मार्क टुली: भारतीय जनमानस की आवाज़ और पत्रकारिता का एक युग !
भारतीय पत्रकारिता के आकाश में मार्क टुली एक ऐसा नाम थे, जिनकी आवाज़ सत्ता के गलियारों से लेकर गाँव की चौपालों तक समान रूप से प्रामाणिक मानी जाती थी। 20वीं सदी के उत्तरार्ध में जब सूचना के साधन सीमित थे, तब बीबीसी रेडियो पर उनकी रिपोर्टिंग भारत के लिए 'सत्य की कसौटी' हुआ करती थी।
बीबीसी का वह दौर और मार्क टुली
मार्क टुली का भारत से गहरा नाता था। 1935 में कोलकाता में जन्मे टुली ने अपने करियर का लंबा समय बीबीसी के दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में बिताया। वह दौर ऐसा था जब लोग रेडियो सेट के पास कान लगाकर बैठते थे ताकि राजनारायण भिसारिया, अचला शर्मा और मार्क टुली जैसे दिग्गजों से दुनिया का हाल जान सकें। टुली की खासियत उनकी निष्पक्षता और भारतीय समाज की गहरी समझ थी। उन्होंने आपातकाल, ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को न केवल कवर किया, बल्कि उनका बारीकी से विश्लेषण भी किया।
"अमृतसर: मिसेज गांधीज लास्ट बैटल" – एक अनिवार्य दस्तावेज़
सतीश जैकब के साथ लिखी गई उनकी यह पुस्तक भारतीय राजनीति के सबसे उथल-पुथल भरे दौर का जीवंत चित्रण है।
"इंडिया इन स्लो मोशन": भारत को समझने का नज़रिया
गिलियन राइट के साथ उनकी दूसरी प्रसिद्ध कृति 'इंडिया इन स्लो मोशन' भारत की जटिलताओं का एक सुंदर कोलाज है।

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