दोहरी मार: अमेरिका का आंतरिक संकट और भारत पर टैरिफ का प्रहार !

   


​आज अमेरिका एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहाँ उसकी आंतरिक विफलताएं और बाहरी व्यापारिक नीतियां आपस में टकरा रही हैं। हालिया आंकड़े और रिपोर्ट एक चौंकाने वाली सच्चाई बयान कर रहे हैं, जो न केवल अमेरिकी प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हैं, बल्कि भारत जैसे रणनीतिक साझेदारों के लिए भी आर्थिक चुनौतियां पेश कर रहे हैं।

​1. आंतरिक विफलता का 'प्रवासी' बहाना

​लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में यह विमर्श बनाया गया कि 'फेंटानिल' जैसे जानलेवा नशीले पदार्थों की बाढ़ के लिए प्रवासी जिम्मेदार हैं। लेकिन आंकड़ों का निष्पक्ष विश्लेषण इस मिथक को तोड़ता है। रिपोर्टों के अनुसार, फेंटानिल तस्करी में शामिल लोगों में से 75% से अधिक अमेरिकी नागरिक हैं, न कि प्रवासी।

​यह प्रशासन की एक बड़ी नीतिगत विफलता है। जब तस्करी 'अपने ही घर' के नागरिकों द्वारा की जा रही है, तो सीमाओं पर प्रवासियों को दोष देना केवल एक राजनीतिक ढाल नजर आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भी तस्करी के इन तरीकों में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया, जिससे स्पष्ट है कि समस्या 'बॉर्डर कंट्रोल' से कहीं अधिक 'आंतरिक निगरानी' और 'क्रिप्टोकरंसी' के अनियंत्रित इस्तेमाल की है।

​2. क्रिप्टोकरेंसी: तस्करी का नया हथियार

​नशीले पदार्थों के लेन-देन में आभासी मुद्रा (क्रिप्टोकरंसी) का बढ़ता उपयोग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। यह तकनीक तस्करों को गुमनामी प्रदान करती है, जिसे रोकने में अमेरिकी प्रशासन अब तक नाकाम रहा है। डिजिटल अर्थव्यवस्था की इस खामी ने ड्रग्स के अवैध कारोबार को और अधिक सुगम बना दिया है।

​3. भारत पर टैरिफ का बोझ: एक अनुचित दंड?

​एक तरफ अमेरिका अपने आंतरिक नशीले पदार्थों के संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर उसने भारत जैसे देशों पर भारी टैरिफ (सीमा शुल्क) का बोझ लाद दिया है।

​50% तक का टैरिफ: वर्ष 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को बढ़ाकर 50% तक कर दिया है। इसमें 25% 'पारस्परिक टैरिफ' और अतिरिक्त 25% 'रूसी तेल' के आयात से जुड़ी दंड स्वरूप ड्यूटी शामिल है।

​भारतीय निर्यात पर असर: इस नीति ने भारत के टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बुरी तरह प्रभावित किया है। सितंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में 15% से 20% की गिरावट दर्ज की गई है।

​फेंटानिल का बहाना: चिंताजनक बात यह है कि अमेरिका ने भारत पर भी फेंटानिल के 'प्रीकर्सर केमिकल्स' (कच्चा माल) की तस्करी का आरोप लगाकर इसे आर्थिक प्रतिबंधों और शुल्कों के लिए आधार बनाया है।

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