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सिस्टम की संवेदनहीनता की भेंट चढ़ती बेटियां: पटना हॉस्टल कांड और खाकी पर उठते सवाल !😢😢

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  राजधानी पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में मेडिकल की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत ने एक बार फिर बिहार की कानून-व्यवस्था और 'सुशासन' के दावों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यह सिर्फ एक छात्रा की मौत नहीं है, बल्कि उन हजारों सपनों की हत्या है जो बेटियां अपनी आँखों में लेकर दूसरे शहरों के हॉस्टलों में रहने आती हैं। पुलिसिया थ्योरी बनाम पोस्टमार्टम रिपोर्ट: सच छिपाने की कोशिश? हैरानी की बात यह है कि घटना के तुरंत बाद पुलिस ने इसे 'आत्महत्या' का जामा पहनाने में ज़रा भी देर नहीं की। बिना किसी पुख्ता जांच के निष्कर्ष पर पहुँच जाना पुलिस की कार्यशैली पर गहरा संदेह पैदा करता है। अब जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस के शुरुआती दावों के उलट इशारा कर रही है, तो सवाल उठता है कि आखिर पुलिस किसे बचाने की कोशिश कर रही थी? परिजनों द्वारा जताई गई दुष्कर्म की आशंका और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संकेतों ने इस मामले को एक भयावह मोड़ दे दिया है। जब मेडिकल साक्ष्य कुछ और कह रहे हैं, तो पुलिस का "किसी तरह का दुष्कर्म न होने" का दावा करना क्या पीड़ित परिवार के घावों पर नमक छिड़कना नहीं है? 'ब...

राम लखन सिंह यादव जी के पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन !

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 राम लखन सिंह यादव कॉलेज ,अनीसाबाद में मनाई गई कॉलेज फाउंडर की 20 वीं पुण्यतिथि मनाई गई ! कॉलेज के प्राचार्य  प्रो सुरेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में शोकसभा मनाई गई और दो मिनट का शोक व्यक्त किया गया । प्रो सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि राम लखन बाबू भले ही हमारे बीच शारिरिक रूप से नही है लेकिन इनकी कृत्य युग युग तक रहेगा। डॉ प्रो महेंद्र सिंह ने कहा कि एजुकेशन में रेवुलेशन यादव जी की देन है। इस अवसर पर   प्रो. शंकर प्रसाद सिंह, प्रो. अशोक सिंह, प्रो. अनिल कुमार, प्रो. रामबीनेश्वर सिंह और डॉ. प्रो. महेंद्र सिंह। प्रो. वीरेन्द्र प्रसाद यादव, प्रो. परिहार, प्रो. राय श्रीपाल सिंह, प्रो. घनश्याम चौधरी और प्रो. रामजीवन यादव , , प्रो. प्रसिद्ध कुमार, प्रो. शनि जोसेफ, प्रो. उसम्मानी, प्रो. संतोष चौधरी और डॉ. प्रो. राजकिशोर प्रसाद। प्रो. रमेश कुमार, प्रो. कुमारी सुंदरम, प्रो. ममता रानी, प्रो. संगीता, गुले जोहरा और प्रो. सतेंद्र प्रसाद। प्रो. बीडी यादव, प्रो. अशोक यादव, प्रो. शैलेंद्र, रामजी राय, रविन्द्र कुमार और मो. मिराज सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति सम्मिलित हुए।    राम ...

खगौल में मानवता का संगम: मकर संक्रांति पर 4000 बुजुर्गों व असहायों के बीच कंबल वितरण और भोज का आयोजन !

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    ​मनो विनोद नारायण कल्याण ट्रस्ट की पहल; समाजसेवियों और पत्रकारों को शॉल देकर किया गया सम्मानित ​खगौल के श्री श्री राम जानकी देवलोक धाम मंदिर (बाबू चक रोड) परिसर में आज मकर संक्रांति का पर्व धार्मिक उल्लास और सेवा भाव के अद्भुत संगम के रूप में मनाया गया। मनो विनोद नारायण कल्याण ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में मानवता की सेवा का संकल्प दोहराते हुए हजारों जरूरतमंदों की मदद की गई। ​सेवा और सरोकार का बड़ा अभियान ​ट्रस्ट के अध्यक्ष और प्रमुख समाजसेवी विनोद कुमार यादव के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के लगभग 4000 से अधिक बुजुर्गों, दिव्यांगों और असहाय महिलाओं के बीच कंबलों का वितरण किया गया। कड़ाके की ठंड को देखते हुए ट्रस्ट की यह पहल स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई। इस अवसर पर सभी आगंतुकों और लाभार्थियों को पारंपरिक व्यंजन दही-चूड़ा और तिलकुट का भोज भी कराया गया। ​प्रमुख अतिथियों की उपस्थिति और सम्मान ​कार्यक्रम में खगौल नगर परिषद के अध्यक्ष सुजीत कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने अतिथियों, समाजसेवियों, चर्चित रंग...

सुनहरा भविष्य: निरंतर सीखने की शक्ति !

    ​आने वाला सुनहरा समय उन लोगों का है, जो समय की बदलती लहरों के साथ खुद को ढालने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। सफलता की पहली सीढ़ी यह मानना है कि सीखने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती। ​आज के इस गतिशील युग में, हमें अपनी पूरी जिंदगी एक 'सक्रिय छात्र' बनकर जीना होगा। जो तकनीक आज आधुनिक है, वह कल पुरानी हो जाएगी; लेकिन सीखने का जज्बा और विकसित किया गया 'हुनर' हमेशा आपके साथ रहेगा। ​अब समय आ गया है कि हम केवल कागजी डिग्रियों के भारी बोझ तले न दबें, बल्कि अपने कौशल के पंख फैलाकर ऊंची उड़ान भरें। शिक्षा का वास्तविक और एकमात्र उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि इंसान को: ​आत्मनिर्भर बनाना, ​जागरूक करना, और ​एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना । आपकी योग्यता ही आपकी असली पहचान है। निरंतर सीखते रहें, बढ़ते रहें!

उत्तर और दक्षिण का महामिलन: काशी-तमिल संगमम!

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  ​वर्ष 2022 भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब वाराणसी की पावन धरा पर 'काशी-तमिल संगमम' का शंखनाद हुआ। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत को पुनर्जीवित करने का एक पावन प्रयास था। ​एक यात्रा, अनेक अनुभव ​तमिलनाडु की उर्वर भूमि से आए लेखकों, विद्यार्थियों, कलाकारों, विद्वानों और किसानों ने जब काशी की धरती पर कदम रखा, तो एक अद्भुत संगम देखने को मिला। अतिथियों ने न केवल काशी की दिव्यता को महसूस किया, बल्कि प्रयागराज के संगम और अयोध्या की मर्यादा के दर्शन कर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण किया। ​निरंतर विस्तार और नयापन ​इस पहल की सफलता को देखते हुए, आगामी आयोजनों में इसे और भी भव्य और व्यापक रूप दिया गया है। इसके मूल में कुछ महत्वपूर्ण उद्देश्य समाहित हैं: ​नवाचार: संगमम में समय-समय पर नए विषयों को जोड़ना ताकि चर्चा के नए द्वार खुलें। ​सृजनात्मकता: परंपरागत और रचनात्मक तरीकों का मेल करना ताकि युवा पीढ़ी भी इससे गहराई से जुड़ सके। ​जन-भागीदारी: इसे केवल एक सरकारी आयोजन न रखकर, एक 'जन-आंदोलन' बनाना जहाँ हर व्यक्ति अपनी भागीदारी सुनिश्चित ...

​शिक्षा और निरंतर अभ्यास: उज्ज्वल भविष्य का आधार !

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   ​शिक्षा केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन सीखने की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। जब हम सीखने की इस प्रक्रिया को प्रोत्साहित करते हैं, तो न केवल व्यक्ति के जीने की राह आसान होती है, बल्कि पूरे समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा मिलती है। ​अभ्यास का महत्व ​शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए 'निरंतर अभ्यास' वह कुंजी है जो ज्ञान को कौशल में बदल देती है। बिना अभ्यास के महानतम सिद्धांत भी विस्मृत हो जाते हैं। अभ्यास हमें त्रुटियों को सुधारने और अपनी क्षमताओं को निखारने का अवसर देता है। ​आधुनिक शिक्षा के तीन स्तंभ शिक्षा को व्यापक बनाने के लिए हमें तीन मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा: ​सुलभता: शिक्षा समाज के हर वर्ग तक आसानी से पहुँचनी चाहिए। ​प्रयोगात्मक दृष्टिकोण: केवल रटना पर्याप्त नहीं है; शिक्षा को व्यावहारिक  होना चाहिए ताकि विद्यार्थी उसे वास्तविक जीवन में लागू कर सकें। ​अनुसंधान और विकास : शिक्षा के क्षेत्र में नई खोजों और विकास को बढ़ावा देना अनिवार्य है, ताकि हम बदलते समय के साथ कदम मिला सकें।

जल संकट: उपलब्धता से बड़ी चुनौती बनती गुणवत्ता!

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     ​संयुक्त राष्ट्र की 'विश्व जल रिपोर्ट 2024' ने एक बार फिर मानवता के सामने खड़े सबसे बड़े संकट की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की लगभग 2.2 अरब आबादी आज भी सुरक्षित पेयजल से वंचित है। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक त्रासदी है। भारत के संदर्भ में यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है क्योंकि दुनिया की लगभग 18% आबादी वाले इस देश के पास वैश्विक मीठे जल के संसाधनों का मात्र 4% हिस्सा ही उपलब्ध है। ​उपलब्धता बनाम गुणवत्ता ​अक्सर जल संकट की चर्चा केवल पानी की 'कमी' तक सीमित रह जाती है, लेकिन इंदौर जैसी हालिया घटनाएं एक अलग और अधिक गंभीर पहलू की ओर ध्यान खींचती हैं। चुनौती केवल यह नहीं है कि नल में पानी आ रहा है या नहीं, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, वह कितना सुरक्षित है? ​निगरानी का अभाव: आज भी हमारे सिस्टम में घरों तक पहुँचने वाले पानी की गुणवत्ता की निरंतर और वास्तविक समय  निगरानी करने की व्यवस्था का अभाव है। ​स्वास्थ्य पर संकट: असुरक्षित पेयजल केवल प्यास का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हैजा, टायफाइड और हेपेटाइटिस ...