नाटो और अमेरिका: क्या डगमगा रही है दशकों पुरानी दोस्ती?
हाल के घटनाक्रमों ने दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन, नाटो (NATO), और उसके सबसे बड़े सहयोगी अमेरिका के बीच बढ़ती दरार को उजागर कर दिया है। एक हालिया साक्षात्कार में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा नाटो से अमेरिका की सदस्यता वापस लेने की बात को "पुनर्विचार से परे" बताए जाने के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
विवाद की जड़: आखिर ट्रम्प नाटो से नाराज क्यों हैं?
ट्रम्प की नाराजगी का मुख्य कारण 'एकतरफा बोझ' और 'सहयोग की कमी' है। उनके अनुसार:
सैन्य सहयोग का अभाव: हालिया ईरान संघर्ष के दौरान, नाटो सहयोगियों ने अमेरिका को सैन्य और हवाई क्षेत्र (Airspace) के उपयोग की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ट्रम्प इसे विश्वासघात मानते हैं, क्योंकि अमेरिका दशकों से यूरोप की रक्षा करता आया है।
वित्तीय असंतुलन: अमेरिका नाटो के रक्षा खर्च का लगभग 62% वहन करता है। हालांकि 2025 के हेग शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने 2035 तक अपने रक्षा खर्च को जीडीपी के 5% तक बढ़ाने पर सहमति जताई है, लेकिन ट्रम्प इसे नाकाफी मानते हैं।
अनुच्छेद 5 की व्याख्या: ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि यदि सहयोगी देश जरूरत के समय अमेरिका का साथ नहीं देते, तो नाटो का 'सामूहिक रक्षा' का सिद्धांत (Article 5) केवल एकतरफा बनकर रह जाता है।
नाटो का इतिहास और महत्व
1949 में सोवियत संघ के खतरे से निपटने के लिए बना यह गठबंधन आज 32 देशों का समूह है। शीतयुद्ध के दौरान सक्रिय सैन्य अभियान न चलाने वाले नाटो ने 90 के दशक के बाद बाल्कन देशों, अफगानिस्तान और इराक जैसे क्षेत्रों में बड़ी भूमिका निभाई है। वर्तमान में रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर नाटो की प्रासंगिकता और बढ़ गई है, जहां इसने यूक्रेन को भारी सैन्य सहायता प्रदान की है।
क्या अमेरिका का नाटो से बाहर निकलना आसान है?
कानूनी और राजनीतिक रूप से, नाटो से बाहर निकलना किसी "दुःस्वप्न" से कम नहीं है:
संसदीय बाधा: 2023 में अमेरिकी कांग्रेस ने एक कानून पारित किया था, जिसके तहत राष्ट्रपति बिना सीनेट की मंजूरी के नाटो से सदस्यता समाप्त नहीं कर सकते।
तकनीकी पेच: नाटो संधि के अनुच्छेद 13 के अनुसार, किसी भी देश को हटने के लिए एक वर्ष का नोटिस देना होता है। चूंकि अमेरिका खुद इस संधि का 'डिपोजिटरी' (निक्षेपागार) है, उसे खुद को ही नोटिस देना होगा, जो एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा करेगा।
वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव: अमेरिका के हटने से पश्चिमी गठबंधन कमजोर होगा और रूस व चीन जैसी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाएगा।

Comments
Post a Comment