भारत के सांख्यिकीय डेटाबेस का आधुनिकीकरण!
भारतीय सांख्यिकी प्रणालियों में हालिया सुधारों का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप को बेहतर ढंग से दर्शाना और आंकड़ों की सटीकता व समयबद्धता को बढ़ाना है।
पुराने डेटाबेस (जैसे 2011-12 का आधार वर्ष) वर्तमान आर्थिक वास्तविकता को सटीक रूप से नहीं दर्शा पा रहे थे। 15 साल पुराने उपभोग पैटर्न (जैसे DVD प्लेयर का उपयोग) अब अप्रासंगिक हो गए थे, जबकि नई सेवाओं (जैसे ऑनलाइन मीडिया) को शामिल करना आवश्यक था। आधार वर्ष को 2022-23 में बदला गया है। 'डबल डेफलेटर' पद्धति को अपनाने से जीडीपी और सकल मूल्य वर्धित की गणना अधिक सटीक हो गई है। इसके अतिरिक्त, जीएसटी डेटा और आवधिक श्रम बल सर्वेक्षणों का उपयोग किया गया है।
आधार वर्ष 2024 किया गया है। बास्केट में वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है। इसमें नए उपभोग आइटम शामिल किए गए हैं और अप्रचलित वस्तुओं (जैसे वीसीआर) को हटा दिया गया है। आधार वर्ष 2022-23 किया गया है और वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 की गई है।
सरकार ने नया PPI पेश किया है, जो उत्पादकों को मिलने वाली कीमतों और इनपुट लागत को अधिक सटीकता से मापता है। भविष्य में WPI को धीरे-धीरे हटाकर CPI और PPI पर मुख्य ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): आधार वर्ष 2022-23 किया गया है और इसका दायरा बढ़ाकर इसमें गैस आपूर्ति, जल आपूर्ति और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

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