पृथ्वी के फेफड़ों पर संकट: विरोधाभासी सम्मेलनों की निराशा

   


​जलवायु परिवर्तन और वनों की अंधाधुंध कटाई वर्तमान वैश्विक संकटों में सबसे आगे हैं। 

​सम्मेलनों का खोखलापन और विरोधाभास

एक महत्वपूर्ण सम्मेलन  जो लेम शहर में हुआ, जहाँ एक बड़ा विरोधाभास सामने आया। अमेज़न, जिसे 'पृथ्वी का फेफड़ा' कहा जाता है, उसके वनों की कटाई को रोकने का कोई साफ़ रास्ता अंतिम दस्तावेज़ में शामिल नहीं किया गया।

​यह स्थिति उस मरीज़ के समान है जिसे दिल का दौरा पड़ा हो, लेकिन चिकित्सक दवा देने के बजाय केवल "चर्चा करने" की बात कहे। जब अमेज़न का तीस फ़ीसद हिस्सा पहले ही नष्ट हो चुका है और वैश्विक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, तो ऐसे सम्मेलनों के निराशाजनक नतीजे यह साबित करते हैं कि हम 'चर्चा' के मायाजाल में फंसे हैं, जबकि 'कार्यवाही' की आवश्यकता है। जलवायु वैज्ञानिकों की चेतावनी कि 'समय अब नहीं बचा', इन निराशाजनक नतीजों के बावजूद अनसुनी की जा रही है।

​ विकास की अंधी दौड़: फैक्ट्री लगाने के लिए अंधाधुंध कटाई

​पर्यावरण को हो रहे इस नुकसान के पीछे एक प्रमुख कारण विकास की अंधी दौड़ है। बढ़ती हुई जनसंख्या और उपभोग की मांग को पूरा करने के लिए, सरकारें और निजी कंपनियाँ बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियों, उद्योगों और बुनियादी ढाँचों की स्थापना कर रही हैं।

​इन औद्योगिक इकाइयों को लगाने के लिए अक्सर घने जंगलों को साफ़ किया जाता है।

​भूमि अधिग्रहण: नई फैक्ट्री लगाने के लिए vast (विशाल) भूमि की आवश्यकता होती है, जिसके लिए सबसे आसान लक्ष्य वन क्षेत्र होते हैं, क्योंकि उन्हें 'उत्पादक' भूमि नहीं माना जाता।

​संसाधनों की पूर्ति: उद्योग लकड़ी, खनिज और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के लिए भी सीधे जंगलों पर निर्भर होते हैं, जिससे अवैध और अंधाधुंध कटाई को बढ़ावा मिलता है।

​नियमों की अनदेखी: पर्यावरण संरक्षण के कड़े नियम होने के बावजूद, अक्सर औद्योगिक दबाव और आर्थिक लाभ के कारण इन नियमों को दरकिनार कर दिया जाता है या उनका पालन ठीक से नहीं किया जाता।

​फैक्ट्री लगाने के नाम पर हो रही यह कटाई न केवल कार्बन उत्सर्जन को बढ़ाती है (क्योंकि पेड़ कार्बन सिंक होते हैं), बल्कि यह स्थानीय जैव विविधता को भी समाप्त करती है और आदिवासी समुदायों के जीवन-स्रोत को छीन लेती है। यह अल्पकालिक आर्थिक लाभ के लिए दीर्घकालिक पर्यावरणीय तबाही का सौदा है।

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