होर्मुज का दांव: ईरान की जवाबी घेराबंदी और वैश्विक संकट!
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण आलेख.
हाल के हफ्तों में ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों ने क्षेत्र के समीकरण बदल दिए हैं। हजारों मिसाइलों और बमों के गिरने तथा नेतृत्व को भारी क्षति पहुँचने के बावजूद, ईरान ने घुटने टेकने के बजाय एक ऐसा कार्ड खेला है जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है: होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी।
रणनीतिक बढ़त और 'एरिया डिनायल'
ईरान ने दशकों से अपनी रक्षा नीति को 'असममित युद्ध' (Asymmetric Warfare) के इर्द-गिर्द बुना है। वह जानता है कि सैन्य रूप से वह अमेरिका से काफी कमजोर है, इसलिए उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को अपनी ढाल बनाया है।
भौगोलिक स्थिति: 104 मील लंबा यह जलमार्ग ओमान की खाड़ी को फारस की खाड़ी से जोड़ता है। इसका सबसे संकरा हिस्सा मात्र 24 मील चौड़ा है, और गहरा पानी ईरानी क्षेत्र में होने के कारण जहाजों को वहां से गुजरना ही पड़ता है।
आर्थिक प्रभाव: दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस और एक-तिहाई उर्वरक इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इसे बंद किए जाने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं और विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह 150 डॉलर तक पहुँच सकती हैं।
कानूनी और तकनीकी पेच
ईरान अपनी इस कार्रवाई को न्यायसंगत ठहराने के लिए 1936 के 'मॉन्ट्रो कन्वेंशन' (Montreux Convention) जैसे सिद्धांतों का हवाला दे रहा है, जो युद्ध के समय शत्रु जहाजों को रोकने की अनुमति देते हैं। इसके अतिरिक्त, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों (Mines) का खतरा इतना अधिक है कि एक भी दुर्घटना शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम को आसमान पर पहुँचा सकती है। अमेरिका के पास वर्तमान में इन सुरंगों को हटाने के लिए पर्याप्त संख्या में माइनस्वीपर्स (Minesweepers) मौजूद नहीं हैं।
राजनयिक गतिरोध और भविष्य की राह
सैन्य हमलों के बावजूद ईरान वार्ता की मेज पर आने को तैयार नहीं है। वह अब अमेरिका से भविष्य में किसी भी हमले के खिलाफ गारंटी चाहता है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर घरेलू दबाव बढ़ रहा है। तेल की बढ़ती कीमतों और आगामी चुनावों को देखते हुए, ट्रम्प प्रशासन दोराहे पर खड़ा है:
सैन्य विकल्प: छोटे ईरानी द्वीपों (जैसे अबू मूसा, ग्रेटर और लेसर टुनब्स) पर कब्जा करना।
राजनयिक विकल्प: इस्लामाबाद के जरिए बैक-चैनल बातचीत और 15-सूत्रीय प्रस्तावों पर चर्चा।
ईरान ने यह सिद्ध कर दिया है कि भले ही वह सैन्य रूप से पिछड़ जाए, लेकिन उसके पास दुनिया की आर्थिक नब्ज को नियंत्रित करने की शक्ति है। 'शासन परिवर्तन' (Regime Change) का विचार अब मेज से हट चुका है। वर्तमान संघर्ष यह तय करेगा कि क्या अमेरिका एक और 'अनंत युद्ध' (Forever War) में फंसता है या फिर होर्मुज के इस संकट से निकलने का कोई सम्मानजनक रास्ता खोज पाता है।

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