आग्रह,निवेदन,शालीनता, कर्मठता, समाजसेवी चुनाव के बाद भी रहे।प्रसिद्ध यादव।

   बदलाव प्रकृति की नियम है। रंजिश न रखें।बिना पद के भी सेवा करें।


अभी  जहाँ पंचायत में चुनाव हैं वहाँ  के उम्मीदवारों की वेशभूषा, भाषा, व्यवहार सब बदला हुआ है। अपने से छोटे को भी पैर छूने में कोई हिचकिचाहट नही है, बाबू, भैया, चाचा, चाची तो सपनें में मुँह से निकल रहे हैं। जो कभी मन्दिर, मस्जिद में मत्था नही टेका, वो भी चढ़ावा चढ़ा रहे हैं। जब भी जनता से भेंट हो जाये कुशलक्षेम पूछना नही भूलते।दरवाजे पर कुर्सियां, दरी ,सफेदा बिछे हैं, चाय की कौन पूछे? कुछ लोगों को एक महीना घर के खाना खाये हो गए।कल तक जो ठर्रा के लिए तरसते थे, आज ब्रांडेड सुलभ है।अभी दीवाली छठ पर्व आने वाले हैं, पंडालों में उम्मीदवारों के पोस्टल टंगने के फ़ीस खुशी खुशी दे देंगे।एक एक आदमी समीकरण जोड़ने घटाने में लगा हुआ है, गणितज्ञ भी फेल हैं।यह लोक व्यवहार परिणाम के पहले तक रहता है।चुनाव बाद उसी उमीदवारों में प्रेत आत्मा घुस जाती है और कल तक जो हाथ से हाथ मिलकर अभिवादन किया करता था, वही हाथ पीटने के लिए उठने लगते हैं, जो दुःखद है। इसका शिकार कमजोर लोग होते हैं, लेकिन ये लोग भी मुफ्त की रोटी तोड़ने में नही चूकते हैं। चुनाव बाद भी उम्मीदवारों के कुशल व्यवहार भी इसी तरह रहता तब सचमुच एक सभ्य समाज बनता और एक मिसाल बनता।

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