नकली बीज: सुरक्षा की ज़रूरत और किसानों की आशंकाएँ
भारत सरकार किसानों को नकली बीजों से बचाने के लिए एक नया कानून लाने पर विचार कर रही है। यह एक सराहनीय कदम है, विशेषकर यह देखते हुए कि कृषि में बीजों का योगदान कुल फसल उत्पादन का 15-20 प्रतिशत तक होता है। उच्च गुणवत्ता वाले बीजों तक पहुँच किसानों की आजीविका, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और समग्र कृषि अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक है।
नकली बीजों की समस्या मुख्य रूप से निम्न कारणों से पैदा हुई है:
आर्थिक लालच: मुनाफा कमाने की होड़।
कमजोर आपूर्ति श्रृंखला: बीजों के वितरण में पारदर्शिता और नियंत्रण की कमी।
ढीले नियम: मौजूदा कानूनी ढाँचे का अपर्याप्त होना या उनका सही से लागू न हो पाना।
किसानों में जागरूकता की कमी: सही और नकली बीज में पहचान की मुश्किल।
निश्चित रूप से, सरकार की मंशा पर संदेह करना हमेशा उचित नहीं है, लेकिन केवल कानून ला देना ही पर्याप्त नहीं होगा।
किसी भी नए कानून के संदर्भ में, सरकार को न केवल अपनी सुरक्षात्मक मंशा पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि किसानों की चिंताओं को सुनना, उनका समाधान करना और उनकी आशंकाओं को खत्म करना भी बेहद जरूरी है।
कानून बनाते समय इन बिंदुओं पर ध्यान देना आवश्यक है:
परिभाषा और दायरा: 'नकली बीज' की कानूनी परिभाषा क्या होगी? क्या यह परिभाषा इतनी व्यापक होगी कि सभी प्रकार की मिलावट और गुणवत्ताहीनता को कवर कर सके?
लागू करना (Enforcement): सबसे बड़ी चुनौती कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने में आती है। क्या सरकार के पास पर्याप्त और प्रशिक्षित जाँच एजेंसियाँ होंगी जो ग्रामीण स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित कर सकें?
किसानों पर प्रभाव: क्या इस कानून से छोटे बीज उत्पादकों और किसानों पर अनावश्यक नियामक बोझ (Regulatory Burden) तो नहीं बढ़ेगा? क्या बहुराष्ट्रीय बीज कंपनियों को एकाधिकार बनाने का मौका मिलेगा?
शिकायत निवारण तंत्र: किसानों के लिए त्वरित, सस्ता और सुलभ शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) कैसा होगा, जहाँ वे आसानी से नकली बीज की शिकायत कर सकें और मुआवजे की मांग कर सकें?
कानून का अंतिम उद्देश्य किसानों को राहत देना होना चाहिए, न कि उन्हें और अधिक कानूनी जटिलताओं में फँसाना। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि नया कानून कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बाधित न करे।
नकली बीजों की समस्या का स्थायी समाधान केवल एक मजबूत कानून से नहीं, बल्कि एक समग्र दृष्टिकोण से होगा, जिसमें शामिल हैं:
सख्त नियम: नियमों को सख्त करना और उनका कठोरता से पालन कराना।
तेज़ न्याय: नकली बीज बेचने वालों पर त्वरित और मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई।
जागरूकता अभियान: किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की पहचान करने और कानूनी सहायता के बारे में शिक्षित करना।
बीज ट्रैकिंग प्रणाली: बीज उत्पादन से लेकर किसान तक पहुँचने तक एक पारदर्शी डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली (जैसे QR कोड) विकसित करना।
यह कानून एक अवसर है कि हम न केवल किसानों को बचाएँ, बल्कि भारत की कृषि आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक विश्वसनीय और टिकाऊ बना सकें।

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