आईआईटी पटना: शिक्षा का मंदिर या लापरवाही का 'डेथ ट्रैप'? एक मेधावी छात्र की मौत का जिम्मेदार कौन?
भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, आईआईटी (IIT) पटना के कैंपस से 9 मई 2026 की सुबह जो खबर आई, उसने न केवल संस्थान को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। तेलंगाना के रहने वाले 22 वर्षीय बीटेक फाइनल ईयर के छात्र हर्षित राज की मौत कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक हत्या है।
जिस छात्र को कुछ ही दिनों में देश के विकास में योगदान देना था, वह आज बिजली विभाग और संस्थान की घोर लापरवाही के कारण हमारे बीच नहीं है।
घटना: खेल के मैदान में बिछा था 'मौत का जाल'
सुबह के 6 बजे, जब कैंपस में उत्साह और खेल का माहौल होना चाहिए था, वहां मातम पसर गया। हॉस्टल के ग्राउंड में क्रिकेट खेलते समय, फील्डिंग के दौरान हर्षित का संपर्क एक लाइव इलेक्ट्रिक पोल (बिजली के खंभे) से हो गया। करंट इतना जोरदार था कि हर्षित को संभलने का मौका तक नहीं मिला और अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी जान चली गई।
व्यवस्था पर कड़वे सवाल: आखिर चूक कहां हुई?
यह घटना आईआईटी प्रशासन और बिजली विभाग की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
इंजीनियरिंग संस्थान में तकनीकी विफलता? जिस संस्थान में देश के बेहतरीन इंजीनियर तैयार किए जाते हैं, क्या वहां के रखरखाव विभाग को एक 'नंगे और असुरक्षित' तार वाले खंभे की खबर नहीं थी? यह विडंबना नहीं तो और क्या है?
बिजली विभाग की लापरवाही: कैंपस के भीतर, विशेषकर खेल के मैदान जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लाइव पोल का इस स्थिति में होना बिजली विभाग की आपराधिक लापरवाही को दर्शाता है। क्या सुरक्षा ऑडिट केवल कागजों पर होता है?
प्रशासन की चुप्पी: घटना के घंटों बाद भी आईआईटी प्रशासन की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण न आना उनकी संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है। क्या एक छात्र की जान की कीमत इतनी कम है?
जवाबदेही तय होनी चाहिए
पुलिस (बिहटा थाना) और एफएसएल (FSL) की टीमें जांच कर रही हैं, लेकिन क्या यह जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी?
"एक मां-बाप अपने बच्चे को आईआईटी जैसे संस्थान में इसलिए भेजते हैं ताकि उसका भविष्य सुरक्षित रहे, इसलिए नहीं कि वह वहां की बदहाल व्यवस्था और खुले तारों की भेंट चढ़ जाए।"
हमारी मांग: न्याय और सुरक्षा
हर्षित राज अब वापस नहीं आ सकता, लेकिन उसकी मौत का हिसाब होना चाहिए।
उन अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो जिन्होंने खेल के मैदान में असुरक्षित बिजली के खंभों को अनदेखा किया।
पूरे कैंपस का तत्काल 'सेफ्टी ऑडिट' हो ताकि दोबारा किसी और 'हर्षित' की जान न जाए।
बिजली विभाग इस तकनीकी विफलता की पूरी जिम्मेदारी ले।
आईआईटी पटना जैसी संस्थाओं को केवल रैंकिंग और प्लेसमेंट पर ही नहीं, बल्कि अपने छात्रों की बुनियादी सुरक्षा पर भी ध्यान देना होगा। हर्षित की मौत एक चेतावनी है—अगर आज आवाज नहीं उठाई गई, तो कल कोई और छात्र इस लापरवाही का शिकार होगा।
हर्षित राज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। न्याय की उम्मीद में...

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