जननायक की विरासत और तेजस्वी का संकल्प: "न कर्पूरी झुके, न लालू झुके, न तेजस्वी झुकेगा"
पटना के राजद राज्य कार्यालय में जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की 102वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह मात्र एक श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि सत्ता की दमनकारी शक्तियों के खिलाफ एक नए शंखनाद का केंद्र बन गई। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस मंच से स्पष्ट कर दिया कि जिस तरह जननायक और लालू प्रसाद यादव ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया, वही अडिगता अब उनके नेतृत्व में भी दिखेगी।
शोषितों और वंचितों के हक की लड़ाई का नया अध्याय
समारोह का उद्घाटन करते हुए तेजस्वी यादव ने बिहार की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज वे लोग सत्ता में बैठे हैं जो कर्पूरी जी के जीवनकाल में उन्हें अपशब्द कहा करते थे, लेकिन अब ढोंग की राजनीति कर रहे हैं।
ब्लॉग की मुख्य बातें:
- अडिग नेतृत्व: तेजस्वी यादव ने हुंकार भरते हुए कहा, "कर्पूरी जी नहीं झुके, लालू जी नहीं झुके और मैं भी नहीं झुकूँगा।" उन्होंने जोर दिया कि शोषित, वंचित और अल्पसंख्यक वर्गों के अधिकारों के लिए हर साजिश का डटकर मुकाबला किया जाएगा।
- लोकतंत्र बनाम धनतंत्र: उन्होंने एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में 'लोक' हारा है और 'तंत्र' जीता है। धनबल और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से चुनाव जीतने वाले आज जनता का सामना करने से डर रहे हैं, यही कारण है कि सत्ता पक्ष का जश्न उनके कार्यालयों की चारदीवारी तक ही सीमित रह गया।
- रोजगार और वादे: 100 दिनों की चुप्पी के बाद तेजस्वी ने सरकार से पूछा कि वादा की गई 1 करोड़ नौकरियों का क्या हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल भ्रम फैला रही है और उद्योग-धंधों के नाम पर बिहार में शून्य प्रगति हुई है।
- सुरक्षा पर सवाल: प्रदेश में बेटियों के साथ बढ़ती हिंसा और अपराध पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव के समय बिहार में डेरा डालने वाले मंत्री अब बिहार की चीखें क्यों नहीं सुन पा रहे हैं?
संगठन की मजबूती और भविष्य की रणनीति
तेजस्वी यादव ने केवल आलोचना ही नहीं की, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक रोडमैप भी तैयार किया:
- बूथ स्तर तक संगठन: बजट सत्र के बाद राजद बूथ स्तर पर नए संगठन का निर्माण करेगी।
- परिवारवाद पर प्रहार: भाजपा द्वारा नितिन नवीन को अध्यक्ष बनाए जाने पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या अब भाजपा को अपना परिवारवाद नहीं दिख रहा?
- आंदोलन का संकल्प: उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे नारों से आगे बढ़कर अन्याय के खिलाफ जमीनी स्तर पर संघर्ष शुरू करें।
"समय सब कुछ कराता है, और हम उस समय का सदुपयोग कर सत्ता में बैठे लोगों को बेचैन कर देंगे।" - तेजस्वी प्रसाद यादव

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