोड शो मीठापुर से शुरू होकर चांदपुर बेला, सिपारा, विग्रहपुर, पोस्टल पार्क, चिरैयाटांड़ पुल, गोरिया टोली, लालजी टोला, पीरमुहानी, आयुर्वेदिक कॉलेज, लोहानीपुर, साहित्य सम्मेलन, दरियापुर और खेतान मार्केट होते हुए सब्जीबाग चौराहा तक पहुंचा। इस दौरान सड़कों पर राजद समर्थकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। रोड शो के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला बोला और बांकीपुर की जनता का रुख बताते हुए कहा, "जनता ने इस बार भाजपा को हराने का मन बना लिया है। इस बार बांकीपुर में लालटेन ही जलेगा।" छात्र आंदोलन पर सरकार को घेरा छात्र आंदोलन और हालिया कार्रवाई पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी ने कहा कि सरकार पहले किसानों को ठग रही थी और अब छात्रों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि सोमवार शाम तक गिरफ्तार छात्रों को...

राम लखन सिंह यादव कॉलेज में बीए सेमेस्टर-1 के नवागत छात्रों का हुआ आत्मीय स्वागत, नियमित कक्षाओं और नैतिक मूल्यों पर दिया गया जोर!

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  पटना, 27 जुलाई 2026: राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद, पटना-2 में स्नातक प्रथम वर्ष (बीए सेमेस्टर-1, सत्र 2026-2030) के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के शैक्षणिक सफर की शुरुआत के उपलक्ष्य में सोमवार को एक भव्य शिक्षक-छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। सुबह 10:30 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज के प्राध्यापकों ने नवागत छात्रों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह महत्वपूर्ण सम्मेलन कॉलेज की उप-प्राचार्या प्रो. संगीता कुमारी की अध्यक्षता में और प्रो. प्रसिद्ध कुमार के कुशल संचालन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन के दौरान प्राध्यापकों ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने की सलाह दी। वक्ताओं ने पठन-पाठन के साथ-साथ स्वाध्याय (स्व-अध्ययन), मौलिक रचनाओं और नैतिक मूल्यों (Moral Values) के महत्व पर विशेष जोर दिया। शिक्षकों ने कहा कि अनुशासन और निरंतरता ही एक सफल छात्र जीवन की नींव है। कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने भी अपने विचार खुलकर रखे और कॉलेज में मिले इस आत्मीय स्वागत के प्रति आभार जताया। छात्रों ने प्राध्यापकों की प्रेरणादायी बातों...

लोक-संवेदना का अमर उल्लास: 'गबरघिचोर' के बहाने! -समीक्षक: प्रो. प्रसिद्ध कुमार।

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    खगौल के नवनिर्मित सृजन प्रेक्षागृह में भिखारी ठाकुर की नाट्य-चेतना और स्त्री-पीड़ा का सजीव प्रकटीकरण !  स्थान: सृजन प्रेक्षागृह, खगौल (पटना) प्रस्तुति: सूत्रधार | मूल नाटककार: भिखारी ठाकुर | निर्देशक: नवाब आलम रविवार की संध्या खगौल का नवनिर्मित सृजन प्रेक्षागृह भोजपुरी माटी के अमर शिल्पी और लोक-नाट्य के महानायक भिखारी ठाकुर की कालजयी नाट्य-चेतना से स्पंदित हो उठा। नाट्य-संस्था 'सूत्रधार' के तत्त्वावधान में आयोजित बहुचर्चित नाटक 'गबरघिचोर' के मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। अत्याधुनिक ध्वनि-प्रकाश व्यवस्था, कलात्मक चित्रों से सुसज्जित दीवारों और मखमली आभामंडल से युक्त यह प्रेक्षागृह स्वयं में रंगकर्म के एक नवीन युग के सूत्रपात का साक्षी बन रहा था। प्रेक्षकों के अपार जनसैलाब ने यह सिद्ध कर दिया कि डिजिटल युग की चकाचौंध में भी लोक-संस्कृति की जड़ें अत्यंत गहरी और अटूट हैं। गरिमामय परिवेश एवं अतिथियों की उपस्थिति समारोह का मंगलाचरण पारंपरिक दीप-प्रज्वलन तथा विशेष नाट्य-पुस्तिका के विमोचन के साथ हुआ। तत्पश्चात आगत अतिथियों को अंगवस्त्रम प्रदान कर सम्मानित किया गया।...

रंग-तरंग: जब खगौल के मंच पर 'गबरघिचोर' के साथ जीवंत हो उठी भिखारी ठाकुर की लोक-संस्कृती - प्रो. प्रसिद्ध कुमार की आँखों देखी !

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    पटना/खगौल। रविवार की शाम खगौल का नवनिर्मित सृजन प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज रहा था। मौका था भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के कालजयी लोकनाट्य 'गबरघिचोर' के प्रभावशाली मंचन का। चर्चित नाट्य संस्था 'सूत्रधार' द्वारा प्रस्तुत इस नाटक को देखने के लिए दर्शकों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि हॉल खचाखच भर गया। आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस यह प्रेक्षागृह किसी बड़े थिएटर या मॉल से कम नहीं लग रहा था—मखमली फर्श, आरामदायक सीटें, शानदार लाइट-साउंड व्यवस्था और दीवारों पर उकेरी गई खूबसूरत चित्रकारी ने रंगकर्म के माहौल को और भी भव्य बना दिया था। गरिमामय शुरुआत और सम्मान कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और एक विशेष पुस्तिका के विमोचन के साथ हुई। उपस्थित सभी अतिथियों को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। फ्रंट सीट पर बैठकर नाटक का आनंद ले रहे अतिथियों में जेएनएल कॉलेज की प्राचार्य सह प्रख्यात साहित्यकार प्रो. (डॉ.) मधु प्रभा सिंह पूरी तन्मयता के साथ कलाकारों का हौसला बढ़ा रही थीं। एक महिला और साहित्यकार के नाते मंच पर उकेरी जा रही स्त्री-वेदना उ...

राजनीति का भंवर और छात्र आक्रोश: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की पूरी कहानी!

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  केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भारतीय राजनीति और छात्र आंदोलनों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बनकर उभरा है। देश भर में परीक्षा पत्रों के लीक होने की घटनाओं और छात्रों के लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बाद, अंततः नरेंद्र मोदी सरकार पर बने भारी दबाव के कारण उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा। GenZ (युवा पीढ़ी) के इस प्रचंड विरोध ने एक बार फिर साबित कर दिया कि युवाओं की चिंताएं सत्ता के समीकरणों पर भारी पड़ सकती हैं। राजनीति में निरंतर बढ़त और पारिवारिक पृष्ठभूमि 1969 में ओडिशा के तालचर में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान का संबंध लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े परिवार से रहा है। उनके पिता देबेंद्र प्रधान भी संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता और वाजपेयी सरकार में मंत्री रह चुके थे। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से की और बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उत्कल विश्वविद्यालय से एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल करने वाले प्रधान ने 2000 में ओडिशा वि...

हरित भविष्य की ओर: धान की खेती और पर्यावरण का संतुलन !

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      भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादक देशों में से एक है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों (जैसे Nature Food) से यह बात सामने आई है कि पारंपरिक सिंचित धान के खेत वैश्विक स्तर पर मीथेन उत्सर्जन के प्रमुख स्रोतों में शामिल हो चुके हैं। यह इस चुनौती के प्रमुख कारणों, इसके वैज्ञानिक पहलुओं और उन प्रेरणादायक तकनीकों पर प्रकाश डालता है, जिनके माध्यम से भारत अपनी खाद्य सुरक्षा को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण का नया मार्ग प्रशस्त कर सकता है। उत्सर्जन में वृद्धि: 1960 के दशक के बाद से धान की खेती से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में दोगुनी वृद्धि देखी गई है। वैश्विक स्तर पर धान के खेतों से प्रतिवर्ष लगभग 1.1 अरब टन CO₂-समकक्ष गैसों का उत्सर्जन होता है। भारत की स्थिति: भारत में सिंचित धान के खेत सालाना लगभग 3.9 करोड़ टन मीथेन का उत्सर्जन करते हैं, जो जर्मनी के कुल वार्षिक मीथेन उत्सर्जन से भी अधिक है। खेतों में लगातार जलभराव जिससे ऑक्सीजन-रहित परिस्थितियाँ बनती हैं और मीथेन बनाने वाले सूक्ष...

ज़ूफार्माकोग्नोसी: जब जानवर स्वयं बनते हैं अपने चिकित्सक!

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  प्रकृति ने जीवों को केवल जीवन ही नहीं दिया, बल्कि स्वास्थ्य और उपचार का ज्ञान भी उनके सहज व्यवहार (Instinct) में समाहित किया है। विज्ञान की भाषा में इस प्रक्रिया को ज़ूफार्माकोग्नोसी (Zoopharmacognosy) कहा जाता है, जिसका सीधा अर्थ है—पशु-पक्षियों और अन्य जीवों द्वारा आत्म-उपचार (Self-medication) के लिए वनस्पतियों और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग करना। स्व-उपचार के अद्भुत उदाहरण ओरंगुटान का देसी इलाज: इंडोनेशिया के मध्य कालीमंतन स्थित सेबंगु जंगल में ओरंगुटान 'ड्राकेना' (Dracaena) नाम के पौधे की पत्तियों को अपनी लार के साथ मिलाकर पेस्ट बनाते हैं। वे इस पेस्ट को शरीर पर लगाते हैं ताकि मांसपेशियों का दर्द, जोड़ों की अकड़न और त्वचा संबंधी समस्याएं दूर हो सकें। शालपर्णी और चिंपैंजी: नाइजीरिया में चिंपैंजी 'डेस्मोडियम गैंगेटिकम' (Desmodium gangeticum या शालपर्णी) की पत्तियों को निगलकर अपनी त्वचा पर मौजूद परजीवियों से छुटकारा पाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि प्राचीन आयुर्वेद में भी महर्षि सुश्रुत जैसे वैद्यों ने इस पौधे का उपयोग दमा, बवासीर और टाइफाइड जैसी बीमारियों के इलाज के लिए...