डब्ल्यूटीओ का MC14: वैश्विक व्यापार बहुपक्षवाद की अग्निपरीक्षा!

 





यह  विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) के महत्व और उसके सामने खड़ी चुनौतियों का विश्लेषण है। सम्मेलन का आयोजन 26 से 29 मार्च के बीच कैमरून के याउंडे में हो रहा है।


प्रमुख मुद्दे और चुनौतियां

वैश्विक व्यापार व्यवस्था इस समय एक गंभीर संकट से गुजर रही है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

बहुपक्षवाद बनाम एकपक्षवाद: अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता और देशों द्वारा सुरक्षा के नाम पर व्यापारिक प्रतिबंधों ने बहुपक्षीय व्यवस्था को कमजोर किया है। अमेरिका की 'एकपक्षीय' नीतियों और टैरिफ जबरदस्ती (Tariff Coercion) ने वैश्विक व्यापार नियमों को चुनौती दी है।

विवाद निपटान प्रणाली का संकट: डब्ल्यूटीओ का 'अपीलीय निकाय' (Appellate Body) लंबे समय से ठप पड़ा है क्योंकि अमेरिका ने नए सदस्यों की नियुक्ति रोक दी है। इस संकट को सुलझाना MC14 की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

बहुपक्षीय (Plurilateral) समझौते: निवेश सुविधा और ई-कॉमर्स जैसे मुद्दों पर कुछ चुनिंदा देशों के बीच होने वाले समझौतों को वैश्विक नियमों में शामिल करने पर बहस जारी है। भारत जैसे देश इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे संगठन का ढांचा बिखर सकता है।

ई-कॉमर्स स्थगन (Moratorium): इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण पर सीमा शुल्क न लगाने का समझौता 31 मार्च को समाप्त हो रहा है। विकसित देश इसे स्थायी बनाना चाहते हैं, जबकि भारत जैसे विकासशील देश राजस्व हानि के डर से इसके विरोध में हैं।


विशेष और विभेदक व्यवहार (SDT) पर खतरा

विकासशील और अल्पविकसित देशों को मिलने वाले 'विशेष अधिकारों' (SDT) को विकसित देशों, विशेषकर अमेरिका से चुनौती मिल रही है। अमेरिका चाहता है कि चीन और भारत जैसी बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को इन विशेष लाभों से वंचित किया जाए।


भारत के लिए आगे की राह

भारत को इस सम्मेलन में एक निर्णायक भूमिका निभानी चाहिए:

नेतृत्व: भारत को विकासशील देशों (Global South) के नेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करनी चाहिए।

लचीलापन: पुरानी जड़ स्थितियों (जैसे बहुपक्षीय समझौतों का पूर्ण विरोध) को छोड़कर नए समाधानों (जैसे अपीलीय निकाय के सदस्यों का चुनाव वोटिंग से करना) पर विचार करना चाहिए।

गठबंधन: अन्य विकासशील देशों के साथ मिलकर एक ऐसी व्यापारिक व्यवस्था की वकालत करनी चाहिए जो केवल शक्तिशाली देशों के हितों तक सीमित न हो।

यदि MC14 विफल होता है, तो यह वैश्विक व्यापार में 'लाठी उसकी भैंस' (Might is Right) वाली स्थिति को बढ़ावा देगा, जो भारत जैसे विकासशील देशों के लिए हानिकारक होगा। 

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