बजट 2026: भारत की 3 मुख्य व्यापक आर्थिक चिंताएं !



1. नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) की सुस्त वृद्धि दर

​ बजट निर्माण के लिए 'वास्तविक जीडीपी' (Real GDP) के बजाय नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) अधिक महत्वपूर्ण होती है क्योंकि सरकार के राजस्व अनुमान इसी पर आधारित होते हैं।

​चुनौती: भारत की Nominal GDP वृद्धि दर में गिरावट देखी जा रही है। वित्त वर्ष 2026 के लिए यह लगभग 8% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है।
​प्रभाव: यदि Nominal GDP कम रहती है, तो सरकार का कर संग्रह (Tax collection) भी कम हो जाता है, जिससे राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है।

2. कमजोर कर उत्प्लावकता (Weak Tax Buoyancy)

​कर उत्प्लावकता वह अनुपात है जो बताता है कि जीडीपी में बदलाव के साथ कर राजस्व में कितना बदलाव आता है।

​चुनौती: कर संग्रह (विशेषकर कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत आयकर) बजट अनुमानों से कम रहा है।
​परिणाम: कर राजस्व में कमी के कारण सरकार को या तो बाजार से अधिक ऋण (Borrowing) लेना पड़ता है या फिर रक्षा, अनुसंधान (R&D) और सब्सिडी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खर्च में कटौती करनी पड़ती है।

3. निजी निवेश और पूंजी प्रवाह में गिरावट (Lagging Private Investment & Capital Inflows)

​अर्थव्यवस्था के दीर्घकालिक विकास के लिए निजी निवेश अनिवार्य है, लेकिन यहाँ दो नकारात्मक रुझान दिख रहे हैं:

​निजी कॉर्पोरेट निवेश: वित्त वर्ष 2019 और 2024 के बीच निजी क्षेत्र के सकल पूंजी निर्माण (Gross Capital Formation) में गिरावट आई है।
​पूंजी खाता संतुलन (Capital Account Balance): विदेशी पूंजी का प्रवाह कम हुआ है और मुद्रा (Rupee) के मूल्य में गिरावट (Depreciation) देखी गई है, जो बाहरी आर्थिक झटकों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।

Comments

Popular posts from this blog

डीडीयू रेल मंडल में प्रमोशन में भ्रष्टाचार में संलिप्त दो अधिकारी सहित 17 लोको पायलट गिरफ्तार !

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !

एक परिवार की पुकार: रामलड्डू की सकुशल वापसी के लिए सरकार से गुहार !😢प्रो प्रसिद्ध कुमार।