हॉर्मुज जलडमरूमध्य का 'झंडा खेल': जब पाकिस्तान बना अमेरिका का रक्षक!

 





      


हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। यह खबर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों में एक नया और अजीबोगरीब मोड़ पेश करती है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने ईरान को भेजे गए एक कथित 'तोहफे' के जरिए अमेरिका की मदद की है। 

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए दुनिया का सबसे संवेदनशील रास्ता माना जाता है—वहां अमेरिका के दस जंगी जहाज फंस गए थे या उन्हें निकलने में भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में पाकिस्तान ने एक अनोखी तरकीब अपनाई:

पहचान छुपाना: अमेरिकी युद्धपोतों पर पाकिस्तानी झंडे लगाए गए।

सुरक्षित रास्ता: पाकिस्तानी झंडे की आड़ में इन जहाजों को ईरानी रडार और चुनौती से बचाते हुए हॉर्मुज से बाहर निकाला गया।

दोहरे सवाल, दोहरी पोल

यह घटना केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि कूटनीतिक रूप से कई राज खोलती है:

पाकिस्तान की दोहरी चाल: एक तरफ ईरान के साथ मधुर संबंधों का प्रदर्शन और दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से अमेरिका को "एग्जिट रूट" देना। यह पाकिस्तान की उस रणनीति को उजागर करता है जहाँ वह एक साथ दो नावों की सवारी करने की कोशिश करता है।

अमेरिका की 'अजेय' छवि पर चोट: दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति और उसकी आधुनिक नौसेना को एक संकरे समुद्री रास्ते से निकलने के लिए किसी दूसरे देश के झंडे का सहारा लेना पड़ा? यह अमेरिका की 'दुर्जेयता' (Invincibility) के दावे पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

"जोश में होश कहाँ?" — यह कहावत इस स्थिति पर सटीक बैठती है। अपनी ताकत के जोश में अक्सर महाशक्तियां जमीनी हकीकतों को भूल जाती हैं, जिसका नतीजा ऐसी शर्मिंदगी भरी गुप्त मदद के रूप में सामने आता है। 

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