आशुतोष का परिणय और सादगी का संकल्प!


   

​प्रो. प्रसिद्ध कुमार

​जीवन के कुछ अध्याय हृदय पर गहरी छाप छोड़ जाते हैं, और मेरे कनिष्ठ पुत्र इंजीनियर आशुतोष कुमार का विवाह संस्कार मेरे लिए कुछ वैसा ही अनुभव रहा। आर्यभट्ट की ऐतिहासिक नगरी, खगौल में सजी बारात से लेकर विदाई तक का यह सफर केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि स्नेह, सद्भाव और एक नए सामाजिक दृष्टिकोण के उदय का साक्षी बना।

​प्रकृति की परीक्षा और आत्मीयता का संबल

​28 अप्रैल 2026 की वह पावन तिथि, जब आशुतोष के नए जीवन की शुरुआत हुई। उत्सव की मिठास अभी फिजाओं में घुली ही थी कि अगले दिन, 29 अप्रैल को प्रकृति ने अपनी चपलता दिखाई। अचानक आई आंधी और बारिश ने मानों व्यवस्थाओं को चुनौती दी, लेकिन आप सभी के अटूट प्रेम और धैर्य के आगे मौसम की वह तल्खी भी फीकी पड़ गई।

​कृतज्ञता का अर्पण: जब 'स्व' बना 'सर्व'

​एक पिता के विनम्र निमंत्रण को मान देकर, इस मांगलिक बेला में शामिल हुए तमाम आगंतुकों का मैं ऋणी हूँ। मेरे 'कॉलेज परिवार' की उपस्थिति ने इस अवसर को गरिमा के शिखर पर पहुँचा दिया।

​आदरणीय प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद जी का सानिध्य,

​वरीय प्राध्यापक प्रो. राम बिनेश्वर बाबू एवं प्रो. राय श्रीपाल बाबू का आशीर्वाद,

​प्रो. अनिल बाबू, इंदु भूषण यादव जी, मेरे अजीज मित्र प्रो. रमेश कुमार एवं प्रो. श्रद्धानंद जी का साथ मेरे लिए अनमोल रहा।

​मातृशक्ति के रूप में प्रो. कुमारी सुंदरम जी, प्रो. गुड़िया कुमारी जी (सपरिवार), उप-प्राचार्या प्रो. संगीता कुमारी जी और प्रो. आरती राज की गरिमामयी उपस्थिति ने उत्सव को पूर्णता दी। साथ ही प्रो. मनीष भारती, रविंद्र कुमार और मेरे अभिन्न मित्र बिल्डर रंजीत कुमार जी (जिनका आशीर्वाद संजीवनी बनकर पहुँचा), आप सभी का सहयोग मेरे जीवन की थाती है।

​सत्ता, समाज और सरोकार का संगम

​इस आयोजन में राजनीति और समाज के उन दिग्गजों का भी स्नेह मिला, जो व्यस्तताओं के बीच समय निकालकर आशीर्वाद देने पहुँचे। पूर्व मंत्री श्री श्याम रजक जी, पूर्व प्रखंड प्रमुख विनोद कुमार जी (व गुड्डू जी), और वरिष्ठ नेता देव किशुन ठाकुर जी सहित दिलीप कुमार, हरिनारायन यादव, नवाब आलम, अस्तानंद, मो. सदिक, रिंकू जी और पत्रकार चंदू प्रिंस जी , कुणाल जी, मधेश्वर्की विश्वकर्मा जी ,  हेड मास्टर मोहन पासवान, लक्ष्मी पासवान , अरुण जी , नवाब आलम, आस्तानंद व दिल्ली से आये मेरे पुत्र के भारतीय रक्षा मिनिस्ट्री के  सहकर्मी  की  मौजूदगी ने रिश्तों की प्रगाढ़ता को और गहरा किया।

​मोहम्मदपुर, मंझौली, विक्रम हरपुरा और चकमुसा से आए तमाम प्रियजन—जिनमें अरविंद शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, मुखिया सुनील यादव, जितेंद्र यादव और मोहन बाबू के सुपुत्र , डब्लू जी प्रमुख हैं—आप सभी ने दूरियां मिटाकर आत्मीयता का परिचय दिया। सैकड़ों नाम ऐसे हैं जिन्हें शब्दों में समेटना असंभव है, पर वे मेरे हृदय के पटल पर अंकित हैं।

​आत्म-चिंतन: सादगी ही भविष्य है

​परंपरागत विवाह की जटिलताओं को करीब से महसूस करने के बाद, मेरा हृदय एक नए विमर्श की ओर मुड़ा है। तड़क-भड़क और आडंबरों के बीच कहीं न कहीं उत्सव का मूल 'सुकून' खो जाता है। मेरा अनुभव कहता है कि आने वाला समय 'एकदिवसीय' और आधुनिक लेकिन सादगीपूर्ण विवाहों का होगा। इससे न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि रिश्तों की ताजगी भी बनी रहेगी।

​क्षमा याचना: आयोजन की आपाधापी में यदि मैं किन्हीं प्रियजनों को आमंत्रित नहीं कर पाया, या किसी भूलवश किसी की सेवा में कमी रही हो, तो मुझे अपना 'अनुज' या 'अपना' समझकर क्षमा प्रदान करें।

​आपका स्नेहिल,

प्रो. प्रसिद्ध कुमार 

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