ब्रह्मांड का नया रहस्य: 700 प्रकाश वर्ष दूर स्थित बाह्यग्रह (Exoplanet) पर मौसम की खोज!

   


​जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) की एक और ऐतिहासिक और अभूतपूर्व वैज्ञानिक सफलता! 

​खगोलविदों ने जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) का उपयोग करके पृथ्वी से लगभग 700 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक विशाल गैसीय ग्रह WASP-94A b के वायुमंडल और वहां के मौसम के पैटर्न का गहराई से अध्ययन किया है। यह पहली बार है जब किसी सुदूर बाह्यग्रह (Exoplanet) पर बादलों के बनने और मौसम के बदलने की चक्रण प्रक्रिया को इतने सटीक रूप से देखा गया है। यह खोज ब्रह्मांड में ग्रहों के निर्माण और उनके वातावरण को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

​ग्रह WASP-94A b की प्रमुख विशेषताएँ:

​दूरी और आकार: यह ग्रह पृथ्वी से 700 प्रकाश वर्ष दूर है, जिसका आकार बृहस्पति (Jupiter) से लगभग दोगुना है, लेकिन द्रव्यमान उसका आधा है।

​अत्यधिक निकटता: यह अपने मूल तारे के बेहद करीब रहकर चक्कर लगाता है, जिससे इसका एक वर्ष (परिक्रमा काल) बहुत छोटा होता है।

​ज्वारीय आबद्धता (Tidal Locking): चंद्रमा की तरह इस ग्रह का भी एक ही हिस्सा हमेशा अपने तारे के सामने रहता है। इसके कारण इसका एक हिस्सा हमेशा अत्यधिक गर्म (दिन) और दूसरा हिस्सा हमेशा अंधेरे व अत्यधिक ठंडे (रात) वातावरण में रहता है।

​1. 'हॉट जुपिटर' और वहां का भयानक मौसम

​WASP-94A b को वैज्ञानिकों ने 'हॉट जुपिटर' की श्रेणी में रखा है। ज्वारीय आबद्धता के कारण इसके दिन वाले हिस्से का तापमान इतना अधिक होता है कि वहां चट्टानें और धातुएं भी पिघल सकती हैं, जबकि रात वाले हिस्से का तापमान परम शून्य (Absolute Zero) के करीब पहुंच जाता है।

​इस भारी तापमान भिन्नता के कारण ग्रह पर अत्यंत तीव्र गति से सुपरसोनिक हवाएं चलती हैं। ये हवाएं रात वाले हिस्से से ठंडी हवा और बादलों को दिन वाले हिस्से की ओर धकेलती हैं, जहां दिन के उजाले में सुबह के समय ये बादल घने होते हैं और शाम होते-होते पूरी तरह वाष्पीकृत होकर आसमान को साफ कर देते हैं।

​2. बादलों की संरचना: पिघली हुई धातु की बारिश

​वैज्ञानिकों ने स्पेक्ट्रोस्कोपी (Spectroscopy) तकनीक का उपयोग करके इस ग्रह के बादलों की रासायनिक संरचना का विश्लेषण किया है। पृथ्वी के पानी से बने बादलों के विपरीत, इस सुदूर ग्रह के बादल मैग्नीशियम सल्फाइड, सिलिकेट (बालू के बारीक कण) और लोहे से बने हैं। इस ग्रह के वायुमंडल में पिघली हुई धातुओं की वर्षा और कुछ हिस्सों में हीरे जैसी क्रिस्टलीय बारिश होने का अनुमान लगाया गया है।

​3. खोज की तकनीक: ट्रांजिट विधि (Transit Method)

​खगोलविदों ने 'ट्रांजिट विधि' का उपयोग किया, जिसके तहत जब यह ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो तारे की रोशनी इसके वायुमंडल से होकर छनकर आती है। अलग-अलग गैसें और रासायनिक यौगिक प्रकाश की विशेष तरंगदैर्ध्य (Wavelengths) को अवशोषित कर लेते हैं। जेम्स वेब टेलीस्कोप के अत्यंत संवेदनशील उपकरणों ने इस अवशोषित प्रकाश का विश्लेषण करके सुबह और शाम के वायुमंडल के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्ज किया।

​4. भावी अनुसंधान 

​यह अध्ययन केवल इस एक ग्रह तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के शोध से हमें हमारे अपने सौर मंडल के गठन और ग्रहों की वास्तुकला (Planetary Architecture) को समझने में मदद मिलेगी। भविष्य में जब यूरोप का 'एक्सट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप' (ELT) उत्तरी चिली में चालू हो जाएगा, तो खगोलविद और भी छोटे, पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रहों पर जीवन और मौसम की खोज करने में सक्षम हो सकेंगे। 

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