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फुलवारीशरीफ की बेटी नबा हसन चाँद ने अमेरिका में लहराया सफलता का परचम !

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  ​फुलवारीशरीफ (पटना): प्रतिभा किसी स्थान या संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यह साबित कर दिखाया है पटना जिले के फुलवारीशरीफ की रहने वाली नबा हसन चाँद ने। नबा ने अमेरिका के शिकागो स्थित प्रतिष्ठित दीपॉल यूनिवर्सिटी (DePaul University) से 'मास्टर ऑफ फाइनेंस' की डिग्री हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। ​अमेरिका में मिली बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि ​नबा हसन चाँद को यह प्रतिष्ठित डिग्री विश्वविद्यालय के डॉ. ड्रेहाउस कॉलेज ऑफ बिजनेस (Driehaus College of Business) के दीक्षांत समारोह में प्रदान की गई। एक छोटे शहर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुकाम तक पहुँचना नबा के शैक्षणिक सफर की एक बड़ी उपलब्धि है। ​दृढ़ संकल्प और मेहनत की कहानी ​नबा के परिजनों के अनुसार, उनकी यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और अनुशासित अध्ययन शैली के दम पर यह सफलता प्राप्त की है। नबा, फुलवारीशरीफ के प्रख्यात चिकित्सक रहे स्वर्गीय डॉ. अली हसन चाँद की पोती और शोएब हसन चाँद की पुत्री हैं। उन्होंने अपने पारिवारिक संस्कारों और शिक्षा के प्रति समर्पण को अपनी ...

फुलवारी का लहूलुहान इतिहास: सामाजिक न्याय के उन पांच दीवानों को याद करते हुए...

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    ​प्रो. प्रसिद्ध कुमार की कलम से ​फुलवारी की माटी आज भारी है। रामपुर फरीदपुर पंचायत की जिस ज़मीन ने दशकों तक सामाजिक न्याय का बिगुल फूंका, आज वह अपने पांच जांबाज़ सिपाहियों की कमी से कराह रही है। 1990 से लेकर आज तक, हमने इस पंचायत में जो लड़ाई लड़ी है, वह महज़ चुनावी राजनीति नहीं थी; वह व्यवस्था के विरुद्ध एक विद्रोह था। ​आई.के. गुजराल ,  गणेश यादव,राम कृपाल यादव से लेकर डॉ. मीसा भारती तक, और श्याम रजक, उदय मांझी से लेकर गोपाल रविदास तक—जब भी हमारे प्रत्याशियों के सिर जीत का सेहरा बंधा, उस जीत की बुनियाद हमारे साथियों के पसीने और खून से रची गई थी। लेकिन इस जीत का हिसाब-किताब बहुत महँगा रहा। ​कुर्बानी की लंबी फेहरिस्त ​सामाजिक न्याय का झंडा बुलंद करना इस इलाके में सीधे मौत को आमंत्रण देने जैसा था। हमारे तीन साथी—भोला यादव, रंजीत यादव और नीरज महतो (मुखिया) ने अपनी जान की आहुति देकर यह साबित किया कि आदर्शों की कीमत क्या होती है। मुझे आज भी वह दिन याद है जब मैं और अरुण यादव मौत के मुहाने से लौटकर आए थे; वह भाग्य ही था जिसने हमें बचा लिया। ​अब उस फेहरिस्त में दो और नाम जुड़ ...

भावपूर्ण श्रद्धांजलि ।। ​अपूरणीय क्षति: फरीदपुर ने खोया एक समर्पित जननेता !

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     नहीं रहे संजू यादव!  ​आज फरीदपुर सहित पूरे राजद (राष्ट्रीय जनता दल) परिवार के लिए एक अत्यंत दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। फरीदपुर के कर्मठ, जुझारू और लोकप्रिय राजद नेता संजू यादव जी का आज शाम अचानक दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया। इस हृदयविदारक समाचार से संपूर्ण क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। जिसने भी यह सुना, वह अपनी सुध-बुध खो बैठा; हर आंख नम है और हर दिल भारी है। ​दल और जनता के लिए आजीवन समर्पित ​संजू यादव जी केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता या नेता नहीं थे, बल्कि वे जनता के सच्चे सेवक थे। राष्ट्रीय जनता दल की नीतियों और सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा अटूट थी। ​आजीवन समर्पण: उन्होंने अपने जीवन का क्षण-क्षण दल की मजबूती और समाज के दबे-कुचले, शोषित वर्गों की आवाज बुलंद करने में लगा दिया। ​सादगी और सुलभता: फरीदपुर का हर आम और खास व्यक्ति उनके सरल स्वभाव, मिलनसारिता और हमेशा मदद के लिए तत्पर रहने के अंदाज का कायल था। उनका असमय चले जाना फरीदपुर की राजनीति और सामाजिक क्षेत्र के लिए एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। ​शब्दो...

डेटा दें, एआई लें !

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    ​भारत के पास एक ऐसा अमूल्य संसाधन है जिसकी अमेरिकी टेक कंपनियों को सबसे ज्यादा जरूरत है—उपयोगकर्ता डेटा !  भारत को अमेरिकी कंपनियों को अपने अत्याधुनिक एआई मॉडलों तक बिना किसी प्रतिबंध के पहुंच देने के बदले में ही अपना डेटा देना चाहिए। इसके लिए भारत 'डेटा स्थानीयकरण अधिदेश' जैसे कड़े नियमों का उपयोग एक सौदेबाजी के हथियार  के रूप में कर सकता है, ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी तकनीकी झटके या प्रतिबंध से देश के हितों की रक्षा की जा सके।

व्यवस्था की नाकामी से उपजा बाजार! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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   अक्षमता की अर्थव्यवस्था !  भारत में बुनियादी सरकारी और सार्वजनिक सुविधाओं (बिजली, पानी, हवा, शिक्षा) की कमी ने एक नए प्रकार के बाजार को जन्म दिया है। इसे 'अक्षमता की अर्थव्यवस्था' (Inefficiency Economy) कहते हैं। यहाँ अवसर विकास से नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामियों से पैदा होते हैं। ​पूरक बनाम सुधारात्मक खपत: यहाँ दो तरह के खर्चों में अंतर  हैं: ​आकांक्षी (Aspirational): जो जीवन को बेहतर बनाते हैं (जैसे रेफ्रिजरेटर या स्मार्टफोन)। ​क्षतिपूरक (Compensatory): जो किसी कमी को पूरा करने के लिए किए जाते हैं (जैसे इनवर्टर, वॉटर फिल्टर, एयर प्यूरिफायर)। ये उत्पाद असल में किसी बुनियादी विफलता (बिजली-पानी की कमी, प्रदूषण) को छिपाने का पैचवर्क (मरम्मत) मात्र हैं। ​अक्षमता की स्वीकृति और भ्रम: समय के साथ लोग इन कमियों को सामान्य मान लेते हैं। एक नए घर में इनवर्टर या प्यूरिफायर होना अब विलासिता नहीं, बल्कि मजबूरी बन चुका है। विज्ञापन और बाजार इस 'मरम्मत' को एक 'अपग्रेड' या प्रगति के रूप में बेचते हैं, जिससे हमें अपनी जेब से अतिरिक्त टैक्स जैसा महसूस नहीं होता। ​एक नई असमा...

​शिक्षा नीति और भाषा का बोझ: क्या तीन भाषाओं का फॉर्मूला सही है?

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     शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। ​शिक्षा का उद्देश्य छात्रों का मानसिक विकास करना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है, न कि उन पर अनावश्यक मानसिक दबाव डालना। हाल ही में सीबीएसई (CBSE) द्वारा कक्षा 9 और 10 के लिए 3-भाषा फॉर्मूला लागू करने के फैसले ने एक नई बहस छेड़ दी है। क्या बिना सोचे-समझे नीतियां थोपना हमारे देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है? आइए इस नीति के विभिन्न पहलुओं और इसकी कमियों को समझने की कोशिश करते हैं। ​1. छात्रों पर बढ़ता अकादमिक बोझ और बुनियादी कमियां ​कक्षा 9 और 10 के छात्र पहले से ही बोर्ड परीक्षाओं और बढ़ते पाठ्यक्रम के भारी दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे नाजुक मोड़ पर अचानक एक अतिरिक्त भाषा का बोझ डालना व्यावहारिक नहीं है। ​किसी भी नई भाषा को सीखने के लिए समय, निरंतरता और सही उम्र के अनुकूल तरीकों की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, देश के अधिकांश स्कूल पहले से ही योग्य भाषा शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। बिना तैयारी के इस तरह का कदम उठाना दूरदर्शिता की कमी को दर्शाता है। यही कारण है कि देश की सर्वोच्च अदालत ने भी इस कदम के खिलाफ एक जनहित याचिका...

एलन मस्क दुनिया का पहला 'खरबपति' (Trillionaire) बने!

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       हालिया आर्थिक बदलावों और तकनीकी क्रांति ने वैश्विक स्तर पर धन सृजन के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। एलन मस्क का दुनिया का पहला 'खरबपति' बनना केवल एक व्यक्ति की कामयाबी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक है कि वैश्विक पूंजीवाद का रुख अब पारंपरिक उद्योगों से हटकर भविष्य की अति-आधुनिक तकनीकों की ओर हो चुका है। ​मस्क की संपत्ति में यह अभूतपूर्व उछाल मुख्य रूप से अंतरिक्ष में बस्तियाँ बसाने उन्नत रोबोटिक्स , और टिकाऊ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में उनके दूरदर्शी निवेश का परिणाम है। यह विकास दिखाता है कि आने वाले समय में दुनिया के सबसे अमीर देश और व्यक्ति वे नहीं होंगे जो केवल पारंपरिक विनिर्माण या सेवाओं पर निर्भर हैं, बल्कि वे होंगे जो कल्पना को मूर्त संपत्तियों में बदलने की क्षमता रखते हैं। यह उपलब्धि धन और प्रगति की आकांक्षाओं को पुनर्परिभाषित करती है, जहाँ जोखिम लेने की असीमित क्षमता ही नए आर्थिक साम्राज्यों की नींव रख रही है। ​वैश्विक स्तर पर जब संपत्ति के नए शिखर छुए जा रहे हैं, तब भारत भी एक बेहद महत्वपूर्ण आर्थिक मोड़ पर खड़ा है। भारत वर्तमान में दुनिया की सबस...