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​खाद्य सुरक्षा: जन-स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था की दहलीज पर संकट !

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    ​आज के दौर में 'शुद्धता' एक दुर्लभ शब्द बन गई है। जिस भोजन को हम जीवनशक्ति का आधार मानते हैं, वही आज बीमारियों का घर बनता जा रहा है। खाद्य पदार्थों में मिलावट केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्र की साख और उसकी आर्थिक नींव पर भी एक बड़ा प्रहार है। ​स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था का अंतर्संबंध: जब खाद्य पदार्थों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तो सार्वजनिक स्वास्थ्य का स्तर गिरता है। एक बीमार कार्यबल देश की उत्पादकता को कम करता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'मेड इन इंडिया' खाद्य उत्पादों की विश्वसनीयता कम होने से निर्यात और अंततः अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ​त्रिपक्षीय जिम्मेदारी (सरकार, उद्योग और नागरिक):  यह लड़ाई अकेले नहीं जीती जा सकती: ​सरकार: कानून सख्त हों और उनका पालन 'कागजों' के बजाय धरातल पर हो। ​उद्योग: केवल मुनाफे की अंधी दौड़ के बजाय नैतिक व्यापार को प्राथमिकता दी जाए। ​नागरिक: एक जागरूक उपभोक्ता ही बाजार को सुधरने पर मजबूर कर सकता है। ​जांच और न्याय प्रक्रिया में सुधार: अक्सर मिलावटखोर इसलिए नहीं डरते क्योंकि जांच की...

नया वर्ष: आत्मनिरीक्षण, बदलाव और नई संभावनाओं का संगम !

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  जीवन अपनी प्रकृति में अनिश्चित और अप्रत्याशित है। जिस प्रकार ऋतुएं बदलती हैं, उसी प्रकार 'वर्ष का परिवर्तन' हमें यह याद दिलाने का एक सशक्त माध्यम है कि परिवर्तन ही जीवन का आधार है। विकास के लिए बदलाव अनिवार्य है, और यही वह समय है जब हम अपनी सीमाओं को लांघकर एक नई यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं। 1. आराम क्षेत्र से बाहर कदम अक्सर हम भय या हिचकिचाहट के कारण नए अवसरों को टाल देते हैं।  हम अपने 'कंफर्ट ज़ोन' से बाहर निकलें। सोच-समझकर लिया गया जोखिम न केवल हमें साहसी बनाता है, बल्कि उन द्वारों को भी खोलता है जिन्हें हमने डर के मारे बंद कर रखा था। 2. प्रशंसा और सकारात्मक दृष्टिकोण बीते वर्ष की उपलब्धियों और दूसरों के प्रयासों की सराहना करना केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक निवेश है। जब हम कृतज्ञता  का भाव रखते हैं, तो जीवन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। यह नजरिया हमें मुश्किल समय में भी टूटने के बजाय लड़ने की शक्ति देता है। 3. सजगता और मानसिक स्पष्टता आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में 'सजगता'  और 'ध्यान' अनिवार्य हैं। दैनिक उद्दे...

समय की पुकार ( कविता )-प्रो प्रसिद्ध कुमार । नववर्ष 2026 मंगलमय हो!💐💐

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​ नववर्ष तो आता रहता है, पर उम्र घटती जाती है, टिक-टिक करती घड़ी हमें, बस यही याद दिलाती है। न काल रुकेगा, न आयु रुकेगी, यह वश में हमारे नहीं, पर जो करना है आज हमें, वह याद हमें रहता ही नहीं। ​ हम 'कल' पर सब कुछ टाल रहे, जो आज हाथ में आया है, न पल मिलना, न उम्र दोबारा, यह कैसी मोह-माया है? हम प्रेम-भाव से रह सकते, सद्भाव की राह चुन सकते थे, हम नेक राह पर चलकर भी, सुंदर सपने बुन सकते थे। ​ पर फितरत ऐसी बदल गई, हम भेदभाव में खो बैठे, जाति-धर्म और रंग-रूप के, कड़वे बीज हम बो बैठे। बनावटी चेहरा ओढ़ लिया, सादगी कहीं अब खो गई है, औरों के पथ में जाल बिछाना, फितरत अपनी हो गई है। ​ ऐश्वर्य की अंधी चाहत में, हम मानवता को भूल गए, कुकर्मों की बैसाखी थामी, मर्यादा से मुँह मोड़ लिए। न कबीर पढ़े, न रहीम पढ़े, न तर्क-ज्ञान को माना है, कुएँ के मेंढक बन बैठे, बस खुद को ही पहचाना है। ​ अभी वक्त है, जाग उठें हम, सत्कर्मों की राह चलें, इतिहास-बोध और ज्ञान की ज्योति, अपने भीतर हम ढलें। समय की रेत फिसलने से पहले, इंसान ज़रा तू जाग जा, नफ़रत के इस अंधेरे से, उजाले की ओर तू भाग जा।

​कलम की स्वतंत्रता और आँकड़ों की वैश्विक उड़ान: मेरी ब्लॉगिंग यात्रा का एक स्वर्णिम अध्याय !प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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    ​"जब गुलामी वाली पत्रकारिता का सामना हुआ, तो मैंने उसे छोड़कर अपनी राह खुद बनाना ही श्रेष्ठ समझा।" इसी संकल्प के साथ मैंने करीब  पाँच साल पहले अपने इस स्वतंत्र ब्लॉग की नींव रखी थी। आज 31 दिसंबर 2025 को, जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो 4300 ब्लॉग पोस्ट और 2,69,661 (पौने तीन लाख के करीब) व्यूअर्स का यह आँकड़ा मेरे वैचारिक संघर्ष की जीत का प्रमाण देता है। ​विकास का तुलनात्मक विश्लेषण (2022 - 2025) ​मेरे ब्लॉग की प्रगति केवल अंकों की वृद्धि नहीं, बल्कि आप पाठकों के बढ़ते विश्वास की कहानी है। साल 2022 में मेरे 1,816 ब्लॉग पर 71 हजार व्यूअर्स थे। आज 2025 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 4,300 ब्लॉग और 2.69 लाख से अधिक व्यूअर्स तक पहुँच गई है। ​प्रतिशत के नजरिए से देखें तो: ​ब्लॉग पोस्ट की संख्या में 136% की वृद्धि हुई है। ​व्यूअर्स (पाठकों) की संख्या में 280% की भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। ​वैश्विक मानचित्र पर मेरी वैचारिक गूँज ​आज मुझे गर्व है कि मेरे विचारों को सीमाएं नहीं रोक पाईं। वर्तमान में 30 से अधिक देशों के लोग मेरे ब्लॉग को नियमित पढ़ रहे हैं। भारत के अलावा मुख्य रूप से ...

अलविदा 2025 — स्मृतियों का कोलाज और सुनहरे कल की आहट !

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     ​1. उपलब्धियों का शिखर: विज्ञान और तकनीक का दम ​साल 2025 ने साबित कर दिया कि सीमाएँ केवल नक्शों पर खींची जा सकती हैं, संभावनाओं पर नहीं। ​अंतरिक्ष में भारत का दबदबा: इसरो (ISRO) के मिशनों ने इस साल नई सफलताएँ अर्जित कीं। विशेष रूप से गगनयान के मानव रहित परीक्षणों और चंद्रमा के अनछुए पहलुओं की खोज ने भारत को अंतरिक्ष विज्ञान में एक 'ग्लोबल पावरहाउस' के रूप में स्थापित किया। ​तकनीकी आत्मनिर्भरता: भारत ने इस साल 'सेमीकंडक्टर हब' बनने की दिशा में ऐतिहासिक छलांग लगाई। स्वदेशी चिप निर्माण और AI के नैतिक उपयोग में भारतीय नवाचारों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। ​2. महत्वपूर्ण घटनाएँ: वैश्विक और राष्ट्रीय बदलाव ​पर्यावरण की चुनौती और समाधान: COP सम्मेलनों के बीच 2025 में रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ते कदमों ने उम्मीद जगाई। भारत का 'ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' अब कागजों से निकलकर सड़कों और उद्योगों में दिखने लगा है। ​खेल जगत की चमक: भारतीय युवाओं ने वैश्विक मंचों पर पदकों की झड़ी लगाकर यह बता दिया कि भारत अब एक 'मल्टी-स्पोर्ट्स नेशन' बन चुका है। ​3. उन महान हस्तियों को ...

​विदाई बेला: कर्तव्य पथ से सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ते कदम !

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    ​दानापुर रेल मंडल में 46 रेलकर्मियों का सम्मानजनक विदाई समारोह ​जीवन का एक लंबा पड़ाव जब पूर्ण होता है, तो स्मृतियों का कारवां साथ चलता है। कुछ ऐसा ही दृश्य आज दानापुर मंडल रेल कार्यालय के सभागार में देखने को मिला, जहाँ दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्त होने वाले 46 रेलकर्मियों के सम्मान में "समापक भुगतान एवं विदाई समारोह" का भव्य आयोजन किया गया। ​सम्मान और कृतज्ञता ​समारोह के मुख्य अतिथि, मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री विनोद कुमार ने सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अंगवस्त्र और समापक भुगतान के दस्तावेज सौंपकर सम्मानित किया। उन्होंने कर्मचारियों के दशकों के परिश्रम और भारतीय रेल के प्रति उनके समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी। ​कार्यक्रम की रूपरेखा वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी श्री अतुल कुमार द्वारा प्रस्तुत की गई, जिन्होंने समापक भुगतान की प्रक्रिया और विवरण साझा किए। ​भविष्य के लिए अनमोल सुझाव ​मंडल रेल प्रबंधक ने अपने संबोधन में रेलकर्मियों के सुखद और समृद्ध भविष्य की कामना की। साथ ही, उन्होंने एक अत्यंत व्यावहारिक सलाह देते हुए कहा कि: ​"जीवन भर की इस जमा पूंजी...

​नवाब आलम: जहाँ कानून की संजीदगी और कला की संवेदना का मिलन होता है !-प्रो प्रसिद्ध कुमार।

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 जन्मदिन की बधाई !💐💐 ​बिहार की मिट्टी ने सदैव ऐसे मनीषियों को जन्म दिया है जिन्होंने समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ बनना अपना धर्म समझा। इसी कड़ी में एक दीप्तिमान नाम है—नवाब आलम। पेशे से अधिवक्ता, स्वभाव से कलाकार और आत्मा से एक सजग सामाजिक कार्यकर्ता; नवाब आलम जी का व्यक्तित्व किसी बहुआयामी इंद्रधनुष की तरह है, जिसका हर रंग समाज सेवा और लोक-कल्याण को समर्पित है। ​बहुआयामी व्यक्तित्व: एक संक्षिप्त परिचय ​पटना के खगौल की गलियों से शुरू हुआ उनका सफर आज पूरे बिहार के लिए एक मिसाल बन चुका है। स्नातक और पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त करने वाले नवाब साहब ने 1990 में जब दानापुर सिविल कोर्ट के गलियारों में कदम रखा, तो उनके हाथ में केवल कानून की किताबें नहीं थीं, बल्कि उनके दिल में गरीबों के प्रति अगाध संवेदना भी थी। आज भी वे उन असहाय लोगों के लिए आशा की किरण हैं, जिन्हें वे निःशुल्क न्यायिक सलाह देकर न्याय की दहलीज तक पहुँचाते हैं। ​कला और साहित्य के 'सूत्रधार' ​नवाब जी केवल कानून के ज्ञाता ही नहीं, बल्कि कला-संस्कृति के अनन्य उपासक भी हैं। नाट्य संस्था 'सूत्रधार' के संस्थापक म...