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दीर्घायु और जीवनशैली: जापान से सीख और भारत की राह ।

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    ​दीर्घायु और स्वस्थ जीवन आज के समय में पूरी दुनिया में चर्चा का एक मुख्य विषय बन चुका है। जापान में 100 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों (शतायु नागरिकों) की संख्या बढ़कर पहली बार 1,07,677 हो गई है, जिनमें 94,298 महिलाएं शामिल हैं। यह संख्या 1963 में केवल 153 थी। जापान की यह उपलब्धि हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर उन्होंने ऐसी कौन सी जीवन-पद्धति अपनाई है, जिससे एक पूरा देश स्वस्थ और सक्रिय रूप से लंबी उम्र जी रहा है।   ​दूसरी ओर, यदि हम भारत की बात करें, तो हमारी पारंपरिक जीवनशैली, खान-पान (थाली) और शारीरिक श्रम (श्रम) में स्वास्थ्य की असली कुंजी छिपी रही है। भारत में भी प्राचीन काल से स्वास्थ्य को किसी औषधि की शीशी में बंद वस्तु नहीं माना गया है, बल्कि इसे हमारी दिनचर्या, थाली, श्रम और संयम का हिस्सा माना गया है।   ​भारत और जापान की जीवनशैली में अंतर एवं समानताएं ​जीवन-पद्धति और खान-पान: जापान के नागरिकों की दीर्घायु के पीछे बेहतर पोषण और स्वास्थ्य-व्यवहार की बड़ी भूमिका है। ठीक इसी तरह, भारत में भी यह माना जाता है कि धन से सुख-सुविधाएं खरीदी जा सक...

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें: बिना OTP के बैंक खाता खाली करने वाले नए फ्रॉड से कैसे बचें?

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     ​आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन ठगी करने वाले नए-नए और शातिर तरीके अपना रहे हैं। अब साइबर ठगों ने लोगों को चूना लगाने के लिए ऐसा तरीका निकाल लिया है जिसमें बिना OTP के ही बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं।  कैसे थोड़ी सी लापरवाही या एक छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है और आपका पूरा अकाउंट खाली हो सकता है।   ​यह फ्रॉड कैसे काम करता है? ​साइबर अपराधी अक्सर लोगों को झांसा देने, फर्जी लिंक भेजने या लुभावने ऑफर्स के जरिए मानसिक रूप से उलझाते हैं। लोग सोचते हैं कि जब तक वे किसी के साथ OTP साझा नहीं करेंगे, तब तक उनका पैसा सुरक्षित है। लेकिन यह नया तरीका इस भ्रम को तोड़ता है। इसमें मैलवेयर, स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स या अन्य तकनीकी कमियों का फायदा उठाकर ठग बिना किसी ओटीपी के खातों में सेंध लगा रहे हैं। ​इससे कैसे बचाव करें? ​अज्ञात लिंक्स से बचें: किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें और न ही किसी अनधिकृत ऐप को अपने फोन में डाउनलोड करें। ​स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स से सावधान रहें: किसी भी अनजान कॉलर के कहने पर अपने फोन में AnyDesk, TeamViewer या ऐसे ही अन्य स्क्...

दास कैपिटल फॉर्मेशन: बंगाल में औद्योगिकीकरण और भूमि सुधार की नई दिशा।

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    बंगाल में राजनीतिक परिवर्तन और बयानबाजी से आगे बढ़कर उद्योग स्थापित करने के लिए स्पष्ट इच्छाशक्ति की आवश्यकता है.   उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि प्राप्त करने के तीन मुख्य तरीके हैं—अधिग्रहण (Acquisition), बातचीत द्वारा खरीद (Negotiated purchase), और भूमि पूलिंग (Land pooling). इनमें से किसी एक का चयन परियोजना की प्रकृति पर निर्भर करता है.    पूंजी की कोई विचारधारा नहीं होती, बल्कि उसे संस्थागत स्थिरता, नियमों की स्पष्टता और विश्वसनीयता की आवश्यकता होती है. बंगाल के सामने मूल समस्या केवल भूमि की कमी नहीं, बल्कि बड़े और कानूनी रूप से उपयोग योग्य भूखंडों का अभाव है.    हाल ही में सरकार ने दुर्गा पूजा से पहले 33 उद्योगों को भूमि सौंपने के लिए रास्ता साफ किया है. हालांकि, असली परीक्षा इस बात की होगी कि क्या ये आवंटन समय पर परियोजना के क्रियान्वयन, रोजगार और निजी निवेश में बदलते हैं.   भूमि पूलिंग और नियमों को सरल बनाना मददगार हो सकता है, लेकिन यह कोई जादुई छड़ी नहीं है. बंगाल को पूंजी और औद्योगिकीकरण की राजनीति से ऊपर उठकर एक...

​भारत में बढ़ती प्रोटीन की मांग और चुनौतियाँ।

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   ​भारत की खाद्य प्रणालियों में एक बड़ा बदलाव आ रहा है, जिसके तहत प्रति व्यक्ति प्रोटीन की खपत 2025 के 9.5 किग्रा से बढ़कर 2070 तक 30 किग्रा से अधिक होने का अनुमान है।   ​यदि पारंपरिक तरीकों से इस मांग को पूरा करने का प्रयास किया गया, तो पशुधन, कृषि संसाधनों और ग्रीनहाउस गैसों (CO2) का उत्सर्जन 44 गीगाटन से अधिक हो जाएगा।   ​एशिया रिसर्च एंड एंगेजमेंट (ARE) और FICCI की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, बिना किसी बदलाव के उत्पादन जारी रखने पर 2070 तक वार्षिक उत्सर्जन जलवायु-सुरक्षित सीमा (1.9 गीगाटन) से लगभग आठ गुना अधिक हो सकता है।   ​केवल उत्पादन में सुधार (जैसे मीथेन और खाद उत्सर्जन कम करना) पर्याप्त नहीं है, बल्कि भारत को अपने प्रोटीन स्रोतों में विविधता लानी होगी।   ​इसका उद्देश्य डेयरी, पोल्ट्री या मछली उद्योगों को प्रतिस्थापित करना नहीं है, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय प्रोटीन पोर्टफोलियो तैयार करना है जो मौजूदा प्रणालियों पर अत्यधिक दबाव डाले बिना भविष्य की मांग को संभाल सके।   ​भारत की मुख्य ताकत उसकी अंतर्निहित खाद्य संस्कृति ...

साहित्य: सहानुभूति और दूसरों के प्रति समझ का एक पुल।

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    ( डॉ संजीव कुमार दाहिनी तरफ प्रो विनोद कुमार)  मानव स्वभाव ही है कि हम अपने अनुभवों के केंद्र में जीते हैं। हम अपने अनुभवों के आधार पर दुनिया को समझने का प्रयास करते हैं, लेकिन यही बात हमें दूसरों के प्रति असंवेदनशील भी बना देती है। हम दूसरों की पीड़ा को तब तक पूरी तरह महसूस नहीं कर पाते हैं, जब तक हम उनके संसार के भीतर प्रवेश न करें। साहित्य हमें यही अवसर प्रदान करता है। साहित्य के माध्यम से हम दूसरों के अनुभवों को समझने का प्रयास करते हैं, उनकी पीड़ा को महसूस करते हैं और उनके संसार के भीतर प्रवेश करते हैं। साहित्य हमें सहानुभूति और करुणा का पाठ पढ़ाता है। साहित्य के माध्यम से हम दूसरों के प्रति अपनी समझ को बढ़ा सकते हैं, उनके प्रति सहानुभूति और करुणा का अनुभव कर सकते हैं। साहित्य हमें एक बेहतर इंसान बनाता है, एक बेहतर समाज का निर्माण करने में मदद करता है। #साहित्य #अनुभूति #समझ #करुणा #समाज #बेहतर इंसान #संवेदना

न्याय, संघर्ष और उम्मीद का नया इतिहास: दीपांशु शौकीन और दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव ।

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    दिल्ली विश्वविद्यालय (DUSU) के छात्रसंघ चुनाव हमेशा से राजनीति, रसूख और पैसे की चमक-दमक के लिए जाने जाते रहे हैं। यहाँ के गलियारों से निकले छात्र आगे चलकर देश की राजनीति की मुख्यधारा का हिस्सा बनते हैं। लेकिन इस बार का चुनाव इन तमाम पुरानी परिभाषाओं को पीछे छोड़ गया। इस बार की जीत किसी बड़े राजनीतिक दल के रसूख की नहीं, बल्कि एक डीटीसी बस कंडक्टर के बेटे की बेबाक और दर्द से उपजी आवाज की जीत है। जब दर्द बनता है अलार्म: 'न्याय सत्याग्रह' की अनकही कहानी सितंबर की तपती दोपहरी में दिल्ली यूनिवर्सिटी के दक्षिणी कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन की एक इमारत ('हॉस्टल डेज') अचानक भरभरा कर बैठ गई। इस मलबे में 5 छात्रों और 2 मजदूरों की जान चली गई। यह हादसा सिर्फ एक इमारत का गिरना नहीं था, बल्कि उन हजारों छात्रों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल था जो दिल्ली के महंगे और अनधिकृत पीजी (PG) में रहने को मजबूर हैं। इस हादसे के बाद कैंपस में एक लड़का ऐसा उठा जिसने अपने पैरों से जूते उतार दिए। नाम था दीपांशु शौकीन। उसने कसम खाई कि जब तक इन मासूम बच्चों को इंसाफ नहीं मिल जाता, वह पैरों में जूता-...

अमेरिका के प्रतिबंध अधिनियम का भारत पर प्रभाव।

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      अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट, 2026' का मुख्य उद्देश्य रूस को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के वित्तपोषण से रोकना है।   यह अधिनियम रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 100% तक का भारी शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रावधान करता है।   ​भारत पर प्रभाव के मानदंड: यदि भारत रूस के कच्चे तेल का आयात जारी रखता है और शीर्ष पांच बड़े आयातों में शामिल रहता है, या रूस प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है, तो भारत पर यह टैरिफ लागू हो सकता है।    यदि भारत को आयात कम करना पड़ा, तो देश के भीतर ईंधन की आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।   अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रीय हितों का हवाला देकर इस टैरिफ को माफ कर सकते हैं, या यदि रूस यूक्रेन के साथ शांति समझौता कर लेता है, तो इस स्थिति से बचा जा सकता है।