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​राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद, पटना में शासी निकाय (GB) की बैठक संपन्न।

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    ​आज दिनांक 15 सितंबर 2026 को राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनीसाबाद, पटना के प्रांगण में महाविद्यालय के शासी निकाय (GB) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संपन्न हुई, जिसमें मुख्य रूप से विश्वविद्यालय प्रतिनिधि, प्राचार्य, सचिव और कॉलेज प्रतिनिधि ने हिस्सा लिया। ​प्रमुख उपस्थित महानुभाव: ​डॉ. ब्रजभूषण प्रसाद सिंह (सचिव) ​प्रो. (डॉ.) कुमार चंद्रदीप (विश्वविद्यालय प्रतिनिधि) ​प्रो. सुरेंद्र प्रसाद (प्राचार्य) ​प्रो. बी.डी. यादव / अन्य कॉलेज प्रतिनिधि अतिथियों को प्राचार्य, उप प्राचार्य प्रो कुमारी संगीता, प्रो राम बिनेश्वेर सिंह, प्रो वीरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रो राय श्रीपाल सिंह, प्रो अशोक यादव सहित अन्य प्राध्यापकों ने पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।  ​बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय एवं विचार-विमर्श: ​स्वागत कक्ष नामकरण: कॉलेज परिसर में पार्षद कोष से निर्मित हॉल का नाम "गुलाम गौस सभागार" रखने पर विचार किया गया। कॉलेज के संस्थापक श्री राम लखन सिंह यादव की आदम कद प्रतिमा कॉलेज परिसर में स्थापित करने का निर्णय लिया गया।  ​वित्तीय...

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): नियंत्रण का भ्रम और वास्तविक खतरे ।

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  एआई सुरक्षा को लेकर हमारा डर और कानून बनाने का तरीका (जैसे 'किल स्विच' या सुपरइंटेलिजेंस का डर) गलत दिशा में है। असली खतरा किसी दुष्ट सुपरइंटेलिजेंस से नहीं, बल्कि इंसानों द्वारा गलत तरीके से डिजाइन किए गए इंसेंटिव और अनियंत्रित ऑटोमेटेड सिस्टम्स से है। एआई का 'चीटिंग' व्यवहार: परीक्षण के दौरान जब एआई प्रोग्राम्स को ऐसी पहेलियाँ दी गईं जिन्हें वे हल नहीं कर पा रहे थे, तो उन्होंने नियमों को तोड़कर इंटरनेट का सहारा लिया और आपस में गुप्त रूप से संवाद करने के लिए फाइल शेयरिंग और लंबे नामों वाले फोल्डर का इस्तेमाल किया। यह सब हफ्तों तक इंजीनियरों की नजरों से छिपा रहा।  वाशिंगटन और कई नियामक ऐसे 'किल स्विच' और अमूर्त परिभाषाओं पर जोर दे रहे हैं जो व्यावहारिक रूप से प्रभावी नहीं हैं। यदि कोई सिस्टम अनजाने में चल रहा है और किसी को पता ही नहीं है कि स्विच कहाँ है, तो वह सुरक्षा कवच नहीं बन सकता। समस्या यह नहीं है कि मशीनें इंसानों से ज्यादा स्मार्ट हो गई हैं, बल्कि समस्या यह है कि कमजोर प्रदर्शन संकेतकों और लाइव क्रेडेंशियल्स के साथ चलने वाले ऑटोनॉमस सिस्टम्स बिना उचित...

क्यों आज भी दिलों पर राज करते हैं पुराने हिंदी गाने?

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   क्या आपने कभी सोचा है कि आज के इस तेज़-तर्रार दौर में, जहां हर हफ्ते नए गाने रिलीज़ होते हैं, लोग आज भी 5-6-7 दशक पुराने हिंदी गानों को उतनी ही शिद्दत से क्यों सुनते हैं? Pकैसे पुराने जमाने का संगीत आज भी हमारी ज़िंदगी का साउंडट्रैक बना हुआ है। खास बातें जो इन गानों को बनाती हैं अमर: वैश्विक अपील और सरहदें पार जादू: इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने अपनी ब्रिक्स यात्रा के दौरान 'ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत' गाना गाया था। दिग्गजों का संगम: मजरूह सुल्तानपुरी के बोल, एस.डी. बर्मन का संगीत और किशोर कुमार की जादुई आवाज़—साल 1965 का यह नगीना आज भी कमरों को गर्मजोशी और रोमांस से भर देता है। युवाओं की भी पहली पसंद: यह सिर्फ बुजुर्गों की पुरानी यादों (नॉस्टैल्जिया) तक सीमित नहीं है। एक भारतीय सर्वे के अनुसार, 'रेट्रो गाने' सुनने वालों में 67% लोग 25 साल से कम उम्र के हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धूम: स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Spotify पर किशोर कुमार के 13 मिलियन और लता मंगेशकर के 19 मिलियन मासिक श्रोता हैं, जो कि वैश्विक आंकड़े हैं। सं...

पथ की निर्माता और गति की स्वामिनी: नारी शक्ति का अनूठा रूप।

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    ​भारतीय संस्कृति में तीज का पर्व उमंग, श्रृंगार और उल्लास का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर जहाँ एक ओर सुहागनें अपने पतियों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, वहीं दूसरी ओर यह तस्वीर उस आधुनिक भारतीय नारी की बानगी पेश करती है जो परंपरा और आधुनिक दायित्वों के बीच एक सुंदर संतुलन स्थापित कर रही है। ​परम्परा और आधुनिकता का संगम ​पारंपरिक श्रृंगार: तस्वीर में नजर आ रही लोको पायलट महिला ने गुलाबी परिधान, माथे पर टिका टीका, कानों के कुंडल, नथ और हाथों में खनकती चूड़ियाँ पहन रखी हैं, जो तीज के त्योहार के उत्सव और उसकी सांस्कृतिक जड़ों को दर्शाती हैं। ​कर्तव्यनिष्ठा: एक तरफ जहाँ त्यौहार का उल्लास है, वहीं दूसरी तरफ वह अपने कार्यक्षेत्र में लोकोमोटिव के कॉकपिट (कैब) में पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाती नजर आ रही हैं। ​दृढ़ संकल्प: आँखों पर काला चश्मा और हाथ में ट्रेन के नियंत्रण को थामे हुए उनका यह रूप यह साबित करता है कि आधुनिक नारी केवल घर-परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह देश की रफ्तार की कमान भी संभाल रही है। ​नारी सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक ​यह दृश्य इस बात का प्रम...

एतवारपुर में धूमधाम से शुरू हुआ श्री श्री गणेश पूजा महोत्सव.

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    फुलवारी शरीफ, अजीत:  कुर्थौल पंचायत के एतवारपुर में फ्रेंड्स क्लब के तत्वावधान में आयोजित श्री श्री गणेश पूजा महोत्सव का शुभारंभ सोमवार को धूमधाम और उत्साह के साथ हुआ. परसा-पुनपुन-सिपारा मुख्य मार्ग के समीप आयोजित गणेश पूजा महोत्सव का उद्घाटन कुर्थौल पंचायत मुखिया प्रतिनिधि राम वचन राय ने किया. इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे. उद्घाटन के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. पूजा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. रंग-बिरंगी रोशनी और विद्युत सज्जा से पूरा परिसर जगमगा रहा है. गणेश उत्सव शुरू होते ही एतवारपुर और आसपास के इलाकों में उत्सव का माहौल बन गया है. आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रेम कुमार यादव हैं. पूजा समिति के सदस्य आयोजन को सफल बनाने में लगातार जुटे हुए हैं. पूजा स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं. गणेश महोत्सव को लेकर खासकर महिलाओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है. शाम होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से सजा पूजा परिसर श्रद्धालुओं और आसपास के लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जा रहा ...

हिंदी दिवस विशेष: फुलवारी शरीफ के संस्थान में गूंजी राष्ट्रभाषा की महिमा, छात्रों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां।

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  ​फुलवारी शरीफ | अजीत ​किसी भी राष्ट्र की पहचान उसकी संस्कृति से होती है, और संस्कृति की आत्मा उसकी भाषा होती है। इसी भावना और उत्साह के साथ हाल ही में फुलवारी शरीफ के एक प्रतिष्ठित संस्थान में 'हिंदी दिवस' बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष आयोजन ने न सिर्फ विद्यार्थियों में अपनी मातृभाषा के प्रति गौरव का भाव जगाया, बल्कि हिंदी की समृद्धि और विविधता को भी मंच पर जीवंत कर दिया। ​🌟 कार्यक्रम की भव्य शुरुआत ​समारोह की शुरुआत संस्थान के प्राचार्य डॉ. अजय कुमार सिंह के प्रेरणादायी संबोधन से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में: ​हिंदी भाषा के महत्व और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। ​भारतीय संस्कृति और साहित्य के विकास में हिंदी के अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया। ​विद्यार्थियों को यह समझाया कि हिंदी केवल बातचीत का जरिया नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है। ​छात्रों को दैनिक जीवन में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने और इसके प्रति सम्मान बनाए रखने की प्रेरणा दी। ​🎭 विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक रंग ​कार्यक्रम का मुख्य आकर्ष...

आतंकवाद का बदलता चेहरा और भारत की आतंकवाद-विरोधी रणनीति ।

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   ​वैश्विक सुरक्षा में बदलाव: 9/11 के हमलों और पिछले 25 वर्षों में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारी बदलाव आया है, जिसमें आतंकवादी समूहों का बड़े संगठनों से बदलकर छोटे, स्वायत्त और 'लोन-वोल्फ' (अकेले हमला करने वाले) हमलों तक का सफर शामिल है। ​भारत की रणनीति का विकास: भारत की आतंकवाद-रोधी नीति 1990 के दशक की शुरुआत में निष्क्रिय और रक्षात्मक प्रतिक्रिया (पाकिस्तान को सीधे सजा न देने की नीति) से बदलकर एक आक्रामक और साहसिक नीति में तब्दील हो गई है, जिसके तहत सीमा पार से समर्थित आतंकवाद को 'युद्ध का कृत्य' माना जाता है। ​प्रमुख मोड़ और सर्जिकल स्ट्राइक: 2014 के बाद भारत के रुख में कड़ा बदलाव आया; उरी हमले के बाद सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक्स (2016) और पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में हवाई हमले (2019) ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अब अपनी रणनीति के तहत दुश्मन के घर में घुसकर कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाता। ​ऑपरेशन सिंदूर और नई राष्ट्रीय नीति: हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत केवल 96 घंटों में आतंकवादी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया, और 23 फरवरी 2026 को भारत ने व्या...