'द लोनली प्रोफेट'—भारतीय राजनीति के उस 'अकेले पैगंबर' वी.पी. सिंह की अनकही कहानी !

 

25  जून को जन्मदिन पर नमन! 

 


- पुस्तक लेखिका  वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफ़ा। 

भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने सत्ता के शिखर पर बैठकर ऐसे फैसले लिए, जिसने देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को हमेशा के लिए बदल दिया। ऐसे ही एक नेता थे भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह)। 25 जून को उनकी जयंती के मौके पर, अगर आप भारतीय राजनीति के उस दौर को गहराई से समझना चाहते हैं, तो वरिष्ठ पत्रकार सीमा मुस्तफ़ा (Seema Mustafa) द्वारा लिखी गई उनकी जीवनी "The Lonely Prophet: V.P. Singh, a Political Biography" एक बेहतरीन और बेहद जरूरी किताब है।

📖 पुस्तक के बारे में बुनियादी जानकारी

किताब का नाम: The Lonely Prophet: V.P. Singh, a Political Biography

लेखिका: सीमा मुस्तफ़ा (वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक)

विषय: भारत के 7वें प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह का राजनीतिक जीवन, उनके संघर्ष और उनके ऐतिहासिक फैसले।

🔍 पुस्तक की मुख्य बातें और समीक्षा

यह किताब केवल वी.पी. सिंह की जीवनी नहीं है, बल्कि यह 1980 और 1990 के दशक की उथल-पुथल से भरी भारतीय राजनीति का एक जीवंत दस्तावेज है। लेखिका ने वी.पी. सिंह को "The Lonely Prophet" (अकेला पैगंबर) क्यों कहा, इसका जवाब किताब के पन्नों में बहुत खूबसूरती से मिलता है।

1. 'मिस्टर क्लीन' से 'राजा नहीं फकीर है...' का सफर

किताब में दिखाया गया है कि कैसे कांग्रेस सरकार में वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री रहते हुए वी.पी. सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई छेड़ी (विशेषकर बोफोर्स घोटाला)। उन्होंने सत्ता और अपनी ही पार्टी के खिलाफ जाने का जोखिम उठाया। इस वजह से वे जनता के बीच बेहद लोकप्रिय हुए और नारा गूंजा— "राजा नहीं फकीर है, भारत की तकदीर है।"

2. मंडल कमीशन और सामाजिक न्याय की क्रांति

इस किताब का एक बड़ा हिस्सा उस दौर को समर्पित है जब प्रधानमंत्री रहते हुए वी.पी. सिंह ने मंडल आयोग (Mandal Commission) की सिफारिशों को लागू करने का ऐतिहासिक फैसला किया था। लेखिका ने निष्पक्षता से विश्लेषण किया है कि कैसे इस एक फैसले ने पिछड़ों (OBC) को राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया, लेकिन साथ ही देश में एक बड़ा छात्र आंदोलन और सामाजिक ध्रुवीकरण भी पैदा कर दिया।

3. सत्ता का त्याग और अकेलेपन की त्रासदी

किताब का शीर्षक 'The Lonely Prophet' उनके जीवन के अंतिम दौर और उनके राजनीतिक अलगाव को दर्शाता है। लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा को समस्तीपुर में रुकवाने और उन्हें गिरफ्तार करवाने के बाद जब उनकी सरकार गिरी, तो वी.पी. सिंह ने सिद्धांतों के लिए सत्ता छोड़ना बेहतर समझा। इसके बाद वे राजनीति के हाशिए पर चले गए और कई गंभीर बीमारियों (जैसे किडनी की बीमारी और कैंसर) से जूझते हुए भी सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाते रहे।

🎯 आपको यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए?

भीतरी कहानियां : सीमा मुस्तफ़ा ने एक पत्रकार के रूप में उस दौर को बहुत करीब से देखा था, इसलिए किताब में कई ऐसी राजनीतिक घटनाएं और बातचीत शामिल हैं जो आम जनता की नजरों से दूर थीं।

तटस्थ विश्लेषण: लेखिका ने वी.पी. सिंह को न तो कोई मसीहा बनाकर पेश किया है और न ही खलनायक। उन्होंने उनके फैसलों की खूबियों और उनकी राजनीतिक गलतियों, दोनों पर खुलकर लिखा है।

आज के भारत को समझने की चाबी: आज की भारतीय राजनीति में जो जातिगत समीकरण और गठबंधन की राजनीति हम देखते हैं, उसकी नींव वी.पी. सिंह के दौर में ही मजबूत हुई थी। उसे समझने के लिए यह किताब बहुत मददगार है।

अगर आप राजनीति में रुचि रखते हैं, या यह जानना चाहते हैं कि कैसे एक राजा (मांडा के राजा बहादुर) ने देश के शोषित और वंचित समाज की आवाज बनने के लिए अपने ही राजनीतिक करियर की आहुति दे दी ।आपको फुर्सत के पलों में यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए।

यह भारतीय इतिहास के एक बेहद ईमानदार, जटिल और 'अकेले' रह गए जननेता को समझने का सबसे बेहतरीन जरिया है।

Comments

Popular posts from this blog

अलविदा! एक जन-नेता का सफर हुआ पूरा: प्रोफेसर वसीमुल हक़ 'मुन्ना नेता' नहीं रहे !

एक परिवार की पुकार: रामलड्डू की सकुशल वापसी के लिए सरकार से गुहार !😢प्रो प्रसिद्ध कुमार।

एक गर्मजोशी भरा स्वागत: पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के नए कुलपति ने वित्त रहित शिक्षक महासंघ से की मुलाकात !-प्रो प्रसिद्ध कुमार।