बढ़ता प्रदूषण: हमारे स्वास्थ्य और भविष्य पर गहराता संकट !
आज के दौर में विकास की अंधी दौड़ ने हमें एक ऐसे मुकाम पर खड़ा कर दिया है, जहाँ खुली हवा में सांस लेना भी दूभर हो गया है। हालिया शोध और सर्वेक्षणों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदूषण अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर 'मेडिकल इमरजेंसी' बन चुका है। स्वास्थ्य पर बहुआयामी प्रहार प्रदूषण का असर अब केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है। चित्र में दिए गए तथ्यों के अनुसार, इसके प्रभाव अत्यंत चिंताजनक हैं: श्वसन और हृदय रोग: हवा में मौजूद सूक्ष्म कण न केवल सांस लेने में दिक्कत पैदा कर रहे हैं, बल्कि हृदय संबंधी बीमारियों और गंभीर एलर्जी का कारण भी बन रहे हैं। मस्तिष्क पर प्रभाव: चौंकाने वाली बात यह है कि लोग अब प्रदूषण के कारण अल्जाइमर और पार्किंसन जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कमजोर होती रोग प्रतिरोधक क्षमता: प्रदूषण ने इंसानी शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को इस कदर घटा दिया है कि अब सामान्य एंटीबायोटिक दवाएं भी शरीर पर असर करना कम कर रही हैं। यह स्थिति भविष्य में किसी भी महामारी को और अधिक घातक बना सकती है। प्रकृति का बिगड़ता संतुलन प्रद...