भारत में जनसांख्यिकीय (Demographic) शासन और राजनीति!
यह भारत सरकार द्वारा जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के अध्ययन के लिए गठित समिति और इस मुद्दे के प्रति सरकार के दृष्टिकोण की समीक्षा है।
सरकार ने "अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तनों" को राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए एक गंभीर चुनौती माना है। गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे अवैध घुसपैठ से जोड़ते हुए एक 'सुनियोजित साजिश' बताया है।
जस्टिस पी.पी. नाओलेकर की अध्यक्षता में गठित समिति का काम जनसांख्यिकीय बदलावों, धार्मिक और सामाजिक समुदायों में जनसंख्या के असामान्य पैटर्न की जांच करना और घुसपैठियों की पहचान व निर्वासन के लिए तंत्र तैयार करना है।
जनसंख्या प्रबंधन केवल अवैध घुसपैठ तक सीमित नहीं होना चाहिए। जनसांख्यिकीय रुझानों को केवल सुरक्षा के नजरिए से देखने के हानिकारक परिणाम हो सकते हैं।
यह चेतावनी है कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में लोग 'राज्यविहीन' हो सकते हैं, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो सकता है। साथ ही, इससे मुसलमानों की सांप्रदायिक प्रोफाइलिंग का डर भी वास्तविक है।
भारत के सामने असली जनसांख्यिकीय चुनौतियां कुछ और हैं—जैसे कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा, गिरती जन्म दर, शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता, और कार्यबल की बदलती गतिशीलता!
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