पुस्तकों का महत्व: ज्ञान की कुंजी और चिंतन का प्रकाश

   


​पुस्तकों की महिमा का बखान शब्दों में करना सूर्य को दीपक दिखाने जैसा है। यह केवल कागज और स्याही का संग्रह नहीं, अपितु ज्ञान का अक्षय भंडार और मानव सभ्यता का मेरुदंड हैं। ये हमें केवल सूचना ही नहीं देतीं, बल्कि हमारी चेतना को विस्तृत करती हैं और हमें सोचने का तरीका सिखाती हैं।

पुस्तकें हमें गहराई से किसी और के दृष्टिकोण से दुनिया देखने की क्षमता प्रदान करती हैं। वे एक खिड़की हैं, जो हमें भिन्न-भिन्न युगों, संस्कृतियों और विचारों की यात्रा कराती हैं। जब हम किसी कहानी या निबंध में डूबते हैं, तो हम अनजाने में ही 'डीप लर्निंग' की प्रक्रिया में संलग्न हो जाते हैं। यह प्रक्रिया मस्तिष्क के उन हिस्सों को सक्रिय करती है जो सहानुभूति, स्मृति और आलोचनात्मक सोच से जुड़े हैं।

​पुस्तकों का एक महत्वपूर्ण कार्य स्मृति को सहेजना है। वे इतिहास, दर्शन और विज्ञान की अमूल्य धरोहर को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं। यदि पुस्तकें न होतीं, तो मानव जाति अपने अतीत के अनुभवों से वंचित रह जाती और हर बार नए सिरे से शुरुआत करने को विवश होती। वे हमारे सामूहिक विवेक को संचित करती हैं।

​साहित्यिक कृतियाँ हमारी कल्पना को पंख देती हैं। वे हमें यथार्थ की सीमाओं से परे ले जाती हैं और नए विचारों तथा रचनात्मकता के लिए उर्वर भूमि तैयार करती हैं। एक अच्छी पुस्तक पढ़ने वाले के मन में नए संसार रचती है, जो उसे जीवन की एकरसता से ऊपर उठकर सोचने की प्रेरणा देता है। वे एक अदृश्य मार्गदर्शक की तरह हैं जो हमें जीवन के रहस्यों को समझने में सहायता करती हैं।

 पुस्तकें जीवन का सारथी हैं। वे अंधकार में प्रकाश, निराशा में आशा और भ्रम में स्पष्टता लाती हैं। उनकी उपयोगिता मात्र जानकारी तक सीमित नहीं, बल्कि वे चरित्र निर्माण, मानवीय मूल्यों का विकास और सभ्य समाज की स्थापना का आधार हैं। इसलिए, पुस्तकों को केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सीखने का माध्यम समझना चाहिए।

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