ट्रंप की ग्रीनलैंड महत्त्वाकांक्षा: कूटनीतिक दबाव और नव-साम्राज्यवाद का विश्लेषण !

 


​संसाधन बनाम सुरक्षा का तर्क: ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ग्रीनलैंड "सुरक्षा" के लिए आवश्यक है, लेकिन असली प्रेरणा वहां मौजूद विशाल प्राकृतिक संसाधन हैं। ग्रीनलैंड में ग्रेफाइट और टाइटेनियम जैसे 25 "महत्वपूर्ण कच्चे माल" मौजूद हैं जो सैन्य तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के लिए अनिवार्य हैं। यह सुरक्षा के नाम पर संसाधनों के दोहन की पुरानी साम्राज्यवादी नीति को दर्शाता है।
​आर्थिक ब्लैकमेल: डेनमार्क और यूरोपीय सहयोगियों पर 10% से 25% तक का आयात शुल्क लगाने की धमकी देना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मानदंडों का उल्लंघन है। यह दर्शाता है कि अमेरिका अपने रणनीतिक हितों को साधने के लिए वैश्विक व्यापार प्रणाली को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
​नाटो (NATO) और संप्रभुता का संकट: ग्रीनलैंड पहले से ही नाटो द्वारा संरक्षित है। ऐसे में अमेरिका का अतिरिक्त नियंत्रण चाहना रूस या चीन के प्रभाव को रोकने के बहाने अपनी भू-राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश है। डेनमार्क की संप्रभुता को दरकिनार करना 'नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था' के लिए एक बड़ा खतरा है।
​वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता: वाशिंगटन, मास्को या तेल अवीव जैसी शक्तियों द्वारा क्षेत्रीय संप्रभुता और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ भारत और चीन जैसे देशों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। यह "नव-साम्राज्यवादी" प्रवृत्तियों को रोकने के लिए अनिवार्य है।

Comments

Popular posts from this blog

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !

केवी स्कूल की छात्रा रास्ते से रहस्यमय परिस्थितियों में गायब, रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में मिले कपड़े और बस्ता! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

नेउरा-दनियावाँ रेल खंड: क्या बाबूचक-मोहम्मदपुर में बनेगा 'शहीद जयगोविंद सिंह यादव रेलवे स्टेशन'?