प्रदर्शन की राजनीति: आधुनिक पार्टियों का बदलता स्वरूप !
आधुनिक पार्टियाँ अब आनंद और गर्मजोशी का माध्यम न रहकर केवल प्रदर्शन और सामाजिक हैसियत का जरिया बन गई हैं। जहाँ पहले पार्टियाँ बौद्धिक विमर्श और वास्तविक संबंधों का केंद्र होती थीं, वहीं अब वे एक व्यवसाय या 'कंटेंट' निर्माण का केंद्र बन चुकी हैं। जहाँ अलग-अलग क्षेत्रों के दिग्गज केवल एक-दूसरे के साथ समय बिताने और चर्चा करने आते थे। वहाँ मेजबान का व्यक्तित्व और आत्मीयता मुख्य आकर्षण होती थी। आज की पार्टियों को सोशल मीडिया के हिसाब से डिजाइन किया जाता है। मेहमान अब केवल एक 'प्रॉप' की तरह होते हैं, जिनका उद्देश्य केवल तस्वीरों के माध्यम से एक भव्य छवि पेश करना होता है। इसे "सिंबल ओवर एक्सपीरियंस" (अनुभव से ऊपर प्रतीक) कह सकते हैं। भारत में गहरी आर्थिक असमानता है। जहाँ एक ओर सुपर-रिच वर्ग अपनी शादियों और पार्टियों में करोड़ों खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आंकड़े बताते हैं कि देश का एक बड़ा किसान वर्ग ऋण और गरीबी के कारण आत्महत्या करने को मजबूर है। बड़े आयोजनों के लिए सड़कों को बंद करना और आम जनता को परेशान करना एक प्रकार के "आधुनिक साम्राज्यवा...