भारतीय रुपया: वैश्विक उथल-पुथल के बीच संकेत या अस्थायी विचलन? -प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र विभाग.

 





वर्तमान में पश्चिम एशिया के युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 7% से अधिक की विकास दर पर टिकी हुई है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में रुपये के मूल्य में आई 10.6% की गिरावट ने विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। यह स्थिति 'टेपर टेंट्रम' (2013-14) की याद दिलाती है, लेकिन क्या वर्तमान गिरावट भारत की आर्थिक कमजोरी का संकेत है या केवल एक बाजार विकृति?

1. गिरावट के प्रमुख कारण और चिंताएं

पोर्टफोलियो बहिर्वाह: वित्त वर्ष 2026 में 16.4 बिलियन डॉलर की निकासी हुई है, जो पिछले 28 वर्षों में सर्वाधिक है।

भुगतान संतुलन (BoP) घाटा: भारत को लगातार तीन वर्षों (वित्त वर्ष 2025 से) BoP घाटे का सामना करना पड़ सकता है, जो 1991 के बाद पहली बार पूंजी और चालू खाता दोनों में घाटे की संभावना को दर्शाता है।

व्यापार घाटा: सेवाओं के निर्यात में वृद्धि के बावजूद, आयात बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ा है।

2. अर्थव्यवस्था के मजबूत पक्ष

भारत का चालू खाता घाटा (CAD) वित्त वर्ष 2027 में भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1.5% से नीचे रहने का अनुमान है, जो इसे सुरक्षित दायरे में रखता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास लगभग 700 बिलियन डॉलर का पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जो किसी भी सट्टेबाजी या संकट की स्थिति में बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए सक्षम है।

3. भविष्य की रणनीति और समाधान

लक्ष्य आधारित बांड: भारतीय प्रवासियों (Diaspora) के लिए लक्षित बांड जारी  करना चाहिए. ताकि विदेशी मुद्रा के प्रवाह को स्थिर किया जा सके।

वैकल्पिक भुगतान प्रणाली: वैश्विक स्तर पर डॉलर के प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए 'BRICS+' मुद्रा और क्षेत्रीय मुद्राओं (जैसे SFMS, CIPS) के माध्यम से व्यापार के निपटान पर जोर देना चाहिए ।

प्रौद्योगिकी का उपयोग: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में टोकनइजेशन और 'डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर सिस्टम' (Blockchain) को अपनाना 'ग्लोबल साउथ' के लिए एक सशक्त कदम हो सकता है। 

रुपये की वर्तमान गिरावट केवल घरेलू कारकों से नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और डॉलर की मजबूती से प्रेरित है। भारत की व्यापक आर्थिक बुनियादी बातें (Macro fundamentals) अभी भी मजबूत हैं। भविष्य में आत्मनिर्भर भुगतान प्रणालियों और रणनीतिक विदेशी निवेश के माध्यम से रुपया पुनः अपनी स्थिति सुदृढ़ कर सकता है। 

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