अकेलेपन के शोर में पक्षियों का मौन साथ !
आज के डिजिटल और प्रतिस्पर्धी युग में, अकेलापन एक ऐसी महामारी बन चुका है जो धीरे-धीरे समाज को अपनी चपेट में ले रहा है। ऊंची इमारतों और भीड़भाड़ वाले शहरों में रहने के बावजूद, इंसान खुद को भीतर से खाली महसूस करता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस मानसिक बोझ का समाधान कहाँ है? जवाब शायद हमारे घर की खिड़की या बालकनी के पास ही है— पक्षियों की मौन संगति में। 1. बिना शर्त का साथ इंसानी रिश्तों में अक्सर उम्मीदें और शिकायतें जुड़ी होती हैं। लेकिन पक्षियों के साथ हमारा रिश्ता पूरी तरह से निस्वार्थ होता है। "वे हमारे दुख नहीं पूछते, हमारी सफलताओं से प्रभावित नहीं होते, फिर भी हमारे साथ होते हैं—एक चिकित्सक की तरह।" यह 'मौन साथ' हमें यह महसूस कराता है कि हम जैसे भी हैं, इस प्रकृति का हिस्सा हैं। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका बैंक बैलेंस क्या है या आप जीवन में कितने सफल हैं। 2. एक प्राकृतिक चिकित्सक मनोवैज्ञानिक भी अब मानते हैं कि प्रकृति के करीब रहने से तनाव कम होता है। पक्षियों का चहचहाना या उनका शांति से आकाश में उड़ना हमारे मस्तिष्क में 'डोपामाइन...