​बिहार में 'बकैती, फेकेती और लठैती' की सरकार: राजद का बड़ा एलान, महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन !

   




​पटना, 3 जून 2026 — बिहार की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। प्रदेश की कानून व्यवस्था, आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी और संगठित भ्रष्टाचार के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नीतीश-एनडीए सरकार के खिलाफ सीधे मोर्चे का एलान कर दिया है। राजद आगामी 9 जून से पूरे राज्य में दो चरणों में व्यापक आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने जा रही है।

​इस सिलसिले में पटना में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजद के प्रदेश अध्यक्ष श्री मंगनी लाल मंडल और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने वर्तमान सरकार पर तीखे हमले किए और इसे "बकैती, फेकेती और लठैती वाली सरकार" करार दिया।

​दो चरणों में होगा राज्यव्यापी धरना: जानें पूरा शेड्यूल

​राजद ने साफ कर दिया है कि आम जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर अब लड़ाई सड़कों पर लड़ी जाएगी। आंदोलन की रूपरेखा कुछ इस प्रकार तय की गई है:

​प्रथम चरण (9 जून 2026): बिहार के सभी प्रखंड (Block) मुख्यालयों पर राजद कार्यकर्ताओं और आम जनता द्वारा व्यापक व प्रभावकारी धरना दिया जाएगा।

​द्वितीय चरण (17 जून 2026): राज्य भर के सभी जिला मुख्यालयों पर बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन का आयोजन होगा।

​आगामी रणनीति: राजद नेताओं के अनुसार, आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा। अगले चरण में धरना-प्रदर्शन के साथ-साथ 'सामूहिक गिरफ्तारी' का कार्यक्रम भी चलाया जाएगा, जिसकी तारीखों का एलान जल्द होगा।

​₹72,000 करोड़ का हिसाब कहाँ है? कैग की रिपोर्ट पर सरकार मौन

​संवाददाता सम्मेलन में कैग (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए गए। श्री मंगनी लाल मंडल ने कहा:

​"बिहार सरकार ₹72,000 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दे पा रही है। राज्य में वित्तीय गबन और वित्तीय अपराध चरम पर हैं, लेकिन सरकार ने चुप्पी साध रखी है। यह जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है और सरकार में बैठे लोगों को इसका जवाब देना ही होगा कि आखिर यह भारी-भरकम राशि कहाँ गायब हुई?"

​महंगाई और टैक्स की मार: सबसे महंगा पेट्रोल-डीजल बेच रहा बिहार

​ब्लॉग में आगे बढ़ते हुए बात करते हैं आम आदमी की जेब पर पड़ने वाली मार की। राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण आज गरीब और गरीब होता जा रहा है।

​भारी वैट और सरचार्ज: देश के कई राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर सरचार्ज घटाया है, लेकिन बिहार सरकार सबसे अधिक वैट और सरचार्ज वसूल रही है।

​महंगाई की चौतरफा मार: ईंधन के दाम बढ़ने से माल भाड़ा बढ़ गया है, जिससे रोजमर्रा की चीजें आम जनता की पहुंच से दूर होती जा रही हैं। किसानों की सुध लेने के लिए सरकार के पास वक्त नहीं है।

​"गरीबी हटाओ" नहीं, "गरीब हटाओ" की नीति: हिडेन इमरजेंसी जैसे हालात

​संवाददाता सम्मेलन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री उदय नारायण चौधरी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए देश और राज्य की स्थिति की तुलना 'हिडेन इमरजेंसी' (अघोषित आपातकाल) से की। उन्होंने कहा कि जो भी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बोलता है या लिखता है, उस पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और लाठियां बरसाई जाती हैं।

​पटना में लाखों गरीब परिवारों को उजाड़े जाने का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि इतनी भीषण गर्मी में लोग सड़कों पर रहने को मजबूर हैं और सरकार की मानवीय संवेदना पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

​भूमिहीनों के आंकड़ों पर सरकार श्वेत पत्र जारी करे

​राजद ने सरकार के 20 वर्षों के दावों को खोखला बताते हुए कुछ कड़े सवाल दागे हैं और सूची जारी करने की मांग की है:

​केंद्र के 12 वर्षों और राज्य के 20 वर्षों के शासन में कितने भूमिहीन व भवनहीन परिवारों को 'तीन डिसमिल जमीन' दी गई?

​कितने पर्चाधारियों को जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाया गया और कितनों की जमीन पर सामंतों ने दोबारा कब्जा कर लिया?

​राजद का आरोप है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी 'समृद्धि यात्राओं' में केवल अमीरों को और सबल बनाने की योजनाएं बनाते रहे, जबकि धरातल पर गरीबों के लिए कोई ठोस काम नहीं हुआ।

​कानून व्यवस्था ध्वस्त: रिशु किसका शिशु है?

​बिहार में चुनाव के बाद कानून व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होने का दावा किया गया है। प्रदेश मुख्य प्रवक्ता श्री शक्ति सिंह यादव ने सरकार को घेरते हुए एक सीधा और तीखा सवाल पूछा— "सरकार बताए कि रिशु किसका शिशु है?"

​नेताओं ने कहा कि राज्य में अबोध और अवयस्क बालिकाओं पर अत्याचार व दरिंदगी की घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और सरकार इन संवेदनशील मामलों को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

विचारधारा और जनहित के लिए संघर्ष

​संवाददाता सम्मेलन में डॉ. तनवीर हसन और श्री रणविजय साहू सहित कई गणमान्य नेताओं (श्रीमती मुकुंद सिंह, निर्भय कुमार अंबेडकर, शक्ति सिंह यादव आदि) ने एक सुर में कहा कि राजद एक वैचारिक पार्टी है और वह जनहित के मुद्दों से पीछे नहीं हटेगी। जून महीने में होने वाला यह आंदोलन सरकार की चूलें हिलाने का काम करेगा।

​अब देखना यह है कि राजद के इस 'हल्ला बोल' पर सत्ता पक्ष की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है और 9 जून को प्रखंड मुख्यालयों पर इस आंदोलन का कितना असर देखने को मिलता है।


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