डिजिटल साक्षरता: सूचना के जाल से विवेक की पहचान तक !

 



​आज के दौर में सोशल मीडिया केवल संवाद का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसी अदृश्य शक्ति बन चुका है जो हमारे विचारों, प्राथमिकताओं और दृष्टिकोण को नियंत्रित कर रहा है। सुबह उठते ही स्मार्टफोन की स्क्रीन पर आने वाली सूचनाएं तय करती हैं कि आज हम किस विषय पर चर्चा करेंगे और किसे अपना समर्थन देंगे। लेकिन क्या यह सूचना प्रवाह हमेशा शुद्ध होता है?

​धुंधली होती सत्य की रेखा

​सूचना के इस महासागर में सत्य और भ्रम तथा तथ्य और अफवाह के बीच का अंतर मिटता जा रहा है। 'फर्जी खबरों' (Fake News) के इस दौर में एक झूठ को इतनी बार और इतनी खूबसूरती से परोसा जाता है कि वह सच जैसा दिखने लगता है। यह स्थिति न केवल व्यक्तिगत निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे समाज के ताने-बाने को भी अस्थिर कर सकती है।

​डिजिटल साक्षरता की नई परिभाषा

​अक्सर हम कंप्यूटर चलाना या इंटरनेट का उपयोग कर लेना ही 'डिजिटल साक्षरता' मान लेते हैं। लेकिन वास्तव में, आज इसकी परिभाषा बदल चुकी है:

  • मीडिया साक्षरता: यह समझना कि परोसी गई सूचना का स्रोत क्या है और उसका उद्देश्य क्या हो सकता है।
  • आलोचनात्मक विवेक: किसी भी जानकारी पर आंख मूंदकर विश्वास करने के बजाय तर्क की कसौटी पर उसे कसना।
  • तथ्य-जांच (Fact-Checking): साझा करने (Share) से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि करना।

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