पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल में व्यवस्था शर्मसार: जगजीवन स्टेडियम बना भ्रष्टाचार और दुराचार का अड्डा!

    




 'रेल वेल विशर्स' द्वारा सिलसिलेवार ढंग से उजागर किए गए "लूट के खेल" ! 


पूर्व मध्य रेलवे (ECR) के दानापुर मंडल के अंतर्गत आने वाले जगजीवन स्टेडियम से आ रही खबरें न केवल रेल प्रशासन की साख पर बट्टा लगा रही हैं, बल्कि महिला सुरक्षा और प्रशासनिक शुचिता के दावों की भी धज्जियां उड़ा रही हैं। 'रेल वेल विशर्स' द्वारा सिलसिलेवार ढंग से उजागर किए गए "लूट के खेल" ने यह साबित कर दिया है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की शह के बिना इतना बड़ा घालमेल संभव नहीं है।

​1. पद का दुरुपयोग और फर्जीवाड़े को संरक्षण

​दानापुर मंडल के वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी और मंडल क्रीड़ा संघ के सर्वेसर्वा अतुल कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ब्रजेश चौबे को खेल संघ का सचिव नियुक्त किया।

​मेडिकल अनफिट कर्मी को जिम्मेदारी: ब्रजेश चौबे चिकित्सीय आधार पर अपने मूल पद से 'डी-कैटेगराइज्ड' (विकोटिकृत) हैं। सवाल यह उठता है कि जो व्यक्ति अपने मूल विभागीय कार्यों के लिए अनफिट है, वह खेल संघ के सचिव जैसे महत्वपूर्ण और सक्रिय पद के लिए कैसे फिट हो गया?

​पुनः जांच की मांग: रेलवे के ही जागरूक कर्मचारियों का कहना है कि यह पूरा मामला एक बड़े फर्जीवाड़े की तरफ इशारा करता है। इस संदिग्ध नियुक्ति की जांच किसी दूसरे जोन के स्वतंत्र डॉक्टरों की टीम से कराई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

​2. महिला सुरक्षा के साथ खिलवाड़ और गंभीर दुर्व्यवहार

​स्टेडियम में मॉर्निंग वॉक और शारीरिक प्रशिक्षण के लिए आने वाली महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को पूरी तरह दांव पर लगा दिया गया है।

​डेटा का गलत इस्तेमाल: स्टेडियम में प्रवेश के लिए अनिवार्य पहचान पत्र और मोबाइल नंबर जमा कराए जाते हैं। वहां तैनात निजी कर्मी दिवाकर तिवारी पर आरोप है कि उसने इस गोपनीय डेटा का दुरुपयोग कर सुबह घूमने आने वाली महिलाओं और लड़कियों को अपने जाल में फंसाने और अकेले में मिलने का दबाव बनाने का घिनौना प्रयास किया।

​जनता का फूटा गुस्सा: हाल ही में एक प्रशिक्षार्थी लड़की पर दबाव बनाने के बाद, जब यह मामला उजागर हुआ तो पीड़ित परिवार ने उक्त आरोपी को कड़ा सबक सिखाया और उसका मोबाइल भी तोड़ दिया। इस संवेदनशील घटना की पुष्टि वहां के विख्यात खेल प्रशिक्षक "मुन्ना जी" (गुरु जी) से भी की जा सकती है।

​3. प्रशासनिक अहंकार और 'लूट की खुली छूट'

​इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला पहलू रेल प्रशासन की चुप्पी और आरोपी तत्वों का अहंकार है।

​अधिकारियों की शह: मीडिया में खबरें आने के बावजूद खेल सचिव ब्रजेश चौबे और उनके चहेते दिवाकर तिवारी के हौसले बुलंद हैं। आरोपी खुलेआम प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं कि उन्हें वहां से हटाने की हैसियत किसी की नहीं है।

​अवैध वसूली का खेल: मॉर्निंग वॉकर्स और स्टेडियम का उपयोग करने वाली अकादमियों से ली जाने वाली मासिक फीस और रसीदों के पैसों का बंदरबांट सीधे तौर पर शीर्ष अधिकारियों के संरक्षण में हो रहा है।

​रेल प्रशासन से तीखे सवाल और मांगें:

 जागरूक नागरिक समाज इस पूरे प्रकरण पर पूर्व मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक  और ज़ोनल खेल अधिकारी से तुरंत हस्तक्षेप की मांग करते हैं:

​तत्काल निलंबन और बेदखली: महिलाओं के साथ अभद्रता करने वाले निजी कर्मी दिवाकर तिवारी को तत्काल प्रभाव से स्टेडियम परिसर से बाहर किया जाए और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

​निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच: वरीय मंडल कार्मिक अधिकारी अतुल कुमार और खेल सचिव ब्रजेश चौबे के गठजोड़ की विजिलेंस जांच हो, तथा ब्रजेश चौबे की मेडिकल रिपोर्ट की री-एग्जामिनेशन कराई जाए।

​डेटा सुरक्षा: मॉर्निंग वॉकर्स के जमा किए गए पहचान पत्रों और मोबाइल नंबरों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में कोई भी कर्मी इसका दुरुपयोग न कर सके।

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