दृढ़ संकल्प की जीत: रेलवे के ग्रुप-डी कर्मचारी से बीपीएसी अधिकारी बनने का सफर!
बिक्रम के सूरज कुमार स्वर्णकार बने वेलफेयर ऑफिसर !
सफलता कोई इत्तेफाक नहीं होती, यह मेहनत, धैर्य और कभी न हार मानने वाले जज्बे का परिणाम होती है। हाल ही में बिहार के बिक्रम नगर के निवासी सूरज कुमार की कहानी यही साबित करती है।
संघर्ष और सफलता की कहानी
सूरज कुमार, जो एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं और जिनके पिता वर्षों से सुनारी (स्वर्णकारी) का व्यवसाय करते हैं, ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने की ठान ली जाए, तो परिस्थितियां आड़े नहीं आतीं।
सूरज ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी के रूप में की थी। एक चुनौतीपूर्ण नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे बाधा नहीं बनने दिया। अपनी ड्यूटी के बाद वे निरंतर स्वध्याय (सेल्फ स्टडी) में लगे रहे।
एक के बाद एक बड़ी उपलब्धियां
उनकी मेहनत का फल उन्हें एक साथ दोहरी खुशियों के रूप में मिला:
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB): कुछ दिन पूर्व ही उनका चयन इंटेलिजेंस ब्यूरो में अधिकारी पद के लिए हुआ।
70वीं बीपीएसी (BPSC): हाल ही में घोषित परिणाम में उन्होंने एससी-एसटी वेलफेयर ऑफिसर के पद पर अपनी जगह सुनिश्चित की।
प्रेरणा के स्रोत
सूरज अपनी इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के त्याग, सहयोग और मार्गदर्शन को देते हैं। उनके सम्मान में वार्ड पार्षद स्मिता गुप्ता ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर और मिठाइयाँ खिलाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
अन्य विद्यार्थियों के लिए संदेश
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सूरज का एक छोटा सा लेकिन गहरा संदेश है:
"अपनी मेहनत और क्षमता पर विश्वास रखें तथा निरंतर प्रयास करते रहें। सफलता देर-सबेर अवश्य मिलती है।"
सूरज की यह कहानी हमें सिखाती है कि सीमित संसाधनों और कड़ी व्यस्तताओं के बीच भी, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत करने की इच्छाशक्ति हो, तो सफलता निश्चित है।

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