संकट की ओर भारतीय अर्थव्यवस्था!
भारतीय अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। कभी विश्व की पाँचवीं और फिर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर भारत अब वैश्विक रैंकिंग में पीछे खिसकने की आशंका से घिरा हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, विदेशी निवेश में कमी, बढ़ता व्यापार घाटा और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने आर्थिक विकास की गति को प्रभावित किया है तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर महँगाई और आम नागरिक की क्रय-शक्ति पर पड़ता है। दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों द्वारा पूँजी। रुपये के लगातार अवमूल्यन से आयात महँगा हो रहा है, जिससे पेट्रोलियम, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर महँगाई और आम नागरिक की क्रय-शक्ति पर पड़ता है। दूसरी ओर, विदेशी निवेशकों द्वारा पूँजी निकासी से शेयर बाजार और निवेश वातावरण भी प्रभावित हुआ है। भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है क्योंकि आयात की तुलना में निर्यात अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पा रहा है। विनिर्माण क्षेत्र, रोजगार सृजन और निजी निवेश में अपेक्षित सुधार ...