राजद के 'कर्मठ सारथी' का असमय प्रस्थान: एक व्यक्तिगत क्षति !-प्रो प्रसिद्ध कुमार।

    


​संजीव जी को भावभीनी श्रद्धांजलि !😢😢

​आज राजद परिवार ने केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक कर्मठ, कर्तव्यनिष्ठ और संवेदनशील सारथी को खो दिया है। राजद नेता संजीव जी का असमय जाना अत्यंत पीड़ादायक और हृदय विदारक है। सांसद डॉ. मीसा भारती के करीबी रिश्तेदार और पार्टी के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में, उनका निधन पूरे दल और उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानने वालों के लिए एक गहरा आघात है।

​यह क्षति उन लोगों के लिए और भी मर्माहत करने वाली है, जिन्होंने संजीव जी की कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदना को बहुत करीब से महसूस किया है।

​कर्तव्यनिष्ठा की वो अविस्मरणीय गाथा

​संजीव जी का जीवन यह दिखाता है कि एक सच्चा नेता न केवल बड़ी रैलियों में, बल्कि आम लोगों की मदद के लिए किए गए छोटे-से-छोटे प्रयासों में भी अपनी पूरी ऊर्जा लगा देता है।

एक वाकया उनकी कर्तव्यनिष्ठा और मित्रता का ऐसा प्रमाण है, जो शायद ही कभी देखने को मिलता है। जब वे जीवन और मृत्यु से जूझते हुए ऑपरेशन थियेटर में प्रवेश करने वाले थे, तब भी उन्होंने मेरे एक महत्वपूर्ण कार्य को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए, बिना किसी शिकायत के, मित्र के कड़े लहजे को भी स्वीकार किया। यह उनका अदम्य जज्बा था कि उन्होंने अपनी पीड़ा को छिपाकर भी, अपने कर्तव्य और मित्रता को निभाया। यह घटना दर्शाती है कि संजीव जी केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक सच्चे और समर्पित इंसान थे।

​'जनसेवक' संजीव: जब इंसाफ ने 24 घंटे में दस्तक दी

​संजीव जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी असाधारण जनसेवा की भावना थी। पटना में 18 अगस्त 2022 को सेना के जवान बबलू कुमार की हृदय विदारक हत्या के मामले में उनका प्रयास आज भी याद किया जाता है।

​जब मृतक के पिता, अमरनाथ यादव, न्याय की गुहार लगाते हुए तत्कालीन उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मिलने का हर संभव प्रयास कर रहे थे और निराशा हाथ लग रही थी, तब संजीव जी ही आशा की किरण बनकर सामने आए। उन्होंने अपनी करीबी का उपयोग किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि एक पीड़ित परिवार को तुरंत न्याय दिलाने के लिए किया।

​उनके एक फ़ोन कॉल और निष्ठापूर्ण प्रयास से तेजस्वी यादव से मुलाकात संभव हुई, जिसका परिणाम था – अपराधियों की 24 घंटे के अंदर गिरफ्तारी और शिनाख्त। यह त्वरित कार्रवाई संजीव जी के जज्बे, पहुंच और उनकी इस दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए।

​एक समर्पित मित्र और वक़ील का प्रस्थान

​संजीव जी का जाना राजद व मेरे लिए एक बड़ा शून्य है, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर यह उन लोगों के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिनके कार्यों और समर्पण की वकालत वे हमेशा करते थे।

​संजीव भाई, आपके जाने से राजद परिवार में मुझे इतने करीब से जानने वाले और मेरे कार्यों को वकालत करने वाले अब कोई नहीं रहे। आपका जुनून, आपका समर्पण, और आपकी मित्रता हमेशा याद रहेगी।

​भावपूर्ण श्रद्धांजलि! आपकी कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय सेवा का भाव सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

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