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हॉर्मुज जलडमरूमध्य का 'झंडा खेल': जब पाकिस्तान बना अमेरिका का रक्षक!

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         हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। यह खबर ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों में एक नया और अजीबोगरीब मोड़ पेश करती है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने ईरान को भेजे गए एक कथित 'तोहफे' के जरिए अमेरिका की मदद की है।  हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—जो वैश्विक तेल व्यापार के लिए दुनिया का सबसे संवेदनशील रास्ता माना जाता है—वहां अमेरिका के दस जंगी जहाज फंस गए थे या उन्हें निकलने में भारी चुनौती का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में पाकिस्तान ने एक अनोखी तरकीब अपनाई: पहचान छुपाना: अमेरिकी युद्धपोतों पर पाकिस्तानी झंडे लगाए गए। सुरक्षित रास्ता: पाकिस्तानी झंडे की आड़ में इन जहाजों को ईरानी रडार और चुनौती से बचाते हुए हॉर्मुज से बाहर निकाला गया। दोहरे सवाल, दोहरी पोल यह घटना केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि कूटनीतिक रूप से कई राज खोलती है: पाकिस्तान की दोहरी चाल: एक तरफ ईरान के साथ मधुर संबंधों का प्रदर्शन और दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से अमेरिका को "एग्जिट रूट" देना। यह पाकिस्तान की उस रणनीति को उजाग...

धर्म परिवर्तन और आरक्षण: सर्वोच्च न्यायालय का हालिया निर्णय और संवैधानिक स्थिति!

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  हाल ही में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने चिंतादा आनंद बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में अनुसूचित जाति (SC) के दर्जे और धर्म के अंतर्संबंधों पर एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। यह निर्णय न केवल कानूनी व्यवस्था को स्पष्ट करता है, बल्कि देश में आरक्षण के आधारभूत सिद्धांतों को भी रेखांकित करता है। अनुसूचित जाति (SC) और धर्म का वैधानिक संबंध संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुसार, अनुसूचित जाति का दर्जा केवल उन व्यक्तियों को मिल सकता है जो हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानते हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि: यदि कोई व्यक्ति ईसाई या इस्लाम जैसे धर्मों में परिवर्तित होता है, तो वह तत्काल अपना SC दर्जा खो देता है। न्यायालय के अनुसार, ईसाई धर्म अपनी मूल धार्मिक नींव में 'जाति व्यवस्था' को स्वीकार नहीं करता, इसलिए धर्म परिवर्तन के साथ ही जाति-आधारित लाभ समाप्त हो जाते हैं। 'पुनर्वापसी' (Reconversion) की शर्तें न्यायालय ने उन मामलों पर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं जहाँ व्यक्ति वापस हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपनाता है। SC दर्जा बहाल करने के लिए तीन कठोर शर्तें (Cumulative an...

भक्ति की सौम्यता बनाम शक्ति का प्रदर्शन: बदलती रामनवमी और सामाजिक सरोकार !

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पटना। बिहार की राजनीति के वरिष्ठ हस्ताक्षर शिवानंद तिवारी ने रामनवमी के बदलते स्वरूप पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए समाज और प्रशासन के सामने कुछ तीखे सवाल खड़े किए हैं। 1952 से पटना की संस्कृति को करीब से देखने वाले तिवारी का मानना है कि जो पर्व कभी सादगी, खीर-पूड़ी और शांतिपूर्ण झंडा बदलने तक सीमित था, वह अब 'शक्ति प्रदर्शन' के एक आक्रामक मंच में तब्दील होता जा रहा है। परंपरा का बदलता चेहरा: सादगी से शोर तक तिवारी जी अपने संस्मरणों को साझा करते हुए बताते हैं कि साठ के दशक में हथियारों से लैस जुलूस केवल तत्कालीन दक्षिण बिहार (अब झारखंड) के रांची, हजारीबाग और जमशेदपुर जैसे क्षेत्रों तक सीमित थे। शेष बिहार में रामनवमी 'भक्ति' का पर्याय थी। लेकिन वर्तमान परिदृश्य पूरी तरह भिन्न है: हथियारों का प्रदर्शन: तलवारें लहराना और मोटरसाइकिलों पर आक्रामक जुलूस अब आम हो गए हैं। बदलती भागीदारी: उत्सवों में महिलाओं और युवतियों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन उनकी भागीदारी में भी वही आक्रामक तेवर दिखाई दे रहे हैं जो पहले कभी नहीं देखे गए। तनाव और हिंसा: पर्व की मूल भावना के विपरीत, कई स्थानों...

अंतर्मन की शांति: संघर्ष से आत्मबोध तक का सफर!

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  अक्सर हम शांति की तलाश में पहाड़ों, जंगलों या एकांत की ओर भागते हैं। हमें लगता है कि शोर से दूर कहीं हरियाली में बैठने से मन शांत हो जाएगा। लेकिन सत्य यह है कि जीवन की वास्तविक शांति बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर से अंकुरित होती है। शांति के तीन स्तंभ: संतुलन, आशा और करुणा बाहरी परिस्थितियाँ कभी हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन हमारा आंतरिक स्वभाव हमारे हाथ में है। यदि हम अपने भीतर इन तीन गुणों को सींचना शुरू कर दें, तो दुनिया का कोई भी शोर हमें विचलित नहीं कर सकता: संतुलन (Balance): सुख-दुख और लाभ-हानि में खुद को स्थिर रखना। आशा (Hope): घने अंधेरे में भी यह विश्वास रखना कि सवेरा निश्चित है। करुणा (Compassion): स्वयं और दूसरों के प्रति दया का भाव रखना, जो हमारे अहंकार को पिघला देता है। दृष्टिकोण का बदलाव जब हम भीतर से मजबूत होते हैं, तो जीवन के प्रति हमारा नजरिया पूरी तरह बदल जाता है। तब मुश्किलें हमें डराने के बजाय निखारने का काम करती हैं। "जब भीतर का समुद्र शांत हो, तो बाहर के तूफान नाव नहीं डुबो सकते।" संघर्ष नहीं, एक यात्रा इस आंतरिक परिवर्तन के बाद, जीवन केवल चुनौतिय...

भारतीय रुपया: वैश्विक उथल-पुथल के बीच संकेत या अस्थायी विचलन? -प्रो प्रसिद्ध कुमार, अर्थशास्त्र विभाग.

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  वर्तमान में पश्चिम एशिया के युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 7% से अधिक की विकास दर पर टिकी हुई है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026 में रुपये के मूल्य में आई 10.6% की गिरावट ने विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है। यह स्थिति 'टेपर टेंट्रम' (2013-14) की याद दिलाती है, लेकिन क्या वर्तमान गिरावट भारत की आर्थिक कमजोरी का संकेत है या केवल एक बाजार विकृति? 1. गिरावट के प्रमुख कारण और चिंताएं पोर्टफोलियो बहिर्वाह: वित्त वर्ष 2026 में 16.4 बिलियन डॉलर की निकासी हुई है, जो पिछले 28 वर्षों में सर्वाधिक है। भुगतान संतुलन (BoP) घाटा: भारत को लगातार तीन वर्षों (वित्त वर्ष 2025 से) BoP घाटे का सामना करना पड़ सकता है, जो 1991 के बाद पहली बार पूंजी और चालू खाता दोनों में घाटे की संभावना को दर्शाता है। व्यापार घाटा: सेवाओं के निर्यात में वृद्धि के बावजूद, आयात बढ़ने से व्यापार घाटा बढ़ा है। 2. अर्थव्यवस्था के मजबूत पक्ष भारत का चालू खाता घाटा (CAD) वित्त वर्ष 2027 में भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1.5% से नीचे रहने का अनुमान है, जो इसे सुरक्षित दायरे में रखता है। भारतीय रिजर्व बैंक (...

गोरगवाँ मेला: स्मृतियों के झरोखे से टूटती परंपराओं की गूँज! - प्रो. प्रसिद्ध कुमार

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    उँगली थामे पीढ़ियों का सफर!  समय का चक्र भी कितना अद्भुत है! कभी मैं अपने पिताजी की उँगली पकड़कर ग्रामीण मेलों की रौनक देखने जाता था, और आज मैं अपने ज्येष्ठ पुत्र प्रेम रंजन के साथ बाइक पर सवार होकर उसी मेले की ओर बढ़ रहा था। दानापुर स्टेशन और खगौल से करीब 3 किमी पश्चिम, जमालुद्दीन चक पंचायत के गोरगवां गाँव का यह मेला आज भी अपनी जड़ों को थामे खड़ा है, लेकिन इसकी रंगत अब समय की धूल में कुछ धुंधली पड़ने लगी है। चैता की तान और वह रसभरी संस्कृति मेले की असली पहचान यहाँ के 'चैता' गीतों से थी। वह गूँज आज भी कानों में मिश्री घोल देती है: "अरि राम जी के भइले जनमवा... चला हो, करि आई दरशनवा..." पुराने दौर में यहाँ 'चैता के गोला' सजते थे। 6-7 मंडलियाँ, शामियाने के नीचे हारमोनियम, नाल, ढोलक और दर्जनों झालों की थाप पर समां बांध देती थीं। बीच में 'लौंडा नाच' और कलाकारों (वचनवा, जदुआ, सुदामा) की कलाकारी देखने लोग आम के पेड़ों पर चढ़ जाते थे। अफसोस कि पुराने व्यवस्थापकों के जाने के बाद वह पारंपरिक 'चैता मंडली' अब बीते दिनों की बात हो गई है। बाबूचक, महम्मदप...

खगौल में राम नवमी के अवसर पर निकाली गई भव्य झाकियाँ

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  राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने मुख्य अतिथि और  मंत्री रामकृपाल यादव का शॉल ओढ़ाकर भव्य स्वागत किया।   खगौल  (पटना): मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, रामनवमी के पावन अवसर पर आज  खगौल  की    सड़कें भक्ति के रंग में सराबोर नजर आईं। सिर पर केसरिया पगड़ी और हाथों में ध्वज लिए हजारों श्रद्धालुओं के 'जय श्री राम' के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। इस वर्ष खगोल में रामनवमी का जुलूस अपनी भव्यता और आपसी सौहार्द के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। दो समूहों में निकली भव्य झांकी इस बार  खगौल  में   दो प्रमुख समूहों के नेतृत्व में झांकियां निकाली गईं। प्रथम समूह का नेतृत्व आशुतोष कुमार ने किया, जबकि दूसरे समूह की कमान भरत पोद्दार ने संभाली। आशुतोष कुमार के नेतृत्व में निकली झांकी मोती चौक, बड़ी खगोल और नवरतन पुर होते हुए बाबूचक रोड स्थित राम-जानकी मंदिर (देव लोक धाम) पहुंची। राम-जानकी मंदिर में हुआ भव्य अभिनंदन बाबूचक रोड पर राम-जानकी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने मुख्य अतिथि और  मंत...