समाज और परिवार: व्यक्तित्व का असली दर्पण !

 


​अक्सर हम दुनिया को बदलने की चाह में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि हम उन लोगों को भूल जाते हैं जिन्होंने हमारे संसार की नींव रखी है—हमारा परिवार। समाज सेवा एक महान कार्य है, लेकिन यदि वह निजी जीवन की खोखली नींव पर टिकी हो, तो उसकी चमक फीकी पड़ जाती है।

​1. बुनियाद की मजबूती: परिवार

​जिस प्रकार एक विशाल वृक्ष को सहारा उसकी जड़ों से मिलता है, उसी प्रकार एक व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक संबल उसके परिवार से प्राप्त होता है। यदि हम अपने माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को 'निष्ठा' से नहीं निभाते, तो हमारा सामाजिक व्यक्तित्व केवल एक मुखौटा बनकर रह जाता है।

​2. बाहरी दुनिया बनाम आंतरिक सत्य

​छवि बनाना आसान है, लेकिन चरित्र निभाना कठिन। यदि हमारे रिश्तों में प्रेम, विश्वास और समर्पण की कमी है, तो समाज के लिए किया गया हर दान या सेवा एक 'छलावा' है। बाहरी प्रशंसा बटोरना सरल है, लेकिन अपनों की नजरों में सम्मान पाना ही वास्तविक सफलता है।

​3. संतुलन ही समाधान है

​समाज सेवा और पारिवारिक दायित्व एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।

​सच्ची सेवा: वह है जो व्यक्ति को घर में उदार बनाती है, ताकि वह बाहर भी वही संवेदनशीलता दिखा सके।
​ईमानदारी: यदि आप घर में शांति और प्रेम का वातावरण नहीं बना सकते, तो दुनिया को शांति का उपदेश देना व्यर्थ है।

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