कोइलवर पुल: इंजीनियरिंग का कालजयी चमत्कार और सोन का गौरव !
बिहार की हृदयस्थली में सोन नदी के ऊपर शान से खड़ा कोइलवर पुल (अब्दुल बारी पुल) केवल ईंट, पत्थर और लोहे का ढांचा नहीं है, बल्कि यह 163 वर्षों के निरंतर इतिहास का साक्षी है। 1862 में निर्मित यह पुल आज भी आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए एक मिसाल बना हुआ है।
निर्माण और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस पुल की नींव 1856 में रखी गई थी। हालांकि, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के कारण इसके निर्माण में कुछ बाधाएँ आईं, लेकिन अंततः 15 जून 1862 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड एल्गिन ने इसका उद्घाटन किया।
डिजाइनर: जेम्स मीडोज रेंडेल और सर मैथ्यू डिग्बी वायट।
विशेषता: उस समय यह एशिया का सबसे लंबा पुल था और आज यह भारत का सबसे पुराना चालू 'रेल-सह-सड़क' (Rail-cum-Road) पुल है।
सामग्री: इसके निर्माण में उच्च कोटि के 'रोट आयरन' (Wrought Iron) का प्रयोग किया गया था, जिसकी मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डेढ़ सदी बीत जाने के बाद भी इसके पिलर अडिग हैं।
वास्तुकला की भव्यता (Double Decker Structure)
कोइलवर पुल अपनी दोहरी संरचना के लिए प्रसिद्ध है। यह एक डबल डेकर पुल है:
ऊपरी तल: यहाँ से हावड़ा-दिल्ली मुख्य रेल मार्ग की दोहरी पटरियाँ गुजरती हैं।
निचला तल: यह सड़क यातायात के लिए समर्पित है, जो आरा (भोजपुर) को राजधानी पटना से जोड़ता है।
यह पुल 1.44 किलोमीटर लंबा है और इसके नीचे बहती सोन नदी की विशालता इसे और भी मनोरम बनाती है। जॉर्ज टर्नबुल की 1851 की नोटबुक के अंश बताते हैं कि इस स्थान पर नदी की एक मील चौड़ाई को पाटना उस दौर की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक था।
सिनेमा और संस्कृति में स्थान
कोइलवर पुल की पहचान केवल परिवहन तक सीमित नहीं है। 1982 में रिलीज हुई और 8 ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली प्रसिद्ध फिल्म "गांधी" के एक महत्वपूर्ण दृश्य में इस पुल को दिखाया गया है, जिसने इसे वैश्विक पहचान दिलाई। स्वतंत्रता सेनानी प्रोफेसर अब्दुल बारी के सम्मान में इसका नाम 'अब्दुल बारी पुल' रखा गया।
आधुनिक नवीकरण और भविष्य
दानापुर रेल मंडल के अंतर्गत, सीनियर डीईएन श्री उत्पल कांत के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। वर्तमान में किए जा रहे प्रमुख कार्य:
एच-बीम स्लीपर (H-Beam Sleeper): पुराने स्लीपरों को हटाकर नए डिजाइन के मजबूत स्लीपर लगाए जा रहे हैं।
चेकर प्लेट: सड़क और पुल के हिस्सों पर लगी प्लेटों को बदला जा रहा है।
पेंटिंग और सुरक्षा: गर्डरों की पेंटिंग के साथ-साथ की-मैन द्वारा प्रतिदिन फिटिंग्स की जांच और 24 घंटे पेट्रोलिंग की जा रही है।
वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री अभिनव सिद्धार्थ के अनुसार, 160 वर्षों से अधिक की निर्बाध सेवा के बाद, यह नवीकरण सुनिश्चित करेगा कि पुल आने वाले कई दशकों तक अपनी सेवा देता रहे।


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