राजनीति की विडंबना: 'बलि' दे दी जिसने जीवन की, उसे अपनों ने ही भुलाया! 😂

 





एक कर्मठ राजद कार्यकर्ता और मिलनसार व्यक्तित्व का असमय अंत

राजनीति का सफर अक्सर चमक-धमक और नारों के बीच गुम हो जाता है, लेकिन इसकी असल शक्ति वे कार्यकर्ता होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के अपना पूरा जीवन पार्टी और समाज की सेवा में लगा देते हैं। फुलवारी प्रखंड के मैनपुर अन्दा पंचायत (बोधागावाँ) के निवासी, 55 वर्षीय शंभु उर्फ बलि यादव एक ऐसे ही कर्मठ और समर्पित व्यक्तित्व थे, जिनका असमयिक निधन समाज और राजद परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

भक्ति से मौत तक का सफर

मृत्यु भी कितनी क्रूर होती है कि जिस क्षण इंसान ईश्वर की भक्ति में लीन होकर निकलता है, वही क्षण उसका आखिरी बन जाता है। एक सप्ताह पूर्व बलि यादव जी गांव के मंदिर में रामायण गाकर बाहर निकले थे। भक्ति के उन पवित्र सुरों के साथ जैसे ही वे सड़क पर आए, शिवाला-नौबतपुर मार्ग पर एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। उस भीषण टक्कर ने न केवल एक हंसते-खेलते इंसान की जान ले ली, बल्कि एक पूरे परिवार और मित्र मंडली से उनका 'बड़ा भाई' छीन लिया।

मिलनसार व्यक्तित्व और सांस्कृतिक लगाव

बलि यादव जी केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, बल्कि वे गांव की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक भी थे। एक कुशल ढोलक वादक के रूप में उनकी एक अलग पहचान थी। उनका मिलनसार स्वभाव ऐसा था कि जो भी उनसे मिलता, उनका होकर रह जाता। उनके साथ बिताए गए पल, बाइक पर खगौल तक का वह सफर और उनका बड़े भाई जैसा स्नेह अब बस यादों का हिस्सा बनकर रह गया है।

उपेक्षा का दर्द: राजनीति की कड़वी सच्चाई

बलि यादव जी के निधन के बाद स्थानीय नेताओं जैसे पूर्व प्रखंड अध्यक्ष ध्रुव यादव, दिनेश रजक और अरुण यादव ने तो अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और शोक व्यक्त किया, लेकिन सत्ता और पद की राजनीति करने वाले जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

"क्या एक कार्यकर्ता की निष्ठा का मूल्य इतना कम है कि उसके अंतिम समय में जनप्रतिनिधियों के पास दो पल का समय भी नहीं? यही है राजनीति में जीवन खपाने की वह कड़वी मजदूरी, जहाँ इंसान सेवा करते-करते मिट जाता है, लेकिन रसूखदारों को याद तक नहीं रहता।"

शंभु उर्फ बलि यादव जी का जाना यह याद दिलाता है कि ज़मीनी कार्यकर्ता ही संगठन की असली रीढ़ होते हैं। उन्हें सम्मान न देना न केवल उस व्यक्ति का अपमान है, बल्कि उस निष्ठा का भी तिरस्कार है जिसके दम पर नेता चुनाव जीतते हैं।

विनम्र श्रद्धांजलि! ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति दें। 

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