तकनीकी संपन्नता और मानवीय संवेदनाओं का ह्रास !
आज के युग में तकनीकी संसाधनों की प्रचुरता ने ज्ञान के द्वार तो खोल दिए हैं, लेकिन मानवीय संबंधों की गहराई को सोख लिया है। "युवा वर्ग जानकारी से तो भरा है, पर भावनात्मक संचार से शून्य है", आधुनिक समाज की एक गंभीर व्याधि की ओर इशारा करता है।
1. सूचना का विस्फोट बनाम संवेदना का अभाव
इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण आज की युवा पीढ़ी 'इंफॉर्मेशन ओवरलोड' (सूचना के अतिरेक) का शिकार है। उनके पास हर विषय पर डेटा है, लेकिन उस डेटा को संवेदना में बदलने का समय नहीं है।
2. उपदेश की निष्फलता
युवाओं को 'उपदेश' से नहीं सुधारा जा सकता। वे तकनीकी रूप से इतने जागरूक हैं कि वे किसी भी तर्क के नकारात्मक और सकारात्मक प्रभाव को पहले से जानते हैं।
3. सहानुभूति और समझ: एकमात्र समाधान
आलोचनात्मक दृष्टि से देखें तो, तकनीकी अलगाव का इलाज तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय है।

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