फार्मा और MSME क्षेत्र में नई क्रांति: 'मेक इन इंडिया' को मिली गति!
हाल के नीतिगत निर्णयों ने भारत के विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र, विशेषकर दवा उद्योग में एक नई ऊर्जा भर दी है। सरकार द्वारा जेनेरिक दवाओं के उत्पादन और छोटे उद्योगों को दी जा रही प्राथमिकता से आर्थिक विकास के नए द्वार खुलते नजर आ रहे हैं।
1. जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में वृद्धि
बजट और सरकारी योजनाओं में विनिर्माण क्षेत्र के अंतर्गत जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। यह दवा क्षेत्र (Pharma Sector) के लिए अत्यंत उत्साहजनक है, क्योंकि इससे न केवल दवाओं की लागत कम होगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की "दुनिया की फार्मेसी" वाली छवि और मजबूत होगी।
2. MSME के लिए वित्तीय प्रोत्साहन
MSME क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसे सशक्त बनाने के लिए दो प्रमुख वित्तीय घोषणाएं की गई हैं:
3. छोटे शहरों का विकास और 'मेक इन इंडिया'
इन योजनाओं का सबसे सकारात्मक प्रभाव छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3 शहरों) पर पड़ेगा।

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