सुनील कुमार जी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर बधाई, बिहार के वित्तरहित शिक्षक-कर्मचारियों ने वेतन और सेवा शर्तों के निदान हेतु की अपील।
बिहार विधानसभा चुनाव में गठबंधन की प्रचंड बहुमत के बाद माननीय श्री सुनील कुमार जी को बिहार का शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर वित्तरहित शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, बिहार, पटना ने हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इनमें सदस्य अध्यक्ष मंडल जय नारायण सिंह मधु , शम्भू कुमार सिंह, रामनरेश पाण्डेय, रामविनेश्वर सिंह सहित अन्य लोग भी थे।
मोर्चा की तरफ से जारी किए गए पत्रों में, शिक्षा मंत्री को भेजे गए 'शुभकामना संदेश' में कहा गया है कि उनके नेतृत्व में शिक्षा विभाग के आने से वित्तरहित शिक्षक परिवार में खुशी की लहर है और आशा है कि उनके सहयोग से वित्तरहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों की समस्याओं का निदान हो सकेगा।
प्रमुख माँगें और चिंताएँ:
बधाई के साथ ही, मोर्चा ने शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार जी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए राज्य के हजारों वित्तरहित शिक्षक-कर्मचारियों की गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। इन समस्याओं में वेतन, पेंशन, बकाए अनुदान का भुगतान और अन्य सेवा शर्तों का निदान शामिल है।
मोर्चा ने कहा कि वित्तरहित माध्यमिक विद्यालयों, इंटरमीडिएट महाविद्यालयों और संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं, और राहत के रूप में मिलने वाले अनुदान भी पिछले सात वर्षों से बकाए हैं।
मोर्चा की मुख्य माँगें निम्नलिखित हैं:
अनुदान के बदले वेतन: वित्तरहित अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों, इंटरमीडिएट महाविद्यालयों और संबद्ध डिग्री महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों को अनुदान के बदले वेतन एवं स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन देने की कृपा की जाए।
बकाए अनुदान का भुगतान: पिछले 7 वर्षों के बकाए अनुदान का एकमुश्त भुगतान किया जाए।
सेवा स्थायीकरण: इन संस्थानों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों की सेवा स्थायी की जाए तथा इन विद्यालयों/महाविद्यालयों का अधिग्रहण/अभिनवीकरण किया जाए।
लंबित भुगतान का निदान: वित्तरहित शिक्षा कर्मियों का वेतन, पेंशन, लंबित अनुदान का भुगतान आदि समस्याओं को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जो कमिटी का गठन किया गया है, उस पर यथाशीघ्र कार्रवाई हेतु आवश्यक पहल करने की कृपा की जाए।
संघर्ष मोर्चा ने उम्मीद जताई है कि शिक्षा विभाग में नई सरकार का आना इन गंभीर संकटों को दूर करेगा और हजारों शिक्षक-कर्मचारियों को भुखमरी और शोषण से बचने में मदद मिलेगी।

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