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उत्तर और दक्षिण का महामिलन: काशी-तमिल संगमम!

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  ​वर्ष 2022 भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब वाराणसी की पावन धरा पर 'काशी-तमिल संगमम' का शंखनाद हुआ। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत को पुनर्जीवित करने का एक पावन प्रयास था। ​एक यात्रा, अनेक अनुभव ​तमिलनाडु की उर्वर भूमि से आए लेखकों, विद्यार्थियों, कलाकारों, विद्वानों और किसानों ने जब काशी की धरती पर कदम रखा, तो एक अद्भुत संगम देखने को मिला। अतिथियों ने न केवल काशी की दिव्यता को महसूस किया, बल्कि प्रयागराज के संगम और अयोध्या की मर्यादा के दर्शन कर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण किया। ​निरंतर विस्तार और नयापन ​इस पहल की सफलता को देखते हुए, आगामी आयोजनों में इसे और भी भव्य और व्यापक रूप दिया गया है। इसके मूल में कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्य समाहित हैं: ​नवाचार: संगमम में समय-समय पर नए विषयों को जोड़ना ताकि चर्चा के नए द्वार खुलें। ​सृजनात्मकता: परंपरागत और रचनात्मक तरीकों का मेल करना ताकि युवा पीढ़ी भी इससे गहराई से जुड़ सके। ​जन-भागीदारी: इसे केवल एक सरकारी आयोजन न रखकर, एक 'जन-आंदोलन' बनाना जहाँ हर व्यक्ति अपनी भागीदारी सुनिश्चित ...

​शिक्षा और निरंतर अभ्यास: उज्ज्वल भविष्य का आधार !

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   ​शिक्षा केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन सीखने की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। जब हम सीखने की इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करते हैं, तो न केवल व्यक्ति के जीने की राह आसान होती है, बल्कि पूरे समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा मिलती है। ​अभ्यास का महत्व ​शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए 'निरंतर अभ्यास' वह कुंजी है जो ज्ञान को कौशल में बदल देती है। बिना अभ्यास के महानतम सिद्धांत भी विस्मृत हो जाते हैं। अभ्यास हमें त्रुटियों को सुधारने और अपनी क्षमताओं को निखारने का अवसर देता है। ​आधुनिक शिक्षा के तीन स्तंभ शिक्षा को व्यापक बनाने के लिए हमें तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा: ​सुलभता: शिक्षा समाज के हर वर्ग तक आसानी से पहुँचनी चाहिए। ​प्रयोगात्मक दृष्टिकोण: केवल रटना पर्याप्त नहीं है; शिक्षा को व्यावहारिक  होना चाहिए ताकि विद्यार्थी उसे वास्तविक जीवन में लागू कर सकें। ​अनुसंधान और विकास : शिक्षा के क्षेत्र में नई खोजों और विकास को बढ़ावा देना अनिवार्य है, ताकि हम बदलते समय के साथ कदम मिला सकें।

जल संकट: उपलब्धता से बड़ी चुनौती बनती गुणवत्ता!

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     ​संयुक्त राष्ट्र की 'विश्व जल रिपोर्ट 2024' ने एक बार फिर मानवता के सामने खड़े सबसे बड़े संकट की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 2.2 अरब आबादी आज भी सुरक्षित पेयजल से वंचित है। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक त्रासदी है। भारत के संदर्भ में यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है क्योंकि दुनिया की लगभग 18% आबादी वाले इस देश के पास वैश्विक मीठे जल के संसाधनों का मात्र 4% हिस्सा ही उपलब्ध है। ​उपलब्धता बनाम गुणवत्ता ​अक्सर जल संकट की चर्चा केवल पानी की 'कमी' तक सीमित रह जाती है, लेकिन इंदौर जैसी हालिया घटनाएं एक अलग और अधिक गंभीर पहलू की ओर ध्यान खींचती हैं। चुनौती केवल यह नहीं है कि नल में पानी आ रहा है या नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, वह कितना सुरक्षित है? ​निगरानी का अभाव: आज भी हमारे सिस्टम में घरों तक पहुँचने वाले पानी की गुणवत्ता की निरंतर और वास्तविक समय  निगरानी करने की व्यवस्था का अभाव है। ​स्वास्थ्य पर संकट: असुरक्षित पेयजल केवल प्यास का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हैजा, टायफाइड और हेपेटाइटिस ...

राम लखन सिंह यादव कॉलेज में 'दही-चूड़ा' भोज का आयोजन: विमर्श और मिठास के साथ हुआ नववर्ष का अभिनंदन !

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  अनिसाबाद, पटना। नूतन वर्ष के आगमन और मकर संक्रांति के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर, अनिसाबाद स्थित राम लखन सिंह यादव कॉलेज के प्रांगण में आत्मीयता और उत्साह का एक अनूठा संगम देखने को मिला। अवसर था—सामूहिक दही-चूड़ा भोज और शैक्षणिक बेहतरी के लिए आयोजित एक विशेष विमर्श बैठक का। शैक्षणिक संकल्पों की गूँज आयोजन की शुरुआत कॉलेज के भविष्य की रूपरेखा और पठन-पठन की सुचारू व्यवस्था पर चर्चा के साथ हुई। बैठक में मुख्य रूप से पाठ्यक्रम को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने और सत्र को नियमित बनाए रखने पर बल दिया गया। प्राचार्य प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सामूहिक प्रयासों से ही संस्थान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। परंपरागत स्वाद और अपनों का साथ बैठक के पश्चात कॉलेज परिवार ने बिहार की पारंपरिक संस्कृति के प्रतीक 'दही-चूड़ा' भोज का आनंद लिया। कड़कड़ाती ठंड के बीच तिलकुट की मिठास और दही-चूड़ा के मेल ने माहौल को उत्सव जैसा बना दिया। शिक्षकों और अतिथियों के बीच हँसी-ठिठोली और स्नेहपूर्ण संवाद ने यह दर्शाया कि अनुशासन के साथ-साथ आपसी सौहार्द ही किसी भी शिक्षण संस्थान की अस...

भारत की उभरती अर्थव्यवस्था: गिग इकोनॉमी का योगदान और चुनौतियाँ !

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  आज भारत की सड़कों पर दौड़ते लाखों युवा केवल सामान की डिलीवरी नहीं कर रहे, बल्कि वे भारत की सप्लाई चेन मैनेजमेंट की अंतिम कड़ी  को मजबूती दे रहे हैं। नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 2 करोड़ कामगार आज इस क्षेत्र से जुड़े हैं, जिन्हें हम 'गिग वर्कर्स' कहते हैं। 1. अर्थव्यवस्था में योगदान और विकास दर गिग इकोनॉमी भारत की आर्थिक रफ्तार को नई दिशा दे रही है। इसके प्रमुख आर्थिक प्रभाव निम्नलिखित हैं: जीडीपी में हिस्सेदारी: भारत के विशाल सप्लाई चेन मैनेजमेंट के अंतिम छोर पर काम करने वाले इन लोगों का जीडीपी के 1.25 फीसदी विकास में बड़ा हाथ है। कारोबार का विस्तार: वर्ष 2024 तक इस क्षेत्र ने 455 अरब डॉलर के कुल कारोबार में अपना योगदान दिया है। उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था: भारत की अर्थव्यवस्था निर्यात के बजाय घरेलू उपभोग पर अधिक आधारित हो रही है। इंटरनेट और स्मार्टफोन के विस्तार ने 'क्लिक और डिलीवरी' मॉडल को सफल बनाया है, जिससे क्रय प्रबंधन सूचकांक (PMI) में भी सुधार देखा गया है। 2. गिग वर्कर्स का सामाजिक प्रभाव  गिग इकोनॉमी ने सामाजिक संरचना में भी सकारात्मक बदलाव किए हैं: रोज...

भारतीय अर्थव्यवस्था: एक आलोचनात्मक आर्थिक विश्लेषण !-प्रो प्रसिद्ध कुमार , अर्थशास्त्र ,विभाग।

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  भारत की आर्थिक स्थिति 'दोधारी तलवार' पर खड़ी है। एक ओर जहाँ घरेलू विकास दर सकारात्मक है, वहीं बाहरी कारक 'मैक्रो-इकोनॉमिक' स्थिरता के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं। निर्यात-आधारित विकास बनाम संरक्षणवाद: भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में विदेशी मुद्रा भंडार और निर्यात में वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, अमेरिका की 'संरक्षणवादी' (Protectionist) नीतियां और टैरिफ बाधाएं भारत के 'तुलनात्मक लाभ'  को प्रभावित कर रही हैं। व्यापार घाटा और टैरिफ युद्ध: राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए उच्च शुल्क एक 'टैरिफ युद्ध' जैसी स्थिति पैदा कर रहे हैं। इससे भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों जैसे फार्मास्यूटिकल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी और आईटी सेवाओं की 'प्रतिस्पर्धात्मकता' कम हो सकती है। आपूर्ति श्रृंखला  लागत-जन्य मुद्रास्फीति: रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित है। यदि अमेरिका रूस से तेल खरीद पर प्रतिबंध कड़े करता है, तो भारत की 'इनपुट लागत' बढ़ेगी, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था में 'लागत-जन्य मुद्रास्फीति...

🌟 साहेब शाही तिलकुट भंडार, खगौल 🌟"रिश्तों जैसी मिठास, शुद्धता के साथ।"

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     (50 वर्षों से आपकी सेवा में समर्पित)    सोंधी खुशबू, शुद्ध मिठास – साहेब शाही पर है सबका विश्वास।" "गया का असली स्वाद, अब खगौल की हर जुबान पर।" "सकरात का असली आनंद, साहेब शाही तिलकुट के संग।" क्या आप भी ढूंढ रहे हैं गया के मशहूर कारीगरों द्वारा निर्मित सोंधी खुशबू वाला असली तिलकुट? खगौल बाजार में साहेब शाही तिलकुट भंडार लेकर आए हैं शुद्धता और स्वाद का बेजोड़ खजाना। हमारे यहाँ अनुभवी कारीगरों द्वारा आपकी आँखों के सामने गर्म-गर्म तिलकुट तैयार किए जाते हैं। हमारी खासियतें: ✅ वैरायटी: तिलवा तिलकुट, शाही मस्का, शुद्ध घी वाला तिलकुट, बादाम पट्टी और खोवा तिलकुट। ✅ शुद्धता: बेहतरीन तिल और गुड़/चीनी का उचित मिश्रण। ✅ उचित मूल्य: थोक एवं खुदरा बिक्री के लिए सबसे विश्वसनीय स्थान। ✅ बहुमुखी सेवा: जाड़े में खास अंडे की दुकान और सालों भर ताजे फलों की उपलब्धता। सेहत का खजाना: तिल केवल स्वाद ही नहीं, सेहत भी देता है! कैल्शियम और मैग्नीशियम से भरपूर तिल हड्डियों को मजबूत बनाता है और कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में सहायक है। एक खास बात: हमारे यहाँ मानवता सर्वोपरि है। सकरा...