वायु प्रदूषण: मात्र पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि एक सामाजिक और स्वास्थ्य संकट !
आज के समय में वायु प्रदूषण भारत के लिए केवल एक वैज्ञानिक या पर्यावरणीय चर्चा का विषय नहीं रह गया है। यह एक गहरा सामाजिक और आर्थिक संकट बन चुका है, जो सीधे तौर पर गरीबी, असमानता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा है।
1. असमानता और प्रदूषण का प्रभाव
प्रदूषण की मार समाज के हर वर्ग पर एक समान नहीं पड़ती। गरीब बस्तियां, असंगठित क्षेत्र के मजदूर और सड़कों के किनारे रहने वाले लोग इसके सबसे बड़े शिकार हैं। उनके पास प्रदूषण से बचने के लिए महंगे एयर प्यूरीफायर या सुरक्षित वातावरण के साधन नहीं हैं, जिसके कारण वे सबसे अधिक स्वास्थ्य जोखिम झेलते हैं।
2. वित्तीय सहायता और स्वच्छ ऊर्जा की चुनौती
यदि वैश्विक वित्तीय सहायता केवल जीवाश्म ईंधन आधारित परियोजनाओं पर केंद्रित रही, तो भारत का 'स्वच्छ ऊर्जा अभियान' धीमा पड़ सकता है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने के लिए निवेश का रुख हरित ऊर्जा की ओर मोड़ना अनिवार्य है।
3. भविष्य के खतरे: जलवायु और स्वास्थ्य आपदा
यदि कोयला आधारित बिजली संयंत्र, भारी उद्योग और डीजल वाहनों पर निर्भरता कम नहीं की गई, तो इसके परिणाम दोहरे होंगे:
जलवायु संकट: वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम चक्र में बदलाव।
स्वास्थ्य आपदा: सांस की बीमारियाँ और फेफड़ों के गंभीर रोगों के कारण भारत एक स्थायी स्वास्थ्य आपातकाल की ओर बढ़ सकता है।

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