2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था: अवसर और सुधार की राह ! प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र, विभाग।

 


​वर्ष 2026 के लिए भारत के आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितताओं के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था एक बेहतर स्थिति में खड़ी नजर आती है। हालाँकि, इस मज़बूत आर्थिक गति को निरंतर बनाए रखने के लिए केवल संभावनाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा; इसके लिए ठोस नीतिगत सुधारों और घरेलू मोर्चे पर सक्रियता की आवश्यकता है।

​प्रमुख चुनौतियाँ और रणनीतिक लक्ष्य

​विकास की दर को स्थिर रखने के लिए निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना अनिवार्य है:

​घरेलू खपत में वृद्धि: बाहरी आर्थिक उतार-चढ़ाव से बचने के लिए देश के भीतर वस्तुओं और सेवाओं की मांग को बढ़ाना होगा।
​रोजगार सृजन: युवाओं के लिए नए अवसरों का निर्माण करना विकास की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
​राजकोषीय अनुशासन: राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) पर नियंत्रण रखकर ही लंबी अवधि की स्थिरता प्राप्त की जा सकती है।

​नई पीढ़ी के सुधार (Next-Gen Reforms)

​सिर्फ पारंपरिक सुधारों से काम नहीं चलेगा। अब समय 'नई पीढ़ी के सुधारों' का है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

​जीवन में आसानी -आम नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर बनाना।
​कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business): व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल और बाधा मुक्त बनाना।
​बुनियादी ढांचा: इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करना ताकि लॉजिस्टिक्स और परिवहन की लागत कम हो सके।
​प्रशासनिक सशक्तिकरण: शासन और प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना।

​भविष्य की दिशा

​आर्थिक मजबूती के लिए कृषि, बैंकिंग, परिवहन, दूरसंचार और बिजली जैसे बुनियादी क्षेत्रों के साथ-साथ रणनीतिक क्षेत्रों जैसे परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, पेट्रोलियम और खनिज क्षेत्रों में भी व्यापक सुधारों पर काम करना होगा।

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