आयुष (AYUSH) क्षेत्र का कायाकल्प: बजट 2026-27 और भविष्य की राह !
हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 में आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। यह न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े निवेश का संकेत है, बल्कि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की एक सोची-समझी रणनीति भी है।
बजट की प्रमुख घोषणाएं और वित्तीय प्रोत्साहन
सरकार ने आयुष क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए बजट आवंटन में भारी वृद्धि की है:
कुल बजट: आयुष का कुल बजट बढ़कर ₹4,408 करोड़ हो गया है (जो पिछले वर्ष ₹3,992 करोड़ था)।
राष्ट्रीय आयुष मिशन: इसके बजट में 66% की भारी वृद्धि की गई है, जिससे यह अब ₹1,300 करोड़ का हो गया है।
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA): एम्स (AIIMS) की तर्ज पर तीन नए संस्थानों की स्थापना की घोषणा की गई है, जो शोध, शिक्षण और उपचार में स्वर्ण मानक स्थापित करेंगे।
भारत-यूरोपीय संघ (EU) मुक्त व्यापार समझौता और वैश्विक पहुंच
आयुष के लिए सबसे बड़ा 'गेम-चेंजर' भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) है। इसके दूरगामी लाभ निम्नलिखित हैं:
व्यवसाय की सुगमता: अब भारतीय आयुष चिकित्सक उन यूरोपीय देशों में अपनी सेवाएं दे सकेंगे जहां पारंपरिक चिकित्सा पर कड़े प्रतिबंध नहीं हैं।
प्रयोगशालाओं की मान्यता: भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे की लैब रिपोर्ट और सुरक्षा प्रमाणपत्रों को मान्यता देंगे, जिससे भारतीय उत्पादों का निर्यात आसान होगा।
TKDL की सुरक्षा: 'पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी' (TKDL) के माध्यम से भारतीय नुस्खों पर विदेशी कंपनियों द्वारा गलत तरीके से पेटेंट लेने पर रोक लगेगी।
नवाचार और तकनीक का समावेश
सरकार केवल पुरानी पद्धति पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक तकनीक से भी जोड़ रही है:
Bharat-VISTAAR: किसानों को औषधीय पौधों की खेती के लिए वास्तविक समय (real-time) सलाह देने हेतु एक बहुभाषी AI सहायक पेश किया गया है।
प्रयोगशालाओं का उन्नयन: औषधियों के परीक्षण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आयुष फार्मेसियों और ड्रग-टेस्टिंग लैब को अपग्रेड किया जा रहा है।
चुनौतियां और आलोचनात्मक पक्ष
सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि आधुनिक चिकित्सा समुदाय (विशेषकर IMA) कुछ मुद्दों पर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहा है:
'मिक्सोपैथी' का विवाद: आयुर्वेद के स्नातकोत्तर छात्रों को सर्जरी (शल्य चिकित्सा) की अनुमति देने पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। उनका तर्क है कि सर्जरी के लिए जिस गहन शारीरिक ज्ञान और एनेस्थीसिया की आवश्यकता होती है, वह पारंपरिक पाठ्यक्रम में पर्याप्त नहीं है।
वैज्ञानिक प्रमाणिकता: आलोचकों का मानना है कि कई आयुष उपचारों में आधुनिक चिकित्सा जैसे कठोर नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) का अभाव है।
भारी धातुओं की उपस्थिति: कुछ उत्पादों में लेड (Lead) और मरकरी (Mercury) जैसे तत्वों की मौजूदगी वैश्विक बाजार में भारत की छवि को प्रभावित करती है।

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