​नाट्य समीक्षा: 'बिदेसिया' ने जीवंत की पलायन और विरह की मार्मिक पीड़ा !-प्रो प्रसिद्ध कुमार।

   





​21 दिसम्बर को  खगौल के बालिगा विद्यालय स्थित रंगमंच  पर नाट्य संस्था 'सूत्रधार' द्वारा लोकनायक भिखारी ठाकुर की अमर कृति 'बिदेसिया' का भव्य मंचन किया गया। वरिष्ठ रंग निर्देशक नवाब आलम के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने न केवल लोक संस्कृति की खुशबू बिखेरी, बल्कि दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोर कर रख दिया।

​कथानक: प्रेम, प्रतीक्षा और द्वंद्व की गाथा

​नाटक की कहानी एक ऐसे युवा (बिदेसी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी के तुरंत बाद रोजगार की तलाश में अपनी पत्नी 'प्यारी सुंदरी' को छोड़कर कलकत्ता चला जाता है। वर्षों के लंबे इंतजार और विरह की पीड़ा के बीच कहानी में तब नया मोड़ आता है, जब एक राहगीर (बटोही) के जरिए उसे संदेश भेजा जाता है।

​कलकत्ता के ग्लैमर में फंसा बिदेसी वहां 'धानिया' नाम की स्त्री से दूसरी शादी कर लेता है। नाटक का अंतिम पड़ाव बेहद संवेदनशील है, जहाँ अंततः दोनों पत्नियों के बीच टकराव और फिर आपसी सहमति के साथ रहने के फैसले से नाटक एक सकारात्मक संदेश के साथ समाप्त होता है।

​कलाकारों का प्रदर्शन और निर्देशन

​मुख्य भूमिकाएं: युवा अभिनेता चैतन्य निर्भय ने 'बिदेसी' के किरदार में पलायन की दुविधा को बखूबी जिया। वहीं, साधना श्रीवास्तव ने 'प्यारी सुंदरी' के रूप में विरह और प्रतीक्षा के भावों को इतनी शिद्दत से उतारा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।

​सह-कलाकार: धानिया के रूप में शालिनी श्रीवास्तव और बटोही के रूप में अंबुज कुमार ने शानदार अभिनय किया। सूत्रधार के रूप में अनिल सिंह और सुंदरम राज ने नाटक की निरंतरता बनाए रखी।

​निर्देशन: नवाब आलम का निर्देशन सधा हुआ था, जिन्होंने लोक परंपराओं को आधुनिक रंगमंच के अनुशासन के साथ सफलतापूर्वक जोड़ा।

​संगीत और तकनीकी पक्ष

​भिखारी ठाकुर के नाटकों की आत्मा उनका लोक संगीत होता है। इस प्रस्तुति में अखिलेश सिंह, कुमार नरेंद्र और उनकी टीम ने हारमोनियम, नाल और झाल की थाप पर लोक धुनों को जीवंत कर दिया।

​नेपथ्य:  कार्यक्रम संयोजक प्रो प्रसिद्ध कुमार , जयप्रकाश मिश्रा (मेकअप), आसिफ हसन (मंच सामग्री) और अरुण सिंह (प्रकाश व्यवस्था) ने नाटक के माहौल को वास्तविक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

​'बिदेसिया' का यह मंचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज के उस पुराने जख्म को कुरेदने जैसा है जो आज भी 'पलायन' के रूप में मौजूद है। सशक्त अभिनय, मर्मस्पर्शी संवाद और कर्णप्रिय लोक संगीत ने मिलकर इस शाम को खगौल के दर्शकों के लिए यादगार बना दिया।

​प्रस्तुति विवरण:

​लेखक: भिखारी ठाकुर

​निर्देशक: नवाब आलम

​आयोजक: नाट्य संस्था 'सूत्रधार', खगौल


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