साम्राज्यवादी युद्ध: अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में 'गुंडागर्दी' के लिए कोई जगह नहीं !
हालिया सैन्य कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हैं और दुनिया को एक खतरनाक संकट की ओर धकेल रही हैं।
वादों का टूटना और युद्ध का अगाज.
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति बनने से पहले 'अंतहीन युद्धों' को समाप्त करने का वादा किया था, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू हुए युद्ध और उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या ने पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है।
मुख्य बिंदु और आरोप:
नेतृत्व पर प्रहार: जहाँ ट्रंप को एक 'अस्थिर राष्ट्रवादी' बताया गया है, वहीं नेतन्याहू पर युद्ध अपराधों के आरोपों का जिक्र है।
कूटनीति की विफलता: यह दावा किया गया है कि ईरान एक परमाणु समझौते के करीब था और ओमान की मध्यस्थता में बातचीत चल रही थी। लेकिन समझौते के बजाय मिसाइल हमलों को चुना गया।
वैश्विक आर्थिक खतरा: ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने की घोषणा से वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है।
एक "चुना हुआ" युद्ध
यह कोई 'पूर्व-नियोजित सुरक्षा' कार्रवाई नहीं थी, बल्कि अपनी पसंद का थोपा गया युद्ध है। इसका उद्देश्य ईरान के शासन को खत्म करना और क्षेत्र को अपनी इच्छाशक्ति के अनुसार ढालना है।
"यह युद्ध किसी को 'आजादी' दिलाने के लिए नहीं, बल्कि विरोधियों को खत्म करने और अमेरिकी-इज़राइली हितों को साधने के लिए छेड़ा गया है।"

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