सात बेटियों का 'सप्तऋषि': एक साधारण मिल मालिक की असाधारण जीत !
सारण जिले के एकमा ब्लॉक के एक छोटे से गांव में रहने वाले कमल सिंह की पहचान आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है। लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं था। एक साधारण आटा मिल चलाने वाले कमल सिंह के घर जब एक के बाद एक सात बेटियों ने जन्म लिया, तो समाज ने उन्हें 'बेचारा' मान लिया था।
1. सामाजिक तानों को बनाया 'ईंधन'
ग्रामीण परिवेश में सात बेटियों का पिता होना अक्सर सहानुभूति या मजाक का विषय बन जाता है। कमल सिंह को भी ताने सुनने पड़े कि "बुढ़ापे का सहारा कौन बनेगा?" या "इतनी शादियां कैसे होंगी?"। लेकिन कमल सिंह ने इन तानों को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय अपनी बेटियों की सफलता का 'ईंधन' बना लिया।
2. सुबह 4 बजे का अनुशासन
संसाधन बेहद सीमित थे, लेकिन इरादे फौलादी। कमल सिंह का दिन सुबह 4 बजे शुरू होता था।
3. सफलता का 'सप्तक' (तथ्य और उपलब्धियां)
आज कमल सिंह की सातों बेटियां सरकारी सेवाओं में विभिन्न पदों पर कार्यरत होकर समाज का मुंह बंद कर चुकी हैं:

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