चुनौतियाँ: जीवन की अनिवार्य सच्चाई और सफलता की सीढ़ी।

   


​यह जीवन तरह-तरह के अवरोधों और मुश्किलों से भरा पड़ा है। हमारा मन अक्सर यह चाहता है कि प्रत्येक वस्तु हमें आसानी से प्राप्त हो जाए। हम सोचते हैं कि इसके लिए न तो हमें कोई चुनौती झेलनी पड़े और न ही कोई परिश्रम करना पड़े।

​परंतु, क्या जीवन में ऐसा हो पाना संभव है? इसका उत्तर है— बिल्कुल नहीं।

​सच्चाई यह है कि चुनौतियाँ तो जन्म के साथ ही या कई बार उससे पहले ही हमारे जीवन में प्रकट हो जाती हैं।

​चुनौतियाँ अनिवार्य हैं: ठीक जैसे एक बीज को फलदार वृक्ष बनने से पहले मिट्टी के दबाव और कठोरता को झेलना पड़ता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपनी क्षमताओं को पहचानने और अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए कठिनाइयों से गुज़रना पड़ता है।

​आसान राह, कमजोर मंज़िल: जिस राह पर कोई अवरोध नहीं होता, वह हमें कमज़ोर बना देती है। हम उस शक्ति और कौशल को विकसित नहीं कर पाते, जो मुश्किलों से जूझने पर प्राप्त होता है।

​परिश्रम सफलता की कीमत है: सफलता, चाहे वह छोटी हो या बड़ी, हमेशा परिश्रम की माँग करती है। यह परिश्रम ही है जो हमें हमारी मनचाही वस्तु की सही कीमत चुकाने का बोध कराता है, और उसकी प्राप्ति के बाद हमें एक गहरी संतुष्टि देता है।

​इसलिए, अगली बार जब कोई चुनौती सामने आए, तो उसे एक रुकावट नहीं, बल्कि अपने भीतर की शक्ति को जगाने का एक अवसर समझें। जीवन में परिश्रम से न घबराएं; क्योंकि परिश्रम ही वह चाबी है जो सफलता के ताले को खोलती है।

​याद रखें: बिना अग्नि परीक्षा के सोने में कभी चमक नहीं आती।

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