अक्षरों का इंद्रधनुष: जब कलम बनी प्रकृति के हुनर की तूलिका



    

​कहते हैं कि शब्द केवल भाव नहीं व्यक्त करते, वे अपने स्वरूप में कलाकार के व्यक्तित्व का दर्पण भी होते हैं। नेपाल की वादियों से निकली एक सोलह वर्षीया बालिका, प्रकृति मल्ला, ने इस कथन को न केवल सत्य सिद्ध किया, बल्कि अपनी लेखनी से विश्व पटल पर विस्मय का एक नया अध्याय लिख दिया। जहाँ आज की डिजिटल दुनिया में कीबोर्ड की खटखटाहट ने कलम की सरसराहट को गौण कर दिया है, वहाँ प्रकृति की लिखावट किसी प्राचीन शिलालेख की गरिमा और आधुनिक चित्रकला की सुघड़ता का अनूठा संगम बनकर उभरी है।

​साधना की स्याही, धैर्य का कागज़

​प्रकृति की उत्तर-पुस्तिका केवल उत्तरों का संग्रह नहीं, बल्कि एकाग्रता की एक जीवंत कविता है। जब उनकी कलम कागज़ का स्पर्श करती है, तो अक्षर मानों एक अनुशासनबद्ध पंक्ति में नृत्य करने लगते हैं। न कोई कांट-छांट, न कोई विचलन—बस एक निरंतर प्रवाह। उनकी लिखावट को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी दक्ष शिल्पी ने संगमरमर पर महीन नक्काशी की हो। जिसे दुनिया 'ग्लोबल सेंसेशन' कह रही है, वह वास्तव में वर्षों के मौन अभ्यास और धैर्य की पराकाष्ठा है।

​सादगी में छिपा सौंदर्य

​इस गौरवमयी उपलब्धि के पीछे न तो कोई बहुमूल्य फाउंटेन पेन था और न ही कोई विशेष चर्मपत्र। यह एक साधारण छात्रा की अपनी कला के प्रति अटूट श्रद्धा थी। परीक्षा के उस तनावपूर्ण वातावरण में, जहाँ अधिकांश विद्यार्थी समय की कमी से जूझते हैं, प्रकृति ने अपनी लेखनी से शांति और सौंदर्य का सृजन किया। उनकी हस्तलिपि की तुलना कंप्यूटर के 'फॉन्ट' से की जाने लगी, किंतु मशीन की उस निर्जीव शुद्धता और प्रकृति के हाथों की सजीव कलाकारी में एक बड़ा अंतर है—वह है आत्मा का जुड़ाव।

​"अक्षर जब हृदय की गहराई से निकलते हैं, तो वे केवल पढ़े नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं।"

​एक वैश्विक प्रेरणा

​आज प्रकृति मल्ला केवल नेपाल की पहचान नहीं, बल्कि दुनिया भर के उन करोड़ों विद्यार्थियों के लिए एक मशाल हैं जो मानते हैं कि महानता केवल बड़े संसाधनों से आती है। उनकी वायरल हुई तस्वीरों ने यह संदेश दिया है कि यदि एकाग्रता हिमालय जैसी अडिग हो, तो साधारण सा दिखने वाला पेन भी इतिहास की इबारत लिख सकता है। उन्हें मिला 'ग्लोबल एप्रिसिएशन' इस बात का प्रमाण है कि श्रेष्ठता कभी सीमाओं की मोहताज नहीं होती।

प्रकृति मल्ला की यह कहानी हमें सिखाती है कि हमारी हर छोटी क्रिया—यहाँ तक कि एक अक्षर का घुमाव भी—यदि पूर्ण तन्मयता से किया जाए, तो वह विश्व को चकित करने की सामर्थ्य रखता है। यह आलेख उन हाथों को नमन है, जिन्होंने स्याही के माध्यम से सभ्यता और सौंदर्य को एक नए धरातल पर प्रतिष्ठित किया है।

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