आंसुओं की भी ब्रांडिंग होती है,क्रेज है।प्रसिद्ध यादव के साथ शेयर करें।

 आँसुओं की अपनी -अपनी स्टेटस है,ब्रांडिंग है।दिन रात किनके आंसू बह रहे हैं ?कौन कितना आंसू बहा रहा है,महत्व नही है।महत्वपूर्ण है आंसू बहाने वाले कौन हैं? और कहां आंसू बहा रहे हैं।कोई  प्रेमी छुप छुप कर आंसू बहा रहे हैं तब ये जालिम जमाना क्या जाने? दीनदुखियों की आंसू तो दिखाई ही नही पड़ती।हाँ, अगर गलती से किसी नेता के आंसू निकल गए तब अखबारों की सुर्खियों में आ जाती है,टीवी चैनल की टीआरपी ही बढ़ जाती है।भले ही नेता आंखों में भेसलिन ही क्यों न लगा रखा है।संसद या विधानसभा में नेता के एक आंसू बह गए तब यारों सैलाब आ जाती है,कयामत आ जाती है।राजनीति में इसे मगरमच्छ की आंसू कहते हैं,लेकिन इसे हम संवेदना की आंसू कहते हैं,भले ही सौ चूहे ख गए हों।आँसुओं की अपनी क्रेज है,इस पर कितने मुहावरें और फिल्मी गीत हैं,कविताएं और कहानियां है।कुछ के शीर्षक हैं.... के आंसू,शाहजहां के आंसू आपने पढ़ा होगा।दिल की अरमान आंसुओं में बह गए..,छुप छुप कर आंसू बहाना क्या,जब प्यार किया तो डरना क्या ? आंसू बहने से दिल हल्का हो जाता है,इसे बहने दें।

प्रसिद्ध यादव।


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