भारत को 'पैक्स सिलिका' के उच्च मंच पर क्यों शामिल होना चाहिए?

 


​उन्नत तकनीकों के वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका और रणनीतिक निर्णयों पर चर्चा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. अवसर और चुनौतियाँ

​वर्तमान में उन्नत तकनीकों पर वैश्विक सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। भारत इस नियम-निर्धारण चरण से बाहर रहने का जोखिम नहीं उठा सकता। भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाली 'पैक्स सिलिका' पहल में शामिल होने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

2. संप्रभुता बनाम कूटनीति

​रणनीतिक स्वायत्तता: नई दिल्ली में इस पहल को लेकर संप्रभुता संबंधी चिंताएं हैं, क्योंकि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखना चाहता है।
​राजनयिक परिणाम: हालांकि, इस निमंत्रण को ठुकराने से अमेरिका के साथ संबंधों में तनाव आ सकता है, जिससे उच्च शुल्क या व्यापार सौदों में बाधा जैसे परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

3. निर्भरता को कम करना

भारत को केवल एक निर्भरता (जैसे बीजिंग के खनिज प्रतिबंध) को दूसरी निर्भरता से नहीं बदलना चाहिए। इसके बजाय, भारत को:

​सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और AI पर अपनी घरेलू औद्योगिक नीति को मजबूत करना चाहिए।
​फ्रांस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विभिन्न भागीदारों के साथ त्रिपक्षीय संबंधों को गहरा करना चाहिए।

4. वैश्विक नेतृत्व की भूमिका

​आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच, भारत जैसे देशों की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत को उस मेज पर मौजूद होना चाहिए जहाँ नियम और मानक तय किए जाते हैं, ताकि वह विकासशील दुनिया की आवाज बन सके और यह सुनिश्चित कर सके कि उन्हें इस तकनीकी दौड़ में पीछे न छोड़ दिया जाए।

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