​पश्चाताप का वास्तविक स्वरूप: केवल अनुभूति नहीं, एक प्रक्रिया!

  


 पश्चाताप केवल एक भावना नहीं, बल्कि एक क्रियात्मक सुधार की प्रक्रिया है।

 पश्चाताप शब्दों (माफी माँगने) से नहीं, बल्कि व्यवहार (बदलाव लाने) से सिद्ध होता है। शब्द सस्ते होते हैं, लेकिन व्यवहार में सुधार करने के लिए अहंकार का त्याग करना पड़ता है, जो सबसे कठिन कार्य है।

सच्चा पश्चाताप व्यक्ति को चैन से बैठने नहीं देता; यह उसे प्रेरित करता है कि वह अपनी गलती से हुए नुकसान की भरपाई करे या भविष्य में उसे दोहराने से बचे।

अहंकार ही वह सबसे बड़ी दीवार है जो इंसान को अपनी गलती स्वीकार करने और उसे ठीक करने से रोकती है। पश्चाताप वही व्यक्ति कर सकता है जो अपने 'स्व' या 'अहंकार' से ऊपर उठने का साहस जुटा सके।

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