कर्तव्यपरायणता ही राष्ट्रभक्ति की असली कसौटी है ! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।
' आज हर तरफ कर्तव्यबोध का अभाव' है। देश में राष्ट्रभक्ति की चर्चा बहुत होती है, लेकिन मेरा मानना है कि राष्ट्रभक्ति का अर्थ केवल सीमाओं पर लड़ना ही नहीं, बल्कि अपने दैनिक कर्तव्यों का निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन करना है। यह सत्य है कि हमारा आचरण ही दूसरे के लिए नजीर (उदाहरण) बन जाता है। चाहे वह राजनेता हो, जनप्रतिधिनिधि हो, शिक्षक हो, पुलिसकर्मी हो या कोई अन्य अधिकारी—पदों की गरिमा और उनका दायित्व जितना बड़ा है, कर्तव्यबोध भी उतना ही अधिक होना चाहिए। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि आज स्थिति इसके उलट है। व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा 'समाधान' खोजने के बजाय 'समस्या' पैदा करने में अपनी ऊर्जा व्यर्थ कर रहा है। इसी मानसिकता के गर्भ से भ्रष्टाचार, शोषण, दमन और दोहन जैसे विकृत स्वरूपों का जन्म होता है। यदि हम अपने काम के प्रति शुचितापूर्ण और वफादार रहें, तो व्यवस्था की आधी से अधिक विसंगतियां स्वतः समाप्त हो जाएँगी। साथ ही, आज समाज में जाति, धर्म और विचारधारा के नाम पर जो कट्टरता और अहंकार फैल रहा है, वह चिंताजनक है। किसी को नीचा दिखाना या कट्टरता का प्रदर्शन करना ...