भारत की नई एफडीआई नीति (PN3) और निवेश की द्वंद्वपूर्ण स्थिति!
यह भारत सरकार द्वारा हाल ही में 'प्रेस नोट 3' (PN3) के तहत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों का विश्लेषण है।
चीन के प्रति नरम रुख: भारत ने उन देशों (विशेषकर चीन) के लिए नियमों में ढील दी है जिनके साथ वह भूमि सीमा साझा करता है। अब इन देशों के निवेशक 'ऑटोमैटिक रूट' के माध्यम से 10% तक की गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी (Beneficial Ownership) रख सकते हैं।
विनिर्माण को प्रोत्साहन: सरकार ने विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनल और कैपिटल गुड्स जैसे क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर निपटाने का लक्ष्य रखा है, ताकि घरेलू विनिर्माण को गति मिल सके।
घटता शुद्ध निवेश (Net FDI): यह एक चिंताजनक रुझान की ओर इशारा करता है कि भले ही भारत में कुल निवेश आ रहा हो, लेकिन 'नेट एफडीआई' (कुल आवक और निकासी का अंतर) ऐतिहासिक रूप से कम हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशी निवेशकों द्वारा विनिवेश $51.5 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।
भारतीय निवेशकों का पलायन: एक विरोधाभासी स्थिति देखी जा रही है जहाँ एक तरफ सरकार विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोल रही है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय निवेशक तेजी से अपना पैसा विदेशी बाजारों (Outward FDI) में लगा रहे हैं।
यह स्पष्ट है कि भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति एक पहेली जैसी है। घरेलू निजी निवेश सुस्त है और भारतीय कंपनियां विदेशों में विस्तार कर रही हैं, जबकि सरकार चीन जैसे देशों से निवेश आकर्षित करके इस कमी को पूरा करने की कोशिश कर रही है। यह नीतिगत बदलाव पिछले कुछ वर्षों से जारी 'आर्थिक फ्रीज' और गलवान घाटी विवाद के बाद आए तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की एक दिशा भी हो सकता है।

Comments
Post a Comment