​जनगणना 2027: नए भारत का राष्ट्रीय 'एक्स-रे'!-प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र, विभाग.

   देश में यह समाजवादियों के सतत संघर्ष की देन है कि यह जनगणना 


हो रही है. लालू यादव हमेशा तर्क देते थे कि जब देश में कुत्ते व बकरी को जनगणना हो सकती है तो जाति की क्यों नही? 

​भारत ने 1 अप्रैल से जनगणना 2027 की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह केवल एक सांख्यिकीय कवायद नहीं है, बल्कि स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे निर्णायक घटना मानी जा रही है। 1872 से शुरू हुई जनगणना श्रृंखला की यह 16वीं कड़ी एक ऐसे मोड़ पर आ रही है जहाँ देश पिछले 15 वर्षों में आए व्यापक बदलावों का आकलन करना चाहता है।

​डिजिटल और सामाजिक परिवर्तन का आईना

​2011 की अंतिम जनगणना के बाद से भारत पूरी तरह बदल चुका है। स्मार्टफोन्स की बाढ़, UPI का सार्वभौमिकरण, कल्याणकारी योजनाओं का डिजिटलीकरण और तेजी से होता शहरीकरण—इन सबने एक नया सामाजिक ढांचा तैयार किया है। जहाँ 2011 की जनगणना 'बढ़ती आकांक्षाओं' की कहानी थी, वहीं 2027 की जनगणना इस बात की जांच करेगी कि क्या वे आकांक्षाएं आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता में बदल पाई हैं।

​प्रमुख चरण और कार्यप्रणाली

​इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए लगभग 35 लाख फील्ड कर्मियों को तैनात किया गया है और इसका कुल बजट ₹11,718.24 करोड़ अनुमानित है। यह प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में पूरी होगी:

​मकानों की सूची और आवास गणना: अप्रैल से सितंबर 2026 तक।

​जनसंख्या गणना: फरवरी 2027 में (बर्फबारी वाले क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में यह सितंबर 2026 में ही कर ली जाएगी)।

​ऐतिहासिक 'जाति गणना' का समावेश

​इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता जाति आधारित गणना का समावेश है। आजादी के बाद पहली बार, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अलावा अन्य जातियों की भी गिनती की जाएगी। इसका उद्देश्य सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लाभार्थियों की सटीक पहचान करना है। हालांकि यह विषय राजनीतिक रूप से संवेदनशील है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि इससे नीति निर्धारण में स्पष्टता आएगी।

​नीति निर्धारण के लिए अनिवार्य

​वर्तमान में भारत का नीति नियोजन 2011 के पुराने आंकड़ों पर निर्भर है, यह  'अंधेरे में उड़ान भरने' के समान  है। जनगणना 2027 से प्राप्त डेटा निम्नलिखित क्षेत्रों में आधार स्तंभ बनेगा:

​निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (Delimitation)

​कल्याणकारी योजनाओं का सटीक लक्ष्यीकरण

​शहरी नियोजन और राजकोषीय हस्तांतरण

​डेटा गोपनीयता और सुरक्षा (आधार पोर्टल की तर्ज पर)

​जनगणना 2027 भारत के लिए अपनी वास्तविकता से रूबरू होने का क्षण है। यह न केवल विकास की असमानताओं को उजागर करेगी, बल्कि भविष्य के भारत की राजनीति, संघवाद और विकास गाथा को एक नई दिशा भी देगी। यह वह 'एक्स-रे' है जो बताएगा कि भारत की प्रगति कितनी व्यापक और समावेशी रही है। 

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