ट्रंप का 'आर्ट ऑफ द रिट्रीट' और मध्य-पूर्व का बदलता समीकरण!
हालिया भू-राजनीतिक घटनाक्रमों ने विश्व मंच पर अमेरिका की साख और उसकी कूटनीतिक सीमाओं को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। जिसे कभी एक 'निर्णायक सैन्य अभियान' के रूप में प्रचारित किया गया था, वह अंततः एक अस्थायी युद्धविराम और रणनीतिक वापसी में तब्दील होता दिख रहा है। इसे आलोचक ट्रंप की 'आर्ट ऑफ द डील' के बजाय 'आर्ट ऑफ द रिट्रीट' का नाम दे रहे हैं। सैन्य दबाव बनाम जमीनी हकीकत अमेरिका ने ईरान के प्रति कड़े तेवर अपनाते हुए परमाणु कार्यक्रमों को ध्वस्त करने और शासन परिवर्तन जैसे बड़े लक्ष्य निर्धारित किए थे। लेकिन हफ्तों की बमबारी के बाद भी ईरान की मिसाइल क्षमताएं और उसका परमाणु भंडार काफी हद तक सुरक्षित है। यहाँ तक कि 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज', जिसे बंद करने की धमकी दी गई थी, अब एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर 'फिर से खोलने' की बात कही जा रही है, जबकि वास्तव में वह कभी पूरी तरह बंद हुआ ही नहीं था। मध्यस्थों की नई भूमिका: पाकिस्तान और चीन इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प मोड़ पाकिस्तान की भूमिका रहा। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी नेतृत्व ने...