जन - जन के नायक का जन्मोत्सव: राबड़ी आवास पर श्रद्धा और सुरों का महासंगम! -प्रो प्रसिद्ध कुमार।

   




10, सर्कुलर रोड' , पटना। 

​बिहार की राजनीतिक आबोहवा में जब भी कोई उत्सव आकार लेता है, तो वह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जन-भावनाओं का ज्वार बन जाता है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के जन्मोत्सव पर पटना का '10, सर्कुलर रोड' (राबड़ी आवास) एक ऐसे ही भावुक और जीवंत दृश्य का साक्षी बना, जहाँ सुरक्षा की कड़ाई और श्रद्धा की तरलता एक साथ एकाकार हो रही थी।

​सुरों की सरिता और स्नेह की सौगात

​जन्मोत्सव की बेला में संगीत की ऐसी त्रिवेणी बही कि वहाँ मौजूद हर आँख सजल और हर हृदय मुदित हो उठा। विख्यात लोकगायक छोटू छलिया के कंठ से जब सुरीले और माटी की गंध से सराबोर गीत फूटे, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो सुरों की कोई मंदाकिनी बह निकली हो। उनके सुरों ने उपस्थित जनसमुदाय को आत्मविभोर कर सम्मोहन के पाश में बांध दिया। इसी मांगलिक घड़ी में, सहधर्मिणी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने लालू जी को एक अनमोल उपहार भेंट किया—यह उपहार केवल भौतिक वस्तु नहीं, बल्कि दशकों के सहचर्य, अटूट विश्वास और अगाध प्रेम का प्रतीक था।

​'कर्तव्य-पथ' पर डटे प्रहरी: निष्ठा का रोस्टर

​राजनीति में नेताओं को अंगरक्षकों के साये में देखने की आदत सबको है, लेकिन जब जनता खुद 'कवच' बन जाए, तो दृश्य ऐतिहासिक हो जाता है। लालू जी के जन्मदिन के अवसर पर आवास की सुरक्षा का जिम्मा किसी सुरक्षा एजेंसी ने नहीं, बल्कि उनके समर्पित कार्यकर्ताओं ने अपने कंधों पर उठा रखा था। सुरक्षा के इस महायज्ञ के छठे दिन फुलवारी प्रखंड के राजद कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला।

​पटना जिला राजद अध्यक्ष दीनानाथ यादव ने इस अनूठे समर्पण की जानकारी देते हुए बताया:

​"अपने नेता की सुरक्षा के लिए कार्यकर्ताओं का एक विधिवत रोस्टर (समय-सारणी) बनाया गया है। आज फुलवारी की बारी थी, तो कल (अगले दिन) बिहटा प्रखंड के निष्ठावान कार्यकर्ता इस सुरक्षा दुर्ग की कमान संभालेंगे।"

​रतजगे की रात: निष्ठा के सिपाही

​रात की कालिमा जब गहरा रही थी, तब राबड़ी आवास के बाहर निष्ठा के दीपक जल रहे थे। फुलवारी राजद अध्यक्ष श्रवण कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का एक विशाल समूह रात भर पलकें बिछाए डटा रहा। इस पहरेदारी में मुख्य रूप से शामिल थे:

​वरिष्ठ राजद नेता देवकिशुन ठाकुर और हरीनारायण यादव

​लालबाबू यादव और लाल बहादुर यादव

​टिंकू यादव और जिला पार्षद दीपक मांझी

​मोहन मंडल, कुंदन यादव और सन्नी यादव

​सैकड़ों की संख्या में आए ये कार्यकर्ता कड़कड़ाती या उमस भरी रातों की परवाह किए बिना, अपने नेता की सुरक्षा में दीवार बनकर खड़े रहे। राजनीति के आधुनिक गलियारों में कार्यकर्ताओं द्वारा अपने शीर्ष नेता के प्रति ऐसा निस्वार्थ और अभूतपूर्व समर्पण विरल ही देखने को मिलता है।

​जन-हृदय के सम्राट: एक विश्लेषणात्मक निष्कर्ष

​इस पूरे दृश्य को अपनी आँखों में समेटते हुए प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. प्रसिद्ध कुमार ने अत्यंत मार्मिक और सारगर्भित टिप्पणी की:

​"अपने नेता की सुरक्षा में कार्यकर्ताओं द्वारा स्वतःस्फूर्त ढंग से की गई ऐसी सुरक्षा व्यवस्था समकालीन इतिहास में अद्वितीय है। यह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि उस अगाध प्रेम की अभिव्यक्ति है जो यह दर्शाती है कि समय और परिस्थितियों के थपेड़ों के बाद भी, आज भी लालू प्रसाद यादव गरीबों, वंचितों और शोषितों के दिलों के सिंहासन पर ससम्मान विराजमान हैं।"

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