प्रतीक यादव का आकस्मिक निधन: जब 'किले' सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी कहाँ जाए?
अखिलेश यादव के भाई प्रतिक यादव अब हमारे बीच नहीं रहे!
आज की सुबह उत्तर प्रदेश की राजनीति और यादव परिवार के लिए एक ऐसी खबर लेकर आई जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। समाजवादी पार्टी के संरक्षक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और अखिलेश यादव के भाई प्रतिक यादव अब हमारे बीच नहीं रहे। मात्र 38 वर्ष की ऊर्जावान आयु में उनका जाना कई सवाल और गहरी उदासियाँ छोड़ गया है।
एक हँसता-खेलता सफर, यूँ थम गया
लखनऊ के सिविल अस्पताल से आई खबर के मुताबिक, प्रतीक यादव को सुबह लगभग 6:00 बजे 'ब्रॉट डेड' घोषित किया गया। जानकारी के अनुसार, सुबह घर पर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। बताया जा रहा है कि वह फेफड़ों से संबंधित किसी गंभीर समस्या (पल्मोनरी एम्बोलिज्म) से जूझ रहे थे।
एक ऐसा व्यक्ति जिसके पास दुनिया भर की सुख-सुविधाएं, बेहतरीन मेडिकल बैकअप और रसूख था, उसे भी नियति ने संभलने का मौका नहीं दिया।
रसूख बनाम स्वास्थ्य: एक कड़वा सच
प्रतीक यादव सिर्फ एक नाम नहीं थे; वह बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति और सूबे के सबसे ताकतवर राजनीतिक परिवारों में से एक के सदस्य थे। जब हम ऐसी हस्तियों के बारे में सुनते हैं, तो मन में एक विचार कौंधता है— "अगर संसाधनों से लबालब इन किलों के भीतर भी जिंदगी सुरक्षित नहीं है, तो एक आम आदमी का हश्र क्या होगा?"
"साँसों का भरोसा तो शहंशाहों को भी नहीं, फिर हम और आप तो महज मुसाफिर हैं।"
स्वास्थ्य को न लें हल्के में
प्रतीक यादव के निधन की खबर हमें दो मुख्य बातें सिखाती है:
बीमारी चेहरा नहीं देखती: पल्मोनरी एम्बोलिज्म या अचानक होने वाले हृदय/फेफड़ों के विकार किसी भी उम्र और किसी भी रसूख वाले व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकते हैं।
वक्त की कमी: हमारे पास धन हो सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के मामले में 'समय' सबसे बड़ा धन है। अक्सर हम छोटी-मोटी तकलीफों को नजरअंदाज करते हैं, जो बाद में घातक साबित होती हैं।

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