वैश्विक और भारतीय अर्थव्यवस्था: नीतिगत अनिश्चितता के दौर में राहत के संकेत।
2020 के दशक में वैश्विक स्तर पर "अनिश्चितता" एक प्रमुख शब्द बन चुका है। आर्थिक नीतिगत स्थिरता और अनिश्चितता को मापने के लिए शिक्षाविदों द्वारा तैयार किया गया 'इकोनॉमिक पॉलिसी अनसर्टेनटी इंडेक्स' दुनिया भर के समाचार पत्रों में आर्थिक और नीतिगत अनिश्चितता से जुड़े शब्दों की आवृत्ति के आधार पर स्थिति को मापता है। इस सूचकांक को दुनिया की "नीतिगत धड़कन" के रूप में भी देखा जाता है। हालिया आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ वर्षों के उथल-पुथल भरे दौर के बाद अब वैश्विक और विशेष रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बादल छंटते दिख रहे हैं। संकट के प्रमुख दौर और सूचकांक का उतार-चढ़ाव 2017 से 2026 तक के आंकड़ों पर नज़र डालें तो वैश्विक और भारतीय अनिश्चितता सूचकांक में कई बड़े उछाल देखे गए हैं: कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन: 2020 में फैली वैश्विक महामारी और उसके बाद लगे लॉकडाउन के दौरान अनिश्चितता सूचकांक में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया। टैरिफ और व्यापार युद्ध: इस...