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केंद्रीय बजट 2026-27: मुख्य बिंदु !

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  ​ 1. रुपया कहाँ से आता है? (Government Income) ​सरकार की कुल कमाई के मुख्य स्रोत (प्रति 1 रुपया): ​उधार और अन्य देनदारियां: 24 पैसे ​आयकर (Income Tax): 21 पैसे ​निगम कर (Corporate Tax): 18 पैसे ​GST और अन्य कर: 15 पैसे ​केंद्रीय उत्पाद शुल्क: 8 पैसे ​सीमा शुल्क (Customs): 5 पैसे ​गैर-कर राजस्व: 7 पैसे ​गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियां: 2 पैसे ​ 2. रुपया कहाँ जाता है? (Government Expenditure) ​सरकार द्वारा खर्च की जाने वाली राशि (प्रति 1 रुपया): ​ब्याज भुगतान: 20 पैसे ​करों में राज्यों का हिस्सा: 20 पैसे ​केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं: 16 पैसे ​रक्षा (Defense): 8 पैसे ​सब्सिडी (खाद्य/उर्वरक): 6 पैसे ​वित्त आयोग व अन्य अंतरण: 9 पैसे ​पेंशन: 4 पैसे ​अन्य खर्च: 17 पैसे ​ 3. क्या सस्ता हुआ? (Rates Decreased) ​कैंसर की दवाइयां: सीमा शुल्क (Customs Duty) में भारी कटौती। ​मोबाइल फ़ोन: मोबाइल पार्ट्स और चार्जर पर इंपोर्ट ड्यूटी कम हुई। ​सोलर पैनल: सोलर ग्लास बनाने वाले कच्चे माल पर शुल्क हटा। ​विदेशी पैसा भेजना (LRS): विदेश पैसे भेजने पर TCS 5% से घटकर 2% हुआ। ​मखाना और बीज: कृषि निर्यात बढ़ाने के लि...

मंगल ग्रह की वधू और गोविंद बाबू का 'पुत्र-पुराण' ! ( कहानी )- प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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  जब ईगो के आगे 'वर-वधू स्वयंवर' भी हो जाए भंग ! ​गोविंद बाबू हमारे कॉलेज के वे नियमित अतिथि हैं, जो अतिथि कम और 'पुत्र-प्रशस्ति' के गायक अधिक जान पड़ते हैं। उनके पास फुर्सत का अपार भंडार है और उस भंडार का एकमात्र उपयोग है—अपने सुपुत्र के लिए ऐसी वधू की खोज, जो शायद विधाता ने अभी तक बनाई ही नहीं। ​ कुलीनता का बोझ और ईगो का आकाश ​गोविंद बाबू के परिचय का दायरा उनके पद और प्रतिष्ठा से शुरू होकर उनके अहंकार पर जाकर समाप्त होता है। वे खुद बीडीओ के दामाद हैं, रिटायर्ड प्रिंसिपल हैं, और नवादा-कौआकोल के जमींदार भी। पटना में मकानों की कतार है और संतान के नाम पर केवल एक 'पुत्र-रत्न'। ​उनकी बातों में बेटा एम्स (AIIMS) का 'पे-लेवल 11' वाला अधिकारी है, लेकिन वास्तविकता की परतों में झांकें तो मामला आउटसोर्सिंग और निजी क्षेत्र की धुंधली गलियों में खो जाता है। सरकारी नौकरी का दावा तो बस उनके ईगो को जिंदा रखने वाली एक ऑक्सीजन है। ​ भूगोल की बंदिशें और 'चांद-सितारों' की चाहत ​गोविंद बाबू का अहंकार भौगोलिक सीमाओं को भी नहीं बख्शता। उनके पास बिहार के उन जिलों की ...

स्मृतियों की पाथेय और विदाई की वेला: राजकीय मध्य विद्यालय गायघाट का एक स्वर्णिम अध्याय !

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  ​'चौदह वर्षों का शैक्षणिक वनवास' और स्नेह की अनमोल पूंजी ! ​आज राजकीय मध्य विद्यालय गायघाट, हरसिद्धि की हवाओं में एक अजीब सी भारीपन और आंखों में नमी है। आज हमारे प्रिय साथी, ओजस्वी शिक्षक श्री राजू प्रसाद जी अपनी गौरवशाली सेवा यात्रा को विराम देकर सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 31 जनवरी 2026 की यह तिथि विद्यालय के इतिहास में एक भावुक मोड़ के रूप में दर्ज हो गई है। ​सेवा का संकल्प और जन्मभूमि का मोह ​राजू जी की सेवा यात्रा किसी तपस्या से कम नहीं रही। अपनी जन्मभूमि पटना के मोह को त्यागकर, पूर्वी चम्पारण की इस मिट्टी को अपनी कर्मभूमि बनाना और यहाँ के बच्चों के भविष्य को संवारना उनके लिए एक 'शैक्षणिक वनवास' की तरह था। जैसे प्रभु राम ने वनवास को लोक कल्याण का मार्ग बनाया, वैसे ही राजू जी ने इन 14 वर्षों को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित करने में व्यतीत किया। ​निष्ठा और ईमानदारी का पर्याय ​एक शिक्षक के रूप में उन्होंने केवल पाठ्यपुस्तकें नहीं पढ़ाईं, बल्कि जीवन जीने के संस्कार रोपे। उनकी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ऐसी थी कि विद्यार्थियों के लिए वे केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि मार्ग...

गरीबी का पैमाना ! प्रो प्रसिद्ध कुमार , अर्थशास्त्र विभाग।

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  ​ 1. सरकारी दावा और आंकड़े ​आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, देश की सबसे निचली 5-10% आबादी के उपभोग व्यय (spending) में वृद्धि हुई है। सरकार का मानना है कि सब्सिडी, पेंशन, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और शिक्षा-स्वास्थ्य पर सार्वजनिक खर्च के कारण गरीबों की स्थिति बेहतर हुई है और उपभोग असमानता में कमी आई है। ​ 2. व्यय बनाम वास्तविक आय का संकट ​: क्या खर्च बढ़ने का अर्थ वास्तव में गरीबी कम होना है? ​महंगाई का प्रभाव: कई बार खर्च में बढ़ोतरी खुशी से नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई और जीवन की अनिवार्य जरूरतों के कारण मजबूरी में होती है। ​कर्ज का जाल: आय कम होने पर भी गंभीर जरूरतों के लिए गरीब परिवार बैंक या साहूकारों से कर्ज लेकर खर्च करते हैं, जिसे आंकड़ों में 'सम्पन्नता' मान लेना भ्रामक हो सकता है। ​ 3. विरोधाभास: मुफ्त राशन की योजना ​ यदि देश में गरीबी वास्तव में कम हो गई है, तो सरकार को आज भी 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? इस योजना को 2024 से अगले पांच साल के लिए बढ़ाना धरातल पर गरीबी की निरंतरता को दर्शाता है। ​ 4. स्थायी समाधान की आवश्यकता ​ गरीबी को के...

आधुनिकता की भीड़ में खोता अकेलापन !

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  ​आज का युग सूचना और तकनीक का महासागर है। हमारे पास मनोरंजन के हजारों साधन हैं और दुनिया भर से जुड़ने के लिए उंगलियों के इशारे पर इंटरनेट है। लेकिन विडंबना यह है कि सुविधाओं के इस महासागर में आज का व्यक्ति पहले से कहीं अधिक अकेला और बेचैन है। ### बदलता सामाजिक ढांचा समय के साथ हमारे सामाजिक ताने-बाने में बड़े बदलाव आए हैं: ​लघु परिवार (Nuclear Families): संयुक्त परिवारों का स्थान छोटे परिवारों ने ले लिया है, जिससे बच्चों और बड़ों के बीच का वह भावनात्मक पुल टूट गया है जो पहले कहानियों और साझा समय से बनता था। ​औपचारिक रिश्ते: अब रिश्तों में वह आत्मीयता कम और औपचारिकता ज्यादा नजर आती है। लोग दिल से मिलने के बजाय 'स्टेटस' और 'दिखावे' को अधिक महत्व देने लगे हैं। ​संवाद बनाम संदेश ​ संवाद का स्थान संदेशों ने ले लिया है। पहले लोग घंटों बैठकर बातें करते थे, एक-दूसरे के चेहरे के भाव पढ़ते थे। आज हम एक ही घर में, एक ही सोफे पर बैठे होते हैं, लेकिन हमारी नजरें अपनी-अपनी मोबाइल स्क्रीन पर होती हैं। हम "बात" नहीं करते, बस "टेक्स्ट" करते हैं। इमोजीस ने असली मु...

बजट 2026: भारत की 3 मुख्य व्यापक आर्थिक चिंताएं !

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​ 1. नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) की सुस्त वृद्धि दर ​ बजट निर्माण के लिए 'वास्तविक जीडीपी' (Real GDP) के बजाय नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) अधिक महत्वपूर्ण होती है क्योंकि सरकार के राजस्व अनुमान इसी पर आधारित होते हैं। ​चुनौती: भारत की Nominal GDP वृद्धि दर में गिरावट देखी जा रही है। वित्त वर्ष 2026 के लिए यह लगभग 8% रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। ​प्रभाव: यदि Nominal GDP कम रहती है, तो सरकार का कर संग्रह (Tax collection) भी कम हो जाता है, जिससे राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। ​ 2. कमजोर कर उत्प्लावकता (Weak Tax Buoyancy) ​कर उत्प्लावकता वह अनुपात है जो बताता है कि जीडीपी में बदलाव के साथ कर राजस्व में कितना बदलाव आता है। ​चुनौती: कर संग्रह (विशेषकर कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत आयकर) बजट अनुमानों से कम रहा है। ​परिणाम: कर राजस्व में कमी के कारण सरकार को या तो बाजार से अधिक ऋण (Borrowing) लेना पड़ता है या फिर रक्षा, अनुसंधान (R&D) और सब्सिडी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में खर्च में कटौती करनी पड़ती है। ​ 3. निजी निवेश...

भारतीय अर्थव्यवस्था: वृद्धि की चुनौतियां और नीतिगत विरोधाभास !-प्रो प्रसिद्ध कुमार ,अर्थशास्त्र विभाग।

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  ​हालिया आर्थिक सर्वेक्षण भारत की विकास गाथा का एक ऐसा चित्र प्रस्तुत करता है जो आशावाद और गंभीर संरचनात्मक चिंताओं के बीच झूल रहा है। एक ओर हम विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निवेश, विनिर्माण और मुद्रा स्थिरता जैसे मोर्चों पर कई लाल झंडे दिखाई दे रहे हैं। ​1. विकास दर और 'Viksit Bharat' का लक्ष्य ​FY27 के लिए 6.8-7.2% का अनुमानित GDP विकास दर, विकसित भारत (2047) के लिए आवश्यक 8.2% की निरंतर वृद्धि दर से काफी कम है। ​रियल बनाम नॉमिनल GDP का अंतर: 7.4% रियल GDP और 8% नॉमिनल GDP के बीच का मात्र 0.6% का अंतर (GDP Deflator) यह संकेत देता है कि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति अत्यंत कम या नकारात्मक स्तर पर है। यह उत्पादकों के लिए चिंताजनक है क्योंकि कम 'प्राइसिंग पावर' उनके मुनाफे को सीमित करती है। ​डॉलर टर्म्स में विकास: यदि नॉमिनल ग्रोथ 8% है और रुपया 6.5% गिरता है, तो वैश्विक संदर्भ में हमारी क्रय शक्ति और अर्थव्यवस्था का आकार बहुत धीमी गति से बढ़ता है। यह 'मिडिल-इनकम ट्रैप' की ओर इशारा करता ह...