सामाजिक सुरक्षा: अटल पेंशन योजना !

 


​भारत के असंगठित क्षेत्र के श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी होने के बावजूद यह वर्ग बुढ़ापे में सबसे अधिक असुरक्षित है।

प्रमुख बिंदु और सामाजिक विश्लेषण

​असंगठित क्षेत्र की व्यापकता: भारत के कुल कार्यबल का लगभग 85% से 93% हिस्सा असंगठित क्षेत्र में है। इसमें मजदूर, घरेलू कामगार, छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले शामिल हैं, जिन्हें नौकरी की सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा (ESI) या भविष्य निधि (PF) जैसे लाभ नहीं मिलते।
​योजना का विस्तार: केंद्र सरकार ने इस योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। यह दर्शाता है कि सरकार दीर्घकालिक सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
​आर्थिक सुरक्षा का आधार: 60 वर्ष की आयु के बाद 1,000 से 5,000 रुपये तक की गारंटीकृत मासिक पेंशन का प्रावधान है। यह राशि व्यक्ति द्वारा किए गए अंशदान (Contribution) पर निर्भर करती है। जनवरी 2026 तक लगभग 8.66 करोड़ लोग इससे जुड़ चुके हैं।

चुनौतियां और सामाजिक प्रभाव

​असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में पारिवारिक उपेक्षा एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। यह योजना उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करती है। हालाँकि इसमे कुछ महत्वपूर्ण बाधाएं हैं :

​जनता में जागरूकता की कमी।
​महंगाई के अनुपात में पेंशन राशि का सीमित होना।
​न्यूनतम आय वर्ग के लिए नियमित अंशदान जमा करने में आने वाली कठिनाइयाँ।

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